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Official Transcriptjft LVªh l añ Mhñ ,yñ—(,u)04@0007@2003—26 REGISTERED NO. DL—(N)04/0007/2003—26 सी.जी.-डी.xएxलx.G-अI.D-2H71x0x2x026-277439 CG-DxxLx-EG-2I7D1E02x0x2x6-277439 vl k/kkj.k EXTRAORDINARY Hkkx 2— vuqHkkx 1d PART 2—Section 1A izkf/kdkj l s izdkf'kr PUBLISHED BY AUTHORITY ] [ l añ 2 ubZ fnYyh] l kseokj] 29 t wu] 2026@8 vk"kk<+] 1948 ¼'kd½ [k.M LXII No. 2 NEW DELHI, MONDAY, JUNE 29, 2026/ASHADHA 8, 1948...
jft LVªh l añ Mhñ ,yñ—(,u)04@0007@2003—26 REGISTERED NO. DL—(N)04/0007/2003—26 सी.जी.-डी.xएxलx.G-अI.D-2H71x0x2x026-277439 CG-DxxLx-EG-2I7D1E02x0x2x6-277439 vl k/kkj.k EXTRAORDINARY Hkkx 2— vuqHkkx 1d PART 2—Section 1A izkf/kdkj l s izdkf'kr PUBLISHED BY AUTHORITY ] [ l añ 2 ubZ fnYyh] l kseokj] 29 t wu] 2026@8 vk"kk<+] 1948 ¼'kd½ [k.M LXII No. 2 NEW DELHI, MONDAY, JUNE 29, 2026/ASHADHA 8, 1948 (SAKA) Vol. LXII bl Hkkx esa fHkUu i`"B l a[;k nh tkrh gS ftl l s fd ;g vyx l adyu ds : i esa j[kk t k l dsA Separate paging is given to this Part in order that it may be filed as a separate compilation.
fof/k vkSj U;k; ea=ky; ¼fo/kk;h foHkkx½ ubZ fnYyh] 29 t wu] 2026@8 vk"kk<+] 1948 ¼'kd½ fn daihfV'ku ¼vesaMeasV½ ,sDV] 2023( ¼2½ fn t u fo'okl ¼vesaMeasV vkQ izksfot Ul ½ ,sDV] 2023( ¼3½ fn Hkkjrh; ok;q;ku vf/kfu;e 2024( vkSj ¼4½ fn ckW;yl Z ,sDV] 2025 ds fuEufyf[kr fgUnh vuqokn jk"Vªifr ds çkf/kdkj l s çdkf'kr fd, t krs gSa vkSj ;s jkt Hkk"kk vf/kfu;e] 1963 ¼1963 dk 19½ dh /kkjk 5 dh mi/kkjk ¼1½ ds [kaM ¼d½ ds v/khu muds fgUnh esa çkf/kd`r ikB l e>s t k,axsa%µ MINISTRY OF LAW AND JUSTICE (LEGISLATIVE DEPARTMENT) New Delhi, June 29, 2026/Ashadha 8, 1948 (Saka) The Competition (Amendment) Act, 2023; (2) The Jan Vishwas (Amendment of Provisions) Act, 2023; (3) The Bharatiya Vayuyan Adhiniyam, 2024 and (4) The Boilers Act, 2025 are hereby published under the authority of the President and shall be deemed to be the authoritative texts thereof in Hindi under clause (a) of sub-section (1) of section 5 of the Official Languages Act, 1963 (19 of 1963) :— 201202 Hkkjr dk jkt i= vl k/kkj.k [Hkkx 2— i`"B 1- izfrLi/kkZZ ¼l a'kks/ku½ vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e l a[;kad 9½- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 203 The Competition (Amendment) Act, 2023 2- t u fo'okl ¼mic/kkas dk l a'kks/ku½ vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e l a[;kad 18½- - - - - - - - - - - - - - - - - - 231 The Jan Vishwas (Amendment of Provisions) Act, 2023 3- Hkkjrh; ok;q;ku vf/kfu;e 2024 ¼2024 dk vf/kfu;e l a[;kad 16½- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 299 The Bharatiya Vayuyan Adhiniyam, Act, 2024
4. ckW;yj vf/kfu;e] 2025 ¼2025 dk vf/kfu;e l a[;kad 12½- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 319 The Boilers Act, 2025vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 203 प्रतिस्पर्धा (सशं ोर्न) अधर्तनयम, 2023 (2023 कध अधर्तनयम संखयधंक 9) [ 11 अप्रैल, 2023] प्रतिस्पर्धा अधर्तनयम, 2002 कध और संशोर्न करने के ललए अधर्तनयम भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा निम्िलिखित रूप में यह अधिनियलमत हो :—
1. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त िाम प्रनतस्पिाष (संशोिि) अधिनियम, संक्षिप्त िाम और प्रारंभ । 2023 है ।
(2) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा, नियत करे : परंतु इस अधिनियम के लभन्ि-लभन्ि उपबंिों के लिए लभन्ि-लभन्ि तारीिें नियत की जा सकेंगी और ऐसे ककसी उपबंि में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रनत ककसी निर्देश का यह अर् ष िगाया जाएगा कक वह उस उपबंि के प्रवत्तृ होिे के प्रनत निर्देश है ।204 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— कनतपय पर्दों के 2. प्रनतस्पिाष अधिनियम, 2002 (जजसे इसमें इसके पश्चात ् मूि अधिनियम 2003 का 12 प्रनतनिर्देश के कहा गया है) में,— स्र्ाि पर कनतपय अन्य पर्दों का (क) “कंपिी अधिनियम, 1956” शब्र्दों और अंकों, जहां-कहीं वे आते हैं, के 1956 का 1 प्रनतस्र्ापि । स्र्ाि पर, “कंपिी अधिनियम, 2013” शब्र्द और अंक रिे जाएंगे ; 2013 का 18 (ि) “1956 का 1” अंक और शब्र्द, जहां कहीं वे आते हैं, के स्र्ाि पर, “2013 का 18” अंक और शब्र्द रिे जाएंगे । िारा 2 का 3. मूि अधिनियम की िारा 2 में,— संशोिि । (क) िंड (ङ) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ् :— ‘(ङक) “प्रनतबद्िता” से िारा 48ि में निर्र्दषष्ट प्रनतबद्िता अलभप्रेत है ;’;
(ि) िंड (ज) में, “ऐसा कोई व्यजतत या सरकार का पवभाग” शब्र्दों स े प्रारंभ होिे वािे और “से सबं ंधित हैं” शब्र्दों पर समाप्त होिे वािे, भाग के स्र्ाि पर, निम्िलिखित रिा जाएगा, अर्ाषत ् :— “ऐसा कोई व्यजत त या सरकार का पवभाग, जजसमें यूनिट, प्रभाग, समिुर्ंगी भी हैं, जो वस्तु या माि के उत्पार्दि, भंडारण, प्रर्दाय, पवतरण, अजषि या नियंत्रण या ककसी प्रकार की सेवाओं की व्यवस्र्ा करिे या पवनििाि से संबंधित ककसी आधर्षक कियाकिाप में, या ककसी अन्य निगलमत निकाय के शेयरों, डडबेंचरों या अन्य प्रनतभूनतयों के अजिष , िारण, हामीर्दारी या संव्यहार के कारबार में या तो प्रत्यि रूप से या उसकी एक या अधिक इकाइयों या प्रभागों या समिुर्ंधगयों के माध्यम से िगा हुआ है, या िगा रहा है, ककंतु इसके अंतगषत सरकार का कोई ऐसा कियाकिाप िहीं आता है जो सरकार के संप्रभु कृत्यों जजिके अंतगतष केन्द्रीय सरकार के परमाणु ऊजाष, करेंसी, रिा तर्ा अंतररि से संबंधित पवभागों द्वारा ककए जािे वािे सभी कियाकिाप भी हैं, से संबंधित हैं ;';
(ग) िंड (ट) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंत:स्र्ापपत ककए जाएंगे, अर्ाषत ् :— ‘(टक) “पिकार” के अंतगतष , यर्ाजस्र्नत, कोई उपभोतता या कोई उद्यम या कोई व्यजतत या कोई सूचिा प्रर्दाता या कोई उपभोतता संगम या कोई व्यापार संगम या केन्द्रीय सरकार या कोई राज्य सरकार या कोई कािूिी निकाय हैं और इसके अंतगतष ऐसा कोई उद्यम या कोई व्यजतत भी सजम्मलित होगा, जजसके पवरुद्ि कोई जांच या कायवष ाही संजस्र्त की जाती है और कोई उद्यम या व्यजतत है, जजसे आयोग द्वारा कायवष ार्हयों में सजम्मलित करिे के लिए पिकार बिाया गया है ;’;
(घ) िंड (ठ) के उपिंड (vi) में, “कंपिी अधिनियम, 1956 की िारा 1956 का 1 617” शब्र्दों और अंकों के स्र्ाि पर, “कंपिी अधिनियम, 2013 की िारा 2 के 2013 का 18 िंड (45)” शब्र्द, अंक और कोष्ठक रिे जाएंगे ; (ङ) िंड (त) के स्र्ाि पर, निम्िलिखित िंड रिा जाएगा, अर्ाषत ् :— ‘(त) “िोक पवत्तीय संस्र्ा” स े कंपिी अधिनियम, 2013 की िारा 2 2013 का 18vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 205 के िंड (72) में यर्ा पररभापर्त िोक पवत्तीय संस्र्ा अलभप्रेत है और इसके अंतगतष कोई राज्य पवत्तीय निगम, राज्य औद्योधगक निगम या राज्य पवनििाि निगम भी है ;’;
(च) िंड (ि) के स्र्ाि पर, निम्िलिखित िंड रिा जाएगा, अर्ाषत ् :— ‘(ि) “सुसंगत उत्पार्द बाजार” से ऐसा बाजार अलभप्रेत है, जो उि सभी उत्पार्दों या सेवाओं से लमिकर बिा है,—
(i) जो उत्पार्दों या सेवाओं की पवलशष् टताओं, उिकी कीमत और आशनयत उपयोग के कारण उपभोत ता द्वारा अन्तर पररवतिष ीय या प्रनतस्र्ापिीय मािे जात े हैं ;
(ii) जजिका उत्पार्दि या पूनत ष को पूनतकष ताष द्वारा ऐसे उत्पार्दों और सेवाओं के बीच उत्पार्दि को बर्दििे और िघ ु अवधि में सापिे कीमतों में िघु और स्र्ायी पररवतिष ों के प्रत्युत्तर में जजिका पवपणि करि े में कोई पवलशष्ट अनतररतत िागत या जोखिम उपगत ककए बबिा अन्तर पररवतषिीय या प्रनतस्र्ापिीय मािा जाता है ;’;
(छ) िंड (प) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ् :— ‘(पक) “समझौता” से िारा 48क में निर्र्दषष्ट समझौता अलभप्रेत है ;’।
4. मूि अधिनियम की िारा 3 में,— िारा 3 का संशोिि । (क) उपिारा (3) में, परंतुक के पश्चात ् निम्िलिखित परंतुक अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ् :— “परंतु यह और कक कोई उद्यम या उद्यमों का संगम या कोई व्यजतत या व्यजततयों का संगम यद्यपप जो समाि या वैसे ही व्यापार में िहीं िगे हुए हैं, की भी इस उपिारा के अिीि करार के भाग के रूप में उपिारणा की जाएगी यर्र्द वह ऐसे करार को अग्रसर करिे में भाग िेता है या भाग िेिे का आशय रिता है ।”;
(ि) उपिारा (4) में,—
(i) “उद्यमों या व्यजततयों के बीच कोई करार” शब्र्दों के स्र्ाि पर, “उद्यमों या व्यजततयों के बीच कोई अन्य करार, जजसके अंतगतष उद्यम या व्यजतत के बीच करार है ककंतु यह उस तक सीलमत िहीं है” शब्र्द रि े जाएंगे ;
(ii) िंड (ि) में, “प्रर्दाय” शब्र्द के स्र्ाि पर, “व्यौहार” शब्र्द रिा जाएगा ;
(iii) स्पष्टीकरण से पूव,ष निम्िलिखित परंतुक अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ् :— “परंतु इस उपिारा में अंतपवष्ष ट कोई बात, ककसी उद्यम और अन्य उपभोतता के बीच हुए ककसी करार को िागू िहीं होगी ।”;
(iv) स्पष्टीकरण में,—
(i) िंड (क) और िंड (ि) के स्र्ाि पर, निम्िलिखित िंड रिे जाएंगे, अर्ाषत ् :—206 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— ‘(क) “इंतजाम करिे में सहबद्िता” के अंतगतष कोई ऐसा करार सजम्मलित है, जो माि या सेवाओं के िेता से ऐस े िय की शत ष के रूप में कोई अन्य सुलभन्ि माि या सेवाओं को िय करिे के लिए की गई हो ;
(ि) “अिन्य व्यौहार करार” के अंतगतष कोई करार सजम्मलित है, जो ककसी भी रीनत में, यर्ाजस्र्नत, िेता या पविेता को उसके व्यापार के अिुिम में, यर्ाजस्र्नत, पविेता या िेता या ककसी अन्य व्यजतत के माि या सवे ाओं से लभन्ि ककन्हीं माि या सेवाओं के अजिष या पविय या अन्यर्ा उिमें व्यौहार को निबधंित करता है ;’;
(ii) िंड (ग) में, “माि” शब्र्द, र्दोिों स्र्ािों पर जहां-जहां वह आता है, के पश्चात,् “या सेवाएं” शब्र्द अंत:स्र्ापपत ककए जाएंगे ;
(iii) िंड (घ) में, “माि” शब्र्द, र्दोिों स्र्ािों पर जहां वह आता है, के पश्चात,् “या सेवाएं” शब्र्द अंत:स्र्ापपत ककए जाएंगे ;
(iv) िंड (ङ) में, “के अंतगतष इस शत ष पर माि पविय करिे का कोई करार भी है” शब्र्द के स्र्ाि पर, “के अंतगतष माि का पविय करिे या सेवाएं प्रर्दाि करिे के लिए ककसी करार की र्दशा में कोई प्रत्यि या अप्रत्यि निबंिि भी है” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) उपिारा (5) के िंड (i) के उपिंड (च) के पश्चात ् निम्िलिखित उपिंड अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ् :— “(छ) अन्य बौद्धिक संपर्दा अधिकारों के संरिण स े संबंधित तत्समय प्रवत्तृ कोई अन्य पवधि ।”। िारा 4 का 5. मूि अधिनियम की िारा 4 की उपिारा (2) के िंड (क) के स्पष्टीकरण में, संशोिि । “पवभेर्दकारी शत ष या कीमत” शब्र्दों के स्र्ाि पर, “शत ष या कीमत” शब्र्द रिे जाएंगे । िारा 5 का 6. मूि अधिनियम की िारा 5 में,— संशोिि । (अ) िंड (ग) के उपिंड (ii) की मर्द (आ) में, “भारत” शब्र्द के स्र्ाि पर, “भारत; या” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(आ) िंड (ग) के पश्चात ् निम्िलिखित अंत:स्र्ापपत ककए जाएंगे, अर्ाषत ् :— “(घ) ककसी उद्यम के ककसी नियंत्रण, शेयरों, मतर्दाि अधिकारों या आजस्तयों के अजषि, पवियि या समामेिि के संबंि में ककसी संव्यवहार का मूल्य र्दो हजार करोड़ रुपए से अधिक होता है :
परंतु उद्यम, जजसको अजजतष ककया जा रहा है, नियंत्रण में लिया जा रहा है, पविय ककया जा रहा है या समामेलित ककया जा रहा है, के भारत में ऐसे सारवाि ् कारबार प्रचािि है, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककए जाएं । (ङ) िंड (क) या िंड (ि) या िंड (ग) में अंतपवष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, जहां या तो भारत में उद्यम की आजस्तयों के मूल्य या व्यापारावत ष का अजिष ककया जा रहा है, उिका नियंत्रण ककया जा रहा है, पवियि या समामेिि ककया जा रहा है, जो ऐसे मूल्य से अधिक िहीं है,vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 207 जो पवर्हत ककया जाए, वहां ऐसा अजिष , नियंत्रण, पवियि या समामेिि िारा 5 के अिीि समुच्चय का गठि िहीं करेगा ।”;
(इ) स्पष्टीकरण के स्र्ाि पर निम्िलिखित स्पष्टीकरण रिा जाएगा, अर्ाषत ् :— “स्पष्टीकरण—इस िारा के प्रयोजिों के लिए,— (क) “नियंत्रण” से ककसी भी रीनत में, वह जो भी हो, निम्िलिखित के द्वारा प्रबंिि या कायकष िापों या सामररक वाखणजज्यक पवनिश्चयों पर ताजववक प्रभाव डाििे की योग्यता—
(i) ककसी अन्य उद्यम या समूह पर एक या अधिक उद्यम द्वारा या तो संयुतत रूप से या एकि रूप से ; या
(ii) ककसी अन्य समूह या उद्यम पर एक या अधिक समूह द्वारा या तो संयुतत रूप से या एकि रूप से, अलभप्रेत है ; (ि) “समूह” से र्दो या अधिक ऐसे उद्यम अलभप्रेत है, जहां एक उद्यम प्रत्यित: या अप्रत्यित :—
(i) ककसी अन्य उद्यम में छब्बीस प्रनतशत या मतर्दाि अधिकारों को ऐसी अन्य उच्चतर प्रनतशतता, जो पवर्हत की जाए, का प्रयोग करिे की ; या
(ii) ककसी अन्य उद्यम में निर्देशक बोड ष में पचास प्रनतशत से अधिक सर्दस्यों की नियुजतत करिे की ; या
(iii) ककसी अन्य उद्यम के प्रबंिि या कायों का नियंत्रण करि े की, जस्र्नत में है ; (ग) “आवत”ष से कािूिी ििे ापरीिक द्वारा, उस पूववष ती पवत्तीय वर् ष से ठीक पूव ष पवत्तीय वर् ष में, जजसमें िारा 6 की उपिारा
(2) या उपिारा (4) के अिीि िोर्टस फाइि ककया गया है, कंपिी के अंनतम उपिब्ि संपरीक्षित िेिाओं के आिार पर प्रमाखणत आवत ष अलभप्रेत है और भारत में ऐसे आवत ष का अविारण अंत:समूह पविय, अप्रत्यि कर, व्यापार बट्टा और सभी रकमें, जो भारत से बाहर के ग्राहकों से आजस्तयों या कारबार के माध्यम से सजृजत की गई है, जैसा कक कािूिी िेिापरीिक द्वारा उस पूववष ती पवत्तीय वर् ष से ठीक पूव ष पवत्तीय वर् ष में, जजसमें िारा 6 की उपिारा (2) या उपिारा (4) के अिीि िोर्टस फाइि ककया गया र्ा, कंपिी के अंनतम उपिब्ि संपरीक्षित िेिाओं के आिार पर प्रमाखणत ककया गया है, को अपवजजतष करके अविारण ककया जाएगा ;
(घ) “संव्यवहार के मूल्य” में ककसी अजिष , आमेिि या समामेिि के लिए प्रत्येक मूल्यवाि प्रनतफि, चाहे वह प्रत्यि या अप्रत्यि या आस्र्धगत हो, सजम्मलित है । (ङ) आजस्तयों के ऐसे मूल्य का अविारण उद्यम की संपरीक्षित िेिा बर्हयों में उस पवत्तीय वर् ष के, जजसमें प्रस्तापवत समुच्चय की तारीि आती है, ठीक पूवषवती पवत्तीय वर् ष में, यर्ार्दलशतष आजस्तयों के बही मूल्य को िेकर ककया जाएगा और यर्र्द ऐसा पवत्तीय पववरण उस208 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— पवत्तीय वर्,ष जजसमें िारा 6 की उपिारा (2) या उपिारा (4) के अिीि िोर्टस फाइि ककया जाता है, के ठीक पूववष ती पवत्तीय वर् ष में कंपिी के अंनतम उपिब्ि संपरीक्षित िेिाओं के आिार पर की गई कािूिी संपरीिक की ररपोटष के अिुसार तब कंपिी अधिनियम, 2013 के 2013 का 18 अिीि रजजस्रार के पास फाइि ककए जािे के लिए अभी तक र्देय िहीं हुआ है, जो ककसी अवियण को घटाकर आए और िारा 3 की उपिारा
(5) में उपबंधित पवधियों के अिीि आजस्तयों के ऐसे मूल्य में ब्ांड मूल्य, गुडपवि मूल्य या प्रनतलिप्याधिकार, पेटेंट, अिुज्ञात उपयोग, सामूर्हक धचह्ि, रजजस्रीकृत स्वत्विारी, रजजस्रीकृत व्यापार धचह्ि, रजजस्रीकृत उपयोगकताष, श्रुनतसम भौगोलिक उपर्दशषि, भौगोलिक उपर्दशिष , डडजाइि या अलभन्यास-डडजाइि या वैसे ही अन्य वाखणजज्यक अधिकारों का मूल्् य भी है ;”;
(च) जहां ककसी उद्यम या प्रभाग या कारबार का कोई भाग अजजतष ककया जा रहा है, उसको नियंत्रण में लिया जा रहा है, उस े ककसी अन्य उद्यम के सार् पविय या समामेलित ककया जा रहा है वहां भाग या प्रभाग या कारबार या जो इसके कारण हुए मािे जा सकते हैं, की आजस्तयों का मल्ू य या आवत ष या संव्यवहार का मूल्य, जैसा भी िाग ू हो, िारा 5 के अिीि अवसीमाओं के िागू होिे के प्रयोजि के लिए सुसंगत आजस्तयां या आवत ष या संव्यवहार का सुसंगत मूल्य होगा ।’। िारा 6 का 7. मूि अधिनियम की िारा 6 में,— संशोिि। (क) उपिारा (2) में,—
(i) “तीस र्र्दि के भीतर” शब्र्दों के स्र्ाि पर “निम्िलिखित में से ककसी के पश्चात ् ककंतु समुच्चय की समाजप्त से पूव”ष शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) िंड (क) में, “िंड (ग)” शब्र्द, कोष्ठक और अिर के पश्चात,् “और िडं (घ)” शब्र्द, कोष्ठक और अिर अंत:स्र्ापपत ककए जाएंगे ;
(iii) िंड (ि) में, “िंड (क)” शब्र्द, कोष्ठक और अिर के पश्चात,् “और िंड (घ)” शब्र्द, कोष्ठक और अिर अंत:स्र्ापपत ककए जाएंगे ;
(iv) निम्िलिखित स्पष्टीकरण अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ् :— ‘स्पष्टीकरण—इस उपिारा के प्रयोजिों के लिए, “अन्य र्दस्तावेज” से कोई ऐसा र्दस्तावेज अलभप्रेत है, चाहे ककसी भी िाम स े ज्ञात हो, जो नियंत्रण, शेयर, मतर्दाि अधिकार या आजस्तयां अजजतष करिे के लिए करार या पवनिश्चय को बताता हो, यर्र्द अजिष अजजतष ककए जािे वािे उद्यम की सहमनत के बबिा ककया जाता है, अजिष करिे वािे उद्यम द्वारा निष्पार्र्दत कोई र्दस्तावेज, चाहे ककसी भी िाम से ज्ञात हो, जो नियंत्रण, शेयर या मतर्दाि अधिकार के अजिष के पवनिश्चय को बताता हो या जहां शेयरों, मतर्दाि अधिकारों का अजिष भारतीय प्रनतभूनत और पवनिमय बोड ष अधिनियम, 1992 के 1992 का 15 अिीि बिाए गए भारतीय प्रनतभूनत और पवनिमय बोड ष (शेयरों का सारवाि ् अजिष और ग्रहण) पवनियम, 2011 के अिुसार कोई िोक उद्घोर्णा की गई है ।’;vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 209 (ि) उपिारा (2क) में, “र्दो सौ र्दस र्र्दि” शब्र्दों के स्र्ाि पर, “एक सौ पचास र्र्दि” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) उपिारा (3) में, “िारा 29, िारा 30 और िारा 31” शब्र्दों और अंकों के स्र्ाि पर, “िारा 29, िारा 29क, िारा 30 और िारा 31” शब्र्द, अंक और अिर रिे जाएंगे ; (घ) उपिारा (4) और उपिारा (5) तर्ा स्पष्टीकरण के स्र्ाि पर निम्िलिखित रिा जाएगा, अर्ाषत ् :— ‘(4) उपिारा (2क) और उपिारा (3) तर्ा िारा 43क में अंतपवष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, यर्र्द कोई समुच्चय ऐसे मािर्दंड को पूरा करता है, जो पवर्हत ककया जाए और उपिारा (2) के अिीि आयोग को िोर्टस र्देिे की अपेिा स े इस अधिनियम के अिीि अन्यर्ा छूट प्राप्त िहीं है, तब ऐसे समुच्चय के लिए िोर्टस आयोग को ऐस े प्ररूप में और ऐसी फीस का संर्दाय करिे पर, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट की जाए, प्रस्तापवत समुच्चय के ब्यौरों का प्रकटि करते हुए र्र्दया जा सकेगा और तत्पश्चात ् उपिारा (2) के अिीि ऐसे समुच्चय के लिए एक पर्ृ क् िोर्टस र्देिा अपेक्षित िहीं होगा ।
(5) उपिारा (4) के अिीि िोर्टस फाइि ककए जािे पर और आयोग द्वारा उसकी अलभस्वीकृनत पर, प्रस्तापवत समुच्चय को िारा 31 की उपिारा (1) के अिीि आयोग द्वारा अिुमोर्र्दत ककया गया समझा जाएगा तर्ा उपिारा (2) या उपिारा (2क) के अिीि कोई अन्य अिुमोर्दि अपेक्षित िहीं होगा ।
(6) यर्र्द िारा 20 की उपिारा (1) में निर्र्दषष्ट अवधि के भीतर, आयोग यह पाता है कक उपिारा (4) के अिीि अधिसूधचत समुच्चय उस उपिारा के अिीि पवनिर्र्दषष्ट अपेिाओं को पूरा िहीं करता है या र्दी गई सूचिा या और की गई घोर्णाएं ताजववक रूप से सही िहीं है या अपूण ष हैं, उपिारा (5) के अिीि र्र्दया गया अिुमोर्दि प्रारंभ स े ही शून्य होगा और आयोग ऐसा आर्देश पाररत कर सकेगा, जो वह ठीक समझे :
परंतु ऐसा कोई आर्देश तब तक पाररत िहीं ककया जाएगा जब तक समुच्चय को सुिे जािे का अवसर प्रर्दाि िहीं कर र्र्दया जाता है ।
(7) इस िारा और िारा 43क में अंतपवष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, ऐस े मािर्दंड को पूरा करिे पर उपिारा (2), उपिारा (2क) और िारा 4 का अिुपािि करिे की अपेिा से समुच्चयों के कनतपय प्रवगों को छूट र्दी जाएगी ।
(8) उपिारा (4), उपिारा (5), उपिारा (6) और उपिारा (7) में अंतपवष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी—
(i) इि उपिाराओं में निर्र्दषष्ट पवर्यों पर, इस अधिनियम के अिीि बिाए गए नियम और पवनियम, जैसा कक वह प्रनतस्पिाष (संशोिि) अधिनियम, 2023 के िागू होिे से ठीक पूव ष र्े और ऐस े प्रारंभ होिे पर प्रवत्तृ र्े ऐस े समय तक प्रवत्तृ बिे रहेंगे जब तक, यर्ाजस्र्नत, नियम या पवनियम इस अधिनियम के अिीि िहीं बिाए जाते हैं ; और210 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(ii) इस अधिनियम के अिीि बिाए गए ककन्हीं नियमों और पवनियमों के अिीि या उिके अिुसरण में पाररत ककया गया कोई आर्देश या अधिरोपपत कोई फीस या बिाया गया समुच्चय या पाररत संकल्प या र्र्दया गया निर्देश या निष्पार्र्दत या जारी ककया गया लिित या की गई कोई बात, यर्र्द प्रनतस्पिाष (संशोिि) अधिनियम, 2023 के प्रारंभ पर प्रवत्तृ है तो वह प्रवत्तृ बिी रहेगी और उसका ऐस े प्रभाव होगा मािो ऐसा पाररत आर्देश या ऐसी अधिरोपपत फीस या ऐसा बिाया गया समुच्चय या ऐसा पाररत संकल्प या ऐसा र्र्दया गया निर्देश या ऐसा निष्पार्र्दत या जारी ककया गया लिित इस अधिनियम के अिीि या उसके अिुसरण में ककया गया है ।
(9) इस िारा के उपबंि ककसी शेयर प्रनतश्रुनत या पवत्तपोर्णकारी सुपविा या ककसी िोक पवत्तीय संस्र्ा अजिष , पवर्देशी पोटषफोलियो पवनििािकताष, बकैं या प्रवग ष 1 अिुकल्पी पवनििाि निधि को ककसी ऋण करार या पवनििाि करार की प्रसंपवर्दा को िागू िहीं होंगे । स्पष्टीकरण—इस िारा के प्रयोजिों के लिए, पर्द— (क) “प्रवग ष 1 अिुकल्पी पवनििाि निधि” का वही अर् ष है, जो उसका भारतीय प्रनतभूनत और पवनिमय बोड ष अधिनियम, 1992 के 1992 का 15 अिीि बिाए गए भारतीय प्रनतभूनत और पवनिमय बोड ष (अिुकल्पी पवनििाि निधि) पवनियम, 2012 में उसका है ;
(ि) “पवर्देशी पोटषफोलियो पवनििािकताष” का वही अर् ष है, जो उसका भारतीय प्रनतभूनत और पवनिमय बोड ष अधिनियम, 1992 के 1992 का 15 अिीि बिाए गए भारतीय प्रनतभूनत और पवनिमय बोड ष (पवर्देशी पोटषफोलियो पवनििािकताष) पवनियम, 2019 में उसका है ।’। िई िारा 6क का 8. मूि अधिनियम की िारा 6 के पश्चात ् निम्िलिखित िारा अंत:स्र्ापपत की अंत:स्र्ापि । जाएगी, अर्ाषत:्— िुिी प्रस्र्ापिाएं, “6क. िारा 6 की उपिारा (2क) और िारा 43क में अंतपवष्ष ट कोई बात, आर्र्द । ककसी िुिी प्रस्र्ापिा के कायाषन्वयि या ककसी पवनियलमत स्टॉक पवनिमय पर संव्यवहारों की ककसी श्रंिृ िा के माध्यम से पवलभन्ि पविेताओं से, अन्य प्रनतभूनतयों में संपररवतषिीय शेयरों या प्रनतभूनतयों के अजिष को िहीं रोकेगी, यर्र्द— (क) आयोग के पास अजिष का िोर्टस ऐस े समय के भीतर और ऐसी रीनत में फाइि ककया गया हो जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककया जाए ; और (ि) अजिष कताष, ऐसे शेयरों में या संपररवतिष ीय प्रनतभूनतयों में ककन्हीं स्वालमत्व या फायर्दाप्रर्द अधिकारों या र्हत, जजिके अंतगतष मतर्दाि अधिकार और िाभांश या ककन्हीं अन्य संपवतरणों की प्राजप्त भी है, का लसवाय उसके जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककया जाए, प्रयोग तब तक िहीं करता है, जब तक आयोग अधिनियम की िारा 6 की उपिारा (2क) के उपबंिों के अिुसार ऐसे अजिष का अिुमोर्दि िहीं कर र्देता है ।” स्पष्टीकरण—इस िारा के प्रयोजिों के लिए “िुिी प्रस्र्ापिा” से भारतीय प्रनतभूनत और पवनिमय बोड ष अधिनियम, 1992 के अिीि बिाए गए भारतीय 1992 का 15vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 211 प्रनतभूनत और पवनिमय बोड ष (शेयरों का सारवाि ् अजिष और ग्रहण) पवनियम, 2011 के अिुसार की गई िुिी प्रस्र्ापिा अलभप्रेत है ।’।
9. मूि अधिनियम की िारा 8 की उपिारा (2) में, “उद्योग” शब्र्द के पश्चात,् िारा 8 का संशोिि । “प्रौद्योधगकी” शब्र्द अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा ।
10. मूि अधिनियम की िारा 9 की उपिारा (1) के िंड (घ) में, “उद्योग” शब्र्द िारा 9 का संशोिि । के पश्चात,् “प्रौद्योधगकी” शब्र्द अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा ;
11. मूि अधिनियम की िारा 12 के स्र्ाि पर, निम्िलिखित िारा रिी िारा 12 के स्र्ाि जाएगी, अर्ाषत ् :— पर िई िारा का रिा जािा । “12. (1) अध्यि और अन्य सर्दस्य, उस तारीि से, जजसको उसका पर्द अध्यि और अन्य सर्दस्यों के िारण करिा समाप्त हो जाता है र्दो वर् ष की अवधि तक परामशर्दष ाता, ररटेिर या नियोजि पर ककसी अन्य हैलसयत में, चाहे वह जो भी हो, निम्िलिखित के प्रबंिि या निबिं ि । प्रशासि में कोई नियोजि स्वीकार िहीं करेंगे या सिाह िहीं र्देंगे या उससे संबद्ि िहीं होंगे,— (क) कोई ऐसा उद्यम, जो इस अधिनियम के अिीि आयोग के समि ककसी कायवष ाही में पिकार है या रहा है ; या (ि) कोई व्यजतत, जो आयोग के समि िारा 35 के अिीि उपजस्र्त होता है या उपजस्र्त हुआ है ।
(2) िारा 35 में अंतपवष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, अध्यि या कोई अन्य सर्दस्य, सेवानिवपृत्त या अन्यर्ा ककसी कारण से सेवा में ि रहिे पर, आयोग के समि ककसी व्यजतत या उद्यम का प्रनतनिधित्व िहीं करेगा : परंतु इस िारा में अंतपवष्ष ट कोई बात केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या स्र्ािीय प्राधिकरण के अिीि या ककसी कािूिी प्राधिकरण या ककसी केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या के अिीि स्र्ापपत ककसी निगम में या 2013 का 18 कंपिी अधिनियम, 2013 की िारा 2 के िंड (45) में यर्ा पररभापर्त ककसी सरकारी कंपिी में ककसी नियोजि को िागू िहीं होगी ।”;
12. मूि अधिनियम की िारा 16 की उपिारा (1) में, “केंद्रीय सरकार, िारा 16 का संशोिि । अधिसूचिा द्वारा, इस अधिनियम के ककसी भी उपबंि के उल्िंघि की जांच करिे में आयोग की सहायता करिे के प्रयोजि के लिए और ऐसे अन्य कृत्यों का पािि करिे के लिए, जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अिीि उपबंधित ककए गए हैं या उपबंधित ककए जाएं, महानिर्देशक नियुत त कर सकेगी ।” शब्र्दों के स्र्ाि पर, “आयोग, केंद्रीय सरकार के पूवाषिुमोर्दि से अधिसूचिा द्वारा, इस अधिनियम के ककसी भी उपबंि के उल्िंघि की जांच करिे में आयोग की सहायता करिे के प्रयोजि के लिए और ऐसे अन्य कृत्यों का पािि करिे के लिए, जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अिीि उपबंधित ककए गए हैं या उपबंधित ककए जाएं, महानिर्देशक नियुत त कर सकेगी ।” शब्र्द रिे जाएंगे ;
13. मूि अधिनियम की िारा 18 के स्र्ाि पर, निम्िलिखित िारा रिी िारा 18 के जाएगी, अर्ाषत ् :— स्र्ाि पर िई िारा का प्रनतस्र्ापि । “18. इस अधिनियम के उपबंिों के अिीि रहते हुए, आयोग का यह आयोग के कतव्ष य और कृत्य । कतव्ष य होगा कक वह ऐसी प्रर्ाओं को समाप् त करे, जो प्रनतस्पिाष पर प्रनतकूि212 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— प्रभाव डािती है, प्रनतस्पिाष का संवििष करे और उसे बिाए रिे, उपभोत ताओं के र्हतों का संरिण करे और भारत के बाजारों में, अन्य सहभाधगयों द्वारा ककए गए व्यापार की स्वतंत्रता को सुनिजश् चत करे :
परंतु आयोग, इस अधिनियम के अिीि अपिे कतव्ष यों के निवहष ि या अपिे कृत्यों का पािि करि े के प्रयोजि के लिए, केन्द्रीय सरकार के पूव ष अिुमोर्दि से, ककसी पवर्देशी अलभकरण के सार् कोई ज्ञापि या ठहराव कर सकेगा :
परंतु यह और कक आयोग, इस अधिनियम के अिीि अपिे कतव्ष यों के निवहष ि या अपिे कृत्यों के पािि के प्रयोजि के लिए, ककसी कािूिी प्राधिकरण या सरकार के पवभाग के सार् कोई ज्ञापि या ठहराव कर सकेगा ।”। िारा 19 का 14. मूि अधिनियम की िारा 19 में,— संशोिि । (क) उपिारा (1) में निम्िलिखित परंतुक अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ् :— “परंतु आयोग तब तक कोई सूचिा या निर्देश ग्रहण िहीं करेगा, जब तक यह उस तारीि से, जजसको हेतुक उत्पन्ि हुआ है, तीि वर् ष की अवधि के भीतर फाइि िहीं ककया गया हो :
परंतु यह और कक पहिे परंतुक में पवनिर्र्दषष्ट कािावधि के पश्चात ् कोई सूचिा या निर्देश ग्रहण ककया जा सकेगा, यर्र्द आयोग का यह समािाि हो जाता है कक ऐसे पविंब को माफ करिे के कारणों को अलभलिखित करिे के पश्चात ् सूचिा या निर्देश को ऐसी अवधि के भीतर फाइि ि करिे का पयाषप्त कारण रहा र्ा ।” (ि) उपिारा (3) में,—
(i) िंड (ग) में, “बाजार में प्रवेश को प्रनतबंधित करके” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ;
(ii) िंड (घ) में, “फायर्दों का प्रोद्भवि” शब्र्दों के स्र्ाि पर, “फायर्दे या हानि का प्रोद्भवि” शब्र्द रिे जाएंगे ; (ग) उपिारा (6) में, िंड (ज) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंत:स्र्ापपत ककए जाएंगे, अर्ाषत ् :— “(झ) माि की पवशेर्ताएं या सेवाओं की प्रकृनत ; और (ञ) अन्य िेत्रों में पूनत ष या मांग को पररवनततष करिे में सहयुतत िागत ;”;
(घ) उपिारा (7) में, —
(i) िंड (क) में, “उसका अंनतम उपयोग” शब्र्दों के पश्चात,् “या सेवाओं की प्रकृनत” शब्र्द अंत:स्र्ापपत ककए जाएंगे ;
(ii) िंड (च) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंत:स्र्ापपत ककए जाएंगे, अर्ाषत ् : — “(छ) अन्य माि या सेवाओं की मांग या पूनत ष को पररवनततष करिे में सहयुतत िागत ; (ज) ग्राहकों के प्रवग ष ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 213
15. मूि अधिनियम की िारा 20 में,— िारा 20 का संशोिि । (क) उपिारा (1) में, “या उस िारा के िंड (ग) में निर्र्दषष् ट पवियि या समामेिि के संबंि में” शब्र्दों, कोष्ठक और अिर के स्र्ाि पर, “िारा 5 के िंड (ग) या ककसी उद्यम के नियंत्रण, शेयर, मतर्दाि अधिकार या आजस्तयों के अजिष या उस िारा के िंड (घ) में निर्र्दषष्ट पवियि या समामेिि के संबंि में” शब्र्द रिे जाएंगे ;
‘(ि) उपिारा (3) में, “अधिसूचिा द्वारा, र्ोक मूल्य सूचकांक या रूपए या पवर्देशी करेंसी की पवनियम र्दर में उतार-चढाव के आिार पर उस िारा के प्रयोजिों के लिए आजस्तयों के मूल्य या व्यापारावत ष के मूल्य में वद्ृ धि या कमी करेगी” शब्र्दों के स्र्ाि पर, “अधिसूचिा द्वारा, र्ोक मूल्य सूचकांक या रूपए या पवर्देशी करेंसी की पवनियम र्दर में उतार-चढाव या ऐसे कारकों, जो उसकी राय में इस मामिे में सुसंगत हैं, के आिार पर, आजस्तयों के मूल्य या आवत ष के मूल्य या संव्यवहार के मूल्य में वद्ृ धि या कमी करेगी या उसे उसी स्तर पर रिेगी” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) उपिारा (4) के िंड (ग) में, “समुच्चय” शब्र्द के स्र्ाि पर, “संकेंद्रि” शब्र्द रिा जाएगा ।
16. मूि अधिनियम की िारा 21 की उपिारा (1) में, परंतुक के स्र्ाि पर, िारा 21 का निम्िलिखित परंतुक रिा जाएगा, अर्ाषत ् :— संशोिि । “परंतु कोई कािूिी प्राधिकरण, स्वप्रेरणा स े आयोग को ककसी ऐस े मुद्र्दे को निर्र्दषष्ट कर सकेगा, जजसमें, यर्ाजस्र्नत, इस अधिनियम का कोई उपबंि अंतवलष ित है या जो इस अधिनियम के उद्र्देश्यों का संविषि करिे से संबंधित है ।”।
17. मूि अधिनियम की िारा 21क की उपिारा (1) में,— िारा 21क का संशोिि । (क) “इस अधिनियम” शब्र्दों के स्र्ाि पर, “अधिनियम” शब्र्द रिा जाएगा ; (ि) परंतुक के स्र्ाि पर, निम्िलिखित परंतुक रिा जाएगा, अर्ाषत ् :— “परंतु आयोग, स्वप्रेरणा से ककसी कािूिी प्राधिकरण को ककसी ऐस े मुद्र्दे पर निर्र्दषष्ट कर सकेगा, जजसमें अधिनियम के उपबंि अंतवलषित हैं, जजिका कायाषन्वयि उस कािूिी प्राधिकरण को सौंपा गया है ।”।
18. मूि अधिनियम की िारा 22 की उपिारा (3) में, ‘‘और मतों के बराबर होिे िारा 22 का संशोिि । की र्दशा में अध्यि या उसकी अिुपजस्र्नत में अध्यिता करिे वािे सर्दस्य का द्पवतीय या निणाषयक मत होगा’’ शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ।
19. मूि अधिनियम की िारा 26 में,— िारा 26 का संशोिि । (क) उपिारा (2) के पश्चात,् निम्िलिखित उपिारा अंत:स्र्ापपत की जाएगी, अर्ाषत ् :— “(2क) आयोग, िारा 3 में निर्र्दषष्ट करार या िारा 4 के अिीि ककसी उद्यम या समूह के सचं ािि की जांच िहीं कर सकेगा, यर्र्द वही | या सारत: उन्हीं तथ् यों और पववा कों को जजन्हें िारा 19 के अिीि प्राप्त जािकारी में उठाया गया है या केंद्रीय सरकार या ककसी राज्य सरकार या ककसी कािूिी प्राधिकारी से प्राप्त निर्देश पर उसके पूववष ती आर्देश में214 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— आयोग द्वारा पहिे ही पवनिश्चय ककया गया है ।”;
(ि) उपिारा (3) के पश्चात,् निम्िलिखित उपिारा अंत:स्र्ापपत की जायेगी, अर्ाषत ् :— “(3क) यर्र्द, उपिारा (3) में निर्र्दषष्ट महानिर्देशक की ररपोटष पर पवचार करिे के पश्चात,् आयोग कक यह राय है कक अनतररतत अन्वेर्ण की आवश्यकता है तो मामि े में अनतररतत जांच के लिए महानिर्देशक को निर्देश र्दे सकेगा । (3ि) महानिर्देशक, उपिारा (3क) के अिीि निर्देश की प्राजप्त पर मामिे का अन्वेर्ण करेगा और अपिे निष्कर्ों पर एक अिुपूरक ररपोटष ऐसी अवधि के भीतर, जो आयोग द्वारा पवर्हत की जाए, प्रस्तुत करेगा ।”;
(ग) उपिारा (4) में, शब्र्द, कोष्ठक और अंक “उपिारा (3)” के स्र्ाि पर, र्दोिों स्र्ािों पर जहां व े आते हैं, “उपिारा (3) और उपिारा (3ि)” शब्र्द, कोष्ठक, अंक और अिर रिे जाएंगे; (घ) उपिारा (5) में शब्र्द, कोष्ठक और अंक “उपिारा (3)” के स्र्ाि पर, “उपिारा (3ि)” शब्र्द, कोष्ठक, अंक और अिर रिे जाएंगे;
(ङ) उपिारा (8) में शब्र्द, कोष्ठक और अंक “उपिारा (3)” के स्र्ाि पर, “उपिारा (3) और उपिारा (3ि)” शब्र्द, कोष्ठक, अंक और अिर रिे जाएंगे; (च) उपिारा (8) के पश्चात,् निम्िलिखित उपिारा अंत:स्र्ापपत की जाएगी, अर्ाषत ् :— “(9) यर्ाजस्र्नत, उपिारा (7) या उपिारा (8) के अिीि अन्वेर्ण या जांच के पूरा होिे पर आयोग मामिे को बंर्द करि े का कोई आर्देश पाररत कर सकेगा या िारा 27 के अिीि कोई आर्देश पाररत कर सकेगा और इस आर्देश की एक प्रनत यर्ाजस्र्नत, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार या कािूिी प्राधिकरण या संबद्ि पिकारों को भेज सकेगा :
परंतु ऐसे आर्देश को पाररत करिे के पूव ष आयोग, ककए गए अलभकधर्त उल्िंघिों को र्दशाषते हुए और ऐसे अन्य ब्यौरे, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककए जाएं तर्ा संबद्ि पिकारों को युजततयुतत सुिवाई का अवसर र्देकर कारण बताओ सूचिा जारी करेगा ।” । िारा 27 का 20. मूि अधिनियम की िारा 27 में, िंड (ि) के स् र्ाि पर निम् िलिखित िंड संशोिि । रिा जाएगा, अर्ाषत ् :— ‘(ि) प्रत्य ेक ऐसे व् यजत त या उद्यम पर, जो ऐसे करार या ऐसी अपिी प्रिाि जस्र्नत का र्दरुु पयोग ककया है, ऐसी शाजस् त अधिरोपपत करिा, जो वह उधचत समझे ककंतु वह गत तीि पूववष ती पवत्तीय वर्ों के, यर्ाजस्र्नत, औसत व् यापारावत ष या आय के र्दस प्रनतशत से अधिक िहीं होगी :
परंतु ककसी उत् पार्द संघ के सार् िारा 3 में निर्र्दषष् ट कोई करार ककए जाि े की र्दशा में, आयोग उस उत् पार्दि संघ में सजम् मलित प्रत्य ेक उत् पार्दक, पविेता, पवतरक, व् यापारी या सेवा प्रर्दाता कर ऐस े करार के जारी रहिे के प्रत्य ेक वर् ष के लिए उसके िाभ के तीि गुणा तक या ऐसे करार के जारी रहिे के प्रत् येक वर्ष के लिए उसके, यर्ाजस्र्नत, आवत ष या आय के र्दस प्रनतशत तक की, इिमें स ेvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 215 जो भी अधिक हो, शाजस् त अधिरोपपत कर सकेगा । स् पष् टीकरण 1—इस िंड के प्रयोजिों के लिए, पर्द, यर्ाजस्र्नत, “आवत”ष या “आय”, ऐसी रीनत में नििाषररत ककया जाएगा जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष् ट ककया जाए । स्पष्टीकरण 2—इस िंड के प्रयोजिों के लिए, “आवत”ष से ककसी व्यजतत या उद्यम द्वारा सभी उत्पार्दों और सेवाओं से व्युत्पार्र्दत सावबषत्रक आवत ष अलभप्रेत है ।’।
21. मूि अधिनियम की िारा 29 में, — िारा 29 का संशोिि । (क) उपिारा (1) में शब् र्द “तीस र्र्दिों के भीतर” के स् र्ाि पर “पन्द्र ह र्र्दिों के भीतर” शब् र्द रिे जाएंगे; (ि) उपिारा (1क) के पश् चात ् निम् िलिखित उपिारा अंत:स् र्ापपत की जाएगी, अर्ाषत:्— “(1ि) आयोग िारा 6 की उपिारा (2) के अिीि सूचिा की प्राजप् त के तीस र्र्दि के भीतर, उपिारा (1) में निर्र्दषष् ट अपिी प्रर्म दृष् टया राय बिाएगा ।”;
(ग) उपिारा (2) में,—
(i) शब् र्द “सात काय ष र्र्दवसों के भीतर” के स् र्ाि पर “सात र्र्दि के भीतर” शब् र्द रिे जाएंगे ;
(ii) शब् र्द “र्दस काय ष र्र्दवसों के भीतर” के स् र्ाि पर “सात र्र्दि के भीतर” शब् र्द रिे जाएंगे ; (घ) उपिारा (3) में, शब् र्द “पन्द्र ह काय ष र्र्दवसों के भीतर” के स् र्ाि पर “र्दस र्र्दि के भीतर” शब् र्द रि े जाएंगे ;
(ङ) उपिारा (4) में, शब् र्द “पन्द्र ह काय ष र्र्दवसों के भीतर” के स् र्ाि पर “सात र्र्दि के भीतर” शब्र्द रिे जाएंगे ; (च) उपिारा (5) में, शब् र्द “पन्द्र ह र्र्दिों के भीतर” के स् र्ाि पर “र्दस र्र्दि के भीतर” शब् र्द रिे जाएंगे ;
(छ) उपिारा (6) के स् र्ाि पर निम् िलिखित उपिारा रिी जाएगी, अर्ाषत ् :— “(6) आयोग, सभी जािकारी प्राप् त होिे के पश् चात,् यर्ाजस् र्नत, िारा 29क या िारा 31 में अंतपवष्ष ट उपबंिों के अिुसार मामि े को निपटािे के लिए अग्रसर होगा ।
(7) इस िारा में अंतपवष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, आयोग समुच् चय के पिकारों द्वारा प्रस्र्ापपत समुधचत उपांतरों को स् वीकार कर सकेगा या स् व:प्रेरणा स े प्रस्र्ापपत उपांतरणों, जैसी भी जस् र्नत हो, उपिारा
(1) के अिीि कोई प्रर्म दृष् टतया राय बिािे से पूव ष प्रस्ताव कर सकेगा ।”।
22. मूि अधिनियम की िारा 29 के पश् चात,् निम् िलिखित िारा अंत:स् र्ापपत िई िारा 29क की जाएगी, अर्ाषत ् :— का अंत:स् र्ापि ।216 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— आयोग द्वारा “29क. (1) िारा 29 के अिीि प्रकिया के पूण ष होिे पर, जहां आयोग की आिेपों का पववरण यह राय है कक समुच् चय िे प्रनतस् पिाष पर पयाषप् त प्रनतकूि प्रभाव डािा है या जारी करिा और डाििे की संभाविा है, यह प्रनतस्पिाष पर ऐसे पयाषप्त प्रनतकूि प्रभाव की पहचाि उपांतरणों का प्रस् ताव करते हुए पिकारों के आिपे ों का कर्ि जारी करेगा और पिकारों को यह निर्देश र्देगा कक वे आिेपों के कर्ि की प्राजप् त के पच्चीस र्र्दि के भीतर यह स् पष् ट करें कक ऐसे समुच् चय को प्रभावी करिे की अिुज्ञा त यों र्दी जािी चार्हए ।
(2) जहां समुच् चय के पिकार यह समझते हैं कक प्रनतस् पिाष पर ऐसा पयाषप् त प्रनतकूि प्रभाव ऐस े समुच् चय के उपयुतत उपांतरण द्वारा समाप्त ककया जा सकता है, वहां उपिारा (1) के अिीि जारी आिेपों के कर्ि पर अपिे स् पष् टीकरण के सार् समुच् चय के समुधचत उपांतरण की प्रस्र्ापिा कर सकेगा, जो पवनियमों द्वारा ऐसी रीनत में पवनिर्र्दषष् ट ककया जाए ।
(3) यर्र्द आयोग, उपिारा (2) के अिीि पिकारों द्वारा प्रस् तुत ककए गए उपांतरण को स् वीकार िहीं करता है तो उस उपिारा के अिीि प्रस् तापवत उपांतरणों की प्राजप् त की तारीि से सात र्र्दि के भीतर पिकारों को संसूधचत करेगा कक तयों ि यह उपांतरण प्रनतस् पिाष पर पयाषप् त उधचत प्रभाव को समाप्त करि े के लिए पयाषप् त है और उत त सूचिा, पुिरीक्षित उपांतरण यर्र्द कोई हो, की प्राजप् त के बारह र्र्दि के भीतर उसे प्रस्तुत करिे के लिए पिकारों से अपेिा करेगा, जजससे प्रनतस् पिाष पर पयाषप् त प्रनतकूि प्रभाव को समाप्त ककया जा सके :
परंतु आयोग ऐसे प्रस् ताव की प्राजप् त से बारह र्र्दिों के भीतर उपांतरण के लिए ऐसे प्रस् ताव का मूल् यांकि करेगा : परंतु यह और कक आयोग स् व:प्रेरणा से समुच् चय में समुधचत उपांतरणों का प्रस्ताव कर सकेगा जजस पर समुच् चय के पिकारों द्वारा पवचार ककया जाए ।”। िारा 31 का 23. मूि अधिनियम की िारा 31 में,— संशोिि । (क) पाश् व ष शीर् ष में, शब् र्द “कनतपय” का िोप ककया जाएगा;
(ि) उपिारा (1) में शब् र्द “ऐसे समुच् चय सर्हत” का िोप ककया जाएगा; (ग) उपिारा (1) के पश्चात ् निम्िलिखित परंतुक अंत:स्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ् :— ‘‘परंतु यर्र्द आयोग, िारा 29 की उपिारा (1ि) के अिीि यर्ा उपबंधित प्रर्मदृष्ट्या कोई राय िहीं बिाता है, तो समुच्चय अिुमोर्र्दत समझा जाएगा और कोई पर्ृ क् आर्देश पाररत ककया जािा अपेक्षित िहीं होगा ।’’;
(घ) उपिारा (3), उपिारा (4), उपिारा (5) और उपिारा (6) के स् र्ाि पर निम् िलिखित उपिाराएं रिी जाएंगी, अर्ाषत ् :— “(3) जहां आयोग की यह राय है कक प्रनतस् पिाष पर ऐसा कोई पयाषप् त प्रनतकूि प्रभाव जो समुच् चय में है या होिा संभाव्य है, यर्ाजस् र्नत, िारा 29 की उपिारा (7) या िारा 29क की उपिारा (2) या उपिारा (3) के अिीि पिकारों या आयोग द्वारा प्रस् तापवत उपांतरण समाप्त ककया जा सकता है, वहां यह ऐसे उपांतरणों के अिीि रहते हुए समुच् चय को अिुमोर्र्दत कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
(4) जहा ं उपिारा (3) के अिीि आयोग द्वारा ककसी समुच् चय कोvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 217 अिुमोर्र्दत ककया जाता है, वहां ऐसे समुच् चय के पिकार आयोग द्वारा यर्ापवनिर्र्दषष् ट ऐसी अवधि के भीतर ऐसे उपांतरण को कायाषजन्व त करेंगे ।
(5) जहां— (क) उपिारा (2) के अिीि आयोग द्वारा यह निर्देश र्र्दया गया है कक समुच् चय प्रभावी िहीं होगा; या (ि) समुच् चय के पिकार उपिारा (4) के अिीि आयोग द्वारा यर्ापवनिर्र्दषष् ट ऐसी अवधि के भीतर उपांतरण को कायाषजन्व त करिे में असफि रहता है; या (ग) आयोग की यह राय है कक समुच् चय से प्रनतस् पिाष पर पयाषप् त प्रनतकूि प्रभाव पड़ा है या पड़िे की संभाविा है, जो ऐस े समुच् चय के उपयुतत उपांतरण द्वारा समाप्त िहीं ककया जा सकता, तब ककसी शाजस् त पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, जो अधिरोपपत की जा सकेगी या कोई अलभयोजि जो अधिनियम के अिीि प्रारंभ ककया जा सकेगा, आयोग, यर्ाजस् र्नत, यह आर्देश र्दे सकेगा कक ऐसा समुच् चय प्रभावी िहीं होगा या शून् य घोपर्त ककया जाएगा या प्रनतस् पिाष पर पयाषप् त प्रनतकूि प्रभाव का समािाि करिे के लिए पिकारों द्वारा कायजषन्वत की जािे वािी स् कीम को पवरधचत कर सकेगा ।
(6) यर्र्द आयोग द्वारा, यर्ाजस् र्नत, उपिारा (1) या उपिारा (2) या उपिारा (3) या उपिारा (5) के उपबंिों के अिुसार िारा 6 की उपिारा
(2) के अिीि आयोग द्वारा र्दी गई सूचिा की तारीि स े एक सौ पचास र्र्दि की अवधि के भीतर कोई आर्देश पाररत िहीं ककया जाता है या निर्देश जारी िहीं ककया जाता है समुच् चय, आयोग द्वारा अिुमोर्र्दत ककया गया समझा जाएगा । (ङ) उपिारा (7), उपिारा (8), उपिारा (9), उपिारा (10), उपिारा (11) और उपिारा (12) का िोप ककया जाएगा ।”।
24. मूि अधिनियम की िारा 32 में, “29 और 30” अंकों और शब् र्दों के स् र्ाि िारा 32 का संशोिि । पर “29, 29क और 30” अंक, अिर और शब् र्द रिे जाएंगे ।
25. मूि अधिनियम की िारा 35 की उसकी निम्िलिखित उपिारा (1) के रूप िारा 35 का में संख यांककत की जाएगी,— संशोिि । (क) इस प्रकार संखयांककत की गई उपिारा (1) में, ‘‘कोई व्यजतत या कोई उद्यम’’ शब्र्दों के स्र्ाि पर, ‘‘कोई पिकार’’ शब्र्द रिा जाएगा ;
(ि) इस प्रकार संख यांककत की गई उपिारा (1) के पश् चात ् निम् िलिखित उपिारा अंत:स्र् ापपत की जाएगी, अर्ाषत ् :— “(2) उपिारा (1) पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, कोई पिकार, अर्शष ास् त्र, वाखणज् य, अंतरराष् रीय व् यापार के ित्रे ों स े या ककसी अन्य पविा से इस मामिे से संबंधित ककसी पवर्य के संबंि में ककसी पवशेर्ज्ञ की राय को उपिब् ि करािे के लिए पवशेर्ज्ञों को बुिा सकेगा ।”।
26. मूि अधिनियम की िारा 41 में,— िारा 41 का संशोिि । (क) उपिारा (3) के स् र्ाि पर, निम् ििलिखित उपिाराएं रिी जाएंगी, अर्ाषत ् :—218 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— “(3) उपिारा (2) पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, पिकार के सभी अधिकाररयों, कमचष ाररयों और अलभकताषओं जो अन्वेर्णािीि हैं, का यह कतव्ष य होगा कक वे— (क) पिकार के या उसस े संबंधित सभी सूचिा, बर्हयों, कागजपत्रों, अन्य र्दस् तावेजों और अलभिेिों की संरक्षित और प्रस् तुत करें, जो इस निलमत्त महानिर्देशक या उसके द्वारा ककसी प्राधिकृत व् यजत त की अलभरिा में है या शजत त में है ; और (ि) महानिर्देशक को अन्व ेर्ण के संबंि में सभी सहायता प्रर्दाि करें ।
(4) महानिर्देशक, उपिारा (3) में निर्र्दषष् ट पिकार से लभन्ि ककसी व् यजत त से यह अपेिा कर सकेगा कक वह उसके समि या उसके द्वारा इस निलमत्त प्राधिकृत ककसी व् यजत त के समि ऐसी जािकारी प्रस्तुत करे या ऐसी बर्हयां, कागजपत्र, अन्य र्दस् तावेज या अलभिेि प्रस् तुत करे, यर्र्द ऐसी जािकारी या ऐसी बर्हयों, कागजपत्रों, अन्य र्दस् तावेजों या अलभिेिों का प्रस् तुत ककया जािा इसके अन्व ेर्ण के प्रयोजिों के लिए सुसंगत या आवश् यक है ।
(5) महानिर्देशक, एक सौ अस्सी र्र्दि के लिए उपिारा (3) या उपिारा (4) के अिीि प्रस् तुत की गई कोई जािकारी, या बर्हयों, कागजपत्रों, अन्य र्दस् तावेजों या अलभिेिों को अपिी अलभरिा में रि सकेगा और उसके पश् चात ् उन्हें उस व् यजत त को जजसके द्वारा या जजसकी ओर से जािकारी या ऐसी बर्हयां, कागजपत्र, अन्य र्दस् तावेज या अलभिेि प्रस् तुत ककए गए र्े, वापस कर र्देगा :
परंतु ऐसी जािकारी या ऐसी बर्हयां, कागजपत्र, अन्य र्दस्त ावेज या अलभिेि महानिर्देशक द्वारा मंगाएं जा सकेंगे, यर्र्द उिकी लिखित में आर्देश द्वारा एक सौ अस्सी र्र्दि की अनतररत त अवधि के लिए पुि: आवश् यक पड़ती है :
परंतु यह और कक महानिर्देशक के समि प्रस् तुत की गई जािकारी या ऐसी बर्हयां, कागजपत्र, अन्य र्दस् तावेज या अलभिेि की प्रमाखणत प्रनतयां, जो िागू हो, उस पिकार या व् यजत त को उपिब् ि कराई जा सकेंगी जजसकी ओर से सूचिा, बर्हयां, कागजपत्र, अन्य र्दस् तावेज या अलभिेि अपिे ही िच ष पर प्रस् ततु ककए गए हैं ।
(6) महानिर्देशक शपर् पर अन्वेर्ण ककए जा रहे पिकार के कायकष िापों के संबंि में निम्िलिखित की परीिा कर सकेगा— (क) अन्व ेर्ण ककए जा रहे अधिकाररयों में स े ककसी अधिकारी एवं अन्य कमचष ारी और पिकार के अलभकताष; और (ि) आयोग के पूव ष अिुमोर्दि से ककसी अन्य व् यजत त, और तद्िुसार शपर् र्र्दिाएगा और उस प्रयोजि के लिए उि व्यजततयों में से ककसी व्यजतत स े अपेिा कर सकेगा कक वह उसके समि व्यजततगत रूप से उपजस्र्त हो ।
(7) उपिारा (6) के अिीि परीिा िेिबद्ि की जाएगी और इस प्रकार परीिा ककए गए व् यजत त को पढ कर सुिाया जाएगा या उसके द्वाराvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 219 उसे पढा जाएगा और उसके द्वारा हस् तािर ककया जाएगा तर्ा उसके पश् चात ् उसके पवरुद्ि साक्ष् य में प्रयुत त ककया जा सकेगा ।
(8) जहां अन्वेर्ण के र्दौराि, महानिर्देशक के पास यह पवश् वास करिे का युजत तयुत त आिार हैं कक ककसी पिकार या व्यजतत के या उसस े संबंधित सूचिा, बर्हयां, कागजपत्र, अन्य र्दस् तावेज या अलभिेि, िष् ट, पवकृत, पररवनततष ककए जा सकेंगे या उिका लमथ् याकरण ककया जा सकेगा या उन्हें गुप् त रिा जा सकेगा, वहां महानिर्देशक ऐसी सूचिा, बर्हयां, कागजपत्र अन्य र्दस् तावेज या अलभिेि के अलभग्रहण के ककसी आर्देश के लिए मुख य महािगर मजजस् रेट, र्र्दल् िी को आवेर्दि कर सकेगा ।
(9) महानिर्देशक, उपिारा (10) में पवनिर्र्दषष् ट सभी या ककन्ह ीं प्रयोजिों के लिए उसको सहायता र्देिे के लिए, केंद्रीय सरकार के ककसी पुलिस अधिकारी या ककसी अधिकारी की सेवाओं की अध् यपेिा कर सकेगा और प्रत्य ेक ऐसे अधिकारी का यह कतव्ष य होगा कक वह ऐसी अध् यपेिाओं का पािि करे ।
(10) मुख य महािगर मजजस् रेट, र्र्दल्िी, आवेर्दि पर पवचार करिे और महानिर्देशक को सुििे के पश् चात,् आर्देश द्वारा महानिर्देशक को निम्िलिखित के लिए प्राधिकृत कर सकेगा— (क) ऐसी सहायता के सार्, जो अपेक्षित हो ऐसे स् र्ाि या स् र्ािों पर जहां ऐसी सूचिा, बर्हयां, कागजपत्र, अन् य र्दस् तावेज या अलभिेि रिे गए हैं, प्रवेश करिे के लिए;
(ि) ऐसे आर्देश में पवनिर्र्दषष् ट रीनत में स् र्ाि और स् र्ािों की तिाशी करिे के लिए; और (ग) अन्व ेर्ण के प्रयोजि के लिए, सूचिा, बर्हयों, कागजपत्रों, अन्य र्दस् तावेजों या अलभिेिों को अलभग्रहण करिे के लिए, यर्र्द वह आवश् यक समझता है :
परंतु अलभग्रहण की गई, यर्ाजस् र्नत, सूचिा, बर्हयों, कागजपत्रों, अन्य र्दस् तावेजों या अलभिेिों की प्रमाखणत प्रनतयां पिकार या व् यजत त को उपिब् ि कराई जा सकेंगी जजिके स् र्ाि या स् र्ािों पर ऐसे र्दस् तावेजों को इिके िच ष पर अलभग्रहण ककया गया है ।
(11) महानिर्देशक, इस िारा के अिीि अलभग्रहण की गई ऐसी सूचिा, बर्हयों, कागजपत्र, अन्य र्दस् तावेजों या अलभिेिों को ऐसी अवधि के लिए जो अन्व ेर्ण की समाजप् त से बार्द की िहीं होगी, जो वह आवश् यक समझे, और उसके पश् चात,् उस पिकार या व् यजत त को वापस कर र्दी जाएगी जजसकी अलभरिा या शजत त से उन्हें अलभगहृ ीत ककया गया र्ा और ऐसी वापसी की जािकारी मुख य महािगर मजजस् रेट को र्दी जाएगी:
परंतु महानिर्देशक, ऐसी जािकारी या ऐसी बर्हयों, कागजपत्रों, अन्य र्दस् तावेजों या अलभिेिों को वापस करिे से पूव ष उसका या उि पर स् र्ाि पहचाि धचह्ि या उसके ककसी भाग की प्रनतयां या उसके उद्िरण िे सकेगा ।
(12) इस िारा में अन्य र्ा उपबंधित के लसवाय, इस िारा के अिीि की गई प्रत् येक तिाशी और अलभग्रहण उस संर्हता के अिीि ककए गए220 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— तिाशी या अलभग्रहण से संबंधित, र्दंड प्रकिया संर्हता, 1973 के उपबंिों 1974 का 2 के अिुसरण में ककया जाएगा (ि) स् पष् टीकरण के स् र्ाि पर, निम् िलिखित स् पष् टीकरण रिा जाएगा, अर्ाषत ् :— ‘स् पष् टीकरण—इस िारा के प्रयोजिों के लिए,— (क) ककसी व् यजत त के संबंि में “अलभकताष” स े ऐस े व् यजत त के लिए या उसकी ओर से काय ष करिे वािा कोई व् यजत त या काय ष करिे के लिए तात् पनयतष व् यजत त अलभप्रेत है, और इसके अन्तगतष बकैं कार और ऐसे व् यजत त द्वारा िेिा परीिकों और पवधिक सिाहकारों के रूप में नियोजजत व्यजतत भी हैं;
(ि) ककसी कंपिी या निगलमत निकाय के संबंि में “अधिकारी” से निगलमत निकाय या ऐसी कंपिी के डडबचैं र िारकों के लिए कोई न्य ासी अलभप्रेत है; (ग) अधिकाररयों और अन् य कमचष ाररयों या अलभकताषओं के प्रनत ककसी निर्देश का यह अर् ष िगाया जाएगा कक वह, यर्ाजस् र्नत, पूव ष या वतमष ाि अधिकारी और अन् य कमचष ारी या अलभकताष के प्रनत निर्देश है ।’। िारा 42 का 27. मूि अधिनियम की िारा 42 में, — संशोिि । (क) उपिारा (2) में, “अधिनियम की िारा 27, िारा 28, िारा 31, िारा 32, िारा 33, िारा 42(क) और िारा 43(क) के अिीि निकािे गए आयोग के आर्देशों या निर्देशों का अिुपािि करिे में असफि रहेगा तो वह जुमाषिे से जो ऐसे प्रत्येक र्र्दि के लिए जजसके र्दौराि ऐसा अििुपािि होता है र्दस करोड़ रुपए की अधिकतम सीमा के अिीि रहते हुए जैसा आयोग अविाररत करे, एक िाि रुपए तक का हो सकेगा, र्दंडिीय होगा” शब् र्दों, अकं ों और अिरों के स्र् ाि पर “अधिनियम की िारा 6, िारा 27, िारा 28, िारा 31, िारा 32, िारा 33, िारा 42(क), िारा 43क, िारा 44 और िारा 45 के अिीि निकािे गए आयोग के आर्देशों या निर्देशों का अिुपािि करिे में असफि रहेगा तो वह जो ऐसे प्रत्येक र्र्दि के लिए जजसके र्दौराि ऐसा अििुपािि होता है र्दस करोड़ रुपए की अधिकतम सीमा के अिीि रहते हुए जैसा आयोग अविाररत करे एक िाि रुपए तक का हो सकेगा, र्दंडिीय होगा, शाजस्त के लिए र्दायी होगा” शब् र्द, अंक और अिर रिे जाएंगे ;
(ि) उपिारा (3) में, ‘‘उपिारा (2) के अिीि अधिरोपपत जुमाषिे का संर्दाय’’ शब्र्दों, कोष्ठक और अंक के स्र्ाि पर, ‘‘उपिारा (2) के अिीि अधिरोपपत शाजस्त का संर्दाय’’ शब्र्द, कोष्ठक और अंक रिे जाएंगे । िारा 42क का 28. मूि अधिनियम की िारा 42क में, “िारा 27 के अिीि” शब् र्दों और अंकों संशोिि के स् र्ाि पर “िारा 6 और िारा 27 के अिीि” शब् र्द और अंक रिे जाएंगे । िारा 43 का 29. मूि अधिनियम की िारा 43 में, शब् र्द “जुमाषिे से र्दंडडत होगा” के स् र्ाि संशोिि । पर “शाजस्त के लिए र्दायी होगा” शब् र्द रिे जाएंगे । िारा 43क के 30. मूि अधिनियम की िारा 43क के स् र्ाि पर निम् िलिखित िारा रिी स् र्ाि पर िई िारा जाएगी, अर्ाषत ् :— का प्रनतस् र्ापि ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 221 “43क. यर्र्द कोई व् यजत त या उद्यम िारा 6 की उपिारा 2(क) या उपिारा समुच् चय के जािकारी को
(4) के अिीि आयोग को सूचिा र्देिे में असफि रहता है या िारा 6 की अकृत् य करिे के उपिारा (2) का उल् िंघि करता है या िारा 20 की उपिारा (1) के अिीि ककसी लिए शाजस् त जांच के अिुसरण में जािकारी प्रस् तुत करता है, तो आयोग ऐसे व् यजत त या अधिरोपपत करिे उद्यम पर ऐसी शाजस् त अधिरोपपत कर सकेगा जो कुि आवत ष या आजस् तयों या की शजतत । िारा 5 के िंड (घ) में निर्र्दषष्ट संव्यवहार के मूल्य के एक प्रनतशत तक पवस् ताररत हो सकेगा, ऐसे समच्ु चय में, जो भी अधिक हो :
परंतु यर्र्द ककसी व् यजत त या उद्यम िे िारा 6 की उपिारा (4) के अिीि कोई सूचिा र्दे र्दी है और ऐसी सूचिा िारा 6 की उपिारा (6) के अिीि प्रारंभत: शून् य पाई गई है, तब िारा 6 की उपिारा (2) के अिीि कोई सूचिा समुच् चय के अजिष कताष या पिकारों द्वारा र्दी जा सके, जो भी िाग ू हो उस िारा की उपिारा (6) के अिीि आयोग के आर्देश के तीस र्र्दि की अवधि के भीतर र्दी जा सकेगी और इस िारा के अिीि ऐसी तीस र्र्दिों की अवधि की समाजप् त तक आयोग द्वारा कोई कारषवाई िहीं की जाएगी ।
31. मूि अधिनियम की िारा 44 में, िंड (ि) में शब् र्द “एक करोड़ रुपए” के िारा 44 का संशोिि । स् र्ाि पर “पांच करोड़ रुपए” शब् र्द रिे जाएंगे ।
32. मूि अधिनियम की िारा 45 में,— िारा 45 का संशोिि । (क) पाश् वशष ीर् ष में, “अपराि” शब् र्द के स् र्ाि पर “उल् िघं ि” शब् र्द रिा जाएगा ; (ि) उपिारा (1) में,—
(i) “िारा 44” शब्र्द और अकं ों के स् र्ाि पर “िारा 6 की उपिारा
(6) और िारा 44” शब् र्द, अंक और कोष्ठक रिे जाएंगे ;
(ii) “जुमाषिे से र्दंडिीय” शब् र्दों के स् र्ाि पर “शाजस् त के लिए र्दायी” शब् र्द रिे जाएंगे ।
33. मूि अधिनियम की िारा 46 के स्र्ाि पर निम्िलिखित रिा जाएगा, िारा 46 के अर्ाषत ् :— स्र्ाि पर िई िारा का प्रनतस्र्ापि । “46. (1) आयोग, यर्र्द उसका यह समािाि हो जाता है कक ककसी व्यापार िघु शाजस्त अधिरोपपत करिे संघ में सजम्मलित ककसी उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता िे, की शजतत । जजसके बारे में यह अलभकर्ि ककया गया है कक उसिे िारा 3 का अनतिमण ककया है, अलभकधर्त अनतिमण की बाबत पूण ष सत्य प्रकटि ककया है, और ऐसा प्रकटि महत्पूण ष है, ऐसे उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता पर इस अधिनियम के अिीि उस समय या इस अधिनियम के अिीि बिाए गए नियमों या पवनियमों के अिीि उद्ग्रहणीय शाजस्त से कम ऐसी शाजस्त अधिरोपपत कर सकेगा, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककया जाए :
परंतु आयोग द्वारा ऐसे मामिों में कम शाजस्त अधिरोपपत िहीं की जाएगी जजिमें ऐसा प्रकटि करिे से पूव ष िारा 26 के अिीि निर्देलशत अन्वेर्ण की ररपोटष प्राप्त हो चुकी है: परंतु यह और कक आयोग द्वारा व्यापार संघ में सजम्मलित ऐसे ककसी उत्पार्दक, पविेता, पवतरक व्यापारी या सेवा प्रर्दाता की बाबत जजसिे इस िारा222 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— के अिीि पूण,ष सत्य और महत्वपूण ष प्रकटि ककया है कम शाजस्त अधिरोपपत की जाएगी :
परंतु यह भी कक आयोग द्वारा कम शाजस्त अधिरोपपत िहीं की जाएगी यर्र्द प्रकटि करिे वािा व्यजतत आयोग के समि कायवष ार्हयों के पूरा होिे तक आयोग का सहयोग करिा जारी िहीं रिता है : परंतु यह भी कक आयोग, यर्र्द उसका यह समािाि हो जाता है कक व्यापार संघ में सजम्मलित ऐसे उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता िे,— (क) कायवष ार्हयों के र्दौराि उस शत ष का पािि िहीं ककया र्ा, जजस पर आयोग द्वारा कम शाजस्त, अधिरोपपत की गई र्ी; या (ि) उसिे लमथ्या साक्ष्य र्र्दया र्ा ; या (ग) ककया गया प्रकटि महत्वपूण ष िहीं है, और तर्दपु रांत ऐसे उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता का ऐस े उल्िंघि के लिए पवचारण ककया जा सकेगा, जजसकी बाबत कम शाजस्त अधिरोपपत की गई र्ी और वह ऐसी शाजस्त अधिरोपपत ककए जािे का भी र्दायी होगा जजसके लिए यर्र्द कम शाजस्त अधिरोपपत िहीं की गई होती, तो वह र्दायी होता ।
(2) आयोग ककसी उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता जजसमें व्यापार संघ भी सजम्मलित है, इस िारा के अिीि कम शाजस्त के लिए ऐसी रीनत और ऐस े समय के भीतर, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककया जाए, अपिा आवेर्दि वापस िे सकेगा ।
(3) उपिारा (2) में ककसी बात के होते हुए भी, महानिर्देशक और आयोग इस अधिनियम के प्रयोजि के लिए, अपिी स्वीकृनत के लसवाय, कम शाजस्त के लिए अपिे आवेर्दि में ककसी उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता द्वारा प्रस्तुत ककसी साक्ष्य को, इस अधिनियम के प्रयोजिों के लिए उपयोग करिे के लिए हकर्दार होगा ।
(4) जहां अन्वेर्ण के र्दौराि, कोई ऐसे उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता जजसिे उपिारा (1) के अिीि ककसी व्यापार संघ को प्रकर्टत ककया है, ककसी ऐसे अन्य व्यापार संघ उपिारा (1) के अिीि पूव,ष सही और महत्वपूण ष प्रकटि करता है की बाबत जजसके बारे में यह अलभकर्ि ककया गया है कक उसिे िारा 3 का अनतिंघि ककया है, जो िारा 26 की उपिारा (1) के अिीि प्रर्म दृष्टया राय बिािे के लिए आयोग को समर्ष बिाता है, तब िए प्रकर्टत व्यापार संघ के संबंि में उपिारा (1) के अिीि कम शाजस्त अलभप्राप्त करिे वािे उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, पहिे ही अन्वेर्ण ककए गए व्यापार संघ की बाबत आयोग ऐसे उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता पर, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककया जाए, अधिरोपपत कर सकेगा ।”। िारा 47 का 34. मूि अधिनियम की िारा 47 के स्र्ाि पर “शाजस्तयों” शब्र्द के पश्चात ् संशोिि । “आयोग द्वारा पवधिक िागत की वसूिी” शब्र्द अन्तःस्र्ापपत ककए जाएंगे । िारा 48 के स्र्ाि 35. मूि अधिनियम की िारा 48 के स्र्ाि पर निम्िलिखित िाराएं रिी पर िई िाराओं का जाएंगी, अर्ाषत ्:— अंतःस्र्ापि ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 223 ‘48 (1) जहां इस अधिनियम या उसके द्वारा बिाए गए नियम, कंपनियों द्वारा उल्िंघि । पवनियम, आर्देश या जारी ककए गए निर्देश के ककसी उपबिं का उल्िंघि करिे वािा व्यजतत कोई कंपिी है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यजतत, जो उल्िंघि ककए जािे के समय, कंपिी के कारबार के संचािि के लिए कंपिी का भारसािक र्ा और उसके प्रनत उत्तरर्दायी र्ा और सार् ही उस कंपिी के बारे में यह समझा जाएगा कक उसिे इस अधिनियम का उल्िंघि ककया गया है और इस अधिनियम में अन्यर्ा उपबंधित के लसवाय आयोग ऐसे व्यजतत पर ऐसी शाजस्त, जो वह ठीक समझे, पपछिे तीि पूववष ती पवत्तीय वर्ों के लिए आय की औसत का र्दस प्रनतशत से अिधिक शाजस्त अधिरोपपत कर सकेगा :
परंतु यर्र्द िारा 3 की उपिारा (3) में निर्र्दषष्ट कोई करार, ककसी व्यापार संघ द्वारा ककया गया है तो आयोग इस अधिनियम में अन्यर्ा उपबंधित के लसवाय, उपिारा (1) में निर्र्दषष्ट व्यजततयों पर ऐसा करार के जारी रहिे के प्रत्येक वर् ष के लिए आय की र्दस प्रनतशत तक की शाजस्त अधिरोपपत कर सकेगा ।
(2) उपिारा (1) में अन्तपवष्ष ट कोई बात, ऐसे ककसी व्यजतत को, ककसी शाजस्त का र्दायी िहीं बिाएगी यर्र्द वह यह साबबत कर र्देता है कक उल्िंघि उसकी जािकारी के बबिा हुआ र्ा या उसिे ऐस े उल्िंघि के ककए जािे को रोकिे के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती र्ी ।
(3) उपिारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम या तद्िीि बिाए गए ककसी नियम, पवनियम के ककसी उपबंि, ककए गए आर्देश या जारी ककए गए निर्देश का कोई उल्िंघि ककसी कंपिी द्वारा ककया गया है और यह साबबत हो गया है कक ऐसा उल्िंघि कंपिी के ककसी निर्देशक, प्रबंिक, सधचव या ककसी अन्य अधिकारी की सहमनत से या मौिािुकूिता से ककया गया है या उिकी ओर उस उल्िंघि का ककया जािा उसकी ककसी उपेिा के कारण हुआ मािा जा सकता है वहां ऐसा निर्देशक, प्रबंिक, सधचव या अन्य अधिकारी भी इस अधिनियम के उपबंिों के उल्िंघि का र्दोर्ी समझा जाएगा और जब तक इस अधिनियम में अन्यर्ा उपबंधित ि हो, आयोग ऐसे व्यजततयों पर ऐसी शाजस्त, जो वह ठीक समझे, पपछिे तीि पूववष ती पवत्तीय वर्ों के लिए आय की औसत का र्दस प्रनतशत से अिधिक अधिरोपपत कर सकेगा :
परंतु यर्र्द िारा 3 की उपिारा (3) में निर्र्दषष्ट कोई करार, व्यापार संघ द्वारा ककया गया है, आयोग, इस अधिनियम में जब तक अन्यर्ा उपबंधित ि ककया जाए ऐसे व्यजतत पर ऐसी संपवर्दा के जारी रहिे के प्रत्येक वर् ष के लिए, जो वह ठीक समझे, आय की र्दस प्रनतशत तक की शाजस्त अधिरोपपत कर सकेगा । स्पष्टीकरण—इस िारा के प्रयोजिों के लिए— (क) “कंपिी” स े कोई निगलमत निकाय अलभप्रेत है और इसके अंतगतष कोई फम ष या व्यजष्टयों का अन्य संगम भी है ;
(ि) फम ष के संबंि में “निर्देशक” से फम ष का भागीर्दार अलभप्रेत है; (ग) व्यजतत के संबंि में “आय” ऐसी रीनत में अविाररत की जाएगी जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट की जाए ।224 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— पररनििाषरण । 48क. (1) कोई ऐसा उद्यम, जजसके पवरुद्ि िारा 3 की उपिारा (4) या िारा 4 के उल्िंघि के लिए िारा 26 की उपिारा (1) के अिीि कोई जांच आरंभ की गई है वह अलभकधर्त उल्िंघिों के लिए आरंभ की गई कायवष ाही का पररनििाषरण करिे के लिए आयोग को ऐसी रीनत में, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट की जाए, लिखित में आवेर्दि प्रस्तुत कर सकेगा ।
(2) उपिारा (1) के अिीि आवेर्दि, िारा 26 की उपिारा (4) के अिीि महानिर्देशक को ररपोटष प्राप्त होिे के पश्चात ् ककसी भी समय ककंतु िारा 27 या िारा 28 के अिीि कोई आर्देश पाररत करिे से पूव ष ऐस े समय स े पहिे, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककया जाए, प्रस्तुत ककया जा सकेगा ।
(3) आयोग, उल्िंघिों की प्रकृनत, गंभीरता और समाघात पर पवचार करिे के पश्चात ् आवेर्दक द्वारा ऐसे रकम की सर्दं ाय पर या पररनििाषरण और मािीटरी के कायाषन्यवि के ऐसे अन्य निबंिि और रीनत पर, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककए जाए, पररनििाषरण के प्रस्ताव पर सहमत हो सकेगा ।
(4) पररनििाषरण के प्रस्ताव पर पवचार करते समय आयोग, संबंधित पिकार, महानिर्देशक को या ककसी अन्य पिकार को, अपिी आिेप और सुझाव, यर्र्द कोई हों, प्रस्तुत करिे के लिए अवसर प्रर्दाि करेगा ।
(5) यर्र्द आयोग की यह राय है कक उपिारा (1) के अिीि प्रस्र्ापपत पररनििाषरण, पररजस्र्नतयों में समुधचत िहीं है या यर्र्द आयोग और संबद्ि पिकार ऐसे समय के भीतर जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककया जाए पररनििाषरण के निबंििों पर सहमत िहीं होते हैं, तो यह िारा 26 के अिीि आर्देश द्वारा पररनििाषरण के आवेर्दि िामंजूर करेगा और उसकी जांच करिे के लिए अग्रसर होगा ।
(6) इस िारा के अिीि पररनििाषरण की कायवष ार्हयों का संचािि करिे के लिए प्रकिया ऐसी होगी, जो पवनियमों द्वारा पवर्हत की जाए ।
(7) इस िारा के अिीि आयोग द्वारा पाररत ककसी आर्देश के पवरुद्ि िारा 53ि के अिीि कोई अपीि िहीं होगी ।
(8) इस अधिनियम के अिीि वसूि की गई सभी पररनििाषरण रकम भारत की संधचत निधि से जमा की जाएंगी । प्रनतबद्िता । 48ि. (1) कोई ऐसा उद्यम जजसके पवरुद्ि, यर्ाजस्र्नत, िारा 3 की उपिारा (4) या िारा 4 के उल्िंघि के लिए िारा 26 की उपिारा (1) के अिीि कोई जांच आरंभ की गई है तो वह आयोग को ऐस े प्ररूप में और ऐसी फीस के संर्दाय पर, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककया जाए, िारा 26 की उपिारा (1) के अिीि आयोग आर्देश में कधर्त अलभकधर्त उल्िंघिों की बाबत टीका- र्टप्पखणयों का प्रस्ताव करते हुए लिखित में आवेर्दि प्रस्तुत करेगा ।
(2) उपिारा (1) के अिीि टीका-र्टप्पखणयों के लिए कोई प्रस्र्ापिा िारा 26 की उपिारा (1) के अिीि आयोग द्वारा पाररत ककए गए आर्देश के पश्चात ् ककसी भी समय ककंतु िारा 26 की उपिारा (4) के अिीि महानिर्देशक की ररपोटष के पिकार द्वारा प्राप्त ककए जािे से पहिे ऐसे समय के भीतर जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककया जाए, प्रस्तुत की जा सकेगी ।
(3) आयोग, प्रस्तापवत प्रनतबद्िताओं की प्रकृनत, गंभीरता तर्ा अलभकधर्त उल्िंघिों और प्रभापवता के समाघात पर पवचार करिे के पश्चात,् ऐसे निबंििोंvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 225 तर्ा कायाषन्वयि और मािीटरी की रीनत पर, जो पवनियमों द्वारा पवनिर्र्दषष्ट ककए जाएं, प्रस्र्ापपत प्रनतबद्िताओं को स्वीकार करेगा ।
(4) प्रनतबद्िता पर पवचार करते समय, आयोग, संबद्ि पिकार, महानिर्देशक या ककसी अन्य पिकार को, अपिे आिेप और सुझाव, यर्र्द कोई हों, प्रस्तुत करिे के लिए अवसर प्रर्दाि करेगा ।
(5) यर्र्द आयोग की यह राय है कक उपिारा (1) के अिीि प्रस्र्ापपत प्रनतबद्िताएं, पररजस्र्नतयों में समुधचत िहीं है या यर्र्द आयोग और संबद्ि पिकार प्रनतबद्िता के निबंििों पर सहमत िहीं होते हैं, तो आयोग िारा 26 के अिीि प्रनतबद्िता आवेर्दि को िामंजूर करिे वािा आर्देश पाररत करेगा और अपिी जांच करिे के लिए अग्रसर होगा ।
(6) इस िारा के अिीि प्रस्तापवत प्रनतबद्िताओं के लिए प्रकिया ऐसी होगी जो पवनियमों द्वारा पवर्हत की जाए ।
(7) इस िारा के अिीि आयोग द्वारा पाररत ककसी आर्देश के पवरुद्ि िारा 53ि के अिीि कोई अपीि िहीं होगी । 48ग. यर्र्द आवेर्दक िारा 48क या िारा 48ि के अिीि पाररत आर्देश का पररनििाषरण या प्रनतबद्िता पािि करिे में असमर्ष रहता है या यर्र्द आयोग की जािकारी में यह आता है आर्देश और कक आवेर्दक िे पूरा और सत्य प्रकटीकरण िहीं ककया है या जहां तथ्यों में शाजस्त का सारवाि ् पररवतिष ककया गया है, वहां, यर्ाजस्र्नत, िारा 48क या िारा 48ि के प्रनतसहं रण । अिीि पाररत आर्देश प्रनतसंह्रत हो जाएगा और वापस िे लिया जाएगा और ऐसा उद्यम आयोग द्वारा उपगत समुधचत पवधिक िागत का, जो एक करोड़ रुपए तक की हो सकेगी, संर्दाय करिे के लिए र्दायी होगा और आयोग जांच का प्रत्यावतषि या प्रारंभ कर सकेगा जजसके संबंि में आर्देश िारा 48क या िारा 48ि के अिीि पाररत ककया र्ा ।’
36. मूि अधिनियम की िारा 49 की उपिारा (3) में “प्रनतस्पिाष समर्िष ” शब्र्दों िारा 49 का के पश्चात ् “या संस्कृनत” शब्र्द अंतःस्र्ापपत ककया जाएगा । संशोिि ।
37. मूि अधिनियम की िारा 51 की उपिारा (1) में िंड (घ) के पश्चात ् िारा 51 का निम्िलिखित िंड अंतःस्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ्:— संशोिि । “(ङ) आयोग द्वारा ऐसे अन्य स्रोतों में प्राप्त ऐसी सभी रालशयां जजि पर सरकार द्वारा पवनिश्चय ककया जाए ।”।
38. मूि अधिनियम की िारा 53क की उपिारा (1) के िडं (क) में “िारा 26 िारा 53क का की उपिारा (2) और उपिारा (6)” शब्र्दों, कोष्ठकों और अकं ों के स्र्ाि पर “िारा 6 संशोिि । की उपिारा (6), िारा 26 की उपिारा (2) उपिारा (2क), उपिारा (6) और उपिारा
(9)” शब्र्द, कोष्ठक, अंक और अिर रिे जाएंगे ।
39. िारा 53ि की उपिारा (2) में, परंतुक के पश्चात ् निम्िलिखित परंतुक िारा 53ि का अंतःस्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ्:— संशोिि । “परंतु यह और कक ककसी ऐसे व्यजतत द्वारा कोई अपीि, जजससे आयोग के आर्देश के निबंििािुसार ककसी रकम का संर्दाय करिा अपेक्षित है, अपीि अधिकरण द्वारा तब तक ग्रहण िहीं ककया जाएगा जब तक कक अपीिार्ी ि े उस रकम की ऐसी रीनत में, जो अपीि अधिकरण द्वारा निर्देलशत ककया जाए, पच्चीस प्रनतशत जमा िहीं कर र्र्दया हो ।”।226 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— िारा 53ढ का 40. मूि अधिनियम की िारा 53ढ में,— संशोिि । (क) उपिारा (1) में, “अधिनियम की िारा 53र् की उपिारा (2) के अिीि उद्भूत होता है, और ककसी उद्यम द्वारा ककए गए अध्याय 2 के उपबंिों के ककसी उल्िंघि के पररणामस्वरूप केन्द्रीय सरकार, या राज्य सरकार या स्र्ािीय प्राधिकारी या ककसी उद्यम या ककसी व्यजतत को हुई ककसी हानि या िुकसािी के लिए उस उद्यम स े प्रनतकर की वसिू ी के लिए आर्देश पाररत करिे के लिए”, शब्र्दों, कोष्ठकों, अंकों, और अिर के स्र्ाि पर, “िारा 53र् की उपिारा (2) के अिीि या िारा 53ि के अिीि अपीि अधिकरण के निष्कर्ों के पवरूद्ि अपीि में उच्चतम न्यायािय के आर्देश या िारा 48क के अिीि पाररत पररनििाषरण के लिए आर्देश और ककसी उद्यम द्वारा ककए गए अध्याय 2 के उपबंिों के ककसी उल्िंघि के पररणामस्वरूप केन्द्रीय सरकार, या राज्य सरकार या स्र्ािीय प्राधिकारी या ककसी उद्यम या ककसी व्यजतत को हुई ककसी हानि या िुकसािी के लिए उस उद्यम से प्रनतकर की वसूिी के लिए आर्देश पाररत करिे के लिए या आयोग द्वारा पाररत पररनििाषरण के आर्देश के पररणामस्वरूप” शब्र्द, कोष्ठक, अंक और अिर रिे जाएंगे;
(ि) उपिारा (2) में “आयोग के निष्कर्”ष शब्र्दों के पश्चात ् “या अपीि अधिकरण या उच्चतम न्यायािय या पररनििाषरण के लिए आर्देश” शब्र्द अंतःस्र्ापपत ककए जाएंगे; (ग) स्पष्टीकरण में,—
(i) िंड (क) में, “आयोग या अपीि अधिकरण” शब्र्दों के पश्चात ् “या िारा 53ि के अिीि अपीि ककए जािे पर उच्चतम न्यायािय” शब्र्द अंतःस्र्ापपत ककए जाएंगे;
(ii) िंड (ि) में, “या अपीि अधिकरण” शब्र्दों के पश्चात ् “या उच्चतम न्यायािय” शब्र्द अंतःस्र्ापपत ककए जाएंगे । िारा 53र् का 41. मूि अधिनियम की िारा 53र् में उपिारा (1) के स्र्ाि पर, निम्िलिखित संशोिि । उपिारा रिी जाएगी, अर्ाषत:्— “(1) इस अधिनियम के उपबंिों पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, यर्र्द कोई व्यजतत ककसी युजततयुतत आिार के बबिा, अपीि अधिकरण के ककसी आर्देश का उल्िंघि करेगा तो, वह िारा 53प के अिीि अवमाििा कायवष ाही का भागी होगा ।”। िई िारा 59क का 42. मूि अधिनियम की िारा 59 के पश्चात ् निम्िलिखित िारा अंतःस्र्ापपत अंतःस्र्ापि । की जाएगी, अर्ाषत ्:— कनतपय अपरािों “59क. र्दंड प्रकिया संर्हता 1973 में ककसी बात के होते हुए भी, इस 1974 का 2 का प्रशमि । अधिनियम के अिीि र्दंडिीय कोई अपराि केवि कारावास स े या कारावास स े और सार् ही जुमाषि े स े र्दंडिीय ककसी अपराि का िहीं है या तो ककसी कायवष ाही के संजस्र्त ककए जािे से पहिे या उसके पश्चात,् अपीि अधिकरण या न्यायािय जजसके समि ऐसी कायवष ाही िंबबत है, प्रशमि ककया जा सकेगा ।”। िारा 63 का 43. मूि अधिनियम की िारा 63 की उपिारा (2) में,— संशोिि ।
(i) िंड (क) को उसके िंड (कङ) के रूप में पुिः अिरांककत ककया जाएगा और इस प्रकार पुिः अिरांककत िंड (कङ) से पहिे निम्िलिखित िंड अंतःस्र्ापपत ककए जाएंगे, अर्ाषत ्:—vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 227 “(क) ऐस े उद्यम की आजस्तयों और आवतिष का मूल्य जजिका िारा 5 के िंड (ङ) के अिीि भारत में अजिष ककया गया है, नियंत्रण ककया गया है, पवियि या समामेिि ककया गया है ;
(कि) िारा 5 के स्पष्टीकरण के िंड (ि) के उपिंड (i) के अिीि छब्बीस प्रनतशत से अधिक मतर्दाि अधिकारों का प्रनतशत ; (कग) िारा 6 की उपिारा (4) के अिीि समुच्चय का मािर्दंड ; (कघ) िारा 6 की उपिारा (7) के अिीि मािर्दंड ;”;
(ii) िंड (डच) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंतःस्र्ापपत ककया जाएगा, अर्ाषत ्:— ‘(डछ) िारा 64ि की उपिारा (5) के अिीि, मागर्दष शिष के प्रकाशि का प्ररूप ;’।
44. मूि अधिनियम की िारा 64 की उपिारा (2) में,— िारा 64 का संशोिि ।
(i) िंड (ग) के स्र्ाि पर,निम्िलिखित िंड अंतःस्र्ापपत ककए जाएंगे, अर्ाषत ्:— “(ग) िारा 5 के िंड (घ) के अिीि भारत में सारवाि ् कारबार संकियाओं के अविारण की रीनत ; (गक) िारा 6 की उपिारा (4) के अिीि समुच्चय के लिए सूचिा हेतु प्ररूप और फीस ;
(गि) िारा 6क के िंड (क) के अिीि अजिष की सूचिा फाइि करिे का समय और रीनत ; (गग) ऐसी रीनत और पररजस्र्नतयों जजिमें अजषिकताष स्वालमत्व या र्हताधिकारी अधिकार अर्वा शेयरों या संपररवतिष ीय प्रनतभूनतयां, जजसमें मतर्दाि अधिकार और िाभाशं ों की प्राजप्त या कोई अन्य पवतरण, जो िारा 6क के िंड (ि) के अिीि अपवार्द के रूप में शालमि है, र्हत का प्रयोग कर सकेगा ।”।
(ii) िंड (च) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंतःस्र्ापपत ककए जाएंगे, अर्ाषत ्:— “(चक) ऐसे अन्य ब्यौरे जो िारा 26 की उपिारा (9) के अिीि ‘कारण बताओं’ िोर्टस में उपर्दलशतष ककए जाएं; (चि) िारा 27 के िंड (ि) के स्पष्टीकरण के अिीि आवतषि या आय अविाररत करिे की रीनत ;
(चग) वह रीनत, जजसमें उपांतरण का िारा 29क की उपिारा (2) के अिीि आयोग को समुच्चय के पिकारों द्वारा प्रस्ताव ककया जाए;”;
(iii) िंड (छ) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंतःस्र्ापपत ककए जाएंगे, अर्ाषत ्:— “(छक) िारा 46 की उपिारा (1) के अिीि उत्पार्दक, पविेता, पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता पर कम शाजस्त अधिरोपपत ककया जािा; (छि) िारा 46 की उपिारा (2) के अिीि कम शाजस्त के लिए आवेर्दि वापस िेिे की रीनत और समय;
(छग) िारा 46 की उपिारा (4) के अिीि उत्पार्दक, पविेता,228 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— पवतरक, व्यापारी या सेवा प्रर्दाता पर कम शाजस्त अधिरोपपत ककया जािा ; (छघ) िारा 48 के स्पष्टीकरण के िंड (ग) के अिीि आय अविाररत करिे की रीनत ;
(छङ) िारा 48क की उपिारा (1) के अिीि आवेर्दि का प्ररूप और फीस, उपिारा (2) के अिीि समय तर्ा उपिारा (3) के अिीि कायाषन्वयि और मािीटरी के निबंिि और रीनत और उपिारा (6) के अिीि पररनििाषरण कायवष ार्हयां संचािि करिे के लिए प्रकिया;
(छच) िारा 48ि की उपिारा (1) के अिीि आवेर्दि का प्ररूप और फीस, उपिारा (2) के अिीि समय तर्ा उपिारा (3) के अिीि कायाषन्वयि और मािीटरी के निबंिि और रीनत और उपिारा (6) के अिीि प्रस्र्ापपत प्रनतबद्िताओं के लिए प्रकिया ;
(छछ) िारा 64क के िंड (क) के अिीि िोक टीका-र्टप्पखणयां आमंबत्रत करिे के लिए प्रारूप पवनियमों और अवधि के सार्-सार् प्रकालशत ककए जािे वािे अन्य ब्यौरे ;”। िई िारा 64क 45. मूि अधिनियम की िारा 64 के पश्चात ् निम्िलिखित िाराएं अंतःस्र्ापपत की और 64ि का जाएंगी, अर्ाषत ्:— अंतःस्र्ापि । पवनियम जारी “64क. आयोग, िारा 64 के अिीि पवनियम बिाते समय, निम्िलिखित करिे की प्रकिया । को करके पारर्दलशतष ा सुनिजश्चत करेगा— (क) ऐसे अन्य ब्यौरों, जो इसकी वेबसाइट पर पवनिर्र्दषष्ट ककए जाएं, प्रारूप पवनियम प्रकालशत करके और पवनियम जारी करिे से पूव ष पवनिर्र्दषष्ट अवधि के लिए िोक टीका-र्टप्पखणयां आंमबत्रत करके;
(ि) िोक टीका-र्टप्पखणयों के लिए अपिे उत्तर के सािारण कर्ि का प्रकाशि करके जो पवनियमों की अधिसूचिा की तारीि के बार्द का ि हो; (ग) ऐसे पवनियम का आवधिक रूप में पुिपविष ोकि करके : परंतु यह कक यर्र्द आयोग की यह राय है कक कनतपय पवनियम बिाए जािे अपेक्षित हैं या पवद्यमाि पवनियमों का िोक र्हत में अत्यावश्यक रूप से संशोिि ककया जािा अपेक्षित है या पवनियम की पवर्य वस्तु एक मात्र रूप स े आयोग को आंतररक कायकष रण से संबंर्र्दत है तो वह ऐसा करिे के लिए कारण िेिबद्ि करते हुए इस िारा में कधर्त उपबंिों का पािि ककए बबिा, यर्ाजस्र्नत, पवनियम बिा सकेगा या पवद्यमाि पवनियमों का संशोिि कर सकेगा । आयोग का 64ि. (1) आयोग इस अधिनियम या तद्िीि बिाए गए नियमों और मागर्दष शिष जारी पवनियमों के उपबंिों पर या तो व्यजतत द्वारा या स्वप्रेरणा से मागर्दष शी करिा । लसद्िान्त प्रकालशत कर सकेगा ।
(2) उपिारा (1) के अिीि जारी मागर्दष शी लसद्िान्तों का, आयोग द्वारा उसके सर्दस्यों या अधिकाररयों द्वारा तथ्य या पवधि के ककसी प्रश्ि के अविारण के रूप में अर् ष िहीं िगाया जाएगा और ि ही वे आयोग उसके सर्दस्यों या अधिकाररयों पर आबद्िकर होंगे ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 229
(3) उपिारा (1) में ककसी बात पर प्रनतकूि प्रभाव डाि े बबिा, आयोग इस अधिनियम के उपबंि के ककसी उल्िंघि के लिए ककसी शाजस्त की समुधचत रकम के बारे में मागर्दष शी लसद्िान्त प्रकालशत करेगा ।
(4) इस अधिनियम के उपबंि के ककसी उल्िंघि के लिए िारा 27 के िंड (ि) या िारा 43क या िारा 48 के अिीि शाजस्त अधिरोपपत करते समय, आयोग, उपिारा (3) के अिीि मागर्दष शी लसद्िान्तों पर पवचार करेगा और ऐसे मागर्दष शी लसद्िान्तों से ककसी पवचिि की र्दशा में कारण बताएगा ।
(5) उपिारा (1) और उपिारा (2) के अिीि मागर्दष शी लसद्िान्त ऐसे प्ररूप में प्रकालशत ककए जाएंगे, जो पवर्हत ककया जाए ।”। __________vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 231 जन विश्िास (उपबंधों का सशं ोधन) अधधननयम, 2023 (2023 का अधधननयम संखयांक 18) [11 अगस्त, 2023] जीिन यापन और कारबार करने की सुगमता के लिए विश्िास आधाररत शासन की और िद्ृ धध करने के लिए अपराधों का ननरापराधीकरण और सुव्यिस्स्ित करने हेतु कनतपय अधधननयलमनतयों का संशोधन करने के लिए अधधननयम भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा निम्िलिखित रूप में यह अधिनियलमत हो :—
1. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त िाम जि ववश्वास (उपबंिों का सशं ोिि) संक्षिप्त िाम अधिनियम, 2023 है। और प्रारंभ ।
(2) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा नियत करें और अिुसूची में वखणतष ववलभन्द्ि अधिनियलमनतयों से संबंधित संशोििों के लिए ववलभन्द्ि तारीिें नियत की जा सकेंगी ।
2. अिुसूची के स्तंभ (4) में उल्लिखित अधिनियलमनतयों का उस सीमा तक और कनतपय अधिनियलमनतयों रीनत में, जो उसके स्तंभ (5) में उल्लिखित हैं, संशोिि ककया जाता है । का संशोिि ।232 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2— जुमाषिे और 3. अिुसूची में उल्लिखित अधिनियलमनतयों में ववलभन्द्ि उपबंिों के अिीि शाल्स्तयों का उपबंधित जुमाषिे और शाल्स्तयों में इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीि से प्रत्येक तीि पुिरीिण । वर् ष की समाल्प्त के पश्चात,् उसके लिए ववहहत, यथाल्स्थनत, जुमाषिे या शाल्स्त की न्द्यूितम रकम में दस प्रनतशत की वद्ृ धि की जाएगी । व्याववृत्त । 4. इस अधिनियम द्वारा ककसी अधिनियलमनत का संशोिि या निरसि ककसी अन्द्य अधिनियलमनत को प्रभाववत िहीं करेगा, ल्जसमें संशोधित या निरलसत अधिनियलमनत को िागू ककया गया है, सल्म्मलित ककया गया है या निहदषष्ट ककया गया है ;
और यह अधिनियम पहिे ही की गई या हुई ककसी बात की ववधिमान्द्यता, अववधिमान्द्यता, प्रभाव या पररणाम या ककसी अधिकार, हक, बाध्यता या दानयत्व, जो पहिे ही अल्जतष कर लिया गया है, उद्भूत हुआ है या उपगत हुआ है, को या उसके संबंि में ककसी उपचार या कायवष ाही या ककसी ऋण, शाल्स्त, बाध्यता से ककसी निमुल्ष तत या उसका उन्द्मोचि, दानयत्व, दाव े या मांग या ककसी िनतपूनत,ष जो पहिे ही अिुदत्त है या ककसी पूव ष कृत्य या चीज के सबूत को प्रनतकूि रूप से प्रभाववत िहीं करेगा ;
ि ही यह अधिनियम ववधि के ककसी लसद्िांत या नियम या स्थावपत अधिकाररता, ककसी अलभवचि के प्ररूप या अिुक्रम, पद्िनत या प्रकक्रया या ववद्यमाि रूह़ि, प्रथा, ववशेर्ाधिकार, निबिं ि, छूट, पद या नियुल्तत को इस बात के होते हुए भी कक उसकी क्रमशः ककसी रीनत में पुल्ष्ट की गई है या मान्द्यता दी गई है या ककसी अन्द्य अधिनियलमनत, ल्जसका संशोिि या निरसि ककया गया है, द्वारा उद्भूत की गई है, पर प्रनतकूि प्रभाव िहीं डािेगा ;
ि ही इस अधिनियम द्वारा ककसी अधिनियलमनत का ककसी संशोिि या निरसि या ककसी अधिकाररता, पद, रूहि, दानयत्व, अधिकार, हक, ववशेर्ाधिकार, निबिं ि, छूट, प्रथा, पद्िनत, प्रकक्रया या अन्द्य मामिे या चीज, जो ववद्यमाि िहीं है या प्रवत्तृ िहीं है, को पुिजीववत या प्रत्यावनततष करेगा ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 233 अिुसूची (धारा 2 देखिए) क्र.सं. वर् ष सं0 संक्षिप्त िाम संशोिि
(1) (2) (3) (4) (5)
1. 1867 25 प्रेस और पुस् तक (अ) िारा 8ग में,— रल्जस् रीकरण (i) उपिारा (1) में, ‘‘िारा 8ि के अिीि’’ शब्द, अंक और अधिनियम, 1867 अिर के पश्चात ् ‘‘या िारा 12 के अिीि रल्जस्रीकरण का प्रमाणपत्र प्रेस रल्जस्रार द्वारा आदेश को नििंबबत करिे या रद्द करिे वाि े आदेश से या िारा 13 के अिीि या िारा 19ट के अिीि शाल्स्तयां अधिरोवपत करिे की’’ शब्द, अंक और अिर अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(ii) उपिारा (2) में, ‘‘मल्जस्रेट स े अलभिेिों’’ शब्दों के स्थाि पर ‘‘यथाल्स्थनत, मल्जस्रेट या प्रेस रल्जस्रार से अलभिेिों’’ शब्द रिे जाएंगे । (आ) िारा 12 स े िारा 14 के स्थाि पर निम्िलिखित िाराएं रिी जाएंगी, अथाषत:्— “12. रल्जस्रेशि के प्रमाणपत्र का नििंबि या रद्द ककया जािा—
(1) प्रेस रल्जस्रार, आदेश द्वारा, ककसी समाचारपत्र के रल्जस्रीकरण के प्रमाणपत्र को एक वर् ष स े अिधिक अवधि के लिए नििंबबत कर सकेगा, यहद— (क) प्रकाशक समाचारपत्र को निरन्द्तर प्रकालशत करिे में असफि रहता है ;
स्पष्टीकरण—शंकाओं को दरू करिे के लिए, यह स्पष्ट ककया जाता है कक यहद समाचारपत्र अपिे अंकों के आिे से कम का प्रकाशि करता है जैसा कक िारा 5 के नियम (6) के अिीि अपेक्षित है तो ऐसे समाचारपत्र के बारे में यह समझा जाएगा कक वह निरन्द्तर प्रकाशि करिे में असफि रहता है ; या (ि) ककसी समाचारपत्र के प्रकाशक िे वावर्कष वववरण में लमथ्या ववलशल्ष्टयां दी हैं ; या (ग) ककसी समाचारपत्र का प्रकाशक उस ववत्तीय वर् ष के अंत से दो वर् ष के भीतर वावर्कष वववरण प्रस्तुत करिे में असफि रहता है ल्जसके लिए वावर्कष वववरण प्रस्तुत ककए जािे थे ।
(2) प्रेस रल्जस्रार, आदेश द्वारा, रल्जस्रीकरण के प्रमाणपत्र को वहां रद्द कर सकेगा, जहां—
(i) कोई समाचारपत्र चौबीस मास से अधिक की अवधि के लिए प्रकाशि से प्रववरत रहा है ;234 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5)
(ii) ककसी समाचारपत्र का प्रकाशक उस अवधि के अवसाि के पश्चात ् भी वावर्षक वववरण प्रस्तुत करिे में असफि रहता है ल्जसके दौराि रल्जस्रीकरण का प्रमाणपत्र उपिारा (1) के िंड (ग) के अिीि नििंबबत ककया गया था ;
(iii) रल्जस्रीकरण लमथ्या अभ्यावेदि या ककसी ताल्ववक तथ्य को नछपािे के आिार पर अलभप्राप्त ककया गया था ;
(iv) समाचारपत्र का शीर्कष ककसी अन्द्य समाचारपत्र के स्वामी द्वारा पहिे से ही िाररत उसी भार्ा में भारत में कहीं भी या ककसी अन्द्य भार्ा में उसी राज्य या संघ राज्यिेत्र में वही और समाि हक रिता है ।
(3) इस िारा के अिीि रल्जस्रीकरण प्रमाणपत्र के नििंबि या रद्द करिे का कोई आदेश, यथाल्स्थनत, समाचारपत्र के प्रकाशक या स्वामी को सुिवाई का युल्ततयुतत अवसर हदए बबिा िहीं ककया जाएगा ।
(4) इस िारा के अिीि पाररत नििंबि या रद्द करिे के आदेश की प्रनत, यथाल्स्थनत, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या संघ राज्यिेत्र प्रशासि और मल्जस्रेट को उपिब्ि कराई जाएगी ।
13. कनतपय उलिंघिों के लिए शाल्स्त— प्रेस रल्जस्रार ऐसी शाल्स्त,—
(i) जो दस हजार रुपए से अधिक की ि हो, जहां प्रकाशक िारा 3 में अंतववष्ष ट उपबंिों की अिुरूपता से अन्द्यथा लभन्द्ि कोई पुस्तक या पत्र मुहरत करता है या प्रकालशत करता है ;
(ii) जो दस हजार रुपए से अधिक की ि हो, जहां प्रेस कीपर िारा 4 में अंतववष्ष ट उपबंिों की अिुरूपता में घोर्णा करिे और अलभदाय करिे में असफि रहता है ;
(iii) जो बीस हजार रुपए से अधिक की ि हो, जहां प्रकाशक िारा 19घ के िंड (क) के अिीि यथा अपेक्षित वावर्कष वववरण उस ववत्तीय वर् ष के अन्द्त से एक वर् ष के भीतर प्रस्तुत करिे में असफि रहता है ल्जसके संबंि में वावर्कष वववरण का प्रस्तुत ककया जािा अपेक्षित था ;
(iv) जो बीस हजार रुपए से अधिक की ि हो, जहा ं व्यल्तत जो अब ककसी समाचार पत्र का मुरक या प्रकाशक िहीं रहा है या िारा 8 के उपबंिों के अिुपािि में कोई घोर्णा करि े में असफि रहता है या उपिे ा करता है ;
(v) पुस्तकों का पररदाि करिे में या िारा 9 में निहदषष्ट मािधचत्र सहहत मुरण की आपूनत ष ि करिे के लिए दो हजार रुपए से अिधिक ;vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 235
(1) (2) (3) (4) (5)
(vi) जो दो हजार रुपए से अधिक ि हो, जहां समाचारपत्र का कोई मुरक िारा 11क और िारा 11ि के उपबंिों के अिुपािि में समाचारपत्र की प्रनतयों का पररदाि करिे में उपेिा करता है ।’’। (इ) िारा 15क से िारा 17 का िोप ककया जाएगा । (ई) िारा 19ट के स्थाि पर निम्िलिखित िारा रिी जाएगी, अथाषत ् :–– ‘‘19ट. िारा 19घ या िारा 19ङ के उलिंघि के लिए शाल्स्त—यहद ककसी समाचारपत्र का प्रकाशक— (क) िारा 19घ के िंड (ि) या िारा 19ङ के उपबंिों का अिुपािि करिे से इंकार करता है या उसकी उपेिा करता है ; या (ि) ककसी समाचारपत्र से संबंधित ककन्द्हीं ववलशल्ष्टयों को िारा 19घ के िंड (ि) के अिुसरण में समाचारपत्र में प्रकालशत करता है, ल्जसके लमथ्या होिे के बारे में उसके पास ववश्वास करिे का कारण है, तो वह शाल्स्त से, जो दस हजार रुपए से अधिक का ि हो, दायी होगा । (उ) िारा 19ठ का िोप ककया जाएगा ।
2. 1898 6 भारतीय डाकघर अध्याय 10 का िोप ककया जाएगा । अधिनियम, 1898
3. 1923 5 बायिर अधिनियम, (अ) िारा 22 में,— 1923 (क) िंड (iii) में, ‘‘िारा 16’’ शब्दों और अंकों के स्थाि पर ‘‘िारा 16 या’’ शब्द और अंक रिे जाएंगे ; (ि) िंड (iii) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत:्— ‘‘(iv) ककसी बायिर या बायिर घटक में हुई ककसी दघु टष िा को ररपोटष करिे से, जब िारा 18 के अिीि ऐसा करिा अपेक्षित हो,’’ ;
(ग) दीघ ष पंल्तत में ‘‘जुमाषिे से दंडिीय’’ शब्दों के स्थाि पर ‘‘शाल्स्त का दायी’’ शब्द रिे जाएंगे ; (आ) िारा 23 के स्थाि पर निम्िलिखित िारा रिी जाएगी, अथाषत:्— ‘‘23. बायिर के अवैि उपयोग के लिए शाल्स्तयां—ककसी बायिर का कोई ऐसा स्वामी जो— (क) ऐसी ककसी दशा में, ल्जसमें इस अधिनियम के अिीि बायिर के उपयोग के लिए प्रमाणपत्र या अिंनतम आदेश की अपेिा की गई है, बायिर का या तो ककसी ऐसे प्रमाणपत्र या प्रवत्तृ आदेश के बबिा या उसके द्वारा अिुज्ञात उच्च दबाव से अधिक दबाव करता है ; या236 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) (ि) ककसी बायिर का उपयोग करेगा या उपयोग करिे की अिुज्ञा देगा, जो िारा 6 के िंड (ि) की अपेिािुसार ररपोटष ककए गए ऐसे अंतरण के बबिा एक राज्य से दसू रे राज्य को अंतररत ककया गया है ; या (ग) िारा 7 की उपिारा (6) की अपेिािुसार बायिर पर स्थायी रूप से धचल्न्द्हत ककए जािे वािे इस अधिनियम के अिीि बायिर को रल्जस्टर संखयांक आबंहटत करवािे में असफि रहेगा, ऐसी शाल्स्त के लिए दायी होगा, जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी और निरंतर उलिघं ि या असफिता की दशा में, अनतररतत शाल्स्त से, जो प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि ऐसा उलिंघि या असफिता जारी रहता है, एक हजार रुपए तक की हो सकेगी ।’’;
(इ) िारा 24 के िंड (क), िंड (ि) और िंड (घ) का िोप ककया जाएगा । (ई) िारा 25 की उपिारा (1) में, ‘‘जुमाषिे से जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा, दंडडत ककया जाएगा’’ शब्दों के स्थाि पर ‘‘शाल्स्त से जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा दंडडत ककया जाएगा’’ शब्द रिा जाएगा । (उ) िारा 26 के पश्चात,् निम्िलिखित िाराएं अंत:स्थावपत की जाएंगी, अथाषत ् :— ‘‘26क. न्द्यायनिणयष ि—(1) यथाल्स्थनत, राज्य सरकार या संघ राज्यिेत्र प्रशासि िारा 22, िारा 23, िारा 25 की उपिारा (1) और िारा 30 के अिीि शाल्स्तयों को अविाररत के प्रयोजिों के लिए, यथाल्स्थनत, राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा यथा ववहहत रीनत में जांच करिे के लिए और शाल्स्त अधिरोवपत करिे के लिए न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के रूप में अधिकाररता रििे वािे, यथाल्स्थनत, ल्जिा मल्जस्रेट या अनतररतत ल्जिा मल्जस्रेट को प्राधिकृत कर सकेगा ।
(2) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी मामि े के तथ्यों और पररल्स्थनतयों से अवगत ककसी व्यल्तत को साक्ष्य देिे के लिए या कोई दस्तावेज प्रस्तुत करिे के लिए समि कर सकेगा और हाल्जर करा सकेगा, जो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी की राय में जांच की ववर्य-वस्तु के लिए उपयोगी या उससे सुसंगत हो, और यहद ऐसी जांच ककए जािे पर उसका यह समािाि हो जाता है कक संबंधित व्यल्तत िारा 22, िारा 23, िारा 25 की उपिारा (1) और िारा 30 के उपबंिों का अिुपािि करिे में असफि रहा है, वह शाल्स्त अधिरोवपत कर सकेगा :
परंतु ऐसी कोई शाल्स्त संबंधित व्यल्तत को सुिे जािे का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि ककए बबिा अधिरोवपत िहीं की जाएगी ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 237
(1) (2) (3) (4) (5) 26ि. अपीि—(1) जो कोई न्द्यायनिणयष ि अधिकारी द्वारा िारा 26क के अिीि पाररत ककसी आदेश स े व्यधथत है, यथाल्स्थनत, राज्य सरकार या संघ राज्यिेत्र प्रशासि के सधचव के पंल्तत से अनिम्ि पंल्तत के ककसी अधिकारी को, जो अपीि प्राधिकारी होगा, ल्जसे इस निलमत्त उस सरकार या प्रशासि द्वारा ववशेर् रूप से प्राधिकृत ककया गया है, आदेश की प्राल्प्त की तारीि से साठ हदि के भीतर ऐसे प्ररूप और रीनत में, जो, यथाल्स्थनत, राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा ववहहत ककया जाए, अपीि कर सकेगा ।
(2) ककसी अपीि को साठ हदि की अवधि की समाल्प्त के पश्चात ् ग्रहण ककया जा सकेगा, यहद अपीिाथी अपीि प्राधिकारी का यह समािाि कर देता है कक उसके पास उस अवधि के भीतर अपीि ि करिे का पयाषप्त कारण था ।
(3) अपीि प्राधिकारी, अपीि के पिकारों को सुिे जाि े का अवसर प्रदाि करिे के पश्चात ् ऐसा आदेश कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
(4) उपिारा (1) के अिीि ककसी अपीि का निपटारा अपीि फाइि करिे की तारीि से साठ हदि के भीतर ककया जाएगा ।’’। (ऊ) िारा 27 में, ‘‘प्रेलसडेंसी मल्जस्रेट या’’ शब्दों का िोप ककया जाएगा । (ऋ) िारा 28क की उपिारा (1क) के िंड (ग) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :— ‘‘(गक) िारा 26क की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत ;
(गि) िारा 26ि की उपिारा (1) के अिीि अपीि करिे का प्ररूप और रीनत ;’’। (ए) िारा 29 की उपिारा (1) के िंड (ज) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :— ‘‘(जक) िारा 26क की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत ;
(जि) िारा 26ि की उपिारा (1) के अिीि अपीि करिे का प्ररूप और रीनत ;’’। (ऐ) िारा 30 में,—
(i) ‘‘प्रथम अपराि की दशा में, जुमाषिे से जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘प्रथम उलिंघि की दशा में, शाल्स्त जो एक हजार रुपए तक की हो सकेगी का दायी’’ शब्द रिे जाएंगे ; r~o
(ii) ‘‘पश्चा ती अपराि की दशा में, ऐस े जुमाषिे स’े’ r~o शब्दों के स्थाि पर, ‘‘पश्चा ती उलिंघि की दशा में ऐसी शाल्स्त से’’ शब्द रिे जाएंगे ।238 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5)
4. 1927 16 भारतीय वि (अ) िारा 26 में,— अधिनियम, 1927 (i) उपिारा (1) के िंड (घ) और िंड (ङ) का िोप ककया जाएगा ;
(ii) उपिारा (1) के पश्चात,् निम्िलिखित उपिारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत:्— “(1क) कोई व्यल्तत, जो ककसी आरक्षित वि में— (क) पशुओं से अनतचार कराता है या उन्द्हें चराता है या पशुओं द्वारा अनतचार ककया जािा अिुज्ञात करता है, िारा 68 के अिीि सशतत वि अधिकारी द्वारा यथाविाररत वि को ककए गए िुकसाि के लिए ऐसे प्रनतकर के अनतररतत, शाल्स्त का दायी होगा, जो पांच सौ रुपए तक की हो सकेगी;
(ि) ककसी विृ को धगरािे या कटाई करिे या ककसी काष्ठ की खिचं ाई करिे में उपेिा द्वारा कोई िुकसाि काररत करता है, िारा 68 के अिीि सशतत वि अधिकारी द्वारा यथाविाररत वि को ककए गए िुकसाि के लिए ऐसे प्रनतकर के अनतररतत शाल्स्त का दायी होगा, जो पांच हजार रुपए तक की हो सकेगी ।’’। (आ) िारा 33 में,—
(i) उपिारा (1) के िंड (ङ), िंड (च) और िंड (छ) का िोप ककया जाएगा ;
(ii) उपिारा (1) के पश्चात,् निम्िलिखित उपिारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत:्— “(1क) कोई व्यल्तत, जो संरक्षित वि में निम्िलिखित में से कोई भी अपराि काररत करता है, अथाषत:्— ‘‘(क) िारा 30 के अिीि ककसी आरक्षित विृ के आस-पास उसके द्वारा सिु गाई ककसी आग को जिती हुई छोड़ देता है चाहे वह िड़ा हुआ हो या धगरा हुआ हो या ककसी संरक्षित वि का बन्द्द भाग हो ;
(ि) ककसी विृ को इस प्रकार धगराता है या ककसी काष्ठ को िीचता है ल्जससे कक पूवोतत ककसी आरक्षित विृ को िुकसाि पहुंचाया जा सके, वह िारा 68 के अिीि सशतत वि अधिकारी द्वारा यथाविाररत वि को ककए गए िुकसाि के लिए ऐस े प्रनतकर के अनतररतत शाल्स्त का दायी होगा, जो पांच हजार रुपए तक की हो सकेगी ।’’। (इ) िारा 68 में,—vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 239
(1) (2) (3) (4) (5)
(i) पाश्व ष शीर् ष के स्थाि पर, निम्िलिखित पाश्व ष शीर् ष रिा जाएगा, अथाषत ्:— ‘‘अपरािों का शमि और शाल्स्तयां अधिरोवपत करिे की शल्तत’’ ;
(ii) उपिारा (1) में,—
(I) िंड (क) में, ‘‘और’’ शब्द के स्थाि पर, ‘‘या’’ शब्द रिा जाएगा ;
(II) िंड (क) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ्:— ‘‘(कक) िारा 26 की उपिारा (1क) और िारा 33 की उपिारा (1क) के उलिंघि में शाल्स्त या प्रनतकर के रूप में ककसी व्यल्तत स े ििरालश स्वीकार करिा ;
और’’।
5. 1937 1 कृवर् उपज (अ) िारा 3 की उपिारा (2) में, िंड (छ) के पश्चात ् (श्रेणीकरण और निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :— धचहिांकि) ‘‘(छक) िारा 5ग की उपिारा (1) के अिीि जांच करिा अधिनियम, 1937 और शाल्स्त अधिरोवपत करिा ;
(छि) िारा 5घ की उपिारा (1) के अिीि अपीि करिा ।’’; (आ) िारा 4 में, ‘‘कारावास से दंडिीय, जो अधिक से अधिक छह माह तक का हो सकेगा और जुमाषिे स,े जो अधिक से अधिक पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘शाल्स्त का दायी होगा, जो पांच िाि रुपए से अधिक की िहीं होगी’’ शब्द रिे जाएंगे । (इ) िारा 5 में, ‘‘कारावास से दंडिीय, जो अधिक स े अधिक तीि वर् ष तक का हो सकेगा और जुमाषिे स,े जो अधिक से अधिक पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘शाल्स्त का दायी होगा, जो पंरह िाि रुपए से अधिक की िहीं होगी’’ शब्द रिे जाएंगे । (ई) िारा 5क में, ‘‘कारावास से दंडिीय, जो अधिक से अधिक छह मास तक का हो सकेगा और जुमाषिे से, जो अधिक से अधिक पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘शाल्स्त का दायी होगा, जो तीि िाि रुपए से अधिक की िहीं होगी’’ शब्द रिे जाएंगे । (उ) िारा 5ि की उपिारा (4) में, ‘‘कारावास से, जो अधिक से अधिक छह मास तक का हो सकेगा और जुमाषिे से, जो अधिक से अधिक पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘शाल्स्त का दायी होगा, जो पांच िाि रुपए से अधिक की िहीं होगी’’ शब्द रिे जाएंगे । (ऊ) िारा 5ग के स्थाि पर निम्िलिखित िारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—240 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) ‘‘5ग. न्द्यायनिणाषयक अधिकारी—(1) केन्द्रीय सरकार, िारा 4, िारा 5, िारा 5क और िारा 5ि के अिीि शाल्स्तयां अविाररत करिे के प्रयोजिों के लिए, भारत सरकार के उपसधचव की पंल्तत से अनिम्ि ककसी अधिकारी या राज्य सरकार के उपसधचव की पंल्तत से अनिम्ि ककसी अधिकारी को ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे के लिए न्द्यायनिणाषयक अधिकारी नियुतत कर सकेगी :
परंतु केन्द्रीय सरकार उतिे न्द्यायनिणाषयक अधिकाररयों की नियुल्तत कर सकेगी, ल्जतिे अपेक्षित हो ।
(2) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी ककसी व्यल्तत को, जो साक्ष्य देिे के लिए या ककसी दस्तावजे को प्रस्तुत करिे के लिए मामिे के तथ्यों और पररल्स्थनतयों स े पररधचत हो, समि कर सकेगा और हाल्जर करा सकेगा, जो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी की राय में जांच की ववर्य-वस्तु के लिए उपयोगी हो या उसस े सुसंगत हो और यहद, ऐसी जांच पर उसका यह समािाि हो जाता है कक संबद्ि व्यल्तत िारा 4, िारा 5, िारा 5क और िारा 5ि के उपबंिों का अिुपािि करि े में असफि रहा है, तो वह शाल्स्त अधिरोवपत कर सकेगा :
परंतु संबद्ि व्यल्तत को मामिे में सुिवाई का युल्ततयुतत अवसर हदए बबिा ऐसी कोई शाल्स्त अधिरोवपत िहीं की जाएगी । 5घ. अपीि—(1) जो कोई िारा 5ग के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा पाररत ककए गए आदेश से व्यधथत है, कृवर् ववपणि सिाहकार, भारत सरकार को आदेश की प्राल्प्त की तारीि से तीस हदि के भीतर, ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, अपीि कर सकेगा ।
(2) ककसी अपीि को तीस हदि की अवधि की समाल्प्त के पश्चात ् ग्रहण ककया जा सकेगा, यहद अपीिाथी, कृवर् ववपणि सिाहकार का यह समािाि कर देता है कक उस अवधि के भीतर अपीि ि करिे के उसके पास पयाषप्त कारण था ।
(3) कृवर् ववपणि सिाहकार, अपीि के पिकारों को सुि े जािे का अवसर प्रदाि करि े के पश्चात ् ऐसा आदेश पाररत कर सकेगा, जो वह ठीक समझ े ।
(4) उपिारा (1) में निहदषष्ट कृवर् ववपणि सिाहकार अपीि फाइि करिे की तारीि से साठ हदि के भीतर अपीि का निपटारा करेगा । 5ङ. वसूिी—इस अधिनियम में अंतववष्ष ट ककसी बात के होत े हुए भी, यहद, यथाल्स्थनत, िारा 5ग के अिीि न्द्यायनिणायष क अधिकारी या िारा 5घ के अिीि कृवर् ववपणि सिाहकार के आदेश द्वारा अधिरोवपत शाल्स्त जमा िहीं की जाती है, तो वह रकम भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूि की जाएगी ।’’।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 241
(1) (2) (3) (4) (5)
6. 1940 23 ओर्धि और (अ) िारा 29 में, ‘‘जुमाषिे से, जो पांच हजार रुपए तक का हो प्रसािि सामग्री सकेगा, दंडिीय होगा’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘शाल्स्त का दायी होगा, अधिनियम, 1940 जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी’’ शब्द रिे जाएंग े ;
(आ) िारा 30 की उपिारा (2) में, ‘‘कारावास से, जो दो वर् ष तक का हो सकेगा या जुमाषिे स,े जो दस हजार रुपए से कम का िहीं होगा या दोिों से’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘जुमाषिे से, जो पांच िाि रुपए से कम का िहीं होगा’’ शब्द रिे जाएंगे ;
(इ) िारा 32ि की उपिारा (1) में, ‘‘िारा 13 की उपिारा (1) के िंड (ि)’’ शब्द, कोष्ठक, अंक और अिरों के पश्चात ् ‘‘िारा 27 के िंड (घ) और िारा 27क के िंड (ii)’’ शब्द, कोष्ठक, अंक और अिर अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ।
7. 1944 18 िोक ऋण िारा 27 का िोप ककया जाएगा । अधिनियम, 1944
8. 1947 24 रबड़ अधिनियम, (अ) िारा 11 की उपिारा (3) में, ‘‘कारावास से, ल्जसकी अवधि 1947 एक वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से, अथवा दोिों से’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘शाल्स्त स,े जो एक िाि रुपए तक हो सकेगी या िारा 14 के अिीि जारी की गई अिुज्ञल्प्त के रद्दकरण या दोिों से’’ शब्द और अंक रिे जाएंगे ;
(आ) िारा 13 की उपिारा (3) का िोप ककया जाएगा । (इ) िारा 25 की उपिारा (2) के िंड (xxiii) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :— ‘‘(xxiiiक) िारा 26ि की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे की और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत ;
(xxiiiि) िारा 26 की उपिारा (2) के अिीि अपीि प्रस्तुत करिे का प्ररूप और रीनत ;’’। (ई) िारा 26 की उपिारा (1) के अंत में, ‘‘कारावास से, ल्जसकी अवधि एक वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे स,े जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोिों से, दंडिीय होगा’’ शब्दों के स्थाि पर ‘‘शाल्स्त से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा, दायी होगा’’ शब्द रिे जाएंगे । (उ) िारा 26क के पश्चात ् निम्िलिखित िारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— ‘‘26ि. शाल्स्तयों का न्द्यायनिणयष ि--(1) िारा 11 की उपिारा
(3) और िारा 26 के अिीि शाल्स्तयों के न्द्यायनिणयष ि के प्रयोजिों के लिए कायपष ािक निदेशक, यथाल्स्थनत, बोड ष के सधचव या केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत ककसी अन्द्य अधिकारी को ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, संबंधित व्यल्तत को सुिे जािे का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि करिे के पश्चात ् जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे के लिए न्द्यायनिणाषयक अधिकारी नियुतत करेगा ।242 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5)
(2) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के आदेश से व्यधथत व्यल्तत कायपष ािक निदेशक को ऐसे आदेश की प्राल्प्त की तारीि से साठ हदि के भीतर ऐसे प्ररूप और रीनत में, जो ववहहत ककया जाए, अपीि कर सकेगा ।
(3) साठ हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् कोई अपीि ग्रहण की जा सकेगी यहद अपीिाथी कायपष ािक निदेशक का यह समािाि कर देता है कक उस अवधि के भीतर अपीि प्रस्तुत ि करिे के उसके पास पयाषप्त कारण था ।
(4) ककसी अपीि का तब तक निपटारा िहीं ककया जाएगा जब तक कक अपीिाथी को सुिे जािे का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि िहीं कर हदया गया हो ।
(5) उपिारा (2) के अिीि ककसी अपीि का उसे फाइि करिे की तारीि से साठ हदि के भीतर निपटारा ककया जाएगा ।
(6) उपिारा (1) के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त की रकम, यहद संदत्त िहीं की जाती है, तो उसकी भ-ू राजस्व के बकाया के रूप में वसूि की जाएगी ।”।
9. 1948 8 भेर्जी अधिनियम, (अ) िारा 18 की उपिारा (2) के िंड (ज) के पश्चात ् 1948 निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :— “(झ) िारा 43क की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत ;
(ञ) िारा 43क की उपिारा (2) के अिीि अपीि करिे का प्ररूप और रीनत ;”। (आ) िारा 26क की उपिारा (3) में, ‘‘कारावास स,े जो छह मास तक का हो सकेगा या जुमाषिे से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोिों से दंडिीय होगा,’’ शब्दों के स्थाि पर ‘‘शाल्स्त का दायी होगा जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी’’ शब्द रिे जाएंगे । (इ) िारा 41 में, उपिारा (1) के स्थाि पर निम्िलिखित उपिारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— ‘‘(1) यहद कोई व्यल्तत, ल्जसका िाम राज्य के रल्जस्टर में, उस समय दज ष िहीं है, लमथ्या रूप से यह बहािा करता है कक उसका िाम इस प्रकार से दजष ककया गया है या अपिे िाम या पदिाम के संबंि में ऐसे शब्दों या अिरों का प्रयोग करता है, जो युल्ततयुतत रूप से यह सुझाव देिे के लिए पररकलित है कक उसका िाम इस प्रकार दजष ककया गया है, तो वह प्रथम दोर्लसद्धि पर जुमाषिे से, जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा और ककसी पश्चातवती दोर्लसद्धि पर कारावास से, जो तीि मास तक का हो सकेगा या जुमाषिे से, जो दो िाि रुपए तक का हो सकेगा या दोिों स े दंडिीय होगा :vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 243
(1) (2) (3) (4) (5) परंतु यह प्रनतवाद होगा यहद व्यल्तत का िाम ककसी अन्द्य राज्य के रल्जस्टर में दजष ककया जाता है और यह कक दावा करते समय राज्य में रल्जस्रीकरण के लिए आवेदि कर हदया गया था ।’’। (ई) िारा 42 की उपिारा (2) में, ‘‘कारावास से, ल्जसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या एक हजार रुपए के अिधिक के जुमाषिे से, या दोिों से,’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘कारावास स े जो तीि मास तक का हो सकेगा या जुमाषिे से जो दो िाि रूपए तक का हो सकेगा या दोिों से’’ शब्द रिे जाएंगे । (उ) िारा 43 के पश्चात ् निम्िलिखित िारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— “(43क) शाल्स्तयों का न्द्यायनिणषयि—(1) िारा 26क के अिीि शाल्स्तयों के न्द्यायनिणषयि के प्रयोजिों के लिए केन्द्रीय सरकार उस राज्य पररर्द् के अध्यि को, जहां अलभकधथत उलिंघि ककया गया है, िारा 18 के अिीि यथाववहहत रीनत में जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे के लिए संबंधित व्यल्तत को सुिे जािे का यल्ुततयुतत अवसर प्रदाि करि े के पश्चात ् प्राधिकृत करेगी ।
(2) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के ककसी आदेश से व्यधथत कोई व्यल्तत अध्यि, केन्द्रीय पररर्द् को ऐसे आदेश की प्राल्प्त की तारीि से पतैं ािीस हदि के भीतर िारा 18 के अिीि यथाववहहत प्ररूप और रीनत में अपीि कर सकेगा ।
(3) अध्यि, केन्द्रीय पररर्द् पतैं ािीस हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् ककसी अपीि को ग्रहण कर सकेगा यहद उसका यह समािाि हो जाता है कक अपीिाथी को उस अवधि के भीतर अपीि फाइि ि करिे से पयाषप्त कारण द्वारा निवाररत ककया गया था ।
(4) ककसी अपीि का निपटारा तब तक िहीं ककया जाएगा जब तक अपीिाथी को सुिे जािे का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि िहीं ककया गया हो ।
(5) उपिारा (2) के अिीि ककसी अपीि का निपटारा फाइि करिे की तारीि से िब्बे हदि के भीतर ककया जाएगा ।
(6) उपिारा (1) के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त की रकम, यहद संदत्त िहीं की जाती है तो उसकी वसूिी भू-राजस्व के बकाया के रूप में की जाएगी ।”।
10. 1951 65 उद्योग (ववकास (अ) िारा 24 की उपिारा (1) में, दीघ ष पंल्तत के स्थाि पर और ववनियमि) निम्िलिखित दीघ ष पंल्तत रिी जाएगी, अथाषत ् :— अधिनियम, 1951 ‘‘वह शाल्स्त का दायी होगा, जो पच्चीस िाि रुपए तक की हो सकेगी ।’’।244 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) (आ) िारा 24क के स्थाि पर निम्िलिखित िाराएं रिी जाएंगी, अथाषत ् :— “24क. न्द्यायनिणयष ण—(1) केन्द्रीय सरकार, िारा 24 के अिीि शाल्स्तयों का अविारण करिे के प्रयोजिों के लिए, अधिकाररता रििे वािे ल्जिा मल्जस्रेट या अपर ल्जिा मल्जस्रेट को यथा ववहहत रीनत में जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे के लिए न्द्यायनिणाषयक अधिकारी होिे के लिए प्राधिकृत करेगी ।
(2) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी साक्ष्य देिे या ककसी दस्तावेज को प्रस्तुत करिे के लिए, जो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी की राय में जांच की ववर्य-वस्तु के लिए उपयोगी या सुसंगत है, के तथ्यों और पररल्स्थनतयों से अवगत ककसी व्यल्तत को समि कर सकेगा और उसे हाल्जर करा सकेगा और यहद ऐसी जांच पर, उसका यह समािाि हो जाता है कक संबंधित व्यल्तत इस अधिनियम के उपबंिों का अिुपािि करिे में असमथ ष है तो वह ऐसी शाल्स्त अधिरोवपत कर सकेगा, जो िारा 24 के उपबंिों के अिुसार ठीक समझे :
परंतु ऐसी ककसी शाल्स्त को संबंधित व्यल्तत को सुिे जािे का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि ककए बबिा अधिरोवपत िहीं ककया जाएगा । 24ि. अपीि—(1) जो कोई िारा 24क के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के द्वारा पाररत ककसी आदेश से व्यधथत है वह भारत सरकार के संयुतत सधचव की पंल्तत से अन्द्यूि ककसी अधिकारी, जो अपीि प्राधिकारी होगा, को आदेश की प्राल्प्त की तारीि से तीस हदि के भीतर ऐसे प्ररूप और रीनत में, जो ववहहत की जाए, अपीि कर सकेगा ।
(2) तीस हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् ककसी अपीि को ग्रहण ककया जा सकेगा यहद अपीिाथी अपीि प्राधिकारी का यह समािाि कर देता है कक उस अवधि के भीतर अपीि प्रस्तुत ि करिे का उसके पास पयाषप्त कारण था ।
(3) अपीि प्राधिकारी, अपीि के पिकारों को सुिे जाि े का अवसर प्रदाि करिे के पश्चात ् ऐसा आदेश पाररत करेगा, जो वह ठीक समझे ।
(4) उपिारा (1) के अिीि ककसी अपीि का निपटारा फाइि करिे की तारीि से साठ हदि के भीतर ककया जाएगा । 24ग. वसूिी—इस अधिनियम में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, यथाल्स्थनत, िारा 24क के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी या िारा 24ि के अिीि अपीि प्राधिकारी के ककसी आदेश द्वारा अधिरोवपत शाल्स्त को, यहद जमा िहीं ककया जाता है तो रकम की वसूिी भू-राजस्व के बकाया के रूप में की जाएगी ।”।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 245
(1) (2) (3) (4) (5) (इ) िारा 27 का िोप ककया जाएगा । (ई) िारा 28 में “अलभयोल्जत” शब्दों के स्थाि पर, “शाल्स्त अधिरोवपत” शब्द रिे जाएंगे । (उ) िारा 29 और िारा 29क का िोप ककया जाएगा । (ऊ) िारा 30 में,—
(i) उपिारा (2) के िंड (तत) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :— “(ततक) िारा 24क की उपिारा (1) के अिीि शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत ; (तति) िारा 24ि की उपिारा (1) के अिीि अपीि करिे का प्ररूप और रीनत ;
(ii) उपिारा (3) में, “दंडिीय” शब्द के स्थाि पर, “शाल्स्त का दायी” शब्द रिे जाएंगे ।”।
11. 1952 37 चिधचत्र (अ) िारा 7 में,— अधिनियम, 1952
(i) उपिारा (1) के स्थाि पर निम्िलिखित उपिारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— ‘‘(1) यहद कोई व्यल्तत,— (क) बबिा ककसी ववधिपूण ष प्राधिकार के (ल्जसको साबबत करिे का भार ऐसे व्यल्तत पर होगा) ककसी कफलम में, उसके प्रमाखणत ककए जािे के पश्चात ् ककसी भी िंग स े पररवतिष करता है या बबगाड़ सकता है, तो वह ‘कारावास से, ल्जसकी अवधि तीि वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से, जो दस िाि रुपए से कम का िहीं होगा या दोिों से, दंडिीय होगा ;
(ि) ककसी कफलम को ककसी स्थाि पर प्रदलशतष करता है या प्रदलशतष ककए जािे की अिुमनत देता है—
(i) ल्जस े बोड ष द्वारा प्रमाखणत िहीं ककया गया है ; या
(ii) ल्जसे, प्रदलशतष ककए जािे पर, बोड ष के ववहहत धचहि द्वारा प्रदलशतष िहीं ककया जाता है ; या
(iii) ल्जसे, बोड ष के धचहि द्वारा प्रदलशतष ककए जािे पर, धचहि को नियत ककए जािे के पश्चात ् उसमें पररवतिष या बबगाड़ हदया गया है,246 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) तो वह कारावास से, जो तीि वर् ष तक की अवधि का हो सकेगा या जमु ाषि े से, जो दस िाि रुपए तक का हो सकेगा या दोिों से, दंडिीय होगा और अपराि जारी रहि े की दशा में अनतररतत जुमाषि े से, जो प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि अपराि जारी रहता है, एक िाि रुपए तक का हो सकेगा ;
(ग) िंड (क) या िंड (ि) के उपबंिों के उलिंघि में कोई वीडडयो कफलम ककसी स्थाि में प्रदलशतष करता है या प्रदलशतष करिे की अिुमनत देता है, तो वह कारावास से, ल्जसकी अवधि तीि वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषि े स,े जो दस िाि रुपए तक का हो सकेगा या दोिों से, दंडिीय होगा और अपराि जारी रहि े की दशा में अनतररतत जुमाषि े से, जो प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि अपराि जारी रहता है, एक िाि रुपए तक का हो सकेगा, दंडिीय होगा ;
(घ) ककसी ऐसी कफलम को ककसी अवयस्क को प्रदलशतष करता है या प्रदलशतष ककए जािे के लिए अिुमनत देता है, ल्जस े इस अधिनियम के अथ ष के भीतर ‘‘वयस्क’’ के रूप में बोड ष द्वारा प्रमाखणत ककया गया है, तो ऐसा व्यल्तत, ऐसी शाल्स्त के लिए दायी होगा, जो ऐसे प्रत्येक प्रदशिष के लिए प्रनत व्यल्तत दस हजार रुपए से अिधिक होगी और ल्जस े ऐसे प्राधिकृत अधिकारी द्वारा ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, उद्गहृ ीत की जाएगी ;
(ङ) ककसी कफलम में ककसी ऐस े व्यल्तत, जो ऐसी ववृत्त या वग ष का सदस्य िही ं है को प्रदलशतष करता है या प्रदलशतष ककए जािे के लिए अिमु नत देता है, ल्जसे इस अधिनियम के अथ ष के भीतर ‘‘ववशेर्’’ के रूप में बोड ष द्वारा प्रमाखणत ककया गया है, तो वह ऐसे प्रत्येक प्रदशिष के लिए प्रनत व्यल्तत दस हजार रुपए से अिधिक की शाल्स्त के लिए दायी होगा, जो ऐसे प्राधिकृत अधिकारी द्वारा ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, उद्गहृ ीत की जाएगी ;
(च) िारा 6क में अंतववष्ष ट उपबंि या इस अधिनियम या उसके अिीि बिाए गए नियमों द्वारा केन्द्रीय सरकार या बोड ष को प्रदत्त शल्ततयों या कृत्यों में से ककसी शल्ततयां कृत्य का प्रयोग करते हुए उिके द्वारा ककए गए ककसी आदेश का अिुपािि करिे में असफि रहता है, तो वह पांच िाि रुपए से अिधिक की शाल्स्त के लिए दायी होगा, जो ऐसे प्राधिकृत अधिकारी द्वारा और ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, उद्गहृ ीत की जाएगी :vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 247
(1) (2) (3) (4) (5) परंतु दंड प्रकक्रया संहहता, 1973 (1974 का 2) की िारा 29 में ककसी बात के होते हुए भी, ककसी महािगर मल्जस्रेट या ककसी प्रथम श्रेणी न्द्यानयक मल्जस्रेट के लिए, ल्जसे राज्य सरकार द्वारा इस निलमत्त ववशेर् रूप से सशतत ककया गया है, िंड (क) से िंड (ग) के अिीि इस भाग के अिीि दंडिीय ककसी अपराि के लिए दोर्लसद्ि ककसी व्यल्तत पर पांच हजार रुपए स े अधिक के जुमाषिे का दंडादेश पाररत करिा ववधिपूण ष होगा :
परंतु यह और कक कोई ववतरक या प्रदशकष या ककसी चिधचत्र गहृ का स्वामी या कमचष ारी चेताविी ल्जसे इस भाग के अिीि ‘‘अनिबधंित वयस्क’’ के रूप में प्रमाखणत ककया गया है के पष्ृ ठांकि की ककसी शत ष के उलिघं ि के लिए दंड का दायी िहीं होगा ।
(ii) उपिारा (3) के पश्चात ् निम्िलिखित उपिारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् : — ‘‘(4) उपिारा (1) के िंड (घ) से िंड (च) या िारा 14 के अिीि अधिरोवपत ककसी शाल्स्त स े व्यधथत कोई व्यल्तत, ऐसी अवधि के भीतर और ऐस े प्ररूप और रीनत में, जो ववहहत की जाए, ऐसे अपीि प्राधिकारी को अपीि कर सकेगा ।’’। (आ) िारा 8 की उपिारा (2) के िंड (ग) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :— ‘‘(गग) प्राधिकृत अधिकारी और िारा 7 की उपिारा (1) के िंड (घ) से िंड (च) के निबंििों में उसके द्वारा उद्गहृ ीत शाल्स्त की रीनत ;
(गघ) अपीि करिे की अवधि, प्ररूप, रीनत और िारा 7 की उपिारा (4) के अिीि अपीि प्राधिकारी;’’। (इ) िारा 14 में ‘‘जुमाषिे से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडिीय होगा और अपराि जारी रहिे की दशा में, अनतररतत जुमाषिे स,े जो प्रत्येक हदि के लिए ल्जसके दौराि अपराि जारी रहता है, एक सौ रुपए तक का हो सकेगा’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘एक िाि रुपए की शाल्स्त के लिए दायी होगा और निरन्द्तर उलिंघि की दशा में अनतररतत शाल्स्त से, जो प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि उलिंघि जारी रहता है, दस हजार रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा’’ शब्द रिे जाएंगे । (ई) िारा 15 के स्थाि पर, निम्िलिखित िारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—248 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) “15. अिुज्ञल्प्त वापस िेिे या नििंबबत करिे की शल्तत—(1) जहां अिुज्ञल्प्त िारक िारा 7 की उपिारा (1) के िंड (क) से िंड (ग) के अिीि ककसी अपराि के लिए दोर्लसद्ि ठहराया गया है, तो अिुज्ञल्प्त, अिुज्ञापि अधिकारी द्वारा वापस िी जा सकेगी ।
(2) जहां ककसी अिुज्ञल्प्त िारक पर िारा 7 की उपिारा
(1) के िंड (घ) स े िंड (च) या िारा 14 के अिीि उलिंघि के लिए शाल्स्त अधिरोवपत की गई है, तो अिुज्ञल्प्त, अिुज्ञापि प्राधिकारी द्वारा तीस हदि से अिधिक की अवधि के लिए नििंबबत की जा सकेगी : परंतु तीि वर्ष की अवधि के दौराि तीि से अधिक उलिंघिों की दशा में, अिुज्ञापि प्राधिकारी, िेिबद्ि ककए जाएं उि कारणों से जो अिुज्ञल्प्त को, आदेश द्वारा वापस िे सकेगा :
परंतु यह और कक इस िारा के अिीि कोई भी आदेश अिुज्ञल्प्त िारक को सुिवाई का युल्ततयुतत अवसर हदए बबिा िहीं ककया जाएगा ।’’।
12. 1953 29 चाय अधिनियम, (अ) िारा 38 स े िारा 40 तक का िोप ककया जाएगा । 1953 (आ) िारा 41 की उपिारा (1) में, ‘‘कारावास स े ल्जसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुमाषिे स,े जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोिों से, दंडिीय होगा’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘शाल्स्त का दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी’’ शब्द रिे जाएंगे । (इ) िारा 42 में, ‘‘कारावास से, ल्जसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुमाषिे से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोिों से, तथा जारी रहिे वािे उलिंघि की दशा में ऐस े अनतररतत जुमाषिे से, जो ऐसे प्रथम उलिंघि के लिए दोर्लसद्धि के पश्चात ् ऐसे प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि ऐसा उलिघं ि जारी रहता है, पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडिीय होगा’’ शब्दों के स्थाि पर, ‘‘शाल्स्त का दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो r~o सकेगी तथा पश्चा ती उलिंघि के लिए, शाल्स्त के लिए, जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा’’ शब्द रिे जाएंग े । (ई) िारा 42 के पश्चात ् निम्िलिखित िारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— ‘‘42क. शाल्स्तयों का न्द्यायनिणषयि—(1) िारा 41 की उपिारा (1) या िारा 42 के अिीि शाल्स्तयों के न्द्यायनिणयष ि के प्रयोजिों के लिए, बोड ष का उपाध्यि, यथाल्स्थनत, बोड ष के सधचव या केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत ककसी अन्द्य अधिकारी से, ऐसी रीनत में जो ववहहत की जाए, सुिवाई का एक युल्ततयुतत अवसर देिे के पश्चात,् जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत के लिए न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के रूप में नियुतत करेगा ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 249
(1) (2) (3) (4) (5)
(2) जो कोई न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के ककसी आदेश स े व्यधथत है ऐसे आदेश की प्राल्प्त की तारीि से साठ हदि की अवधि के भीतर, बोड ष के उपाध्यि को ऐसे प्ररूप और रीनत में जो ववहहत ककया जाए, अपीि कर सकेगा ।
(3) कोई अपीि साठ हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् ग्रहण की जा सकेगी यहद अपीिकताष, उपाध्यि का यह समािाि करा देता है कक उसके पास उस अवधि के भीतर अपीि ि करिे का पयाषप्त कारण था ।
(4) ककसी भी अपीि का निपटारा तब तक िहीं ककया जाएगा जब तक कक अपीिकताष को सुिवाई का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि िहीं कर हदया गया हो ।
(5) उपिारा (2) के अिीि ककसी अपीि का, उसे फाइि करिे की तारीि से साठ हदि के भीतर निपटाि ककया जाएगा ।
(6) उपिारा (1) के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त की रकम का, यहद संदाय िहीं ककया गया है तो उसकी भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूिी की जा सकेगी ।”। (उ) िारा 49 की उपिारा (2) में, िंड (भ) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंतःस्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :— “(भक) िारा 42क की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत;
(भि) िारा 42क की उपिारा (2) के अिीि अपीि करिे का प्ररूप और रीनत ;”।
13. 1957 14 प्रनतलिप्यधिकार िारा 68 का िोप ककया जाएगा । अधिनियम, 1957
14. 1958 44 वाखणज्य पोत (अ) िारा 436 में,— पररवहि (क) उपिारा (2) की सारणी में, स्तंभ (1) के अिीि अधिनियम, 1958 उल्लिखित क्रम संखयांक के सामिे, स्तंभ (2) के अिीि अपरािों के संबंि में, स्तंभ 3 के अिीि िाराओं स े संबंधित और स्तंभ 4 के अिीि शाल्स्तयां यथा उपबंधित रीनत में क्रमश: प्रनतस्थावपत की जाएंगी, अथाषत ् :— क्र.सं. अपराि उस अधिनियम शाल्स्त की वह िारा, ल्जसमें अपराि के प्रनत निदेश है 16 ‘‘दो िाि रुपए तक की शाल्स्त ।’’।250 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) 29 ‘‘दो िाि रुपए तक की शाल्स्त ।’’। 35 ‘‘दो िाि रुपए तक की शाल्स्त ।’’। 43 ‘‘दो िाि रुपए तक की शाल्स्त ।’’। 44 ‘‘पचास हजार रुपए तक की शाल्स्त ।’’। 57(क) “फिक पर छोडी गई उसकी सभी संपवत्तयां या उिका कोई भाग तथा उसके द्वारा तब तक अल्जतष मजदरू ी और, यहद अलभत्यजि ऐसे ककसी स्थाि पर ककया जाता है जो भारत में िहीं है तो, ऐसी कुि मजदरू ी या उसका कोई भाग जो वह ऐसे ककसी अन्द्य पोत पर, ल्जस पर उसे उसके भारत िौटिे पयन्द्ष त नियोल्जत ककया जाए, उपाल्जतष कर सके, समपहत ककए जािे पर दानयत्वािीि होगी, और यह िाववक या लशिु उतिी अधिक रकम की पूनत ष करिे के दानयत्वािीि भी होगा जो उस पोत के, ल्जस पोत का उसिे अलभत्यजि ककया है, मास्टर या स्वामी उसके स्थाि पर नियोल्जत ककए गए उसके प्रनतस्थािी को मजदरू ी की उसकी दर स े उच्चतर पर देिी पड़े, ल्जस दर पर ऐसे िाववक या लशि ु को मजदरू ी का संदाय करिे के लिए अिुबंि ककया गया था ;”।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 251
(1) (2) (3) (4) (5) 57(ि) “यहद उलिंघि अलभत्यजि िहीं है तो ऐसा िाववक या लशशु ल्जसकी मजदरू ी में से दो हदि से अिधिक को मजदरू ी के बराबर रालश और उसके अनतररतत, अिुपल्स्थनत के प्रत्येक चौबीस घंटे की अवधि के लिए या तो छह हदि की मजदरू ी स े ि अिधिक रालश, या ऐस े कोई व्यय, जो प्रनतस्थािी को रििे पर समुधचत रूप से उपगत ककए जाएं, उसकी मजदरू ी में से समपहत ककए जािे के दानयत् वािीि होंगे ।”। 59 (iv) 194(घ) “तीि मास तक का िारा कारावास या पांच सौ रुपए 194 का तक जुमाषिा या दोिों ।”। िंड (घ) (ivक) 194(ङ) “एक मास तक का िारा कारावास और प्रत्य ेक 194 का चौबीस घंटे की ऐसी िंड (ङ) अवज्ञा या उपेिा के लिए दो हदि की मजदरू ी स े अिधिक रालश का जो छह हदि की वेति स े अिधिक रालश की उसकी मजदरू ी या ककन्द्हीं ऐसे व्ययों का जो उसके प्रनतस्थािी को रििे पर समुधचत रूप से उपगत ककए जाएं ।”। 60 “एक िाि रुपए तक शाल्स् त ।”। 65 “दो िाि रुपए तक शाल्स् त ।”। 66(क) “दो िाि रुपए तक शाल्स् त ।”। 68 “पचास हजार रुपए तक शाल्स् त ।”।252 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) 72 “दो िाि रुपए तक शाल्स् त ।”। 84 “प्रथम अपराि के लिए एक िाि रुपए और r~o प्रत्य ेक पश्चा ती अपराि के लिए पांच िाि रुपए तक शाल्स् त ।”। 108(ि) “मास्टर या स्वामी या अलभकताष, ऐसी शाल्स् त के लिए जो पांच िाि रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा और पोत को भी निरुद्ि ककया जा सकेगा ।” । 109 “पांच िाि रुपए तक शाल्स् त ।”। 115घ(ii) “अपरािी ऐसी शाल्स्त से, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा ।”। 133 “ऐसी शाल्स् त के लिए जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा और जियाि को भी निरुद्ि ककया जा सकेगा ।”। 135 “पांच हजार रुपए तक शाल्स् त ।”। 137 “एक िाि रुपए तक शाल्स् त और जियाि को भी निरुद्ि ककया जा सकेगा ।”। 137ञ “एक िाि रुपए तक शाल्स् त और जियाि को भी निरुद्ि ककया जा सकेगा ।”। (ि) उपिारा (2) के पश् चात ् निम् िलिखित उपिाराएं अंत:स् थावपत की जाएंगी, अथाषत:्— “(3) इस अधिनियम के ककन्द्ह ीं उपबंिों के उल िंघि के लिए ववहहत शाल्स् त वाखणल्ज् यक समुरी बेड़ा ववभाग के प्रिाि अधिकारी द्वारा अधिरोवपत की जाएगी:vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 253
(1) (2) (3) (4) (5) परंतु इस िारा के अिीि कोई शाल्स् त तब तक अधिरोवपत िहीं की जाएगी जब तक पिकारों को सुिवाई का समुधचत अवसर प्रदाि िहीं ककया गया हो ।
(4) जो कोई, उपिारा (3) में निहदषष्ट प्रिाि अधिकारी द्वारा ककए गए ककसी आदेश से व् यधथत हो, ऐसा आदेश प्राप् त होिे की तारीि से तीस हदि की अवधि के भीतर महानिदेशक को ऐस े प्ररूप और रीनत में जो केन्द्र ीय सरकार द्वारा ववहहत की जाए, अपीि कर सके ।
(5) महानिदेशक पिकारों को सुिवाई का अवसर हदए जािे के पश् चात,् उपिारा (4) के अिीि अपीि प्राप् त होि े की तारीि से तीस हदि की अवधि के भीतर, समुधचत आदेश पाररत कर सकेगा ।
(6) इस अधिनियम के उपबंिों के ककसी उलिंघि, ल्जसके लिए शाल्स् त ववहहत की गई है, का उपिारा (3) में निहदषष्ट प्रिाि अधिकारी या ऐसे अन्द्य अधिकारी द्वारा, जो इस निलमत् त केन्द्र ीय सरकार द्वारा राजपत्र में, अधिसूधचत ककया जाए, पहिे उलिंघि के लिए शमि हो सकेगा :
परंतु जहां ककसी ऐसे उलिंघि का शमि ककया गया है, वहां रालश ककसी दशा में उस शाल्स् त, जो ऐसे उल िंघि के लिए अधिरोवपत की जा सकेगी, की अधिकतम रकम से अधिक िहीं होगी ।
(7) इस अधिनियम में अंतववषष्ट ककसी बात के होते हुए भी, यथाल्स्थनत, उपिारा (3) के अिीि वाखणल्ज्यक समुरी बेड़ा ववभाग के प्रिाि अधिकारी द्वारा या उपिारा (5) के अिीि महानिदेशक के आदेश द्वारा अधिरोवपत शाल्स्त जमा िहीं की जाती है तो, रकम को भ-ू राजस्व के बकाया के रूप में वसूिा जाएगा ।” । (ि) िारा 436 के पश् चात ् निम् िलिखित िारा अंत:स् थावपत की जाएगी, अथाषत:्— “436क नियम बिािे की शल्त त—केन्द्र ीय सरकार पूव ष प्रकाशि की शत ष के अिीि रहते हुए, िारा 436 की उपिारा
(4) के अिीि वाखणल्ज् यक समुरी बेड़ा ववभाग के प्रिाि अधिकारी के आदेश के ववरुद्ि अपीि का प्ररूप और रीनत ववहहत करिे वािे नियम बिा सकेगी ।”।
15. 1961 47 नििेप बीमा और िारा 47 में, उपिारा (2) के स्थाि पर, निम्िलिखित उपिाराए ं प्रत्यय गारंटी निगम रिी जाएंगी, अथाषत:्— अधिनियम, 1961 “(2) यहद कोई व्यल्तत इस अधिनियम के ककसी उपबंि के अिीि कोई बही, िेिा या अन्द्य दस्तावेज पेश करिे में या कोई ऐसा वववरण या जािकारी प्रस्तुत करि े ल्जसे पेश करिा या देिा इस अधिनियम के अिीि उसका कतव्ष य है में असफि रहता है, तो वह शाल्स्त से, जो प्रत्येक ऐसी असफिता के संबंि में जो एक िाि254 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) पचास हजार रुपए तक हो सकेगी, और असफिता के जारी रहिे की दशा में, अनतररतत शाल्स्त, जो उस प्रत्येक हदि के लिए ल्जसके दौराि ऐसी पहिी असफिता के पश्चात ्असफिता जारी रहती है, सात हजार पांच सौ रुपए, का दायी होगा ।
(3) उपिारा (2) के अिीि शाल्स्त न्द्यायनिणीत करिे के प्रयोजि के लिए, निगम व्यल्तत पर यह अपेिा करते हुए कारण बताओ िोहटस तामीि करेगा कक तयों ि िोहटस में ववनिहदषष् ट रकम अधिरोवपत ककया जाए और ऐस े व्यल्तत को सुिवाई का भी युल्ततयुतत अवसर प्रदाि ककया जाएगा ।
(4) इस िारा के अिीि निगम द्वारा अधिरोवपत कोई शाल्स्त उस तारीि से, ल्जसको रालश का मांग करिे वािा िोहटस निगम द्वारा व्यल्तत पर तामीि ककया जाता है से चौदह हदि की अवधि के भीतर संदेय होगी और ऐसी अवधि के भीतर रालश का संदाय करिे में ककसी व्यल्तत की असफि होिे की दशा में, ऐसे प्रिाि लसववि न्द्यायािय द्वारा ल्जसकी अधिकाररता उस िेत्र पर है ल्जसमें ऐसा व्यल्तत निवास करता है जहां व्यल्तत ल्स्थत है, ककए गए आदेश या निदेश के संबंि में उद्गहृ ीत की जा सकेगी :
परंतु यह कक ऐसा कोई आदेश या निदेश, जो निगम द्वारा या इस निलमत उसके प्राधिकृत ककसी अधिकारी द्वारा न्द्यायािय को ककए गए आवेदि पर ही ककया जा सकेगा अन्द्यथा िहीं ।
(5) ऐसे न्द्यायािय जो उपिारा (4) के अिीि आदेश या निदेश देता है उस व्यल्तत द्वारा संदेय रालश ववनिहदषष्ट करिे वािा प्रमाणपत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाणपत्र वैसी ही रीनत में जो मािो यह लसववि वाद में न्द्यायािय द्वारा की गई डडक्री प्रवतिष ीय होगा ।
(6) ककसी न्द्यायािय में ककसी उलिंघि या व्यनतक्रम के संबंि में ककसी व्यल्तत के ववरुद्ि पररवाद फाइि िहीं ककया जाएगा ल्जसके संबंि में उपिारा (2) के अिीि निगम द्वारा शाल्स्त अधिरोवपत की गई है ।
(7) जहां उपिारा (1) में निहदषष्ट प्रकृनत के ककसी उलिंघि या व्यनतक्रम के संबंि में ककसी न्द्यायािय में ककसी व्यल्तत के ववरुद्ि कोई पररवाद फाइि ककया गया है, वहां उपिारा (2) के अिीि उस व्यल्तत पर ककसी शाल्स्त को अधिरोवपत करिे के लिए कोई कायवष ाहहयां आरंभ िहीं की जाएंगी ।”।
16. 1962 58 भांडागारण निगम िारा 38 का िोप ककया जाएगा । अधिनियम, 1962
17. 1964 37 िाद्य निगम िारा 41 का िोप ककया जाएगा। अधिनियम, 1964vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 255
(1) (2) (3) (4) (5)
18. 1970 39 पेटेंट अधिनियम, (अ) िारा 120 में, “वह जुमािष े से, जो एक िाि रुपए तक का 1970 हो सकेगा, दंडिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर, “वह ऐसे शाल्स्त का, जो दस िाि रुपए तक की हो सकेगी, संदाय करिे का दायी होगा और दावा चािू रहिे की दशा में, प्रथम बार ल्जसके दौराि दावा चािू रहता है के पश्चात ् प्रत्येक हदि के लिए एक हजार रुपए की अनतररतत शाल्स्त का दायी होगा” शब्द रिे जाएंगे। (आ) िारा 121 का िोप ककया जाएगा। (इ) िारा 122 में,—
(i) उपिारा (1) में, दीघ ष पंल्तत के स्थाि पर निम्िलिखित दीघ ष पंल्तत रिी जाएगी, अथाषत:्— “वह जुमाषिे से, जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी” शब्दों के स्थाि पर, “वह ऐसी शाल्स्त जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी का दायी होगा और इंकार या असफिता जारी रहिे की दशा में, प्रथम बार ल्जसके दौराि इंकार या असफिता जारी रहती है के पश्चात ् प्रत्येक हदि के लिए एक हजार रुपए की अनतररतत शाल्स्त का दायी होगा” शब्द रिे जाएंगे ;”।
(ii) उपिारा 2 में “वह कारावास से, ल्जसकी अवधि छह मास तक का हो सकेगा या जुमाषिे से, या दोिों से, दंडिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर “वह ऐसे व्यल्तत के, यथाल्स्थनत, िेिापरीक्षित िातों में यथासंगखणत कारबार के या ववृत्त की सकि प्राल्प्तयों के कुि ववक्रय या आवत ष के आिा प्रनतशत के बराबर रालश या पांच करोड़ रुपए के बराबर रालश, जो भी कम हो, की शाल्स्त का दायी होगा” शब्द रिे जाएंगे ।” (ई) िारा 123 में, “वह जुमाषिे से, जो प्रथम अपराि की दशा r~o में एक िाि रुपए तक का और हदवतीय या पश्चा ती अपरािों की दशा में, पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा, दंडिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर “वह ऐसी शाल्स्त, जो पांच िाि रुपए तक की हो सकेगी, का दायी होगा और जारी रहिे वाि े व्यनतक्रम की दशा में, प्रथम बार ल्जसके दौराि ऐसा व्यनतक्रम जारी रहता है, के पश्चात ् प्रत्येक हदि के लिए एक हजार रुपए की अनतररत त शाल्स् त, का दायी होगा” शब्द रिे जाएंगे । (उ) िारा 124 के पश्चात,् निम्िलिखित िाराएं अंत: स्थावपत की जाएगी, अथाषत:्— “124क. शाल्स्तयों का न्द्यायनिणाषयि—(1) नियंत्रक, आदेश द्वारा, िारा 73 में निहदषष्ट ककसी व्यल्तत को जांच करिे के लिए न्द्यायनिणयष ि अधिकारी के रूप में प्राधिकृत करेगा तथा इस अधिनियम के उपबंिों के अिीि संबधं ित व्यल्तत को सुिवाई का युल्ततयुतत अवसर देिे के पश्चात,् ऐसी रीनत में जो ववहहत की जाए ।256 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) 124ि. अपीि (1) िारा 124क के अिीि न्द्यायनिणयष ि प्राधिकारी के आदेश स े व्यधथत कोई व्यल्तत, ऐस े अपीिीय प्राधिकारी को, आदेश की प्राल्प्त की तारीि से साठ हदि की अवधि के भीतर, अपीि कर सकेगा जो न्द्यायनिणयष ि अधिकारी से कम से कम एक रैंक ऊपर का अधिकारी होगा, जैसा केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निलमत्त अधिसूचिा द्वारा प्राधिकृत करे ।
(2) इस िारा के अिीि प्रत्येक अपीि ऐसे प्ररूप और रीनत में की जाएगी जो ववहहत ककया जाए ।
(3) कोई अपीि साठ हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् स्वीकार की जा सकेगी यहद अपीिकताष अपीिीय प्राधिकारी का यह समािाि कर देता है कक उसके पास उस अवधि के भीतर अपीि ि करिे का पयाषप्त कारण था ।
(4) ककसी भी अपीि का निपटारा तब तक िही ं ककया जाएगा जब तक कक अपीिकताष को सुिवाई का एक यल्ुततयुतत अवसर प्रदाि िहीं कर हदया गया हो ।
(5) उपिारा (1) में निहदषष्ट अपीिीय प्राधिकारी, अपीि फाइि करिे की तारीि स े साठ हदि के भीतर अपीि का निपटारा करेगा ।
(6) इस अधिनियम में अंतववषष्ट ककसी बात के होते हुए भी, यहद कोई व्यल्तत, यथाल्स्थनत, िारा 124क के अिीि न्द्यायनिणषयि प्राधिकारी के आदेश या इस िारा के अिीि अपीिीय प्राधिकारी के आदेश का ऐस े आदेश के िब्बे हदि के भीतर अिुपािि करिे में असफि रहता है तो वह शाल्स्त के अनतररतत एक िाि रुपए के जुमाषिे या ऐसे कारावास से ल्जसकी अवधि एक वर् ष तक की हो सकेगी, या दोिों से दंडिीय होगा ।”। (ऊ) िारा 159 की उपिारा (2) के िंड (xiii) के पश् चात ् निम् िलिखित िंड अंत:स् थावपत ककया जाएगा, अथाषत:्— “(xiiiक) िारा 124क के अिीि शाल्स् त अधिरोवपत करिे की रीनत;
“(xiiiि) िारा 124ि की उपिारा (2) के अिीि अपीि करिे का प्ररूप और रीनत;” ।
19. 1972 13 सामुहरक उत् पाद (अ) िारा 20 में, उपिारा (3) में, “कारावास से, ल्जसकी अवधि एक नियाषत ववकास वर् ष तक की हो सकेगी, या जुमाषिे से, या दोिों से, दण् डिीय होगा” शब् दों के प्राधिकरण स् थाि पर “ऐसी शाल्स् त के लिए जो दस हजार रुपए से कम की िहीं होगी अधिनियम, 1972 या ऐसे माि ल्जसकी बाबत ऐसा आदेश हदया गया था, के मूल य के दगु ुिे के समतुल य रकम, जो भी अधिक हो, के लिए दायी होगा” शब् द रिे जाएंगे । (आ) िारा 23 में, “जुमाषि े स,े जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्ड िीय होगा” शब् दों के स् थाि पर “ऐसी शाल्स् त के लिए दायी होगा जो दस हजार रुपए तक हो सकेगी” ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 257
(1) (2) (3) (4) (5) (इ) िारा 24 और िारा 25 के स् थाि पर निम् िलिखित िाराएं रिी जाएगी, अथाषत:्— “24. प्राधिकरण के ककसी सदस् य या अधिकारी द्वारा उसके कतव्ष यों के निवहष ि में बािा डाििे और बहहयां तथा अलभिेि पेश करिे में असफि रहिे के लिए शाल्स् तयां—कोई व् यल्त त— (क) जो अध् यि द्वारा लिखित रूप से प्राधिकृत ककसी सदस्य को या प्राधिकरण द्वारा इस निलमत्त प्राधिकृत उसके ककसी अन्द् य अधिकारी या कमचष ारी अथवा केन्द्र ीय सरकार या प्राधिकरण द्वारा इस निलमत्त प्राधिकृत ककसी अन्द् य व् यल्त त को इस अधिनियम द्वारा या उसके अिीि उसे प्रदत्त शल्त तयों के प्रयोग में या उस पर अधिरोवपत कतव्ष यों के निवहष ि में बािा डािेगा तो वह कारावास से, ल्जसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुमाषिे से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोिों से, दण्ड िीय होगा । (ि) ककसी िेिा-बही या अन्द् य अलभिेि को, जो उसके नियंत्रण या अलभरिा में हो, इस अधिनियम द्वारा या उसके अिीि ऐसी अपेिा की जािे पर उस बही या अलभिेि को पेश करिे में असफि रहेगा, वह ऐसी शाल्स् त के लिए जो दस हजार रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा ।
25. अन्द्य शाल्स् तयां—जो कोई इस अधिनियम या उसके अिीि बिाए गए नियमों के उपबंिों का, उि उपबंिों को छोड़कर ल्जिके उल िंघि के लिए दण्ड या शाल्स्त का उपबन्द्ि िारा 20, िारा 23 और िारा 24 में ककया गया है, उल िंघि करेगा या उल िघं ि करिे का प्रयत् ि करेगा या उलि ंघि का दष्ु प्रेरण करेगा, वह ऐसी शाल्स् त के लिए, जो दस हजार रुपए से कम िहीं होगी या ऐसे माि ल्जसकी बाबत ऐसा उलिंघि ककया गया था, के मूल य के समतुल य रकम से अिधिक जो भी अधिक हो, के लिए दायी होगा और पूवोतत उल िंघि जारी रहिे की दशा में ऐसी शाल्स् त के लिए जो पचास हजार रुपए से कम िहीं होगी या ऐसे माि ल्जसकी बाबत ऐसा उलिंघि ककया गया था, के मूल य के दगु िे के समतुल य रकम, जो भी अधिक हो, के लिए दायी होगा । 25क. शाल्स्तयों का न्द्यायनिणषयि- (1) िारा 20 की उपिारा (3), िारा 23, िारा 24 के िंड (ि) और िारा 25 के अिीि शाल्स्तयों के न्द्यायनिणषयि के प्रयोजिों के लिए, अध्यि, यथाल्स्थनत, प्राधिकरण के सधचव या केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत ककसी अन्द्य अधिकारी को, जांच करिे के लिए न्द्यायनिणषयि अधिकारी होिे के लिए नियुतत करेगा तथा इस258 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) अधिनियम के उपबंिों के अिीि ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, संबंधित व्यल्तत को सिु वाई का एक युल्ततयुतत अवसर देिे के पश् चात,् शाल्स्त अधिरोवपत करेगा ।
(2) न्द्यायनिणषयि अधिकारी के आदेश से व्यधथत कोई व्यल्तत ऐसे आदेश की प्राल्प्त की तारीि से साठ हदि की अवधि के भीतर अध्यि को ऐसे प्ररूप और रीनत में, जो ववहहत ककया जाए, अपीि कर सकेगा ।
(3) कोई अपीि साठ हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् स्वीकार की जा सकेगी यहद अपीिकताष अध्यि का यह समािाि कर देता है कक उसके पास उस अवधि के भीतर अपीि ि करिे का पयाषप्त कारण था ।
(4) ककसी भी अपीि का निपटारा तब तक िहीं ककया जाएगा जब तक कक अपीिकताष को सुिवाई का एक युल्ततयुतत अवसर प्रदाि िहीं कर हदया गया हो ।
(5) उपिारा (2) में निहदषष्ट अपीिीय प्राधिकारी, अपीि फाइि करिे की तारीि स े साठ हदि के भीतर अपीि का निपटारा करेगा ।
(6) उपिारा (1) के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त की रकम का यहद संदाय िहीं ककया जाता है तो उसे भ-ू राजस्व के बकाए के रूप में वसूिा जाएगा ।”। (ई) िारा 33 की उपिारा (2) में िंड (थ) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंतःस्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :— “(थक) िारा 25क की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे तथा शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत;
“(थि) िारा 25क की उपिारा (2) के अिीि अपीि करिे का प्ररूप और रीनत;”।
20. 1978 11 उच् च मूल य बकैं िोट निरलसत। (ववमुरीकरण अधिनियम, 1978)
21. 1981 14 वायु (प्रदर्ू ण (अ) िारा 21 की उपिारा (1) में निम् िलिखित रिे जाएंगे, अथाषत:्— निवारण और “(1) कोई व् यल्त त वायु प्रदर्ू ण नियंत्रण िेत्र में ककसी भी नियंत्रण) अधिनियम, औद्योधगक संयंत्र की स् थापिा या प्रचािि तब तक िहीं करेगा जब तक वह इस िारा के उपबंिों के अिुसार ऐसे व् यल्त त 1981 द्वारा ककए गए आवेदि के अिुसरण में राज् य बोड ष की पूव ष सहमनत प्राप् त ि की गई हो :
परन्द् तु केन्द्र ीय सरकार, शासकीय राजपत्र में, अधिसूचिा द्वारा, केन्द्र ीय प्रदर्ू ण नियंत्रण बोड ष के परामश ष से इस उपिारा के उपबंिों को िाग ू करिे से औद्योधगक संयंत्रों के कनतपय प्रवगों को छूट प्रदाि कर सकेगी ।”।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 259
(1) (2) (3) (4) (5) (आ) िारा 21 के पश् चात ् निम् िलिखित िारा अंत:स् थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— “21क. हदशानिदेश जारी करिे की शल्तत,—
(1) इस अधिनियम में अन्द्तववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, बोड ष के परामश ष से, राजपत्र में, अधिसूचिा द्वारा, वायु प्रदर्ू ण िेत्र में ककसी भी औद्योधगक संयंत्र को स् थावपत करिे या प्रचालित करिे के लिए ककसी भी राज् य बोड ष द्वारा सहमनत प्रदाि करिे, इंकार करिे, या रद्द करिे स े संबंधित मामिों पर मागदष शकष लसद्िांत जारी कर सकेगी ल्जिमें िारा 21 के अिीि ककए गए आवेदि के निपटाि की समय-सीमा के लिए तंत्र या ऐसी सहमनत की ववधिमान्द्य अवधि भी सल्म् मलित है ।
(2) प्रत्य ेक राज् य बोड,ष िारा 21 के अिीि सहमनत को प्रदाि करिे, इंकार करिे या रद्द करिे के प्रयोजि के लिए, उपिारा (1) के अिीि जारी मागदष शकष लसद्िांतों के अिुसार काय ष करेगा ।”। (इ) िारा 37 से िारा 41 के स् थाि पर निम् िलिखित िारा रिी जाएगी, अथाषत:्— “37. िारा 22 के उपबंिों या िारा 31क के अिीि जारी ककए गए निदेशों के अिुपािि में असफिता—(1) जो कोई िारा 22 के उपबंिों या िारा 31क के अिीि जारी ककए गए निदेशों का उल िंघि करता है या अिुपािि िहीं करता है, तो वह ऐसे प्रत्य ेक उल िंघि के संबंि में ऐसी शाल्स् त के संदाय के लिए, जो दस हजार रुपए से कम िहीं होगी, ककन्द् त ु पचास िाि रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा :
(2) जहां ककसी व् यल्त त उपिारा (1) के अिीि उल िंघि करिा जारी रिता है, तो वह अनतररत त शाल्स् त, जो ऐसे उल िंघि के जारी रहिे के दौराि प्रत्य ेक हदि के लिए दस हजार रुपए होगी, के लिए दायी होगा ।
38. (1) कनतपय अधिनियमों के लिए शाल्स् तयां—जो कोई— (क) बोड ष के प्राधिकार से या उसके अिीि भूलम पर िगे ककसी स् तम् भ, थम् ब या िूंटे को या िगाई गई, अन्द्त लिखष ित या रिी गई ककसी सूचिा या अन्द् य पदाथ ष को िष् ट करेगा, धगराएगा, हटाएगा या िनत पहुंचाएगा या उसे ववरूवपत करेगा ; या (ि) बोड ष के आदेशों या निदेशों के अिीि काय ष करिे वािे ककसी व् यल्त त को इस अधिनियम के अिीि260 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) अपिी शल्त तयों का प्रयोग और अपिे कृत् यों का पािि करिे में बािा डािेगा ; या (ग) बोड ष के ककसी संकम ष या संपवत्त को िुकसाि पहुंचाएगा ; या (घ) बोड ष को या बोड ष के ककसी अधिकारी या अन्द् य कमचष ारी को कोई ऐसी जािकारी देिे में असफि रहेगा, ल्जसकी इस अधिनियम के प्रयोजि के लिए बोड ष या ऐसा अधिकारी या अन्द्य कमषचारी अपेिा करे ; या (ङ) राज् य बोड ष द्वारा अधिकधथत मािकों से अधिक वातावरण में वायु प्रदर्ू कों के उत् सजिष की घटिा या ऐसी घटिा होिे की आशंका की सूचिा िारा 23 की उपिारा
(1) के अिीि अपेक्षित रूप में राज् य बोड ष और अन्द्य ववहहत प्राधिकरणों या अलभकरणों को देिे में असफि रहेगा ; या (च) कोई ऐसी जािकारी देिे में असफि रहेगा, ल्जसका हदया जािा उसस े इस अधिनियम के अिीि अपेक्षित है, ऐसा कथि करेगा, ल्जसकी कोई महत्वपूणष ववलशल्ष् ट लमथ् या है ;
वह ऐसी शाल्स् त के लिए, जो दस हजार रुपए से कम िहीं होगी, ककन्द् त ु पन्द्रह िाि रुपए तक हो सकेगी, का दायी होगा :
(2) जहां ऐसे व् यल्त त द्वारा उपिारा (1) के अिीि उल िंघि ककया जािा जारी रहता है, तो वह अनतररत त शाल्स् त, जो ऐसे उल िंघि के जारी रहिे के प्रत्य ेक हदि के लिए दस हजार रुपए होगी, के लिए दायी होगा । 38क. सरकारी ववभाग द्वारा उल िंघि के लिए शाल्स् त—
(1) जहां इस अधिनियम के ककसी उपबंि का उल िंघि केन्द्र ीय सरकार या राज्य सरकार के ककसी ववभाग द्वारा ककया गया है, वहां ववभागाध्यि एक मास के अपिे मूि वेति के समतुलय शाल्स्त का दायी होगा : परंतु वह ऐसे उलिंघि के लिए दायी िहीं होगा, यहद वह यह साबबत कर देता है कक उलिंघि उसकी जािकारी या निदेशों के बबिा ककया गया था या उसिे ऐसे उलिंघि को निवाररत करिे के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) जहां उपिारा (1) के अिीि कोई उलिंघि ववभागाध्यि से लभन्द्ि ककसी अधिकारी की ओर स े ककसी उपेिा के कारण हुआ है तो अधिकारी एक मास के अपिे मूि वेति के समतुलय शाल्स्त का दायी होगा : परंतु वह उलिंघि के लिए दायी िहीं होगा, यहद वह साबबत कर देता है कक उसि े ऐसे उलिंघि से बचिे के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 261
(1) (2) (3) (4) (5)
39. इस अधिनियम के कनतपय उपबंिों के उलिंघि के लिए शाल्स् त—यहद कोई व्यल्तत इस अधिनियम के ककसी उपबंि या इसके अिीि जारी ककए गए ककसी आदेश या निदेश का, ल्जसके लिए इस अधिनियम में ककसी शाल्स् त का उपबंि िहीं ककया गया है, उल िंघि करेगा तो वह शाल्स् त के लिए, जो दस हजार रुपए से कम िहीं होगी, ककन्द् त ु पन्द्रह िाि रुपए तक हो सकेगी, दायी होगा और जहां ऐसा उल िंघि जारी रहता है, तो वहां वह ककसी ऐसी अनतररत त शाल्स् त, जो प्रत्येक हदि के लिए ल्जसके दौराि ऐसा उलिंघि जारी रहता है दस हजार रुपए तक की हो सकेगी, के लिए दायी होगा । 39क. न्द्य ायनिणाषयक अधिकारी—(1) केन्द्र ीय सरकार िारा 37, िारा 38, िारा 38क और िारा 39 के अिीि शाल्स् तयों का अविारण करिे के प्रयोजिों के लिए उस रीनत में जो ववहहत की जाए कोई जांच करिे के लिए और शाल्स् त का अधिरोपण करिे के लिए ककसी ऐसे अधिकारी को, जो भारत सरकार के संयुत त सधचव या राज् य सरकार के ककसी सधचव की पंल्त त के िीचे का ि हो, न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के रूप में नियुत त करेगा :
परन्द् तु केन्द्र ीय सरकार उतिे न्द्य ायनिणाषयक अधिकाररयों को नियुत त कर सकेगी, ल्जतिे अपेक्षित हों ।
(2) न्द्य ायनिणाषयक अधिकारी ककसी ऐसे व् यल्त त को, जो मामिे के तथ् यों और पररल्स् थनतयों से अवगत हो, साक्ष् य देिे या ककसी दस् तावेजों को प्रस् तुत करिे के लिए समि कर सकेगा और उसे हाल्जर करा सकेगा, जो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी की राय में जांच की ववर्य-वस् तु के लिए उपयोगी या सुसंगत हो और यहद ऐसी जांच पर, उसका यह समािाि हो जाता है कक संबंधित व् यल्त त िे इस अधिनियम के उपबंिों का उल िंघि ककया है, तो वह ऐसी शाल्स् त, जो यथाल्स् थनत, िारा 37, िारा 38, िारा 38क या िारा 39 के उपबंिों के अिीि उधचत समझता है, नििाषररत कर सकेगा :
परन्द् तु कोई शाल्स् त संबंधित व् यल्त त को सुिवाई का युल्ततयुतत अवसर हदए बबिा अधिरोवपत िहीं की जाएगी ।
(3) िारा 37, िारा 38, िारा 38क और िारा 39 के उपबंिों के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त की रकम राष्रीय हररत अधिकरण अधिनियम, 2010 (2010 का 19) की िारा 17 के साथ पहठत िारा 15 के अिीि अिुतोर् या प्रनतकर का सदं ाय करिे के दानयत्व के अनतररतत होगी । 39ि. अपीि—(1) िारा 37, िारा 38, िारा 38क या िारा 39 के अिीि ककसी न्द्यायनिणाषयि अधिकारी द्वारा पाररत ककसी आदेश से व्यधथत कोई व्यल्तत, राष्रीय हररत अधिकरण अधिनियम, 2010 (2010 का 19) की िारा 3 के अिीि स्थावपत262 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) राष्रीय हररत अधिकरण को अपीि कर सकेगा ।
(2) उपिारा (1) के अिीि की प्रत्येक अपीि, उस तारीि से ल्जसको न्द्यायनिणयष ि अधिकारी द्वारा ककए गए आदेश के प्रनत व्यधथत व्यल्तत के द्वारा प्राप्त की जाती है, साठ हदि के भीतर फाइि की जाएगी ।
(3) अधिकरण, अपीि के पिकारों को सुिवाई का अवसर देिे के पश्चात ् उस आदेश, ल्जसके ववरुद्ि अपीि की गई है, को पुष्ट करिे, उपांतररत करिे या अपास्त करिे वािा आदेश पाररत कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(4) जहां कोई अपीि उपिारा (1) के अिीि न्द्यायनिणयष ि अधिकारी के ककसी आदेश के ववरुद्ि की गई हो, वहां इसे अधिकरण द्वारा तब तक ग्रहण िहीं ककया जाएगा जब तक ऐसे व्यल्तत िे न्द्यायनिणयष ि अधिकारी द्वारा अधिरोवपत शाल्स्त की रकम का दस प्रनतशत अधिकरण के पास जमा ि कर दी गई हो । 39ग. पयाषवरण संरिण निधि में जमा की जािे वािी रकम की शाल्स्त—जहां कोई न्द्यायनिणषयि अधिकारी, यथाल्स्थनत, िारा 37, िारा 38, िारा 38क या िारा 39 के अिीि शाल्स्त या अनतररतत शाल्स्त अधिरोवपत करता है वहां पयाषवरण (संरिण) अधिनियम, 1986 (1986 का 29) की िारा 16 के अिीि स्थावपत पयाषवरण (संरिण) निधि में जमा करेगी । 39घ. िारा 21 के उपबंिों के अिुपािि में असफिता के लिए तथा शाल्स्त के संदाय में असफिता के लिए अपराि—(1) जो कोई, िारा 21 के उपबंिों का अिुपािि करिे में असफि रहता है, ऐसी प्रत्येक असफिता के लिए, कारावास से ल्जसकी अवधि एक वर् ष और छह मास से कम की िहीं हो सकेगी ककन्द्तु छह वर् ष तक की हो सकेगी, तथा असफिता जारी रहिे की दशा में, अनतररतत जुमाषिे से जो प्रथम ऐसी असफिता की दोर्लसद्धि के पश्चात ् ऐसे प्रत्येक हदि ल्जसके दौराि ऐसी असफिता जारी रहती है, के लिए पचास हजार रुपए तक हो सकेगी ।
(2) यहद उपिारा (1) में निहदषष्ट असफिता, दोर्लसद्धि की तारीि के पश्चात ् एक वर् ष की कािावधि से आगे जारी रहती है तो अपरािी कारावास से, ल्जसकी अवधि दो वर् ष स े अन्द्यूि िहीं होगा, ककंतु जो सात वर् ष तक का हो सकेगा या जुमाषिे स,े दंडिीय होगा ।
(3) जहां कोई व्यल्तत इस अधिनियम के उपबंिों के अिीि, यथाल्स्थनत, अधिरोवपत शाल्स्त या अनतररतत शाल्स्त का ऐसे अधिरोपण से िब्बे हदि की अवधि के भीतर संदाय करिे में असफि रहता है तो वह कारावास स,े ल्जसकी अवधि तीि वर्ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से, जो उस पर अधिरोपनत शाल्स्त या अनतररतत शाल्स्त की रकम के दगु ुिे तक का हो सकेगा याvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 263
(1) (2) (3) (4) (5) दोिों से दंडिीय होगा ।
(4) जहां कोई अपराि उपिारा (1), उपिारा (2) और उपिारा (3) के अिीि ककसी कंपिी द्वारा ककया गया हो, वहां ऐसा प्रत्येक व्यल्तत जो उस अपराि के ककए जाते समय उस कंपिी के कारबार के संचािि के लिए उस कंपिी का सीिे और उसके प्रनत उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपिी भी, ऐसे अपराि के लिए दोर्ी समझे जाएंग े तथा तद्िुसार अपिे ववरुद्ि कायवष ाही ककए जािे और दंडडत ककए जािे की दायी होंगे :
परंतु इस उपिारा में अंतववष्ष ट कोई बात का ऐसे ककसी व्यल्तत को, उपिारा (1) या उपिारा (2) या उपिारा (3) में उपबंधित ककसी दंड का भागी िहीं बिाएगी, यहद वह यह साबबत कर देता है कक अपराि उसकी जािकारी के बबिा ककया गया था या उसिे ऐस े अपराि के ककए जािे का निवारण करिे के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(5) उपिारा (4) में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, जहां कोई अपराि कंपिी द्वारा ककया गया है और यह साबबत हो जाता है कक अपराि, कंपिी के ककसी निदेशक, प्रबिं क, सधचव या अन्द्य अधिकारी की, सम्मनत या मौिािुकूिता से ककया गया है या उस अपराि का ककया जािा उसकी ककसी उपेिा के कारण मािा जा सकता है, वहां कंपिी का निदेशक, प्रबंिक, सधचव या अन्द्य अधिकारी भी उसी अपराि का दोर्ी समझा जाएगा और तद्िुसार अपिे ववरुद्ि कायवष ाही ककए जािे और दंडडत ककए जािे का भागी होगा । स्पष्टीकरण—इस िारा के प्रयोजिों के लिए,— (क) “कंपिी” के अन्द्तगतष कोई निगलमत निकाय, फम,ष न्द्यास, सोसाइटी और कोई अन्द्य व्यल्ततयों का संगम भी हैं ;
(ि) “निदेशक” के अन्द्तगतष , यथाल्स्थनत, कंपिी का निदेशक, फम ष का भागीदार, सोसाइटी का सदस्य या न्द्यास या व्यल्ततयों के ककसी संगम का सदस्य भी हैं ।”; (ई) िारा 43 की उपिारा (1) में, िंड (क) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत:्— “(कक) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी या उसके द्वारा इस निलमत्त प्राधिकृत कोई अधिकारी ;”;
(उ) िारा 53 की उपिारा (1) में, िंड (छ) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत:्— “(ज) िारा 39क की उपिारा (1) के अिीि न्द्यायनिणाषयि अधिकारी द्वारा जांच करिे और शाल्स्तयां अधिरोवपत करिे की रीनत ।”।264 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5)
22. 1981 61 राष्रीय कृवर् और िारा 56 में, उपिारा (2) के स्थाि पर, निम्िलिखित ग्रामीण ववकास बकैं उपिाराएं रिी जाएंगी, अथाषत:्— अधिनियम, 1981 “(2) यहद कोई व्यल्तत, ककसी बहीिेिा या अन्द्य दस्तावेज को पेश करिे में या कोई वववरण या जािकारी देिे में असफि रहता है, जो, ल्जसे देिा या पेश करिा इस अधिनियम के उपबंिों के अिीि उसका कतव्ष य है, असफि रहेगा तो वह शाल्स्त के लिए, जो प्रत्येक असफिता के लिए एक िाि पचास हजार रुपए तक हो सकेगी और जारी रहिे वािी असफिता की दशा में अनतररतत शाल्स्त, जो उस प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि असफिता ऐसी पहिी असफिता के पश्चात ् जारी रहती है, के लिए सात हजार पांच सौ रुपए तक हो सकेगी, दायी होगा ।
(3) उपिारा (2) के अिीि न्द्यायनिणाषयक शाल्स्त के प्रयोजि के लिए, राष्रीय बकैं उस व्यल्तत पर सूचिा तामीि करेगा, ल्जससे यह कारण बतािे की अपेिा की जाती है कक सूचिा में ववनिहदषष्ट रकम को शाल्स्त के रूप में अधिरोवपत तयों िहीं ककया जाए और ऐसे व्यल्तत को सुिे जािे का युल्ततयुतत अवसर भी तयों िहीं प्रदाि ककया जाए ।
(4) इस िारा के अिीि राष्रीय बकैं द्वारा अधिरोवपत कोई शाल्स्त उस तारीि से चौदह हदि की अवधि के भीतर संदेय होगी ल्जस हदि राष्रीय बकैं द्वारा जारी िोहटस में रकम के संदाय की मांग की जाएगी और ककसी व्यल्तत द्वारा ऐसी अवधि के भीतर रालश का संदाय की असफिता की दशा में, उस ित्रे में, जहां वह व्यल्तत ल्स्थत है, अधिकाररता रििे वाि े प्रिाि लसववि न्द्यायािय ककए गए निदेश पर उद्गहृ ीत की जा सकेगी :
परंतु राष्रीय बकैं द्वारा या इस निलमत्त राष्रीय बकैं द्वारा प्राधिकृत ककसी अधिकारी द्वारा ककए गए आवेदि के लसवाय न्द्यायािय को कोई निदेश िहीं ककया जाएगा ।
(5) न्द्यायािय जो उपिारा (4) के अिीि निदेश करता है, व्यल्तत द्वारा संदेय रकम को ववनिहदषष्ट करते हुए प्रमाणपत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाणपत्र उसी प्रकार से प्रवत्तृ िीय होगा मािो वह ककसी लसववि वाद में न्द्यायािय द्वारा की गई डडक्री में ककया गया हो ।
(6) ककसी व्यनतक्रम या चूक के संबंि में ककसी व्यल्तत के ववरुद्ि ककसी न्द्यायािय में कोई लशकायत फाइि िहीं की जाएगी ल्जसके संबंि में राष्रीय बकैं द्वारा उपिारा (2) के अिीि कोई शाल्स्त अधिरोवपत की गई है ।
(7) जहां कोई लशकायत उपिारा (1) में निहदषष्ट प्रकृनत के उलिंघि या चूक के बाबत ककसी न्द्यायािय में ककसी व्यल्तत के ववरुद्ि फाइि की गई है, तो उपिारा (2) के अिीि व्यल्तत पर कोई शाल्स्त अधिरोवपत करिे की कोई कायषवाहीvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 265
(1) (2) (3) (4) (5) आरंभ िहीं की जाएगी । 23 1986 10 मसािा बोड ष (अ) िारा 26 में, “जुमाषिे स,े जो पांच सौ रुपए तक का हो अधिनियम, 1986 सकेगा, दंडिीय होगा”, शब्दों के स्थाि पर, “शाल्स्त का दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी और पश्चातवती असफिता के लिए शाल्स्त, जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी, का दायी होगा” शब्द रिे जाएंगे । (आ) िारा 27 में, दीघ ष पंल्तत में, “वह कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा, या जुमाषिे से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोिों से, दंडिीय होगा”, शब्दों के स्थाि पर, “शाल्स्त, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी और पश्चातवती उलिंघि के लिए शाल्स्त, जो एक िाि रुपए तक हो सकेगी, से दायी होगा” शब्द रिे जाएंगे । (इ) िारा 28 का िोप ककया जाएगा । (ई) िारा 29 में, “कारावास से, ल्जसकी अवधि एक वर् ष तक की हो सकेगी, या जुमाषिे से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोिों से, दण्ड िीय होगा”, शब्दों के स्थाि पर, “शाल्स्त, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी और पश्चातवती उलिंघि के लिए शाल्स्त, जो एक िाि रुपए तक हो सकेगी, से दायी होगा” शब्द रिे जाएंगे । (उ) िारा 30 में, “वह कारावास से जो छह मास तक का हो सकेगा, या जुमाषि े से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोिों से, और जारी रहिे वािे उल िंघि की दशा में, अनतररत त जुमाषिे से, जो प्रत् येक हदि के लिए ल्जसके दौराि ऐसा उल िंघि ऐसे प्रथम उलि ंघि के लिए दोर्लसद्धि के पश् चात ् जारी रहता है, पचास रुपए तक का हो सकेगा, दंडिीय होगा”, शब्दों के स्थाि पर, “शाल्स्त, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी और पश्चातवती उलिंघि के लिए शाल्स्त, जो एक िाि रुपए तक हो सकेगी, का दायी होगा” शब्द रिे जाएंगे । (ऊ) िारा 30 के पश्चात,् निम्िलिखित िारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— “30क. शाल्स्तयों का न्द्यायनिणयष ि—(1) िारा 26, िारा 27, िारा 29 और िारा 30 के अिीि शाल्स्तयों के न्द्यायनिणषयि के लिए बोड ष का सधचव, यथाल्स्थनत, बोड ष में निदेशक की पंल्तत से अन्द्यूि ककसी अधिकारी या केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत ककसी अधिकारी को ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, ककसी जांच को करिे के लिए और संबधं ित व्यल्तत को सुिे जािे का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि करिे के पश्चात ् शाल्स्त अधिरोवपत करिे के लिए न्द्यायनिणयष ि अधिकारी होिे के लिए नियुतत करेगा ।
(2) जो कोई न्द्यायनिणषयि अधिकारी के आदेश से व्यधथत होता है, बोड ष के सधचव को ऐसे आदेश की प्राल्प्त की266 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) तारीि से साठ हदि के भीतर ऐसे प्ररूप और रीनत में, जो ववहहत की जाए, अपीि प्रस्ततु कर सकेगा ।
(3) साठ हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् कोई अपीि ग्रहण की जा सकेगी यहद अपीिाथी बोड ष के सधचव का यह समािाि कर देता है कक उस अवधि के भीतर अपीि ि करिे के उसके पास पयाषप्त कारण थे ।
(4) ककसी अपीि का तब तक निपटाि िहीं ककया जाएगा जब तक कक अपीिाथी को सुि े जािे का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि िहीं कर हदया जाता है ।
(5) उपिारा (2) के अिीि अपीि का फाइि करिे की तारीि से साठ हदि के भीतर उसका निपटारा ककया जाएगा ।
(6) उपिारा (1) के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त की रकम, यहद संदत्त िहीं की जाती है, तो उसकी भ-ू राजस्व के बकाया के रूप में वसूिी की जाएगी ।”। (ऋ) िारा 38 की उपिारा (2) के िंड (ड) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंतःस्थावपत ककए जाएंग,े अथाषत:्— ‘(डक) िारा 30क की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत ;
(डि) िारा 30क की उपिारा (2) के अिीि अपीि प्रस्तुत करिे का प्ररूप और रीनत ।’।
24. 1986 29 पयाषवरण (संरिण) (अ) िारा 2 में, िंड (ग) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अधिनियम, 1986 अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत:्— ‘(गक) “निधि” से िारा 16 के अिीि स्थावपत की गई पयाषवरणीय संरिण निधि अलभप्रेत है ;’। (आ) िारा 10 की उपिारा (2), उपिारा (3) और उपिारा (4) के स्थाि पर, निम्िलिखित उपिाराएं रिी जाएंगी अथाषत:्— “(2) ककसी पररसंकटमय पदाथ ष की संभिाई का कोई उद्योग संचािि या प्रकक्रया करिे वािा प्रत्येक व्यल्तत उपिारा
(1) के अिीि केन्द्रीय सरकार द्वारा सशतत व्यल्तत को इस उपिारा के अिीि कायों को करिे के लिए, जो अपेक्षित हों, सहायता प्रदाि करेगा, और यहद वह बबिा ककसी उधचत कारण के ऐसा करिे में असफि रहता है तो वह िारा 14ि के अिीि उपबंधित शाल्स्त का दायी होगा ।
(3) यहद कोई व्यल्तत जािबूझकर केन्द्रीय सरकार द्वारा उपिारा (1) के अिीि सशतत ककसी व्यल्तत को उसके उपिारा
(1) या उपिारा (2) के अिीि कृत्यों के निवषहि में वविंब करता है या व्यविाि उत्पन्द्ि करता है, वह िारा 14ि के अिीि उपबंधित शाल्स्त का दायी होगा ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 267
(1) (2) (3) (4) (5)
(4) दंड प्रकक्रया संहहता, 1973 (1974 का 2) के उपबंि, जहां तक वह तिाशी या अलभग्रहण को िागू होते हैं, इस िारा के अिीि उस संहहता की िारा 94 के अिीि जारी वारंट के प्राधिकार के अिीि तिाशी या अलभग्रहण को िागू होंगे ।”। (इ) िारा 14 के पश्चात ् निम्िलिखित िाराएं अंत:स्थावपत की जाएंगी, अथाषत:्— “14क. िारा 7 और िारा 8 के उलिंघि के लिए शाल्स्त—
(1) यहद कोई व्यल्तत िारा 7 या िारा 8 या तद्िीि बिाए गए नियमों का उलिंघि करता है, वह ऐसे प्रत्येक उलिंघि के लिए शाल्स्त का दायी होगा, जो एक िाि रुपए से कम की िहीं होगी ककंतु पन्द्रह िाि रुपए तक की हो सकेगी ।
(2) जहां कोई व्यल्तत उपिारा (1) के अिीि ऐसा उलिंघि करिा जारी रिता है, वहां वह प्रत्येक हदि के लिए ल्जसके दौराि ऐसा उलिंघि जारी रहता है, पचास हजार रुपए की अनतररतत शाल्स्त का दायी होगा। 14ि. िारा 9, िारा 10 और िारा 11 के उलिंघि के लिए शाल्स्त,—(1) यहद कोई व्यल्तत िारा 9, िारा 10 या िारा 11 के उपबंिों का या उि िाराओं के अिीि जारी आदेशों या निदेशों का उलिंघि करता है तो वह ऐसे प्रत्येक उलिंघि के संबंि में शाल्स्त का दायी होगा, जो दस हजार रुपए से कम िहीं होगी ककंतु जो पांच िाि रुपए तक की हो सकेगी ।
(2) जहां कोई व्यल्तत उपिारा (1) के अिीि उलिंघि जारी रिता है, वहां वह प्रत्येक हदि के लिए ल्जसके दौराि ऐसा उलिंघि जारी रहता है, दस हजार रुपए की अनतररतत शाल्स्त का दायी होगा ।” (ई) िारा 15 स े िारा 17 के स्थाि पर, निम्िलिखित िाराएं रिी जाएंगी, अथाषत:्— “15. अधिनियम, नियमों, आदेशों और निदेशों के उपबंिों के उलिंघि के लिए शाल्स्त—(1) जहां कोई व्यल्तत इस अधिनियम के ककन्द्हीं उपबंिों या तद्िीि बिाए गए नियमों या निकािे गए आदेशों या हदए गए निदेशों का उलिंघि करता है या पािि िहीं करता है, ल्जिके लिए ककसी शाल्स्त का उपबंि िहीं है, वहां वह ऐस े प्रत्येक उलिंघि के लिए शाल्स्त का दायी होगा, जो दस हजार रुपए से कम की िहीं होगी ककन्द्तु जो पन्द्रह िाि रुपए तक की हो सकेगी ।
(2) जहां ऐसा कोई व्यल्तत उपिारा (1) के अिीि उलिघं ि जारी रिता है वहां वह प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि ऐसा उलिंघि जारी रहता है, दस हजार रुपए की अनतररतत शाल्स्त का दायी होगा ।268 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) 15क. कंपनियों द्वारा उलिघं ि के लिए शाल्स्त—(1) जहां कोई कंपिी इस अधिनियम के ककसी उपबंि का उलिंघि करती है वहां ऐसे प्रत्येक उलिंघि के लिए शाल्स्त का दायी होगी, जो एक िाि रुपए स े कम की िहीं होगी ककन्द्तु जो पन्द्रह िाि रुपए तक की हो सकेगी ।
(2) जहां ऐसी कोई कंपिी उपिारा (1) के अिीि उलिंघि जारी रिती है वहां कंपिी प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि ऐसा उलिंघि जारी रहता है, एक िाि रुपए की अनतररतत शाल्स्त की दायी होगी । 15ि. सरकारी ववभाग द्वारा उलिंघि के लिए शाल्स्त—
(1) जहां केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के ककसी ववभाग द्वारा इस अधिनियम के ककन्द्हीं उपबंिों का उलिंघि ककया गया है तो ववभागाध्यि एक मास के उसके मूि वेति के समतुलय शाल्स्त का दायी होगा : परंतु ऐसा ववभागाध्यि ऐसे उलिंघि के लिए दायी िहीं होगा, यहद वह साबबत कर देता है कक उलिंघि उसकी जािकारी या अिुदेशों के बबिा ककया गया था या उसिे ऐसे उलिंघि को निवाररत करिे के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) जहां उपिारा (1) के अिीि कोई उलिंघि ववभागाध्यि से लभन्द्ि ककसी अधिकारी की ककसी अिाविािी के कारण हुआ है तो ऐसा अधिकारी एक मास के उसके मूि वेति के समतुलय शाल्स्त का दायी होगा : परंतु ऐसा अधिकारी उलिंघि के लिए दायी िहीं होगा, यहद वह साबबत कर देता है कक उसिे ऐस े उलिंघि से बचिे के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी । 15ग. न्द्यायनिणाषयक अधिकारी—(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अिीि शाल्स्तयों का अविारण करिे के प्रयोजिों के लिए जांच करिे और ऐसी रीनत, जो ववहहत की जाए, में शाल्स्त अधिरोवपत करिे के लिए, भारत सरकार के संयुतत सधचव या राज्य सरकार के सधचव से अन्द्यूि पंल्तत के ककसी अधिकारी को न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के रूप में नियुतत कर सकेगी :
परंतु केन्द्रीय सरकार उतिे न्द्यायनिणाषयक अधिकाररयों को नियुतत कर सकेगी, जो अपेक्षित हों ।
(2) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी— (क) ककसी ऐसे व्यल्तत को ल्जसे इस अधिनियम और तद्िीि बिाए गए नियमों के उपबंिों का उलिंघि करिे या पािि ि करिे के लिए अलभकधथत ककया गया है या जो मामिे के तथ्यों और पररल्स्थनतयों की जािकारी रिता है, बुिा सकेगा ;vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 269
(1) (2) (3) (4) (5) (ि) ऐसे व्यल्तत से अपेिा कर सकेगा कक वह उसके कब्जे में ककसी अलभिेि, रल्जस्टर या अन्द्य दस्तावेज या ककसी अन्द्य ऐसे दस्तावेज, जो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी की राय में ववर्य-वस्तु के लिए सुसंगत हो सके, प्रस्तुत करे ।
(3) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी, ककसी व्यल्तत को मामि े में सुिवाई का युल्ततयुतत अवसर देिे के पश्चात,् और यहद, ऐसी जांच पर, उसका यह समािाि हो जाता है कक संबंधित व्यल्तत िे अधिनियम के या तद्िीि बिाए गए नियमों के उपबंिों का उलिघंि ककया है या उिका अिुपािि िहीं ककया है तो वह, यथाल्स्थनत िारा 14क, िारा 14ि, िारा 15, िारा 15क या िारा 15ि के उपबंिों के अिुसार ऐसी शाल्स्त अधिरोवपत कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
(4) न्द्यायनिणाषयि अधिकारी, उपिारा (3) के अिीि शाल्स्त की मात्रा का न्द्यायनिणषयि करते समय, निम्िलिखित का सम्यक् ध्याि रिेगा, अथाषत:्— (क) ऐस े उलिघंि या अििुपािि के कारण संघानतत या प्रभाववत जिसंखया और िेत्र;
(ि) ऐस े उलिघंि या अििुपािि की आवनृत और कािावधि; (ग) वग ष के ऐसे व्यल्ततयों की भेद्यता, ल्जिके ऐसे उलिंघि या अििुपािि से प्रनतकूि रूप से प्रभाववत होिे की संभाविा है; (घ) ऐस े उलिघंि या अििुपािि, यहद कोई हो, के पररणामस्वरूप ककसी व्यल्तत को हुए या होिे के लिए संभाववत िुकसाि, (ङ) ऐसे उलिंघि या अििुपािि से व्युत्पन्द्ि अिुधचत अलभिाभ; और (च) ऐसा अन्द्य कारक, जो ववहहत ककया जाए ।
(5) यथाल्स्थनत, िारा 14क, िारा 14ि, िारा 15, िारा 15क या िारा 15ि के उपबंिों के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त की रकम राष्रीय हररत अधिकरण अधिनियम, 2010 (2010 का 19) की िारा 17 के साथ पहठत िारा 15 के अिीि अिुतोर् या प्रनतकर का संदाय करिे के दानयत्व के अनतररतत होगी । 15घ. अपीि—(1) इस अधिनियम के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा पाररत आदेश से व्यधथत कोई व्यल्तत, राष्रीय हररत अधिकरण अधिनियम, 2010 (2010 का 19) की िारा 3 के अिीि स्थावपत राष्रीय हररत अधिकरण को अपीि कर सकेगा ।
(2) उपिारा (1) के अिीि प्रत्येक अपीि उस तारीि से, ल्जसको न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा ककए गए आदेश की प्रनत व्यधथत व्यल्तत द्वारा प्राप्त की जाती है, साठ हदि के270 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) भीतर फाइि की जाएगी।
(3) अधिकरण, अपीि के पिकारों को सुिवाई का अवसर प्रदाि करिे के पश्चात ् ऐसे आदेश, ल्जसके ववरुद्ि अपीि की गई है, को पुष्ट करिे या उपांतररत करिे या अपास्त करिे वािा ऐसा आदेश पाररत कर सकेगा, जो वह ठीक समझ े ।
(4) जहां उपिारा (1) के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के ककसी आदेश के ववरुद्ि कोई अपीि की गई है, वहां ऐसी अपीि अधिकरण द्वारा तब तक ग्रहण िहीं की जाएगी जब तक ऐसे व्यल्तत िे न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा अधिरोवपत शाल्स्त की रकम की दस प्रनतशत रकम अधिकरण के पास जमा ि कर दी हो । 15ङ. पयाषवरण (संरिण) निधि में जमा की जािे वािी शाल्स्त रकम—जहां िारा 14क, िारा 14ि, िारा15, िारा 15क या िारा 15ि के अिीि, यथाल्स्थनत, कोई शाल्स्त या अनतररतत शाल्स्त अधिरोवपत की जाती है, वहां ऐसी शाल्स्त की रकम िारा 16 के अिीि स्थावपत पयाषवरण संरिण निधि में जमा की जाएगी । 15च. शाल्स्त या अनतररतत शाल्स्त का संदाय करिे के लिए असफिता के लिए अपराि—(1) जहां कोई व्यल्तत िारा 14क, िारा 14ि, िारा 15, िारा 15क या िारा 15ि के अिीि, यथाल्स्थनत, शाल्स्त या अनतररतत शाल्स्त का ऐसे अधिरोपण के िब्बे हदि के भीतर संदाय करिे में असफि रहता है वहां वह ऐसे कारावास, जो तीि वर् ष तक का हो सकेगा या ऐसे जुमाषिे से, जो शाल्स्त की रकम के दगु िे तक का हो सकेगा या दोिों के लिए दायी होगा ।
(2) जहां उपिारा (1) के अिीि कम्पिी द्वारा कोई अपराि ककया गया है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यल्तत, जो अपराि के समय, कम्पिी के कारबार के संचािि के लिए कम्पिी का सीिे तौर पर भारसािक था और उसके प्रनत उत्तरदायी था, अपराि का दोर्ी समझा जाएगा और वह तद्िुसार अपिे ववरुद्ि कायवष ाही ककए जािे के लिए और दल्ण्डत ककए जािे का दायी होगा :
परन्द्तु इस उपिारा में अंतववष्ष ट कोई बात, उपिारा (1) में उपबंधित ककसी दंड के लिए ककसी ऐस े व्यल्तत को दायी िहीं बिाएगी, यहद वह साबबत कर देता है कक अपराि उसकी जािकारी के बबिा ककया गया था या उसिे ऐसे अपराि के ककए जािे को रोकिे के लिए सभी सम्यक् तत्परता का प्रयोग ककया था ।
(3) उपिारा (2) में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, जहां कोई अपराि ककसी कम्पिी द्वारा ककया गया है और यहvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 271
(1) (2) (3) (4) (5) साबबत हो जाता है कक वह अपराि कंपिी के ककसी निदेशक, प्रबंिक, सधचव या अन्द्य अधिकारी की सहमनत या मौिािुकूिता से ककया गया है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंिक, सधचव या अन्द्य अधिकारी भी उस अपराि का दोर्ी समझा जाएगा और तद्िुसार अपिे ववरुद्ि कायवष ाही ककए जािे और दंडडत ककए जािे का दायी होगा । स्पष्टीकरण—इस िारा के प्रयोजिों के लिए,— (क) “कंपिी” के अन्द्तगषत निगलमत निकाय, फम,ष न्द्यास, सोसाइटी और व्यल्ततयों का कोई अन्द्य संगम आता है;
(ि) “निदेशक” के अन्द्तगतष , यथाल्स्थनत, कंपिी का निदेशक, फम ष का भागीदार, सोसाइटी या न्द्यास के सदस्य या व्यल्ततयों के ककसी संगम का सदस्य आते हैं ।’। (उ) अध्याय 3 के पश्चात,् निम्िलिखित अध्याय अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :— “अध्याय 3क ननधध, िेिा और संपरीक्षा
16. पयाषवरण सरंिण निधि—(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा, पयाषवरण सरंिण निधि िामक निधि की स्थापिा कर सकेगी।
(2) निधि में निम्िलिखित जमा ककया जाएगा— (क) वायु (प्रदर्ू ण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (1981 का 14) के अिीि और इस अधिनियम के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त की रकम; (ि) निधि से ककए गए ववनििािों में से प्राप्त ब्याज या अन्द्य आय; और (ग) ऐसे स्त्रोतों से कोई अन्द्य रकम, जो ववहहत की जाए ।
(3) निधि निम्िलिखित के लिए उपयोल्जत की जाएगी— (क) पयाषवरण के सरंिण के लिए जागरूकता, लशिा और अिुसंिाि का संवििष ; (ि) वायु (प्रदर्ू ण का निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (1981 का 14) और इस अधिनियम के अिीि उद्देश्यों और प्रयोजिों के प्राल्प्त के लिए िचे;
(ग) ऐसे अन्द्य प्रयोजि, जो ववहहत ककए जाए ।
(4) केन्द्रीय सरकार, निधि के प्रशासि के लिए और उससे संबंधित या उसके आिुर्ंधगक अन्द्य ववर्यों के लिए, ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, प्रशासक अधिसूधचत करेगी ।272 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5)
(5) केन्द्रीय सरकार, शाल्स्तयों की ऐसी रकम की पचहत्तर प्रनतशत रकम राज्य सरकारों या संघ राज्यिेत्र प्रशासिों को आबहं टत करेगी ल्जसे निधि में जमा ककया गया है । 16क. निधि के िेिा और उसकी संपरीिा—(1) केन्द्रीय सरकार, पयाषवरण सरंिण निधि के संबंि में पथृ क िेिाओं और अन्द्य सुसंगत अलभिेिों को बिाए रिेगी और भारत के नियंत्रक महािेिापरीिक के परामश ष से ऐसे प्ररूप में, जो ववहहत ककया जाए, िेिाओं का वावर्कष वववरण तैयार करेगी।
(2) निधि के िेिे भारत के नियंत्रक महािेिापरीिक द्वारा ऐसे अन्द्तरािों पर, जो उसके द्वारा अविाररत ककए जाएं, संपरीक्षित ककए जाएंग े और उस पर संपरीिा ररपोटष सहहत ऐसे संपरीक्षित िेिे केन्द्रीय सरकार को वावर्कष रूप से अग्रेवर्त ककए जाएंगें । 16ि. वावर्कष ररपोटष—केन्द्रीय सरकार, पयाषवरण संरिण निधि के संबंि में अपिी वावर्कष ररपोटष तैयार करेगी, ल्जसमें इस अधिनियम के अिीि पररभावर्त अपिे कक्रयाकिापों का पूरा िेिा इस प्रकार से तैयार ककया जाएगा, जैसा ववहहत ककया जाए और वपछिे ववत्तीय वर् ष के दौराि प्रत्येक ववत्तीय वर् ष के लिए भारत के नियंत्रक-महािेिापरीिक द्वारा दी गई िेिा परीिा ररपोटष के साथ संसद् के प्रत्येक सदि के समि उस े रिवाएगी । (ऊ) िारा 19 में, िंड (क) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :— “(कक) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी या उसके द्वारा इस निलमत्त प्राधिकृत कोई अधिकारी ;”;
(ऋ) िारा 24 के स्थाि पर, निम्िलिखित िारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— “24. अन्द्य ववधियों का प्रभाव—इस अधिनियम के और इसके अिीि बिाए गए नियमों के उपबंि या इसके अिीि ककए गए आदेशों को तत्समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधि में ककसी असंगत बात के होते हुए भी प्रभावी होंग े ।”। (ए) िारा 25 की उपिारा (2) के िंड (छ) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :— “(छक) िारा 15ग की उपिारा (1) के अिीि न्द्यायनिणषयाक अधिकारी द्वारा जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करि े की रीनत और उपिारा (4) के िंड (च) के अिीि शाल्स्त की मात्रा नििाषररत करिे के लिए अन्द्य कारक ;
(छि) िारा 16 की उपिारा (2) के िंड (ग) के अिीि अन्द्य रकम ;vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 273
(1) (2) (3) (4) (5) (छग) िारा 16 की उपिारा (3) के िंड (ग) के अिीि अन्द्य प्रयोजि के लिए ; (छघ) िारा 16 की उपिारा (4) के अिीि निधि के प्रशासि ; (छङ) िारा 16क की उपिारा (1) के अिीि निधि के िेिा के रिरिाव और िेिाओं का वावर्कष वववरण तैयार करिे का प्ररूप ;
(छच) िारा 16ि के अिीि निधि की वावर्कष ररपोटष तैयार करिे का प्ररूप ;”।
25. 1987 53 राष्रीय आवास बकैं (अ) िारा 33ि के पश्चात,् निम्िलिखित िारा अंत:स्थावपत अधिनियम, 1987 की जाएगी, अथाषत ् :— “33ग. िेिापरीिकों के ववरुद्ि कारषवाई करिे की शल्तत—जहां कोई िेिापरीिक, िारा 33 के अिीि राष्रीय आवास बकैं या ररजव ष बकैं द्वारा हदए गए ककसी निदेश या ककए गए ककसी आदेश का अिुपािि करिे में असफि रहता है, तब ररजव ष बकैं सुिे जािे का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि करिे के पश्चात,् ररजव ष बकैं द्वारा ववनियलमत ककसी भी अल्स्तत्व के िेिा परीिक के रूप में कतव्ष यों के निवहषि करिे से एक समय पर अधिकतम तीि वर् ष की अवधि के लिए हटा या वल्जतष कर सकेगा ।”। (आ) िारा 49 में,—
(i) उपिारा (2) और उपिारा (2ि) का िोप ककया जाएगा;
(ii) उपिारा (3) के िंड (कक) का िोप ककया जाएगा;
(iii) उपिारा (4) का िोप ककया जाएगा । (इ) िारा 52क में,—
(I) पाश्व ष शीर् ष में, “जुमाषिा” शब्द के स्थाि पर, “शाल्स्त” शब्द रिा जाएगा;
(II) उपिारा (1) में,—
(i) िंड (क) में, “पांच हजार” शब्दों के स्थाि पर, “पच्चीस हजार” शब्द रिे जाएंगे;
(ii) िंड (ि) में,— (क) “या िंड (कक)” शब्दों, कोष्ठकों और अिरों का िोप ककया जाएगा ; (ि) “पांच िाि” शब्दों के स्थाि पर, “दस िाि” शब्द रिे जाएंगे; (ग) “पच्चीस हजार” शब्दों के स्थाि पर, “एक िाि” शब्द रिे जाएंगे;274 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5)
(III) उपधारा (1) के पश्चात,् निम्िलिखित उपधाराएं अंत:स्थापपत की जाएंगी, अथाात ्:— “(1क) यदि कोई व्यक्तत या आवास पवत्त संस्थाि, जो एक कंपिी है, कोई बही, िेिा या अन्य िस्तावेज प्रस्तुत करि ेया कोई कथि या सूचिा िेिे में असफि रहता है, तो इस अधधनियम के उपबंधों के अधीि ऐसे व्यक्तत या आवास पवत्त संस्थाि का कतव्ा य है कक वह प्रस्तुत करे या िे, यथाक्स्थनत, राष्ट्रीय आवास बकैं या ररजवा बकैं , ऐसे व्यक्तत या आवास पवत्त संस्थाि पर प्रत्येक उल्िंघि या चूक के संबंि में ऐसी शाक्स्त अधधरोपपत कर सकेगा, जो एक िाि पचास हजार रुपए से अधधक की िही ंहोगी और जहां ऐसा उल्िंघि या चूक जारी रहती है, वहां प्रथम हदि के पश्चात ् प्रत्येक दिि के लिए ऐसी अनतररतत शाक्स्त, जो सात हजार पांच सौ रुपए तक की हो सकेगी, िायी होगा । (1ि) जहां कोई िेिापरीक्षक, धारा 33 के अधीि, यथाक्स्थनत, राष्ट्रीय आवास बकैं या ररजवा बकैं द्वारा दिए गए ककसी नििेश या ककए गए ककसी आिेश का अिुपािि करि े में असफि रहता है, तो उस पर िस िाि रुपए से अिधधक की शाक्स्त अधधरोपपत की जा सकेगी । (1ग) यदि (िेिापरीक्षक से लिन्ि) कोई व्यक्तत या आवास पवत्त संस्थाि, जो कंपिी है, यथाक्स्थनत, राष्ट्रीय आवास बकैं या ररजवा बकैं द्वारा, अध्याय 5 के ककसी उपबंध के अधीि दिए गए ककसी नििेश या ककए गए ककसी आिेश का अिुपािि करि े में असफि रहता है, तो, यथाल्स्थनत, राष्ट्रीय आवास बकैं या ररजवा बकैं ऐसे व्यक्तत या आवास पवत्त संस्थाि पर ऐसी शाक्स्त अधधरोपपत कर सकेगा, जो िस िाि रुपए से अिधधक या ऐसे उल्िंघि या चूक में अंतपवष्ट्ा ट रकम की िोगुिी होगी ; जहा ं रकम मात्रात्मक है, जो िी अधधक हो और जहां ऐसा उल्िंघि या चूक जारी रहती है, वहां पहिे दिि के पश्चात ्प्रत्येक दिि के लिए एक िाि रुपए तक की अनतररतत शाल्स्त हो सकेगी । (1घ) जहां इस अधधनियम के ककसी अन्य उपबंध का उल्िंघि ककया जाता है या इस अधधनियम की ककसी अन्य अपेिा या इसके अधीि अधधरोपपत ककसी आदेश, ववनियम या निदेश के अिुपािि में चूक की जाती है, यथाक्स्थनत, राष्ट्रीय आवास बकैं या ररजव ाबकैं , , ऐसे उल्िंघि या चूक का िोषी है, ककसी व्यक्तत या आवास पवत्तीय संस्थाि, जो एक कंपिी है पर प्रत्येक उल्िंघि या चूक के लिए एक िाि रुपए से अिधधक की शाल्स्त अधिरोवपत कर सकेगा और यदि यह सतत ् प्रकृनत की है तो ऐसे प्रत्येक उल्िंघि या चूक के लिए ल्जसके दौराि ऐसा उलिंघि या चूक जारी रहती है पहिे दिि के पश्चात ्प्रत्येक दिि के लिए िस हजार रुपए तक की शाल्स्त अधिरोवपत कर सकेगा ।";vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 275
(1) (2) (3) (4) (5)
(IV) उपधारा (2) में,—
(i) “उपधारा (1)” शब्ि, कोष्ठकों और अंक के स्थाि पर “यह धारा” शब्ि, कोष्ठक और अंक रि ेजाएंगे ;
(ii) “आवास पवत्त संस्था” शब्ि, िोिों स्थािों पर जहा ंव ेआते हैं, के स्थाि पर “व्यक्तत या आवास पवत्त सस्ं था” शब्ि रि ेजाएंग े;
(V) उपधारा (3) में,—
(i) “आवास पवत्त संस्था पर तामीि” शब्िों के स्थाि पर“व्यक्तत या आवास पवत्त संस्था पर तामीि” शब्ि रि ेजाएंग े;
(ii) “आवास पवत्त संस्था का ऐसी अवधध के िीतर उस धिरालश का संिाय करिे में असफि रहिे की िशा में”, शब्िों के स्थाि पर, “व्यक्तत या आवास पवत्त संस्था के ऐसी अवधध के िीतर उस धिरालश का संिाय करि े में असफि रहि े की िशा में”, शब्ि रि ेजाएंगे ;
(iii) “जहां आवास पवत्त संस्था का रक्जस्रीकृत कायाािय”, शब्िों के स्थाि पर, “यथाक्स्थनत, जहां ऐसा व्यक्तत मामूिी तौर पर निवास करता है या जहां आवास पवत्त संस्था का रक्जस्रीकृत कायाािय”शब्ि रिे जाएंगे ;
(VI) उपधारा (4) में, “पवत्त संस्था द्वारा संिेय”, शब्िों के स्थाि पर, “पवत्त संस्था या व्यक्तत द्वारा संिेय” शब्द रिे जाएंगे ।
26. 1988 59 मोटर याि (अ) धारा 192क की उपधारा (1) में,— अधधनियम, 1988 (i) “और दस हजार रुपए का जुमाषिा” शब्दों के स्थाि पर “या दस हजार रुपए का जुमाषिा या दोिों” शब्द रिे जाएंगे;
(ii) परंतुक का िोप ककया जाएगा । (आ) िारा 200 में, उपिारा (1) के स्थाि पर निम्िलिखित उपिारा रिी जाएगी, अथाषत:्—
(1) धारा 177, धारा 177क, धारा 178, धारा 179, धारा 180, धारा 181, धारा 182, 182क की उपधारा (1) या उपधारा (3) या उपधारा
(4), 182ि, धारा 183 की उपधारा (1) या उपधारा (2), धारा 184 के स्पष्टीकरण का िंड (ग), धारा 186, धारा 189, धारा 190 की उपधारा (2), धारा 192, धारा 192क, धारा 192ि की उपधारा (3), धारा 194, धारा 194क, धारा 194ि, धारा 194ग, धारा 194घ, धारा 194ङ, धारा 194च, धारा 196 , धारा 198 और िारा 201 के अधीि दंडिीय ककसी अपराध का, चाहे वह इस अधधनियम के प्रारंभ के पूव ा ककया गया हो या पश्चात ् ककया गया हो, ऐस े अधधकाररयों या प्राधधकाररयों द्वारा और ऐसी रकम के लिए जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधधसूचिा द्वारा, इस निलमत्त पवनिदिाष्ट करे, या तो अलियोजि संल्स्थत ककए जाि ेके पूव ाया पश्चात ्शमि ककया जा सकेगा ।”। (इ) धारा 215 की उपधारा (3) में, निम्िलिखित परंतुक अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाात:्—276 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) “परंतु जहां राज्य सरकार िे ल्जिा सड़क सुरिा सलमनत गहठत िहीं की है, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचिा द्वारा, ऐसे क्जिे के लिए सलमनत का गठि कर सकेगी जो एक अध्यि और ऐसे अन्द्य सदस्य जो यह आवश्यक समझे तथा ऐसी शतों और निबंििों पर जो अविाररत की जाएं, से लमिकर बिेगी ।
27. 1989 24 रेि अधिनियम, िारा 144 की उपिारा (2) के स्थाि पर, निम्िलिखित उपिारा 1989 रिी जाएगी, अथाषत:्— “(2) ककसी व्यल्तत को रेि के ककसी सवारी डडब्बे में या रेि के ककसी भाग पर भीि मांगिा अिुज्ञात िहीं होगा ।”।
28. 1991 6 िोक दानयत् व बीमा (अ) िारा 2 में,— अधिनियम, 1991 (i) िंड (जक) को उसके िंड (जि) के रूप में संखयांककत ककया जाएगा और इस प्रकार पुिःसंखयांककत िंड (जक) से पूव ष निम्िलिखित िंड अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत:्— ‘(जक) "संपपत्त" में पररसंकटमय पिाथों के पवनिमााण, प्रसंस्करण, उपचार, पैकेज, िंडारण, पारेषण, प्रयोग, संग्रहण, िाश, संपररवतिा , अंतरण या ऐसी अन्य प्रकियाओं के कारण ककसी इकाई या उपिम के द्वारा प्रिापवत या क्षनत की गई कोई प्राइवेट संपपत्त या िोक संपपत्त सक्म्मलित है ।”।
(ii) िंड (ञ) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंत: स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत:्— “(ट) उि शब्दों और पदों के जो इस अधिनियम में प्रयुतत हैं और पररभावर्त िहीं है ककन्द्तु संपवत्त अंतरण अधिनियम, 1882 (1882 का 4) और पयाषवरण (संरिण) अधिनियम, 1986 (1986 का 29) में पररभावर्त हैं, वही अथ ष होंगे जो क्रमशः उि अधिनियमों में है ।”;
(आ) िारा 3 की उपिारा (1) के स्थाि पर, निम्िलिखित उपिारा रिी जाएगी, अथाषत:्— “(1) जहां ककसी दघु टष िा के पररणामस् वरूप (कमकष ार स े लभन्द्ि ) ककसी व् यल्त त की मत्ृ यु हो जाती है या उस े िनत पहुंचती है या संपवत्त को कोई िुकसाि पहुंचता है वहां स् वामी ऐसी रकम या ऐस े अन्द्य अिुतोर् जो ववहहत ककए जाएं, को प्रनतपूनत ष करिे के लिए दायी होगा— (क) घातक दघु टष िा के कारण मत्ृ यु;
(ि) पूण ष रूप से या आंलशक निःशततता के कारण उपगत धचककत्सीय व्यय; (ग) आंलशक निःशततता के कारण मजदरू ी की हानि; (घ) अन्द्य िनत या बीमारी; (ङ) प्राइवेट संपवत्त की िनत; याvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 277
(1) (2) (3) (4) (5) (च) ऐसा अन्द्य िुकसाि या िनत जो ववहहत की जाए।”। (इ) िारा 4 में,— (क) उपिारा (1) के स्थाि पर, निम्िलिखित रिा जाएगा अथाषत:्— “(1) ककसी उपक्रम का प्रत् येक स् वामी ककसी पररसंकटमय पदाथ ष का रिरिाव प्रारम् भ करिे के पूवष ककसी उपक्रम या इकाई के लिए एक या अधिक बीमा पालिलसयां िेगा ल्जसमें या ल्जिमें ऐसे बीमा की संववदाओं के लिए उपबन्द् ि होगा ल्जसके द्वारा वह ऐसा अिुतोर् देिे या िारा 3 की उपिारा (1) में निहदषष्ट ऐसी रकम की प्रनतपूनत ष करिे की देयता के लिए बीमाकृत है । स्पष्टीकरण—इस उपिारा के प्रयोजिों के लिए, यह स्पष्ट ककया जाता है कक निम्िलिखित के अिीि प्रचािि के लिए पथृ क सहमनत रिते हुए कोई उपक्रम—
(i) जि (प्रदर्ू ण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 (1974 का 6); और
(ii) वाय ु (प्रदर्ू ण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (1981 का 14), पथृ क इकाई के रूप में समझा जाएगाः परंतु जि ववश्वास (उपबंिों का संशोिि) अधिनियम, 2023 के प्रारंभ से तत्काि पूव ष ककसी पररसंकटमय पदाथ ष के रिरिाव को करिे वािा कोई स्वामी यथासंभवशीघ्र तथा उस अधिनियम के प्रारंभ से एक वर् ष की अवधि के भीतर ऐसी बीमा पॉलिसी या पॉलिलसयां िेगा।”;
(ि) उपिारा (2क) के स्थाि पर, निम्िलिखित उपिारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— ‘(2क) ककसी उपिम या इकाई के लिए ककसी स्वामी द्वारा िी गई या िवीकृत कराई गई कोई िी बीमा पालिसी उस रकम के लिए होगी जो ककसी पररसंकटमय पिाथ ा को हथाििे वािे उस उपिम या इकाई के स्वामी के स्वालमत्वािीि या नियंत्रणाधीि उपिम की समाित्त पूंजी की रकम से कम रकम की िहीं होगी और ऐसी रकम तक हो सकेगी, जो पवदहत की जाए ककन्द्तु पांच सौ करोड़ रुपए से अधधक की िहीं होगी । स्पष्टीकरण—इस उपिारा के प्रयोजिों के लिए, ककसी स्वामी के संबंि में जो कंपिी िहीं है “समादत्त पूंजी” से बीमा की संववदा की तारीि पर उपक्रम की सभी आल्स्तयों और स्टॉक का बाजार मूलय अलभप्रेत है ।’।278 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) (ई) िारा 6 में, उपिारा (1) के पश्चात,् निम्िलिखित उपिारा अंतःस्थावपत की जाएगी, अथाषत:्— “(1क) जहां कोई िनत ऐसे पररसंकटमय पदाथ ष के ववनिमाषण, प्रसंस्करण, उपचार, पैकेज, भंडारण, पारेर्ण, प्रयोग, संग्रहण, िाश, संपररवतिष , अंतरण या ऐसी अन्द्य प्रकक्रयाओं के कारण ककसी िोक संपवत्त या प्राइवेट संपवत्त को काररत हुई है, तो ऐसी संपवत्त के पुिःसंग्रहण के दावे के लिए आवेदि को किेतटर को ऐसी संपवत्त के स्वामी या ऐसे अन्द्य व्यल्तत द्वारा ककया जा सकेगा, जैसा ववहहत ककया जाए ।”। (उ) िारा 7 में, उपिारा (8) के पश्चात,् निम्िलिखित उपिारा अंतःस्थावपत की जाएगी, अथाषत:्— “(9) जहां ऐसे पररसंकटमय पदाथों के ववनिमाषण, प्रसंस्करण, उपचार, पैकेज, भंडारण, पारेर्ण, प्रयोग, संग्रहण, िाश, संपररवतिष , अंतरण या ऐसी अन्द्य प्रकक्रयाओं के कारण पयाषवरण प्रभाववत होता या उसकी िनत होती है, तो केन्द्रीय सरकार, यथाल्स्थनत, केन्द्रीय प्रदर्ू ण नियंत्रण बोड ष या राज्य प्रदर्ू ण नियंत्रण बोड ष द्वारा ककए गए आवेदि पर उस रीनत में जो ववहहत की जाए इस प्रकार काररत िनत के प्रत्यावतिष के लिए पयाषवरण अिुतोर् निधि से निधि आवंहटत कर सकेगी ।”। (ऊ) िारा 7क में, उपिारा (1) के पश्चात,् निम्िलिखित उपिारा अंतःस्थावपत की जाएगी, अथाषत:्— “(1क) उपिारा (1) के अिीि स्थावपत अिुतोर् निधि में निम्िलिखित जमा ककया जाएगा,— (क) िारा 4 की उपिारा (2ग) में निहदषष्ट रकम;
(ि) इस अधिनियम के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त की रकम; (ग) निधि से ककए गए ववनििािों से प्राप्त ब्याज या अन्द्य आय; (घ) ऐसे अन्द्य संसाििों से कोई अन्द्य रकम, जो ववहहत की जाए;”; (ऋ) िारा 14 और िारा 15 के स्थाि पर, निम्िलिखित िाराए ं रिी जाएंगी, अथाषत:्— “14. उलिंघि के लिए शाल्स्त —(1) जहां कोई व्यल्तत जो िारा 4 की उपिारा (1), उपिारा (2), उपिारा (2क) या उपिारा (2ग) के ककन्द्हीं उपबंिों में से ककसी का उल िंघि करता है, वह बीमा पॉलिसी के वावर्कष प्रीलमयम की रकम के बराबर शाल्स्त के लिए दायी होगा और ल्जसे ऐसे प्रीलमयम की रकम के दगु िु े तक ब़िाया जा सकेगा ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 279
(1) (2) (3) (4) (5)
(2) जहां उपिारा (1) के अिीि कोई उलिंघि निरंतर हुआ हो, ऐसे न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा अनतररतत शाल्स्त अधिरोवपत की जा सकेगी, जो प्रत्येक माह या उस अवधि के दौराि ल्जसमें उलिंघि निरंतर हुआ हो, के लिए संदत्त की जािे वािी प्रीलमयम की रकम से अधिक िहीं होगी ।”।
15. आदेशों का अिुपािि करिे के लिए शाल्स्त—(1) जहां कोई व्यल्तत िारा 12 के अिीि जारी ककसी निदेश का अिुपािि िहीं करता है, तो वह ऐसी शाल्स्त के लिए दायी होगा जो दस हजार रुपए स े कम िहीं होगी ककन्द्तु ल्जसे पन्द्रह िाि रुपए तक ब़िाया जा सकेगा ।
(2) जहां कोई व्यल्तत उपिारा (1) के अिीि निरंतर अििुपािि करता है, तो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा अधिरोवपत की जािे वािी ऐसी अनतररतत शाल्स्त के लिए दायी होगा जो प्रनतहदि दस हजार रुपए से कम िहीं होगी ल्जसके दौराि ऐसा अििुपािि िगातार हुआ हो।
(3) जहां कोई स्वामी धारा 9 के अधीि जारी नििेशों का अिुपािि िहीं करता है या धारा 10 या धारा 11 की उपधारा (1), उपिारा (2) या उपधारा (3) के अधीि अपिे कृत्यों के निवाहि में ककसी व्यक्तत को बाधा पहुंचाता है, तो वह ऐसी शाक्स्त के लिए िायी होगा जो दस हजार रुपए से कम िहीं होगी ककन्द्तु क्जसे पन्द्रह िाि रुपए तक बढाया जा सकेगा ।
(4) जहां कोई व्यल्तत उपिारा (3) के अिीि अििुपािि जारी रिता है, तो वह प्रनतहदि दस हजार रुपए की अनतररतत शाल्स्त के लिए उत्तरदायी होगा ल्जसके दौराि ऐसा अििुपािि जारी रहता है । 15क. न्द्यायनिणाषयक अधिकारी—(1) केन्द्रीय सरकार, िारा 14 या िारा 15 के अिीि शाल्स्तयां अविारण करिे के प्रयोजि के लिए, िेत्र पर अधिकाररता रििे वािे ल्जिा मल्जस्रेट को या भारत सरकार के निदेशक के पद से अन्द्यूि पंल्तत के अधिकारी को या राज्य सरकार के संयुतत सधचव की पंल्तत से अन्द्यूि पंल्तत के अधिकारी को, ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए, जांच करि े और शाल्स्त अधिरोवपत करि े के लिए न्द्यायनिणाषयक अधिकारी नियुतत कर सकेगी :
पंरतु केन्द्रीय सरकार, कई न्द्यायनिणाषयक अधिकारी नियुतत कर सकेगी, जैसा अपक्षेित हो ।
(2) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी मामिे के तथ्यों और पररल्स्थनतयों से पररधचत ककसी व्यल्तत को साक्ष्य देिे या कोई दस्तावेज प्रस्तुत करिे के लिए समि भेज सकेगा और उपल्स्थनत को प्रवत्तृ कर सकेगा, जो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी की राय में जांच की ववर्य-वस्तु के लिए उपयोगी हो सकता है280 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) या सुसंगत हो सकता है और यहद ऐसी जांच पर उसका यह समािाि हो जाता है कक संबद्ि व्यल्तत, िारा 4 की उपिारा
(1), उपिारा (2), उपिारा (2क) या उपिारा (2ग) और िारा 12 के उपबंिों का अिुपािि करिे में असफि रहा है तो वह िारा 14 और िारा 15 के अिीि ऐसी शाल्स्त को अविाररत कर सकेगा, जो वह ठीक समझे : पंरतु कोई ऐसी शाल्स्त संबद्ि व्यल्तत को सुिे जािे का युल्ततयुतत अवसर हदए बबिा अधिरोवपत िहीं की जाएगी । 15ि. अपीि—(1) कोई व्यल्तत, जो िारा 15क के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा पाररत ककए गए आदेश द्वारा व्यधथत है, राष्रीय हररत अधिकरण अधिनियम, 2010 (2010 का 19) की िारा 3 के अिीि स्थावपत ककए गए राष्रीय हररत अधिकरण को अपीि प्रस्तुत कर सकेगा ।
(2) उपिारा (1) के अिीि प्रत्येक अपीि उस तारीि स े साठ हदिों के भीतर फाइि की जाएगी ल्जस हदि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा ककए गए आदेश की प्रनत व्यधथत व्यल्तत द्वारा प्राप्त की जाती है ।
(3) अधिकरण, अपीि के पिोकारों को सुिवाई का अवसर देिे के पश्चात,् उस आदेश, ल्जसके ववरुद्ि अपीि की गई है, को संपुष्ट करिे, उपातं ररत करिे या अपास्त करिे वािा ऐसा आदेश पाररत कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
(4) जहां उपिारा (1) के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के ककसी आदेश के ववरुद्ि अपीि की जाती है, ऐसी अपीि पर अधिकरण द्वारा ववचार तब तक िहीं ककया जाएगा, जब तक कक ऐसे व्यल्तत िे अधिकरण को न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा अधिरोवपत शाल्स्त की रकम का दस प्रनतशत जमा िहीं ककया है ।”। (ए) िारा 16 का िोप ककया जाएगा । (ऐ) िारा 17 के स्थाि पर, निम्िलिखित िाराएं रिी जाएंगी, अथाषत ् :— “17. सरकारी ववभाग द्वारा उलिंघि के लिए शाल्स्त—
(1) जहां इस अधिनियम के ककन्द्हीं उपबंिों का उलिंघि केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के ककसी ववभाग द्वारा ककया जाता है वहां ववभाग का प्रमुि उसके मूि वेति के एक मास के वेति के बराबर शाल्स्त के लिए उत्तरदायी होगा :
परंतु वह ऐसे उलिंघि के लिए दायी िहीं होगा, यहद वह यह साबबत कर देता है कक उलिंघि उसकी जािकारी या अिुदेशों के बबिा ककया था या उसिे उस उलिंघि को ककए जािे का निवारण करिे के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 281
(1) (2) (3) (4) (5)
(2) जहां उपिारा (1) के अिीि कोई उलिंघि ववभाग के प्रमुि से लभन्द्ि, ककसी अधिकारी की उपिे ा के कारण हुआ है, वहां वह मूि वेति के एक मास के वेति के बराबर शाल्स्त के लिए उत्तरदायी होगा : परंतु वह उलिंघि के लिए दायी िहीं होगा, यहद वह यह साबबत कर देता है कक उसिे उस उलिंघि को ककए जािे का निवारण करिे के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी । 17क. शाल्स्त रकम का पयाषवरण राहत कोर् में जमा ककया जािा—यथाल्स्थनत, जहां कोई शाल्स्त या अनतररतत शाल्स्त, िारा 14 या िारा 15 या िारा 17 के अिीि अधिरोवपत की जाती है, वहां ऐसी शाल्स्त की रकम िारा 7क के अिीि स्थावपत पयाषवरण राहत कोर् में जमा की जाएगी । 17ि. शाल्स्त या अनतररतत शाल्स्त के संदाय की असफिता के लिए अपराि—(1) जहां कोई व्यल्तत निम्िलिखित के अधिरोपण के लिए शाल्स्त या अनतररतत शाल्स्त के संदाय में असफि रहता है— (क) यथाल्स्थनत, िारा 14 या िारा 17 के अिीि उलिंघि या निरंतर उलिंघि ;
(ि) िारा 15 के अिीि जारी निदेशों का अििुपािि, ऐसे अधिरोपण के िब्बे हदिों के भीतर, वह कारावास का, जो तीि वर् ष तक हो सकेगा या शाल्स्त स े जो पन्द्रह िाि रुपए तक हो सकेगी या दोिों का दायी होगा ।
(2) जहां अपराि उपिारा (1) के अिीि ककसी कंपिी द्वारा ककया गया है, प्रत्येक व्यल्तत, जो उस समय पर जब अपराि ककया गया, प्रत्यितः कंपिी का सीिे प्रभारी था और कंपिी के कारोबार के संचािि के लिए उत्तरदायी था, साथ ही कंपिी को, ऐसे अपराि का दोर्ी समझा जाएगा और उसके ववरुद्ि तद्िुसार कारषवाई और दंडडत ककए जािे का दायी होगा :
परंतु इस उपिारा में ककसी बात के होते हुए भी, कोई ऐसा व्यल्तत इस अधिनियम में उपबंधित ककसी अपराि का उत्तरदायी िहीं होगा यहद वह यह साबबत कर देता है कक अपराि उसकी जािकारी के बबिा ककया गया था या उसिे ऐसे अपराि को ककए जािे से रोकिे के लिए सभी सम्यक् तत्परता का प्रयोग ककया था ।
(3) उपिारा (2) में ककसी बात के होते हुए भी, जहां कोई अपराि इस अधिनियम के अिीि ककसी कंपिी द्वारा ककया गया है और यह साबबत हो जाता है कक अपराि कंपिी के ककसी निदेशक, प्रबंिक, सधचव या अन्द्य अधिकारी की ओर से सहमनत या मौिािुकूिता या ककसी उपेिा के कारण है, तो ऐसा निदेशक, प्रबंिक, सधचव या अन्द्य अधिकारी ऐसे अपराि का दोर्ी समझा282 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) जाएगा और उसके ववरुद्ि तद्िुसार कायवष ाही और दंडडत ककए जािे का दायी होगा । स्पष्टीकरण—इस िारा के प्रयोजिों के लिए,— (क) “कंपिी” से कोई भी कारपोरेट अलभप्रेत है और इसमें फम ष या अन्द्य व्यल्ष्टयों का संगम भी है ;
(ि) “निदेशक” के अन्द्तगतष कंपिी का निदेशक भी है और फम ष के संबंि में, फम ष में भागीदार है ; (ओ) िारा 23 की उपिारा (2) में,—
(i) िंड (क) के स्थाि पर, निम्िलिखित िंड रिा जाएगा, अथाषत ्:— “(क) िारा 4 की उपिारा (2क) के अिीि ऐसी रकम ;”;
(ii) िंड (ङ) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंतःस्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत:्— “(ङक) िारा 3 की उपिारा (1) के अिीि रकम या अिुतोर् और कोई अन्द्य हानि या िनत ; (ङि) िारा 6 की उपिारा (1क) के अिीि ऐसा अन्द्य व्यल्तत ;
(ङग) िारा 7 की उपिारा (9) के अिीि िनत की प्रनतपूनत ष के लिए निधि के आबंटि की रीनत ; (ङघ) िारा 7क की उपिारा (1क) के िंड (घ) के अिीि अन्द्य स्रोतों से कोई अन्द्य रकम ; (ङङ) िारा 15क की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत ;”;
(औ) अिुसूची का िोप ककया जाएगा।
29. 1995 7 केबि टेिीपवजि (अ) अध्याय 4 के स्थाि पर, निम्िलिखित अध्याय रिा जाएगा िेटवका (पवनियमि) अथाषत:्–– अधधनियम, 1995 "अध्याय 4 शास्स्तयां
16. इस अधधनियम के उपबंिों के उल् िंघि के लिए शाक्स्त––
(1) जो कोई इस अधधनियम के ककसी उपबंि का उल् िंघि करेगा वह–– (क) प्रथम उलिंघि के लिए सिाह या पररनििं ा या चेताविी या ककसी शाल्स्त से, जो बीस हजार रुपए तक की हो सकेगी, या िोिों से ; (ि) तीि वर्ों की अवधि के भीतर प्रत् येक पश्चाr~o ती उलिंघि के लिए सिाह या पररनििं ा या चेताविी या ककसी शाल्स्त से, जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी, या िोिों सहहत,vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 283
(1) (2) (3) (4) (5) ऐसे पदालभहहत अधिकारी द्वारा दायी होगा, जो ववहहत ककया जाए ।
(2) पदालभहहत अधिकारी, िेिबद्ि ककए जािे वाि े कारणों से आदेश द्वारा उपिारा (1) में निहदषष्ट शाल्स्त अधिरोवपत कर सकेगा : परन्द्तु तीि वर्ों स े अधिक अवधि के दौराि तीि स े अधिक बार उलिंघिों के मामिे में पदालभहहत अधिकारी उपिारा (1) में निहदषष्ट शाल्स्त के अनतररतत, अलभलिखित कारणों से आदेश द्वारा अिुदत्त ककए गए रल्जस्रेशि को नििंबबत या प्रनतसंहृत कर सकेगा :
परंतु यह और कक इस उपिारा के अिीि पदालभहहत अधिकारी द्वारा कोई आदेश, सुिवाई ककए जािे के युक्ततयुतत अवसर को प्रिाि ककए बबिा, िही ं ककया जाएगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीि आिेश द्वारा अधधरोपपत ककसी शाक्स्त स ेव्यधथत कोई व्यक्तत िारत सरकार के सधचव या उसके द्वारा प्राधिकृत ऐसे अन्द्य अधिकारी को अपीि कर सकेगा : परन्द्तु ऐसी कोई अपीि ऐसे ककसी आदेश की प्राल्प्त स े तीस हदि की अवधि की समाल्प्त के पश्चात ्स्वीकाय ािही ंहोगी :
परंतु यह और कक कोई अपीि तीस हदि की अवधि की समाल्प्त के पश्चात ् भी ग्रहण की जा सकेगी यहद उसका यह समािाि हो जाता है कक अपीिाथी समय स े अपीि प्रस्तुत करि े से ककसी पयाषप्त कारण स े निवाररत था ।”। (आ) िारा 22 की उपिारा (2) के िंड (घक) के पश्चात,् निम्िलिखित िंड अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत:् –– “(घि) िारा 16 की उपिारा (1) के अिीि पदालभहहत अधिकारी ;”।
30. 1999 47 व् यापार धचह्ि (अ) धारा 106 का िोप ककया जाएगा । अधधनियम, 1999 (आ) धारा 107 की उपधारा (2) में, “कारावास से, ल्जसकी अवधि तीि वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से या दोिों से दंडिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर, “ऐसे व्यल्तत के संपरीक्षित िेिों में यथा संगखणत, कारबार के, यथाल्स्थनत, कुि ववक्रय या आवत ष अथवा ववृत्त की सकि प्रल्प्तयों के आिे प्रनतशत के बराबर रालश या पांच िाि रुपए के बराबर रालश, इिमें से जो भी कम हो, की शाल्स्त का दायी होगा” शब्द रिे जाएंगे । (इ) धारा 108 और धारा 109 का िोप ककया जाएगा । (ई) धारा 112 के पश्चात ्निम्िलिखित धारा अंत:स्थापपत की जाएगी, अथाषत:्–– “112क. शाल्स्तयों का न्द्यायनिणषयि- रल्जस्रार, ककसी आदेश द्वारा, िारा 3 में निहदषष्ट ककसी अधिकारी को इस अधिनियम के उपबंिों के अिीि सुिवाई का उधचत अवसर प्रदाि करिे के पश्चात ् उस रीनत में जो ववहहत की जाए जांच करिे और उस पर शाल्स्त अधिरोवपत करिे तक के लिए, न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के रूप में प्राधिकृत कर सकेगा ।284 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) 112ि. अपीि- (1) जो कोई िारा 112क के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के ककसी आदेश द्वारा व्यधथत है, ऐसे अपीि प्राधिकारी को, ऐसे आदेश की प्राल्प्त की तारीि से साठ हदि के भीतर अपीि कर सकेगा, ल्जसे केन्द्रीय सरकार इस निलमत्त अधिसूचिा द्वारा प्राधिकृत करे, जो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी की पंल्तत से कम से कम एक रैंक से अधिक वािा अधिकारी होगा ।
(2) इस िारा के अिीि की गई प्रत्येक अपीि ऐसे प्ररूप और रीनत में की जाएगी जो ववहहत की जाए ।
(3) कोई अपीि साठ हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् स्वीकृत की जा सकेगी यहद अपीिकताष अपीि प्राधिकारी का यह समािाि कर देता है कक उतत अवधि के भीतर अपीि िहीं करिे का उसके पास पयाप्ष त कारण हदया गया था ।
(4) ककसी अपीि का तब तक निपटाि िहीं ककया जाएगा जब तक अपीिकताष को सुिवाई का उधचत अवसर प्रदाि िहीं कर हदया गया हो ।
(5) उपिारा (1) में निहदषष्ट अपीि प्राधिकारी अपीि को फाइि करिे की तारीि से साठ हदिों के भीतर अपीि का निपटारा करेगा ।
(6) इस अधिनियम में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, यहद कोई व्यल्तत, यथाल्स्थनत िारा 112क के अिीि न्द्यायनिणाषयक प्राधिकारी के आदेश या इस िारा के अिीि अपीि प्राधिकारी के ककसी आदेश का अिुपािि करिे में ववफि होता है, तो ऐस े आदेश के िब्बे हदि के भीतर शाल्स्त के अनतररतत एक िाि रुपए के जुमाषिे या ऐसे कारावास से जो एक वर् ष तक का हो सकेगा या दोिों स े दंडिीय होगा ।”। (उ) धारा 140 में उपधारा (3) के स्थाि पर, निम्िलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत:्–– “(3) आयातकता ा या उसका अलिकताा, चौिह दिि के िीतर यथापूवोतत अपेक्षा का अिुपािि करेगा और यदि वह ऐसा करि े में असफि रहता है तो वह िस हजार रुपए की शाक्स्त के लिए िायी होगा :
परंतु इस धारा के अधीि शाक्स्त ऐसे प्राधधकारी द्वारा इस प्रयोजि के लिए, सीमाशुल्क अधधनियम, 1962 (1962 का 52) के अधीि उद्गहृ ीत और वसूि की जाएगी ।”। (ऊ) िारा 157 की उपिारा (2) में, िंड (xxxiii) के पश्चात ् निम्िलिखित िंड अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत:्–– "(xxxiiiक) िारा 112क के अिीि जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत;
(xxxiiiि) िारा 112ि की उपिारा (2) के अिीि अपीि प्रस्तुत करिे का प्ररूप और रीनत ;”।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 285
(1) (2) (3) (4) (5)
31. 1999 48 माि का िौगोलिक (अ) धारा 37 के पश्चात,् निम्िलिखित धाराएं अंत:स्थापपत की उपिशिा जाएगी, अथाषत:्–– (रक्जस् रीकरण “37क. शाल्स्तयों का न्द्यायनिणषयि- रल्जस्रार, आदेश और संरक्षण) द्वारा, सुिवाई का उधचत अवसर प्रदाि करिे के पश्चात ् उस अधधनियम, 1999 रीनत में जो ववहहत की जाए इस अधिनियम के उपबंिों के अिीि जांच करिे के लिए और शाल्स्त अधिरोवपत करिे के लिए, िारा 3 में निहदषष्ट अधिकारी को न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के रूप में प्राधिकृत कर सकेगा । 37ि. अपीि- (1) जो कोई, िारा 37क के अिीि न्द्यायनिणषाायक अधिकारी के ककसी आदेश द्वारा व्यधथत है आदेश की प्राल्प्त की तारीि से साठ हदि की अवधि के भतीर अपीि प्राधिकारी को अपीि कर सकेगा, जो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी की रैंक से कम स े कम एक रैंक ऊपर होगा, जैसा केन्द्रीय सरकार इस निलमत्त अधिसूचिा द्वारा प्राधिकृत करे ।
(2) इस िारा के अिीि की गई प्रत्येक अपीि ऐसे प्ररूप और रीनत में की जाएगी जो ववहहत की जाए ।
(3) कोई अपीि साठ हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् स्वीकृत की जा सकेगी यहद अपीिकताष अपीि प्राधिकारी का समािाि कर देता है कक उसके पास उस अवधि के भीतर अपीि िहीं करिे का पयाषप्त हेतुक था ।
(4) ककसी अपीि का तब तक निपटाि िहीं ककया जाएगा जब तक अपीिकताष को सुिवाई का उधचत अवसर प्रदाि िहीं कर हदया गया हो ।
(5) उपिारा (1) में निहदषष्ट अपीि प्राधिकारी अपीि को फाइि करिे की तारीि से साठ हदिों के भीतर अपीि का निपटाि करेगा ।
(6) इस अधिनियम में अंतववषष्ट ककसी बात के होते हुए, यहद कोई व्यल्तत, यथाल्स्थनत िारा 37क के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के आदेश या इस िारा के अिीि अपीि प्राधिकारी के आदेश का अिुपािि करिे में ववफि होता है, ऐसे आदेश के िब्बे हदि के भीतर शाल्स्त के अनतररतत एक िाि रुपए के जुमाषि े या ऐस े कारावास स े जो एक वर् ष तक का हो सकेगा या दोिों से दंडिीय होगा ।”। (आ) धारा 42 की उपधारा (2) में, कारावास से, ल्जसकी अवधि तीि वर् ष तक की हो सकेगी, या जुमाषिे से या दोिों से, दंडिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर “ऐसे व्यल्तत के संपरीक्षित िेिों में यथा संगखणत कारबार में, यथाल्स्थनत, कुि ववक्रयों या आवत ष अथवा ववृत्त में सकि प्राल्प्तयों के आिे प्रनतशत के बराबर रालश या पांच िाि रुपए के बराबर रालश, जो भी कम हो, की शाल्स्त का दायी होगा” शब्द रि े जाएंगे ।286 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) (इ) धारा 43 और धारा 44 का िोप ककया जाएगा । (ई) धारा 87 की उपधारा (2) में, िंड (ण) के पश्चात ्निम्िलिखित िंड अन्तःस्थापपत ककया जाएगा, अथाात ्:–– “(णक) धारा 37क के अधीि जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत ;
(णि) िारा 37ि की उपिारा (2) के अिीि अपीि प्रस्तुत करिे का प्ररूप और रीनत ।”।
32. 2000 21 सूचिा प्रौद्योधगकी (अ) िारा 33 की उपिारा (2) में, “कारावास से, जो छह मास अधिनियम, 2000 तक हो सकेगा या जुमाषिे से, जो दस हजार रुपए तक हो सकेगा या दोिों से दंडडत ककया जाएगा” शब्दों के स्थाि पर “ऐसी शाल्स्त के लिए दायी होगा, जो पांच िाि रुपए तक की हो सकेगी” शब्द रि े जाएंगे। (आ) िारा 44 में,––
(i) िंड (क) में, “एक िाि पचास हजार” शब्दों के स्थाि पर “पंरह िाि” शब्द रि े जाएंगे;
(ii) िंड (ि) में, “पांच हजार” शब्दों के स्थाि पर “पचास हजार” शब्द रि े जाएगं े;
(iii) िंड (ग) में, “दस हजार” शब्दों के स्थाि पर “एक िाि” शब्द रि े जाएंगे; (इ) िारा 45 में,––
(i) “नियमों या ववनियमों” शब्दों के स्थाि पर “नियमों, ववनियमों, निदेशों या आदेशों” शब्द रि े जाएंगे;
(ii) “पच्चीस हजार रुपए से अिधिक के प्रनतकर का संदाय करिे या पच्चीस हजार रुपए से अिधिक की शाल्स्त” शब्दों के स्थाि पर निम्िलिखित रिा जाएगा, अथाषत:्–– “ऐसे उलिंघि से प्रभाववत व्यल्तत को प्रनतकर के अनतररतत एक िाि रुपए से अिधिक शाल्स्त, जो कक निम्िलिखित से अधिक िहीं होगी–– (क) मध्यवती, कंपिी या निगलमत निकाय द्वारा दस िाि रुपए ; या (ि) ककसी अन्द्य व्यल्तत की दशा में एक िाि रुपए ।” (ई) िारा 46,––
(i) उपिारा (1) में, “इस अध्याय के अिीि” शब्दों के स्थाि पर “इस अधिनियम के अिीि” शब्द रि े जाएंगे ;
(ii) उपिारा (1क) में, “िनत” शब्द का, दोिों स्थाि पर जहां वह आता है, िोप ककया जाएगा । (उ) िारा 66क का िोप ककया जाएगा।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 287
(1) (2) (3) (4) (5) (ऊ) िारा 67ग की उपिारा (2) में, “कारावास, ल्जसकी अवधि तीि वर् ष तक की हो सकेगी, दंडिीय होगा और जुमाषि े का भी दायी होगा” शब्दों के स्थाि पर “ऐसी शाल्स्त के लिए दायी होगा, जो पच्चीस िाि रुपए तक हो सकेगी” शब्द रि े जाएंगे। (ऋ) िारा 68 की उपिारा (2) में, “कारावास का, ल्जसकी अवधि दो वर् ष से अधिक की िहीं होगी या एक िाि रुपए स े अिधिक के जुमाषिे का या दोिों का दायी होगा” शब्दों के स्थाि पर “शाल्स्त के लिए दायी होगा, जो पच्चीस िाि रुपए तक हो सकेगी” शब्द रि े जाएंगे। (ए) िारा 69ि की उपिारा (4) में, “कारावास, ल्जसकी अवधि तीि वर् ष तक की हो सकेगी दंडडत ककया जाएगा और जुमाषिे का भी दायी होगा” शब्दों के स्थाि पर “कारावास से, जो एक वर् ष तक हो सकेगा या जुमाषिे से, जो एक करोड़ रुपए तक हो सकेगा या दोिों स े दायी होगा” शब्द रि े जाएंगे। (ऐ) िारा 70ि की उपिारा (7) में, “एक िाि” शब्दों के स्थाि पर “एक करोड़” शब्द रि े जाएंगे। (ओ) िारा 72 में, “कारावास से, ल्जसकी अवधि दो वर् ष तक हो सकेगी, या ऐस े जुमाषिे से, जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोिों से, दंडडत ककया जाएगा” शब्दों के स्थाि पर “ऐसी शाल्स्त के लिए दायी होगा, जो पांच िाि रुपए तक की हो सकेगी” शब्द रि े जाएंगे। (औ) िारा 72क में,––
(i) पाश्वशष ीर् ष में, “दंड” शब्द के स्थाि पर, “शाल्स्त” शब्द रिा जाएगा ;
(ii) “वह कारावास से, ल्जसकी अवधि तीि वर् ष तक की हो सकेगी, या जुमाषिे से, जो पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा, या दोिों से, दंडडत ककया जाएगा” शब्दों के स्थाि पर “ऐसी शाल्स्त के लिए दायी होगा, जो पच्चीस िाि रुपए तक हो सकेगी” शब्द रि े जाएंगे ।
33. 2002 60 मेरो रेि (प्रचािि (अ) िारा 6 की उपिारा (2) में, िंड (छ) के पश्चात ् और अिुरिण) निम्िलिखित िंड अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :–– अधिनियम, 2002 “(छक) इस अधिनियम के अिीि शाल्स्तयां उद्ग्रहण करिा और संगहृ ीत करिा ।”। (आ) िारा 59 की उपिारा (2) में,–– “(i) “जुमाषिे से दंडिीय होगा जो दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा” शब्दों के स्थाि पर “शाल्स्त का दायी होगा जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगी” शब्द रि े जाएंगे ;
(ii) “पांच सौ रुपए” शब्दों के स्थाि पर “दस हजार रुपए” शब्द रि े जाएंगे ;”।288 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) (इ) िारा 63 में, “यहद कोई यात्री, ककसी मेरो रेिवे पदिारी द्वारा पररववरत रहिे की चेताविी हदए जािे के पश्चात ् भी, ककसी रेिगाड़ी की छत पर यात्रा करेगा या ककसी रेिगाड़ी के ऐस े भाग, जो याबत्रयों के उपयोग के लिए आशनयत िहीं है पर हठपूवकष यात्रा करेगा या अपिे शरीर का कोई भाग रेिगाड़ी के बाहर निकािेगा तो वह कारावास से, ल्जसकी अवधि एक मास तक हो सकेगी, या जुमाषिे से, जो पचास रुपए तक हो सकेगा अथवा दोिों से दंडिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर “यहद कोई यात्री, ककसी रेिगाड़ी की छत पर यात्रा करेगा या रेिगाड़ी के ऐसे भाग, जो याबत्रयों के उपयोग के लिए आशनयत िहीं है पर हठपूवकष यात्रा करेगा या अपिे शरीर का कोई भाग रेिगाड़ी से बाहर निकािेगा तो वह शाल्स्त का जो पांच हजार रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा” शब्द रि े जाएंग े । (ई) िारा 65 के दीघशष ीर् ष में, “कारावास से, ल्जसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुमाषिे से, जो छह हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोिों से, दण्डिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर “कारावास से, जो दो वर्ष तक हो सकेगा या जुमाषि े से, जो तीस हजार रुपए तक हो सकेगा या दोिों से दंडडत ककया जाएगा” शब्द रिे जाएंगे । (उ) िारा 69 की उपिारा (4) के स्थाि पर निम्िलिखित उपिारा रिी जाएगी, अथाषत:्–– “(4) यहद उपिारा (1) में वखणतष अधिक प्रभार और ककराया या उपिारा (2) में वखणतष अधिक प्रभार और ककराए का कोई अतंर देिे के दानयत्वािीि कोई यात्री उसकी मांग की जािे पर, उस े िहीं देता है या देिे से इंकार करता है तो इस निलमत्त मेरो रेिवे प्रशासि द्वारा प्राधिकृत कोई मैरो रेिवे पदिारी ऐसी संदेय रालश की वसिू ी के लिए, यथाल्स्थनत, ककसी महािगर मल्जस्रेट या प्रथम वग ष न्द्यानयक मल्जस्रेट को आवेदि कर सकेगा, मािो वह जुमाषिा हो ।”। (ऊ) िारा 70 के स्थाि पर, निम्िलिखित िारा रिी जाएगी, अथाषत:्–– “70. रेिगाड़ी के संचार साििों में अिावश्यक रूप से हस्तिेप करिा—यहद कोई यात्री या कोई अन्द्य व्यल्तत, याबत्रयों और रेिगाड़ी के भारसािक मेरो रेि पदिारी के बीच के संचार के लिए मेरो रेि प्रशासि द्वारा रेिगाड़ी में व्यवल्स्थत ककन्द्हीं साििों का उपयोग या उिमें हस्तिेप, युल्ततयुतत और पयाषप्त कारण के बबिा करेगा या मेरो रेि की चेताविी घंटी या आपात स्टॉप पुश या आपात हरप प्रणािी या आपात कॉि प्वाइंट का दरुु पयोग करेगा तो ऐसी शाल्स्त से, जो दस हजार रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा ।”। (ऋ) िारा 80 का िोप ककया जाएगा ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 289
(1) (2) (3) (4) (5) (ए) िारा 82 की उपिारा (1) में, “िारा 65 से िारा 79” शब्दों और अंकों के स्थाि पर, “िारा 65 से िारा 68, िारा 71 स े िारा 79” शब्द और अंक रि े जाएंगे । 34 2003 15 िि-शोिि निवारण अिुसूची के भाग क में,–– अधिनियम, 2002 (i) पैरा 21 के स्थाि पर, निम्िलिखित पैरा रिा जाएगा, अथाषत ् :–– “पैरा 21 व्यापार धिह्न अधधननयम, 1999 (1999 का 47) के अधीन अपराध धारा अपराध का िणनण “103 लमथ्या व्यापार धचहि, पण्य वववरण आहद िगािे के लिए शाल्स्त । 104 ऐसे माि का ववक्रय या ऐसी सेवाएं प्रदाि करि े के लिए शाल्स्त, ल्जस पर लमथ्या व्यापार धचहि या लमथ्या पण्य वववरण िगाया गया है । 105 दसू री या पश्चातवती दोर्लसद्धि के लिए वधितष शाल्स्त । 120 भारत के बाहर ककए गए कृत्यों के लिए भारत में दष्ु प्रेरण का दंड ।”;
(ii) पैरा 22 के स्थाि पर, निम्िलिखित पैरा रिा जाएगा, अथाषत ् :–– “पैरा 22 सूिना प्रौद्योधगकी अधधननयम, 2000 (2000 का 21) के अधीन अपराध धारा अपराध का िणनण “75 अधिनियम का भारत स े बाहर ककए गए अपरािों या उलिंघिों को िागू होिा ।”;
(iii) पैरा 25 का िोप ककया जाएगा ;
(iv) पैरा 27 का िोप ककया जाएगा ।
35. 2006 34 िाद्य सुरिा और (अ) िारा 59 के िंड (i) में, “कारावास से, ल्जसकी अवधि छह मािक अधिनियम, मास तक की हो सकेगी और जुमाषिे से भी, जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्दों के स्थाि पर, “कारावास से जो तीि मास तक 2006 का हो सकेगा और जुमाषि े से भी, जो तीि िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्द रिे जाएंग े । (आ) िारा 61 में,––
(i) पाश्वशष ीर् ष में “दंड” शब्द के स्थाि पर, “शाल्स्त” शब्द रि े जाएंगे ;290 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5)
(ii) “कारावास से, ल्जसकी अवधि तीि मास तक की हो सकेगी और जुमाषि े स े भी, जो दो िाि रुपए तक का हो सकेगा, दंडिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर, “शाल्स्त का, जो दस िाि रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा” शब्द रि े जाएंगे । (इ) िारा 63 में,––
(i) पाश्वशष ीर् ष में “दंड” शब्द के स्थाि पर, “शाल्स्त” शब्द रिा जाएगा ;
(ii) “कारावास से, ल्जसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी और जुमाषिे से भी, जो पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा, दंडिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर, “शाल्स्त का, जो दस िाि रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा” शब्द रि े जाएंगे ।
36. 2006 38 सरकारी प्रनतभूनत िारा 30 में,–– अधिनियम, 2006 (i) उपिारा (1) में, “वह कारावास से, ल्जसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुमाषिे से अथवा दोिों से दंडिीय होगा” शब्दों के स्थाि पर, “बकैं पांच िाि रुपए या ऐसे उलिंघि में अन्द्तवलषित रकम के दगु िे जहां रकम पररमाणात्मक है, जो भी उच्चतर हो, से अिधिक की शाल्स्त अधिरोवपत कर सकेगा और जहां ऐसा उलिंघि जारी रहता है, तो अनतररतत शाल्स्त से जो पहिे हदि के पश्चात ् ल्जसके लिए ऐसा उलिंघि जारी रहता है प्रत्येक हदि के लिए पांच हजार रुपए तक हो सकेगी” शब्द रि े जाएंगे ।
(ii) उपिारा (2) का िोप ककया जाएगा ।
37. 2006 41 छाविी अधिनियम, (अ) िारा 156 का िोप ककया जाएगा। 2006 (आ) िारा 185 की उपिारा (1) के स्थाि पर, निम्िलिखित उपिारा रिी जाएगी, अथाषत:्–– “(1) ककसी छाविी ित्रे में ककसी बोड ष के अिीि ककसी आवश्यक सेवा में नियोल्जत कोई व्यल्तत ककसी संववदा के अभाव में समुधचत प्राधिकार के बबिा युल्ततयुतत कारण के बबिा त्यागपत्र िहीं देगा या ड्यूटी से स्वयं अिुपल्स्थत िहीं होगा और ऐसे त्यागपत्र या ड्यूटी से अिुपल्स्थनत की दशा में, ऐसी प्रकक्रया के अिुसरण में, जो ववहहत की जाए, उसके ववरुद्ि अिुशासिात्मक कायवष ाहहयां आरंभ की जाएंगी ।”। (इ) िारा 286 का िोप ककया जाएगा । (ई) िारा 287 के स्थाि पर, निम्िलिखित िारा रिी जाएगी, अथाषत ् :–– “287. िारा 285 के अिीि अपरािों के लिए व्यल्ततयों की धगरफ्तरी, वस्तुओ ं का अलभग्रहण और अधिहरण—(1) दंड प्रकक्रया संहहता, 1973 (1974 का 2) में अंतववष्ष ट ककसी बातvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 291
(1) (2) (3) (4) (5) के होत े हुए भी, कोई पुलिस अधिकारी अथवा उत्पाद-शुलक अधिकारी न्द्यानयक मल्जस्रेट के आदेश के बबिा और वारंट के बबिा ककसी व्यल्तत को जो िारा 285 के अिीि ककसी अपराि को करता है और ऐसा कोई आसव लिकर या मादक रव्य, ल्जसकी बाबत िारा 285 के अिीि कोई अपराि ककया गया है तथा ऐसे कोई बरति या पररवेष्ठि, ल्जिमें वह लिकर या मादक रव्य रिा है, अलभगहृ ीत कर सकेगा और निरुद्ि कर सकेगा ।
(2) जहां िारा 285 के अिीि वािे अपराि के लिए अलभयुतत व्यल्तत उस िारा के अिीि वािे अपराि के लिए पहिे दोर्लसद्ि ककया जा चुका है, वहां पुलिस थािे का भारसािक अधिकारी, न्द्यानयक मल्जस्रेट की लिखित अिुज्ञा स,े छाविी के अंदर अथवा उस िारा के अिीि पररनिल्श्चत ककन्द्हीं सीमाओं के अंदर ऐसा कोई आसव लिकर या मादक रव्य अलभगहृ ीत कर सकेगा और उस े निरुद्ि कर सकेगा, जो पश्चातवती अपराि के अलभकधथत, ककए जािे के समय ऐसे व्यल्तत का था या उसके कब्जे में था ।
(3) वह न्द्यायािय जो ककसी व्यल्तत को िारा 285 के अिीि अपराि के लिए दोर्लसद्धि करता है, उपिारा (1) या उपिारा (2) के अिीि अलभगहृ ीत ककसी पूरी वस्तु या उसके भाग के अधिहरण का आदेश दे सकेगा ।
(4) दंड प्रकक्रया संहहता, 1973 (1974 का 2) के अध्याय 34 के उपबंिों के अिीि रहते हुए, ऐसी कोई वस्तु, जो उपिारा
(1) या उपिारा (2) के अिीि अलभगहृ ीत की गई है और उपिारा (3) के अिीि समपहृत िहीं की गई है, उस व्यल्तत को िौटा दी जाएगी, ल्जससे वह िी गई थी । (उ) िारा 289 की उपिारा (5) का िोप ककया जाएगा । (ऊ) िारा 314 के परन्द्तुक के िंड (क) में “ऐसे ककसी उपबंि के भंग की दशा में जो चौथी अिुसूची के भाग ि में ववनिहदषष्ट है” शब्दों, अिर और अंक का िोप ककया जाएगा । (ऋ) चौथी अिुसूची के स्थाि पर निम्िलिखित अिुसूची रिी जाएगी, अथाषत ् :–– “चौथी अिुसूची (धारा 314 देखिए) िारा ववर्य़ 183(1) ककसी अस्पताि या और्िािय में उपल्स्थत होिे में असफिता के लिए निष्कासि की सूचिा के पश्चात ् ककसी छाविी में बिे रहिा या पुिःप्रवेश करिा292 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) 296 आग्िेयास्त्र आहद ऐसे छोड़ो़िा कक ितरा पैदा हो जाए 300 िधैंगक अिैनतकता के लिए चतकर िगािा या दरु ाग्रह करिा 304(क) निष्कासि की सूचिा के पश्चात ् छाविी में बिे रहिा या िौट कर आिा ।
38. 2007 51 संदाय और निपटाि (अ) िारा 26 में,–– प्रणािी अधिनियम, (i) उपिारा (3) में, “जुमाषिे से, जो प्रत्येक अपराि के 2007 संबंि में दस िाि रुपए तक का हो सकेगा और यहद वह िगातार ऐसे इंकार करता है, तो ऐसे अनतररतत जुमाषिे से, जो ऐसे प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि ऐसा अपराि जारी रहता है, पच्चीस हजार रुपए तक हो सकेगा, दंडिीय होगा” के स्थाि पर “िारा 30 के उपबंि के अिुसार शाल्स्त के लिए दायी होगा” शब्द और अंक रि े जाएंगे ;
(ii) उपिारा (6) में, “जुमाषिे से, जो दस िाि रुपए तक का हो सकेगा और जहां ऐसा उलिंघि या व्यनतक्रम जारी रहिे वािा है, वहां ऐसे अनतररतत जुमाषिे से, जो उस प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि उलिंघि या व्यनतक्रम जारी रहता है, पच्चीस हजार रुपए तक हो सकेगा, दंडिीय होगा” के स्थाि पर “िारा 30 के उपबंि के अिुसार शाल्स्त के लिए दायी होगा” शब्द और अंक रि े जाएंगे । (आ) िारा 30 में–– (क) पाश्वशष ीर् ष में “जुमाषि”े शब्द के स्थाि पर “शाल्स्तयां” शब्द रिा जाएगा;
(ि) उपिारा (1) में––
(i) “उपिारा (2)” शब्द, कोष्ठक और अंक के बाद “या उपिारा (3)” शब्द, कोष्ठक और अंक अंत:स्थावपत ककए जाएगें;
(ii) “पांच िाि” शब्दों के स्थाि पर “दस िाि” शब्द रिें जाएगें । 39 2009 7 सांल्ख यकी संग्रहण (अ) िारा 9 की उपिारा (2) और उपिारा (3) में “अलभयोजि” अधिनियम, 2008 शब्द के स्थाि पर “शाल्स्त” शब्द रिा जाएगा ;
(आ) अध्याय 4 के स्थाि पर निम्िलिखित अध्याय रिा जाएगा, अथाषत ् :–– “ अध्याय 4 शास्स्तयां और न्यायननणयण न” “15. ववलशल्ष्टयां प्रदाय करिे और अन्द्य उलिंघिों की उपेिा या इंकार करिे के लिए शाल्स्त––(1) जो कोई ककसी िेिा बही, वाउचर, दस् तावेज या अन्द्य कारबार अलभिेि पेश करिे में असफिvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 293
(1) (2) (3) (4) (5) रहता है अथवा जो कोई उसे दी गई या भेजी गई ककसी सचू िा अिुसूची या वववरणी में अपेक्षित ववलशल्ष् टयों को भरिे या उिका प्रदाय करिे में अपेिा करता है या इंकार करता है या जो कोई इस अधिनियम के ककसी उपबंि के अिीि या उिके प्रयोजिों के लिए उससे संबंधित ककसी प्रश्ि या जांच का उत्तर देिे में उपेिा करता है या इंकार करता है या इस अधिनियम के उपबंिों को या तद्िीि बिाए गए नियमों के या इस अधिनियम के अिीि अधिरोवपत ककसी अपेिा के उलिंघि में कृत्य करता है या अिुपािि करिे में असफि रहता है, शाल्स्त का जो एक हजार रुपए तक की हो सकेगी और कंपिी की दशा में ऐसी शाल्स्त जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा ।
(2) ककसी व्यल्तत या कंपिी पर शाल्स्त का अधिरोपण उपिारा (1) के अिीि उसे या उसकी बाध्यताओं से अवमुतत िहीं करेगी, और यहद शाल्स्त के अधिरोपण की तारीि से चौदह हदि के अवसाि के पश्चात,् वह अपेक्षित ववलशल्ष्टयों को देिे में असफि रहता है या रहती है या इस अधिनियम या इसके अिीि बिाए गए ककसी नियम के ककसी उपबंि की या इस अधिनियम के अिीि अधिरोवपत ककसी अपेिा की उपेिा या इंकार या उलिंघि करता है, अनतररतत शाल्स्त जो एक हजार रुपए तक हो सकेगी और ककसी कंपिी की दशा में, अनतररतत शाल्स्त से, जो पहिे हदि के पश्चात ् प्रत्येक हदि के लिए ल्जसके दौराि वह उपेिा, इंकार या उलिंघि जारी रहता है, पांच हजार रुपये तक का हो सकेगी, दायी होगा । 15क न्द्यायनिणाषयक अधिकारी––(1) समुधचत सरकार िारा 15 के अिीि शाल्स्तयों को अविाररत करिे के प्रयोजिों के लिए ऐसी रीनत में, जो ववहहत की जाए कोई जांच करिे के लिए, ककसी अधिकारी को, ल्जस े वह ठीक समझे, न्द्यायनिणाषयक अधिकारी नियुतत कर सकेगी :
परन्द्तु समुधचत सरकार, उतिे न्द्यायनिणाषयक अधिकाररयों की नियुल्तत कर सकेगी, ल्जतिे अपेक्षित हों ।
(2) न्द्यायनिणाषयक अधिकारी मामिे के तथ्य और पररल्स्थनतयों से अवगत ककसी व्यल्तत को सक्ष्य देिे के लिए या कोई दस्तावेज प्रस्तुत करिे के लिए समि कर सकेगा और उपल्स्थत होिे के लिए बुिा सकेगा, जो न्द्यायनिणाषयक अधिकारी की राय में जांच की ववर्य-वस्तु के लिए उपयोगी या सुसंगत हो सकेगा, और यहद ऐसी जांच के पश्चात ् उसका समािाि हो जाए कक संबंधित व्यल्तत इस अधिनियम के उपबंिों का अिुपािि करिे में असफि रहा है, तो वह शाल्स्त अधिरोवपत कर सकेगा :
परन्द्तु ऐसी कोई शाल्स्त संबंधित पिकारों को सुिे जाि े का युल्ततयुतत अवसर प्रदाि ककए बबिा अधिरोवपत िहीं की जाएगी ।294 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) 15ि. अपीि—(1) जो कोई इस अधिनियम के अिीि न्द्यायनिणाषयक अधिकारी द्वारा पाररत ककसी आदेश से व्यधथत है, समुधचत सरकार द्वारा प्राधिकृत न्द्यायनिणाषयक अधिकारी के रैंक से ऊपर के अपीि प्राधिकारी को आदेश की प्राल्प्त की तारीि से तीस हदि के भीतर ऐसे प्ररूप और रीनत में, जो ववहहत ककया जाए, अपीि प्रस्तुत कर सकेगा ।
(2) ककसी अपीि को तीस हदि की अवधि के अवसाि के पश्चात ् ग्रहण ककया जा सकेगा, यहद अपीिाथी अपीि प्राधिकारी का यह समािाि कर देता है कक उस अवधि के भीतर अपीि प्रस्तुत िहीं करिे के उसके पास पयाषप्त कारण थे ।
(3) अपीि प्राधिकारी अपीि के पिकारों को सुिे जािे का अवसर प्रदाि करिे के पश्चात ् ऐसा आदेश कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
(4) उपिारा (1) में निहदषष्ट ककसी अपीि का निपटाि अपीि प्रस्तुत करिे की तारीि से साठ हदि के भीतर ककया जाएगा । 15ग वसूिी––इस अधिनियम में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, यहद इस अधिनियम के अिीि अधिरोवपत शाल्स्त जमा िहीं की जाती है, तो रकम भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूि की जाएगी ।”। (इ) िारा 33 की उपिारा (2) के िंड (घक) में निम्िलिखित िंड अंतस्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ्:–– “(घि) िारा 15क की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे और शाल्स्त अधिरोवपत करिे की रीनत ;
(घग) िारा 15ि की उपिारा (1) के अिीि अपीि प्रस्तुत करिे का प्ररूप और रीनत ।”। 40 2010 1 ववधिक मापववज्ञाि (अ) िारा 25 में, “जुमाषिे से, जो पच् चीस हजार रुपए तक का हो r~o अधिनियम, 2009 सकेगा और द्ववतीय या पश्चा ती अपराि के लिए कारावास से, ल्जसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी और जुमाषिे से भी” शब्दों के स्थाि पर “जुमाषिे से, जो एक िाि रुपए और द्ववतीय अपराि के लिए ऐसे जुमाषिे से, जो दो िाि रुपए तक का हो सकेगा और ततृ ीय तथा पश्चातवती अपराि के लिए ऐसे जुमाषिे से, जो पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्द रिे जाएंगे । (आ) िारा 27 की दीघशष ीर् ष में, “जुमाषि े से, जो बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्ववतीय या पश्चातवती अपराि के लिए कारावास से, ल्जसकी अवधि तीि वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से या दोिों से,” शब्दों के स्थाि पर, “ऐसे जुमाषिे से, जो एक िाि रुपए तथा द्ववतीय अपराि के लिए ऐस े जुमाषिे से, जो दो िाि रुपए तक का हो सकेगा और ततृ ीय तथा पश्चातवती अपराि के लिए ऐसे जुमाषिे से जो चार िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्द रिे जाएंगे ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 295
(1) (2) (3) (4) (5) (इ) िारा 28 में, “वह जुमािष े से ,जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्ववतीय या पश्चातवती अपराि के लिए कारावास से , ल्जसकी अवधि एक वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से या दोिों से,” शब्दों के स्थाि पर, “ऐस े जुमाषिे से, जो पचास हजार रुपए और दसू रे अपराि के लिए ऐसे जुमाषिे से, जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा और ततृ ीय तथा पश्चातवती अपराि के लिए ऐस े जुमाषिे से जो दो िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्द रिे जाएंग े । (ई) िारा 29 में, “जुमाषिे से ,जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्ववतीय या पश्चातवती अपराि के लिए, कारावास स,े ल्जसकी अवधि एक वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से या दोिों से” शब्दों के स्थाि पर, “दसू रे अपराि के लिए पचास हजार रुपए और ऐसे जुमाषिे स,े जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा और ततृ ीय तथा पश्चातवती अपराि के लिए ऐसे जुमाषिे से जो दो िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्द रिे जाएंगे । (उ) िारा 31 में, “जुमाषिे से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्ववतीय या पश्चातवती अपराि के लिए कारावास स े ल्जसकी अवधि एक वर् ष तक की हो सकेगी और जुमाषिे से भी” शब्दों के स्थाि पर, “पच्चीस हजार रुपए और द्ववतीय अपराि के लिए ऐस े जुमाषिे से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा और ततृ ीय तथा पश्चातवती अपराि के लिए ऐसे जुमाषिे से जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्द रिे जाएगं े । (ऊ) िारा 34 में, “जुमाषिे स े ,जो दो हजार रुपए से कम का िहीं होगा ,ककंतु जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्ववतीय या पश्चातवती अपराि के लिए कारावास से ,ल्जसकी अवधि तीि मास से कम िहीं होगी, ककंतु जो एक वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से या दोिों से” शब्दों के स्थाि पर, “ऐसे जुमािष े से, जो पच्चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्ववतीय अपराि के लिए, ऐसे जुमाषिे से जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा ततृ ीय और पश्चातवती अपराि के लिए ऐसे जुमाषिे से जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्द रिे जाएंगे । (ऋ) िारा 35 में, “जुमाषिे से, जो दो हजार रुपए से कम का िहीं होगा, ककंतु जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्ववतीय या पश्चातवती अपराि के लिए कारावास से ,ल्जसकी अवधि तीि मास से कम िहीं होगी, ककंतु जो एक वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से, या दोिों से” शब्दों के स्थाि पर, “जुमाषिे स,े जो पच्चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्ववतीय अपराि के लिए, ऐस े जुमाषिे से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा ततृ ीय और पश्चातवती अपराि के लिए ऐसे जुमाषिे से, जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्द रिे जाएगं े । (ए) िारा 48 में,––296 Hkkjr dk jkti = vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(1) (2) (3) (4) (5) (क) उपिारा (1) और उपिारा (2) में, “िारा 27 से िारा 39” दोिों स्थािों पर, जहा-ं जहां वे आते हैं, शब्दों और अंकों के स्थाि पर, “िारा 27 स े िारा 39, िारा 41” शब्द और अंक रिे जाएंगे । (ि) उपिारा (3) में, “िारा 33 से िारा 37” शब्दों और अंकों के पश्चात ् “िारा 41” शब्द और अंक अंत: स्थावपत ककए जाएंगे ।”।
41. 2012 12 फेतटर ववनियमि (अ) िारा 21 और िारा 22 के स्थाि पर निम्िलिखित िाराएं अधिनियम, 2011 रिी जाएंगी, अथाषत.् :–– “21. शाल्स्तयां––यहद िारा 19 के अिीि ककसी फेतटर द्वारा प्राप्तव्यों के समिुदेशि और प्राप्तव्यों की वसूिी के ककसी संव्यवहार की ववलशल्ष्टया ं फाइि करि े में कोई व्यनतक्रम ककया जाता है, तो ऐसी कंपिी और कंपिी का प्रत्येक अधिकारी, जो व्यनतक्रम करिे वािा व्यल्तत है, ऐसी शाल्स्त से जो पांच िाि रुपए तक की हो सकेगी, दायी होगा और अपराि जारी रहि े की दशा में ऐसी अनतररतत शाल्स्त से, जो ऐसे प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि व्यनतक्रम जारी रहता है, दस हजार रुपए तक की हो सकेगी, जो कक िारा 22 की उपिारा (2) स े उपिारा (4) के उपबंिों के अिुसार ररजव ष बकैं द्वारा अधिरोवपत की जा सकेगी ।
22. ररजव ष बकैं के निदेश का अिुपािि ि करि े के लिए शाल्स्त––
(1) यहद कोई फेतटर िारा 6 के अिीि ररजव ष बकैं द्वारा जारी ककसी निदेश का अिुपािि करि े से असफि रहता है या िारा 19 के अिीि प्राप्तव्यों के ककसी संव्यवहार और प्राप्तव्यों की वसूिी की ववलशल्ष्टया ं फाइि करि े में असफि रहता है, तो ररजव ष बकैं ऐसी शाल्स्त जो पांच िाि रुपए तक की हो सकेगी और असफिता जारी रहि े की दशा में ऐसी अनतररतत शाल्स्त, जो प्रत्येक हदि के लिए, ल्जसके दौराि व्यनतक्रम जारी रहता है, दस हजार रुपए तक की हो सकेगी, अधिरोवपत कर सकेगा ।
(2) ररजव ष बकैं उपिारा (1) या िारा 21 के अिीि शाल्स्त अधिनिणीत करि े के प्रयोजि के लिए, फेतटर को उससे यह हेतुक दलशतष करिे की अपेिा करि े वािी सूचिा की तामीि करेगा कक सूचिा में ववनिहदषष्ट रकम अधिरोवपत तयों िहीं की जािी चाहहए और ऐसे फेतटर को सुिवाई का युल्ततयुतत अवसर भी हदया जाएगा ।
(3) इस िारा या िारा 21 के अिीि ररजव ष बकैं द्वारा अधिरोवपत कोई शाल्स्त, उस तारीि से ल्जसको ररजव ष बकैं द्वारा रालश के सदं ाय की मांग करि े संबंिी सूचिा की फैतटर पर तामीि की जाती है, चौदह हदि कीvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 297
(1) (2) (3) (4) (5) अवधि के भीतर संदेय होगी और फेतटर द्वारा उस अवधि के भीतर रालश का संदाय करिे में असफि रहिे की दशा में, उस िेत्र में, जहां फेतटर का रल्जस्रीकृत कायाषिय ल्स्थत है; अथवा ककसी फेतटर के भारत के बाहर निगलमत होिे की दशा मे, जहां भारत में उसके कारबार का मुखय स्थाि ल्स्थत है, अधिकाररता रििे वािे प्रिाि लसववि न्द्यायािय द्वारा हदए गए ककसी निदेश पर उद्गहृ ीत की जा सकेगी :
परंतु ऐसा कोई निदेश ररजव ष बकैं या इस निलमत्त ररजव ष बकैं द्वारा प्राधिकृत ककसी अधिकारी द्वारा न्द्यायािय को ककए गए आवेदि के लसवाय िहीं हदया जाएगा : परंतु यह और कक ररजव ष बकैं व्यनतक्रम करिे वािे व्यल्तत के चािू िाता, यहद कोई हो, से िामें द्वारा या व्यनतक्रम करिे वािे व्यल्तत के जमा रिी प्रनतभूनतयों के पररसमापि द्वारा शाल्स्त की रकम वसूि कर सकेगा ।
(4) वह न्द्यायािय, जो उपिारा (3) के अिीि कोई निदेश देता है, फेतटर द्वारा संदेय रालश ववनिहदषष्ट करते हुए एक प्रमाणपत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाणपत्र उसी रीनत में प्रवतिष ीय होगा, मािो वह ककसी न्द्यायािय द्वारा लसववि वाद में की गई कोई डडक्री हो ।”।
42. 2016 18 आिार (ववत्तीय और िारा 41 में, “कारावास से, ल्जसकी अवधि एक वर् ष तक की हो अन्द्य सहानयककयों, सकेगी या जुमाषिे से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा या प्रसुवविाओं और कंपिी की दशा में ऐस े जुमािष े से, जो एक िाि रुपए तक का हो सेवाओं का िल्क्ष्यत सकेगा या दोिों से, दंडिीय होगा ।” शब्दों के स्थाि पर “शाल्स्त स,े पररदाि) अधिनियम, जो एक िाि रुपए तक हो सकेगी या कंपिी की दशा में, शाल्स्त स,े 2016 जो दस िाि रुपए तक हो सकेगी, दण्डिीय होगा ।” रिा जाएगा । __________vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 299 भारतीय वायुयान अधिननयम, 2024 (2024 का अधिननयम संखयांक 16) [11 दिसम्बर, 2024] वायुयान की डिजाइन, ववननमााण, अनुरक्षण, कब् जा, उपयोग, प्रचालन, ववक्रय, ननयाात और आयात के ववननयमन और ननयंत्रण के ललए तथा उससे संसक्त और उसके आनुषंधगक ववषयों का उपबंि करने के ललए अधिननयम भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा निम्िलिखित रूप में यह अधिनियलमत हो :— अध्याय 1 प्रारंलभक
1. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त िाम भारतीय वायुयाि अधिनियम, 2024 है । संक्षिप्त िाम, ववस् तार, िागू
(2) इसका ववस् तार सम् पूण ष भारत पर है और यह निम्िलिखित पर िागू होता है— होिा और (क) भारत के िागररक, वे जहां कह ं भी हों ; प्रारंभ । (ि) भारत में पंजीकृत वायुयाि और वायुयाि में सवार व्यक्तत, वे जहां कह ं भी हों ;300 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— (ग) भारत से बाहर पंजीकृत वायुयाि, ककन् तु जो तत् समय भारत में हो या भारत के ऊपर हो और वायुयाि पर सवार व् यक्त त; और (घ) ऐसे व् यक्त त, जो भारत का िागररक िह ं है ककन् तु उसके कारबार का मुख् य स् थाि या स् थायी निवास भारत में है, द्वारा प्रचालित कोई वायुयाि ।
(3) यह उस तार ि को प्रवत्तृ होगा, जो केंद्र य सरकार, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा नियत करे । पररभार्ाएं । 2. इस अधिनियम में, जब तक कक संदभ ष से अन्यथा अपेक्षित ि हो,—
(1) “ववमाि ित्रे ” से कोई निक् चत या सीलमत स्थि या जि िेत्र अलभप्रेत है जो पूणतष : या भागत: वायुयाि के उतरिे, उसके प्रस् थाि करिे और सतह संचिि के लिए आशनयत है और इसके अन्त गतष उस पर क्स्थत और उससे संबद्ि सभी भवि, शेड, जियाि, प्रस् तम् भ और अन्य संरचिाएं सक्म्मलित हैं;
(2) ककसी ववमाि िेत्र के संबंि में, “ववमाि िेत्र निदेश बबन् द”ु से वह अलभहहत बबन् द ु अलभप्रेत है जो वायुयाि के प्रस् थाि करिे या उतरिे के लिए आरक्षित ववमाि िेत्र के उस भाग के ज् यालमतीय केन्द्र पर या उसके समीप िैनतज समति में स् थावपत ककया जाए;
(3) “वायुयाि” से ऐसी कोई मशीि अलभप्रेत है जो पथ्ृ वी की सतह पर वाय ु की प्रनतकियाओं से लभन्ि , वायु की प्रनतकियाओं से वायुमंडि में आिंब प्राप् त कर सकती है;
(4) “वायुयाि दघु टष िा अन्वेर्ण ब्यूरो” से िारा 7 के अिीि गहित वायुयाि दघु टष िा अन्वेर्ण ब्यूरो अलभप्रेत है;
(5) “िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो” से िारा 5 के अिीि गहित िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो अलभप्रेत है;
(6) “डडजाइि” से आंकडों और सूचिा का ऐसा समुच्चय अलभप्रेत है, जो उडि-योग्यता के अविारण के प्रयोजि के लिए ककसी वैमानिक उत्पाद प्रकार उसके संबंधित भाग और यंत्रों को पररभावर्त करता है;
(7) “िागर ववमािि महानिदेशािय” स े िारा 3 के अिीि गहित िागर ववमािि महानिदेशािय अलभप्रेत है;
(8) “नियाषत” से भारत स े बाहर िे जािा अलभप्रेत है;
(9) “आयात” से भारत में िािा अलभप्रेत है;
(10) “अिुरिण” से ककसी वायुयाि, इंजि, िोदक या संबंधित भाग पर कायों का ककया जािा अलभप्रेत है, जो वायुयाि, इंजि, िोदक या संबंधित भाग की उडि- योग्यता की निरंतरता को सुनिक्चत करिे के लिए आवयक है, क्जसके अंतगतष पूर तरह से मरम्मत, निर िण, बदििा, त्रुहट सुिार, और पररवतिष या मरम्मत का प्रनतरूप भी सक्म्मलित है;
(11) “ववनिमाषण” से ऐस े कायों का ककया जािा अलभप्रेत है क्जिमें आहदप्ररूप सहहत वायुयाि, इंजि, िोदक या संबंधित भागों और उसकी प्रयोज्य डडजाइि की अिुरूपता में यंत्र भी है, का समं जि या उत्पादि सक्म्मलित है;
(12) “ववहहत” से इस अधिनियम के अिीि नियमों द्वारा ववहहत अलभप्रेत है ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 301 अध्याय 2 नागर ववमानन महाननिेशालय 1934 का 22 3. (1) वायुयाि अधिनियम, 1934 के अिीि गहित िागर ववमािि महानिदेशािय, िागर ववमािि महानिदेशािय । इस अधिनियम के अिीि गहित ककया गया समझा जाएगा, क्जसकी अध्यिता, केंद्र य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा इस निलमत्त नियुतत ककए गए िागर ववमािि महानिदेशक के रूप में पदालभहहत ककसी अधिकार द्वारा की जाएगी ।
(2) िागर ववमािि महानिदेशािय, इस अधिनियम और इसके अिीि बिाए गए नियमों में ववनिहदषष्ट ववर्यों के बारे में, सुरिा अन्विे ा और ववनियामक कृत्य करिे के लिए उत्तरदायी होगा ।
(3) िागर ववमािि महानिदेशािय का प्रशासि, िागर ववमािि महानिदेशक में निहहत होगा ।
(4) केंद्र य सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आदेश द्वारा निदेश दे सकेगी कक िागर ववमािि महानिदेशक द्वारा प्रयोग की जा सकिे वाि कोई शक्तत, केंद्र य सरकार द्वारा इस निलमत्त ववशेर् रूप से सशतत ककए गए ककसी अन्य अधिकार या प्राधिकार द्वारा भी प्रयोग की जा सकेगी ।
4. (1) िागर ववमािि महानिदेशक या केंद्र य सरकार द्वारा इस निलमत्त ववशेर् रूप िागर ववमािि महानिदेशक की स े सशत त कोई अन् य अधिकार , समय-समय पर, आदेश द्वारा, इस अधिनियम और निदेश जार तद् िीि बिाए गए नियमों के उपबंिों से संगत, िारा 10 की उपिारा (2) के िंड (ि), िंड करिे की (ङ), िंड (छ), िंड (झ), िंड (ञ), िंड (ट), िंड (ि), िंड (ड), िंड (ढ़), िंड (ण), िंड शक्त त । (त), िंड (थ), िंड (द), िंड (ि), िंड (ब), िंड (यि), िंड (यग), िंड (यघ), और िंड (यच) में ववनिहदषष् ट ककसी ववर्य के संबंि में, ऐसी ककसी दशा में, जब िागर ववमािि महानिदेशक या ऐसे अन् य अधिकार का समािाि हो जाता है कक भारत की सुरिा के हहत में या वायुयािों के प्रचािि की सुरिा सुनिक् चत करिे के लिए ऐसा करिा आव यक है, ककसी ववमाि िेत्र का उपयोग करिे वािे या वायुयाि प्रचाििों, वायु यातायात नियंत्रण, ववमाि िेत्र का अिुरिण और प्रचािि, संचार, संचािि, निगरािी और वायु यातायात प्रबंि कायों के ववरुद्ि तथा ववधिववरुद्ि हस्तिेप के कृत्यों के ववरुद्ि िागर ववमािि की सुरिा में िगे ककसी व् यक्त त या व् यक्त तयों को, निदेश जार कर सकेगा।
(2) उपिारा (1) के अिीि जार ककए गए प्रत्य ेक आदेश का अिुपािि, ऐस े व् यक्त त द्वारा ककया जाएगा क्जसको ऐसा निदेश जार ककया गया है । अध्याय 3 नागर ववमानन सुरक्षा ब्यूरो 1934 का 22 5. (1) वायुयाि अधिनियम, 1934 के अिीि गहित िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो, िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो । इस अधिनियम के अिीि गहित ककया गया समझा जाएगा, क्जसकी अध्यिता केंद्र य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा इस निलमत्त नियुतत ककए गए िागर ववमािि महानिदेशक के रूप में पदालभहहत ककसी अधिकार द्वारा की जाएगी ।
(2) िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो, इस अधिनियम या इसके अिीि बिाए गए नियमों में ववनिहदषष्ट िागर ववमािि सुरिा से संबंधित ववर्यों के बारे में, ववनियामक और अन्वेिा कृत्य करिे के लिए उत्तरदायी होगा ।
(3) िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो का प्रशासि, िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो महानिदेशक में निहहत होगा ।302 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(4) केंद्र य सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आदेश द्वारा निदेश दे सकेगी, कक िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो महानिदेशक द्वारा प्रयोग की जा सकिे वाि कोई शक्तत, केंद्र य सरकार द्वारा इस निलमत्त ववशेर् रूप से सशतत ककए गए ककसी अन्य अधिकार या प्राधिकार द्वारा भी प्रयोग की जा सकेगी । िागर ववमािि 6. (1) िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो महानिदेशक या केंद्र य सरकार द्वारा इस सुरिा ब्यूरो निलमत्त ववशेर् रूप स े सशतत कोई अन्य अधिकार , समय-समय पर आदेश द्वारा, इस महानिदेशक की अधिनियम और उसके अिीि बिाए गए नियमों के उपबंिों से संगत, िारा 10 की निदेश जार करिे की शक्तत । उपिारा (2) के िंड (झ), िंड (ञ), िंड (ण), िंड (यङ) और िंड (यछ) में ववनिहदषष्ट ककन्ह ं ववर्यों के संबंि में, उस दशा में, जहां िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो महानिदेशक या ऐसे अधिकार का यह समािाि हो जाता है कक भारत की सुरिा के हहत में या िागर ववमािि प्रचाििों की सुरिा सुनिक्चत करिे के लिए, ऐसा करिा आवयक है, ककसी ववमाि िेत्र का उपयोग करिे वािे, या वायुयाि प्रचाििों, वायु यातायात नियंत्रण, ववमाि िेत्र को अिुरिण और प्रचािि या ववधि ववरुद्ि हस्तिेप के कृत्यों के ववरुद्ि िागर ववमािि सुरिा में नियोक्जत ककसी व्यक्तत या ककन्ह ं व्यक्ततयों को, निदेश जार कर सकेगा ।
(2) प्रत्येक व्यक्तत, क्जसे उपिारा (1) के अिीि आदेश जार ककया जाता है, ऐस े आदेश का अिुपािि करेगा । अध्याय 4 वायुयान िर्ु टा ना अन्वेषण ब्यूरो वायुयाि दघु टष िा 7. (1) वायुयाि अधिनियम, 1934 के अिीि गहित वायुयाि दघु टष िा अन्वेर्ण 1934 का 22 अन्वेर्ण ब्यूरो । ब्यूरो, इस अधिनियम के अिीि गहित ककया गया समझा जाएगा, क्जसकी अध्यिता केंद्र य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा इस निलमत्त नियुतत ककए गए वायुयाि दघु टष िा अन्वेर्ण ब्यूरो महानिदेशक के रूप में पदालभहहत ककसी अधिकार द्वारा की जाएगी ।
(2) वायुयाि दघु टष िा अन्वेर्ण ब्यूरो, इस अधिनियम या इसके अिीि बिाए गए नियमों में ववनिहदषष्ट वायुयाि दघु टष िाओं या घटिाओं के अन्वेर्ण से संबंधित ववर्यों के बारे में, कृत्य करिे के लिए उत्तरदायी होगा ।
(3) वायुयाि दघु टष िा अन्वेर्ण ब्यूरो का प्रशासि, वायुयाि दघु टष िा अन्वेर्ण ब्यूरो महानिदेशक में निहहत होगा ।
(4) केंद्र य सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आदेश द्वारा, निदेश दे सकेगी कक वायुयाि दघु टष िा अन्वेर्ण ब्यूरो महानिदेशक द्वारा प्रयोग की जा सकिे वाि कोई शक्तत, केंद्र य सरकार द्वारा इस निलमत्त ववशेर् रूप से सशतत ककए गए ककसी अन्य अधिकार या प्राधिकार द्वारा भी प्रयोग की जा सकेगी । अध्याय 5 केंद्रीय सरकार की शक्क् तयां केंद्र य सरकार का 8. िागर ववमािि महानिदेशािय, िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो और वायुयाि अिीिण । दघु टष िा अन्वेर्ण ब्यूरो का अिीिण केंद्र य सरकार में निहहत होगा, क्जसे िमश: िारा 3 की उपिारा (2), िारा 5 और िारा 7 के अिीि आिे वाि े ककन्ह ं ववर्यों पर, इिमें स े प्रत्येक संगिि को, यहद वह िोकहहत में ऐसा करिा आवयक या समीचीि समझे, निदेश जार करिे की शक्तत होगी ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 303
9. (1) जहां केंद्र य सरकार, िोकहहत में ऐसा करिा आवयक या समीचीि केंद्र य सरकार की िारा 4 या समझती है, वहां वह ककसी व्यक्तत से अभ्यावेदि की प्राक्प्त पर या अन्यथा िारा 4 के िारा 6 के अिीि िागर ववमािि महानिदेशक द्वारा या िारा 6 के अिीि िागर ववमािि सुरिा अिीि पाररत ब्यूरो महानिदेशक द्वारा पाररत ककसी आदेश का पुिवविष ोकि कर सकेगी और इस प्रकार आदेशों के पाररत आदेश को वविंडडत या उपांतररत करिे के लिए संबद्ि महानिदेशक को ऐस े पुिवविष ोकि की शक्तत । निदेश जार कर सकेगी, जो वह उपयुतत समझे ।
(2) यथाक्स्थनत, िागर ववमािि महानिदेशक या िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो महानिदेशक, उपिारा (1) के अिीि जार ककए गए प्रत्येक निदेश का पािि करेगा और िारा 4 या िारा 6 के अिीि अपिे द्वारा इस प्रकार पाररत ककए गए आदेश को, यथाक्स्थनत, या तो वविंडडत या उपांतररत करेगा ।
10. (1) िारा 34 के उपबिं ों के अिीि रहते हुए, केंद्र य सरकार, राजपत्र म े केंद्र य सरकार की नियम अधिसूचिा द्वारा, ककसी वायुयाि या वायुयाि के वग ष के डडजाइि, ववनिमाषण, अिुरिण, बिािे की कब् जा, उपयोग, प्रचािि, वविय, आयात या नियाषत का ववनियमि करिे वािे और शक्त त । वायुयािों के प्रचािि की सुरिा सुनिक् चत करिे के लिए, नियम बिा सकेगी ।
(2) पूवगष ामी शक्त त की व् यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, ऐसे नियम, निम् िलिखित के लिए उपबंि कर सकेंगे— (क) व े प्राधिकार , क्जिके द्वारा इस अधिनियम द्वारा या इसके अिीि प्रदत्त शक्त तयों में से ककसी का प्रयोग ककया जािा है;
(ि) वायु पररवहि सेवाओं का ववनियमि और वायुयाि का ऐसी सेवाओं में प्रयोग का प्रनतर्ेि लसवाय सेवा की स् थापिा को प्राधिकृत करिे वाि अिुज्ञक्प् त के प्राधिकार के अिीि और उसके अिुसार हो; (ग) िागर ववमािि और वायु पररवहि सेवाओं का आधथकष ववनियमि, क्जसके अन्त गषत भारतीय ववमािपत्ति आधथकष ववनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 का 27 2008 की िारा 13 की उपिारा (1) के िंड (क) में निहदषष् ट टैररफ से लभन्ि , वायु पररवहि सेवाओं के प्रचािकों के टैररफ का अिुमोदि, अििुमोदि या पुिर िण है;
वे अधिकार या प्राधिकार , जो इस निलमत्त शक्त तयों का प्रयोग कर सकेंगे; ऐस े अधिकाररयों या प्राधिकाररयों द्वारा अिुसररत की जािे वाि प्रकिया और वे बातें क्जन्ह ें वे ध् याि में रिेंगे; ऐसे अधिकाररयों या प्राधिकाररयों के आदेशों के ववरुद्ि केंद्र य सरकार को अपीिें और ऐसे टैररफ से संबंधित अन्य सभी ववर्य । स् पष् टीकरण—इस िंड के प्रयोजिों के लिए, “टैररफ” के अन्त गतष याबत्रयों या माि के वायु पररवहि के लिए ककराया, दरें मूल यांकि प्रभार और अन्य प्रभार, ऐसे ककराए, रेट, मूल यांकि प्रभारों और अन् य प्रभारों को प्रभाववत करिे वािे नियम, ववनियम, पद्िनतयां या सेवाएं और यात्री या स् थौरा वविय अलभकताषओं को संदेय कमीशि की दरें, निबंिि और शतें सक्म्मलित हैं ;
(घ) जो वायु पररवहि सेवा की स् थापिा को प्राधिकृत करिे वाि अिुज्ञक्प् त के आवेदक या िारक द्वारा ऐसे प्राधिकाररयों को प्रदाि की जािे वाि सूचिा, जो नियमों में ववनिहदषष् ट ककए जाएं; (ङ) ववमाि िेत्रों का अिुज्ञापि, निर िण और ववनियमि, वे शत ें क्जिके अिीि ववमाि िेत्रों का अिुरिण ककया जा सकेगा और अिुज्ञप्त-रहहत ववमाि िेत्रों के उपयोग का प्रनतर्ेि या ववनियमि;304 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— (च) वह फीस, जो उि ववमाि िेत्रों पर प्रभाररत की जा सकेगी, क्जि पर भारतीय ववमािपत्ति प्राधिकरण अधिनियम, 1994 या भारतीय ववमािपत्ति आधथकष 1994 का 55 ववनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 िागू िह ं होता है या िागू िह ं ककया 2008 का 27 गया है;
(छ) वायुयाि की डडजाइि, ववनिमाषण, मरम् मत और अिुरिण का और ऐसे स् थािों का निर िण और नियंत्रण जहां वायुयािों की डडजाइि, ववनिमाषण या मरम् मत की जा रह है या जहां वे रिे गए हैं; (ज) वायुयाि का पंजीकरण और धचहिांककत करिा;
(झ) वे शतें, क्जिके अिीि वायुयाि उडाया जा सकेगा या यात्री, डाक या माि ि े जा सकेगा अथवा औद्योधगक प्रयोजिों के लिए प्रयोग ककया जा सकेगा और वायुयाि में रिे जािे वािे प्रमाणपत्र, अिुज्ञक्प् तयां या दस्त ावेज;
(ञ) इस अधिनियम के और इसके अिीि नियमों के उपबंिों के प्रवतषि के प्रयोजि के लिए वायुयाि या वायुयाि की डडजाइि, ववनिमाषण, अिुरिण या प्रचािि के लिए ककसी सुवविा का निर िण; (ट) वायुयाि के प्रचािि, ववनिमाषण, मरम् मत या अिुरिण में नियोक्जत व् यक्त तयों का अिुज्ञापि;
(ि) वायु यातायात नियंत्रण में िगे व् यक्त तयों का अिुज्ञापि; (ड) वायुयाि और सहबद्ि उपकरणों के प्रचािि और अिुरिण के लिए रेडडयो टेि फोि या टेि ग्राफ के प्रचािि में िगे हुए कालमकष ों का प्रमाणीकरण और अिुज्ञक्प्तकरण;
(ढ) संचार, संचािि और निगरािी तथा वायु यातायात प्रबंि सुवविाओं का प्रमाणि, निर िण तथा ववनियमि; (ण) ववधिववरुद्ि हस् तिेप के कायों के ववरुद्ि िागर ववमािि की सुरिा के उपाय ; (त) वायु संचािि सेवाओं, जो कक वैमानिक सूचिा सेवाएं, वैमानिक चाटष और मािधचत्र सेवाएं, वैमानिक मौसम ववज्ञाि संबंिी सेवाएं, तिाशी और बचाव सेवाएं, वायु संचािि सेवाओं के लिए प्रकिया और वायुयाि प्रचािि, जो िंड (ढ) में निहदषष्ट से लभन्ि हैं तथा वायु संचािि सेवाओं से संबंधित ककसी अन्य ववर्य का ववनियमि ;
(थ) वे वायुमाग,ष क्जिसे और वे शतें, क्जिके अिीि वायुयाि भारत में प्रवेश कर सकेंगे या भारत से प्रस् थाि कर सकेंगे अथवा भारत के भीतर या ऊपर उड सकेंगे और वे स् थाि जहां वायुयाि उतरेंगे या उडाि भरेंगे ; (द) ककसी ववनिहदषष् ट िेत्र में, या तो पूणतष या या ववनिहदषष् ट समयों पर या ववनिहदषष् ट शतों और अपवादों के अध् यिीि वायुयाि की उडाि का प्रनतर्ेि ;
(ि) वायुमाग ष के संकेत-द पों, ववमाि िेत्र के प्रकाश और ववमाि िेत्रों पर या उसके आसपास या वायुमागों पर या उसके आसपास, प्रकाश का प्रदाय, पयवष ेिण और नियंत्रण; (ि) ववमाि िेत्रों के आसपास या वायुमागों पर या उसके आसपास निजी संपवत्त पर, ऐसी संपवत्त के स्व ालमयों या अधिभोधगयों द्वारा प्रकाश का प्रनतष् िापि और उिका अिुरिण, ऐसे प्रनतष् िापि और अिुरिण के लिए केंद्र य सरकार द्वारा संदाय, तथा ऐसे प्रनतष् िापि और अिुरिण का पयवष ेिण और नियंत्रण, क्जसके अन्त गषत ऐसे प्रयोजिों के लिए संपवत्त तक पहुंच का अधिकार भी सक्म्मलित है;vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 305 (प) वायुयाि द्वारा या उसको संसूचिा के प्रयोजिों के लिए प्रयोग ककए जाि े वािे संकेत और संकेत भेजिे में िगाए जािे वाि े उपकरण;
(फ) वायुयाि में ककसी ववनिहदषष् ट वस् तु, ितरिाक माि या पदाथ ष के वहि का प्रनतर्ेि और ववनियमि; (ब) जीवि की सुरिा सुनिक् चत करिे के प्रयोजिाथ ष ककए जािे वािे उपाय और िे जाए जािे वािे उपकरण; (भ) िॉग बुक जार करिा और उस े रििा;
(म) इस अधिनियम या इसके अिीि बिाए गए नियमों के अिीि ककसी अिुज्ञक्प् त, प्रमाणपत्र या अिुमोदि के जार करिे या उसके िवीकरण की र नत और शत,ें उससे संबंधित द जािी वाि पर िाएं और पर िण, ऐसी अिुज्ञक्प् त, प्रमाणपत्र या अिुमोदि या ककसी िॉग बुक का प्ररूप, अलभरिा, प्रस्तुत करिा, पष्ृ िांकि, रद्दकरण, नििंबि या समपणष ;
(य) इस अधिनियम के अिीि ककए गए, जार ककए गए या िवीकरण ककए गए ककसी निर िण, पर िा, पर िण, प्रमाणपत्र, अिुज्ञक्प् त या अिुमोदि के संबंि में प्रभाररत की जािे वाि फीस; (यक) वायुयाि या वायुयाि के प्रचािि, ववनिमाषण, मरम् मत या अिुरिण के लिए नियोक्जत व् यक्त तयों की अहषताओं के संबंि में भारत स े अन्य त्र जार ककए गए अिुज्ञक्प् तयों और प्रमाणपत्रों को इस अधिनियम के प्रयोजिाथ ष मान्य ता देिा;
(यि) ववमाि िेत्र निदेश बबन् द ु से दस ककिोमीटर के बत्रज्या के भीतर पशओु ं का वि करिे और िाि उतारिे का तथा कूडा, गंदगी और अन्य प्रदवूर्त एवं हानिकर पदाथ ष डाििे का प्रनतर्ेि; (यग) ववमाि िेत्र के आसपास की सतहों या संसूचिा और संचािि सेवा सुवविा को सीलमत करिे वाि बािाओं के नियंत्रण का ववनियमि;
(यघ) बचाव अन्वेिा और ववनियामक कृत्य; (यङ) सुरिा अन्वेिा और उसके ववनियामक कृत्य; (यच) वह िेत्र और र नत, क्जसमें िागर ववमािि महानिदेशक बचाव अन्वेिा और ववनियामक कृत्यों के लिए निदेश जार कर सकेंगे और ऐसे निदेशों के अिुपािि से छूट प्रदाि कर सकेंगे;
(यछ) वह िेत्र और र नत, क्जसमें िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो महानिदेशक सुरिा अन्वेिा कृत्यों के लिए निदेश जार कर सकेंग े और ऐसे निदेशों के अिुपािि से छूट प्रदाि कर सकेंगे; (यज) ििीय शाक्स्त की रकम का अविारण;
(यझ) इस उपिारा में निहदषष् ट ववर्यों के समिुर्ंगी या आिुर्ंधगक कोई ववर्य़।
11. (1) िारा 34 के उपबिं ों के अिीि रहते हुए, केंद्र य सरकार, राजपत्र में अलभसमय को कियाक्न् वत करिे अधिसूचिा द्वारा, ऐस े नियम बिा सकेगी ववर्य जो 7 हदसम् बर, 1944 को लशकागो में के लिए नियम हस् तािररत अन्त रराष् र य िागर ववमािि स े संबंधित, समय-समय पर यथासंशोधित, बिािे की केंद्र य अलभसमय (क्जसमें अन्त रराष् र य मािकों और लसफाररश की गई पद्िनतयों से संबंधित, सरकार की उसका कोई उपाबन्ि भी है) को कियाक्न्व त करिे के लिए उसे आव यक प्रतीत हों । शक्त त ।306 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(2) दरू -संचार अधिनियम, 2023 में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, ककंतु 2023 का 44 िारा 34 के उपबंिों के अिीि रहते हुए, केंद्र य सरकार, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा समय-समय पर यथा संशोधित अंतरराष्र य दरू -संचार अलभसमय के िाग ू उपबंिों के अिुसार ऐसे नियम बिा सकेगी, जो वायुयाि के प्रचािि और अिुरिण में नियोक्जत व्यक्ततयों को रेडडयो दरू भार् प्रचािक (निबधं ित) प्रमाणपत्र और अिुज्ञक्प्त जार ककए जािे के लिए आवयक या समीचीि प्रतीत हो । केंद्र य सरकार की 12. (1) केंद्र य सरकार, िारा 34 के उपबंिों के अिीि रहते हुए— दघु टष िाओं का (क) भारत में या भारत के ऊपर ककसी भी वायुयाि; या अन् वर्े ण करिे के लिए नियम (ि) भारत में कह ं भी पंजीकृत वायुयाि के, बिािे की सचं ािि से उद्भूत या उसके दौराि ककसी दघु टष िा या घटिा के अन् वेर्ण का उपबंि शक्तत । करिे के लिए, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा, नियम बिा सकेगी ।
(2) पूवगष ामी शक्त त की व् यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, ऐसे नियम— (क) यह अपेिा कर सकेंगे कक ऐसी र नत में और ऐसे व् यक्त त द्वारा जो उसमें ववनिहदषष्ट ककया जाए, ककसी दघु टष िा या घटिा की सचू िा द जाएगी;
(ि) दघु टष िा या घटिा के अन् वेर्ण से संबंधित तत् समय प्रवत्तृ ककसी ववधि के उपबंि ऐसे अन्व ेर्ण के प्रयोजिाथ ष उपांतरण सहहत या रहहत िागू कर सकेंगे; (ग) अन्व ेर्ण के िंबबत रहिे तक ऐसे वायुयाि तक पहुंचिे और हस् तिेप करिे का प्रनतर्ेि कर सकेंगे, क्जससे कोई दघु टष िा या घटिा हुई है और जहां तक अन्व ेर्ण के प्रयोजिाथ ष आव यक हो, ककसी व् यक्त त को यह प्राधिकार दे सकेंगे कक वह ऐसे ककसी वायुयाि तक पहुंच सकेगा, उसकी पर िा कर सकेगा, उसे हटा सकेगा, उसके परररिण के लिए उपाय कर सकेगा, या अन्य कायवष ाह कर सकेगा;
और (घ) जब अन्व ेर्ण से यह प्रतीत हो कक अिुज्ञक्प् त पर कायवष ाह की जािी चाहहए तब इस अधिनियम के अिीि अिुदत्त या मान् यताप्राप् त ककसी अिुज्ञक्प् त या प्रमाणपत्र के रद्दकरण, नििम्ब ि, पष्ृ िांकि या अभ् यपणष को प्राधिकृत या अपेक्षित कर सकेंगे और ऐसे प्रयोजि के लिए ऐसी ककसी अिुज्ञक्प् त को प्रस्तुत करिे का उपबंि कर सकेंगे । केंद्र य सकार की 13. केंद्र य सरकार, िारा 34 के उपबंिों के अिीि रहते हुए, राजपत्र में अधिसूचिा िोक स् वास् थ् य की द्वारा, ककसी ववमाि िेत्र पर आिे वािे या वहां क्स् थत वायुयाि से िोक स् वास् थ् य को संरिा के लिए ककसी संिामक या सांसधगषक रोग के प्रवेश या प्रसार से होिे वािे संकट को रोकिे के लिए नियम बिािे की शक्त त । और ककसी ववमाि िेत्र से प्रस् थाि करिे वािे ककसी वायुयाि के माध् यम से संिमण या संसग ष के प्रवहण को रोकिे के लिए और ववलशष् ट रूप से और इस उपबंि की व् यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, ककसी भी वायुयाि और ववमाि िेत्र या ककसी ववनिहदषष् ट ववमाि िेत्र के संबंि में उि ववर्यों का उपबंि करिे वािे नियम बिा सकेगी, क्जिके लिए भारतीय पत्ति अधिनियम, 1908 की िारा 6 की उपिारा (1) के िंड (त) के उपिंड (i) से 1908 का 15 उपिंड (viii) तक के अिीि यािों और पत्तिों के ववर्य में नियम बिाए जा सकेंग े । केंद्र य सरकार की 14. (1) यहद केंद्र य सरकार का समािाि हो गया है कक भारत या उसके ककसी िोक स् वास् थ् य की भाग में कोई ितरिाक महामार फैि हुई है या फैििे की आंशका है और वायुयाि के संरिा के लिए माध्यम से िोक स् वास् थ् य को उस रोग के प्रवेश या फैििे से होिे वािे संकट को रोकिे आपातकाि ि शक्त तया ं । के लिए तत् समय प्रवत्तृ ववधि के सािारण उपबंि अपयाषप् त हैं, तो केंद्र य सरकार ऐस े संकट को रोकिे के लिए ऐस े उपाय कर सकेगी, जो वह आव यक समझे ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 307
(2) ऐसे ककसी मामिे में केंद्र य सरकार, िारा 13 द्वारा प्रदत्त शक्त तयों पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा, वायुयाि और उसमें यात्रा करि े वािे व् यक्त तयों या उसमें ि े जाई जािे वाि वस् तुओं और ववमाि िेत्रों के संबंि में, ऐस े अस् थायी नियम बिा सकेगी, जो वह उि पररक्स् थनतयों में आव यक समझे ।
(3) िारा 34 में अन्त ववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, उपिारा (2) के अिीि नियम बिािे की शक्त त, इि शतों के अिीि िह ं होगी कक नियमों को पूव ष प्रकाशि के प चात ् बिाया जाए, ककन् तु ऐसे नियम अधिसूचिा की तार ि से तीि मास स े अधिक समय तक प्रवत्तृ िह ं रहेंगे:
परन् तु यह कक केंद्र य सरकार, ववशेर् आदेश द्वारा इन्ह ें अनतररत त अवधि या अवधियों के लिए प्रवत्तृ कर सकेगी, जो कुि लमिाकर तीि मास स े अधिक की िह ं होगी ।
15. (1) यहद केंद्र य सरकार की यह राय है कक िोक संरिा या प्रशाक्न्त के हहत में केंद्र य सरकार की आपात में निम् िलिखित आदेशों में से सभी या ककसी का जार ककया जािा समीचीि है, तो वह आदेश देि े की राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा,— शक्त त । (क) इस अधिनियम के अिीि जार सभी या ककसी अिुज्ञक्प् त, प्रमाणपत्र या अिुमोदि को या तो पूण ष रूप से या ऐसी शतों के अध् यिीि, क्जन्ह ें वह आदेश में ववनिहदषष् ट करिा िीक समझे, रद्द या नििंबबत कर सकेगी;
(ि) सम् पूण ष भारत या उसके ककसी भाग के ऊपर सभी या ककसी वायुयाि या वायुयाि के वग ष की उडाि का या तो पूण ष रूप से या ऐसी शतों के अध् यिीि, क्जन्ह ें वह आदेश में ववनिहदषष्ट करिा िीक समझे, प्रनतर्ेि कर सकेगी अथवा उस े ऐसी र नत में ववनियलमत कर सकेगी, जो आदेश में अन्त ववष्ष ट हो;
(ग) ककसी ववमाि िेत्र, वायुयाि सुवविा, उड्डयि प्रलशिण संगिि या वह स् थाि, जहां वायुयाि या उिका कोई वग ष या प्रकार डडजाइि ककए जाते हैं, ववनिलमतष ककए जाते हैं, मरम् मत ककए जाते हैं या रिे जाते हैं, के पररनिमाषण, अिुरिण या उपयोग को पूण ष रूप से या सशत ष प्रनतवर्द्ि कर सकेगी या ववनियलमत कर सकेगी; और (घ) यह निदेश दे सकेगी कक कोई वायुयाि या वायुयाि का वग ष या कोई ववमाि िेत्र, वायुयाि सुवविा, उड्डयि प्रलशिण संगिि या वह स् थाि, जहां वायुयाि डडजाइि ककए जाते हैं, ववनिलषमत ककए जाते हैं, मरम् मत ककए जाते हैं या रिे जाते हैं, साथ ह साथ वायुयाि के डडजाइि प्रचािि, ववनिमाषण, मरम् मत या अिुरिण में प्रयुत त कोई मशीि, संयंत्र, सामग्री या वस्त ुएं या तो तुरन् त या ववनिहदषष् ट समय के भीतर, ऐसे प्राधिकार को और उस र नत में जो आदेश में ववनिहदषष् ट ककया जाए, िोक सेवा के लिए उस सरकार के व् ययिािीि पररदत्त की जाएगी ।
(2) इस अधिनियम के अिीि बिाए गए ककसी नियम में अन्तववष्ष ट ककसी बात से असंगत होते हुए भी, उपिारा (1) के अिीि हदया गया कोई आदेश प्रभावी होगा ।
(3) यहद ककसी व् यक्त त को उपिारा (1) के िंड (ग) या िंड (घ) के अिीि जार ककए गए ककसी आदेश के कारण कोई प्रत् यि िनत या हानि होती है तो उसे उतिा प्रनतकर हदया जाएगा, जो ऐस े प्राधिकार द्वारा अविाररत ककया जाएगा, जो इस निलमत्त केंद्र य सरकार द्वारा नियुत त ककया जाए ।
(4) केंद्र य सरकार, उपिारा (1) के अिीि जार ककए गए आदेश का अिुपािि करािे308 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— के लिए ऐसे कदम उिािे के लिए प्राधिकृत कर सकेगी, जो उसे आव यक प्रतीत हों ।
(5) जो कोई जािबूझकर, उपिारा (1) के अिीि ककए गए आदेश की अवज्ञा करता है, या उसका अिुपािि करिे में असफि रहता है या उसके उल िंघि में कोई काय ष करता है, तो वह कारावास से, क्जसकी अवधि तीि वर् ष तक की हो सकेगी, या जुमाषिे स,े या दोिों से, दंडिीय होगा और वह न् यायािय, क्जसके द्वारा वह दोर्लसद्ि ककया जाता है यह निदेश दे सकेगा कक वह वायुयाि या वस् तु (यहद कोई हो) क्जसके संबंि में वह अपराि ककया गया है, या ऐसी वस् तु का कोई भाग, केंद्र य सरकार को जब्त हो जाएगा । केंद्र य सरकार की 16. केंद्र य सरकार, िारा 34 के उपबंिों के अिीि रहते हुए, राजपत्र में अधिसूचिा बबिा दावा वाि द्वारा, ऐसे नियम बिा सकेगी क्जिमें उस संपवत्त की सुरक्षित अलभरिा और पुि:
संपवत्त की पररदाि सुनिक् चत करिे के लिए उपबंि ककए जा सकेंगे जो ककसी ववमाि िेत्र पर अथवा सुरक्षित अलभरिा और पुि: पररदाि ककसी ववमाि िेत्र पर ककसी वायुयाि में उधचत अलभरिा ववह ि पाई जाती है और ऐसे सुनिक् चत करिे ककन्ह ं नियमों में ववलशष् टत: निम् िलिखित के लिए उपबंि ककया जा सकेगा— के लिए नियम (क) ऐसी ककसी संपवत्त को उसके हकदार व् यक्त त को पुि: पररदाि करिे स े बिािे की शक्त त । पूव,ष उस संपवत्त के संबंि में प्रभारों का सदं ाय करिा; और (ि) जहां उसके हकदार व् यक्त त को, ऐसी अवधि के अवसाि के पूव ष जो उसमें ववनिहदषष्ट ककया जाए, पुि: पररदत्त िह ं की जाती है, उस दशा में उस संपवत्त का निपटारा करिा । वायुयाि को 17. (1) केंद्र य सरकार द्वारा इस निलमत्त प्राधिकृत कोई प्राधिकार ककसी वायुयाि निरुद्ि करिे की को निरुद्ि कर सकेगा, यहद ऐसे प्राधिकार की राय में— शक्त त । (क) आशनयत उडाि की प्रकृनत को देिते हुए, ऐसे वायुयाि की उडाि से उस वायुयाि में सवार व् यक्त तयों को या ककसी अन्य व् यक्त त को या संपवत्त को ितरा हो सकता है; या (ि) ऐसा अवरोिि, इस अधिनियम या ऐसे वायुयाि को िागू होिे वाि े नियमों के ककसी उपबंि का अिुपािि करािे के लिए आव यक है, या ऐसा अवरोिि, िारा 10 की उपिारा (2) के िंड (थ) या िंड (द) के अिीि बिाए गए ककसी नियम का उल िंघि रोकिे के लिए अथवा ककसी न् यायािय द्वारा ककए गए ककसी आदेश को कायाषक्न्व त करिे के लिए आव यक है ।
(2) केंद्र य सरकार, िारा 34 के उपबंिों के अिीि रहते हुए, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा, इस शक्त त के प्रयोग के समिुर्ंगी या आिुर्ंधगक सभी मामिों को ववनियलमत करिे के लिए नियम बिा सकेगी । केंद्र य सरकार की 18. (1) यहद केंद्र य सरकार की यह राय है कक वायुयाि के प्रचािि की सुरिा के भवि निमाषण, लिए ऐसा करिा आव यक या समीचीि है, तो वह राजपत्र में, अधिसूचिा द्वारा,— विृ ारोपण और ऐसे ह कायों को (क) निदेश दे सकेगी कक ववमाि िेत्र निदेश बबन् द ु स े बीस ककिोमीटर स े प्रनतवर्द्ि या अिधिक ऐसी बत्रज्या के भीतर ककसी भूलम पर जो अधिसूचिा में ववनिहदषष् ट ककया ववनियमि की जाए, ककसी भवि या संरचिा का निमाषण अथवा पररनिमाणष िह ं ककया जाएगा, या शक्त त । विृ ारोपण िह ं ककया जाएगा तथा यहद ऐसा कोई भवि, सरं चिा या विृ ऐसी भूलम पर हो तो वह ऐस े भवि, सरं चिा या विृ के स् वामी या उस पर नियंत्रण रििे वािे व् यक्त त को, ऐसी कािावधि के भीतर, जो अधिसूचिा में ववनिहदषष् ट की जाए, यथाक्स् थनत, ऐसे भवि या संरचिा को तोडिे अथवा ऐसे विृ को काट देिे का निदेश दे सकेगी ;vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 309 (ि) निदेश दे सकेगी कक ववमाि िेत्र निदेश बबन् द ु से बीस ककिोमीटर से अिधिक ऐसी बत्रज्या के भीतर ककसी भूलम पर, जो अधिसूचिा में ववनिहदषष् ट की जाए, उतिी ऊंचाई से अधिक ऊंचे ककसी भवि या संरचिा का निमाषण या पररनिमाषण िह ं ककया जाएगा, अथवा ऐसा कोई विृ ारोपण िह ं ककया जाएगा, क्जसकी अधिसूचिा में ववनिहदषष् ट ऊचांई से अधिक ऊंचा उगिे की संभाव् यता है या जो सािारणतया ऐसी ऊंचाई से अधिक ऊंचा उगता है, और यहद ऐसी भूलम पर ककसी भवि या संरचिा या विृ की ऊंचाई ववनिहदषष् ट ऊंचाई से अधिक हो तो वह ऐसे भवि, संरचिा या विृ् के स् वामी या उस पर नियंत्रण रििे वािे व् यक्त त को ऐसी अवधि के भीतर, जो अधिसूचिा में ववनिहदषष् ट की जाए, उसकी ऊंचाई कम करिे का निदेश भी दे सकेगी, ताकक वह ववनिहदषष् ट ऊंचाई से अधिक ि रहे ।
(2) केंद्र य सरकार, उपिारा (1) के िंड (क) या िंड (ि) के अिीि बत्रज्या ववनिहदषष् ट करते समय तथा उत त िंड (ि) के अिीि ककसी भवि, संरचिा या विृ की ऊंचाई ववनिहदषष् ट करते समय, निम् िलिखित बातों का ध् याि रिेगी,— (क) ववमाि िेत्र में प्रचालित या प्रचािि के लिए आशनयत वायुयाि की प्रकृनत; और (ि) वायुयाि के प्रचािि को शालसत करिे वाि े अन्त रराष् र य मािक और लसफाररश की गई पद्िनतयां ।
(3) जहां उपिारा (1) के अिीि ककसी भवि, संरचिा या विृ के स् वामी को अथवा उस पर नियंत्रण रििे वािे व् यक्त त को ऐसे भवि या संरचिा को तोडिे या ऐसे विृ को काटिे का अथवा ककसी भवि, संरचिा या विृ की ऊंचाई कम करिे का निदेश देिे वाि कोई अधिसूचिा जार कर द गई हो, वहां ऐस े निदेश को अन्तववष्ष ट करिे वाि अधिसूचिा की एक प्रनत, यथाक्स् थनत, भवि, संरचिा या विृ के स् वामी पर अथवा उस पर नियंत्रण रििे वािे व् यक्त त पर तामीि की जाएगी,— (क) ऐसे स् वामी या व् यक्त त को पररदत्त या निववदत्त करके; या (ि) यहद वह इस प्रकार पररदत्त या निववदत्त िह ं की जा सकती है, तो ऐस े स् वामी या व् यक्त त के ककसी अधिकार को अथवा ऐसे स् वामी या व् यक्त त के पररवार के ककसी वयस् क सदस् य को पररदत्त या निववदत्त करके अथवा अधिसूचिा की एक प्रनत उस पररसर के, क्जसमें ऐसे स् वामी या व् यक्त त का अक्न्त म बार निवास ककया जािा अथवा कारबार चिािा अथवा अलभिाभ के लिए स् वयं काम करिा ज्ञात है, बाहर द्वार पर अथवा सहजदृ य ककसी भाग पर िगाकर; या डाक अथवा ककसी अन्य इिैतरानिक साििों द्वारा पररदाि करके; या (ग) िंड (क) या िंड (ि) में ववनिहदषष्ट ककन्ह ं साििों द्वारा सेवा की तामीि में असफिता की दशा में डाक द्वारा ।
(4) उपिारा (1) के अिीि जार की गई ककसी अधिसूचिा में अन्तववष्ष ट ककसी निदेश का अिुपािि करिा प्रत् येक व् यक्त त के लिए बाध् यकार होगा ।
19. (1) इस अधिनियम में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, यहद कोई केंद्र य सरकार की अिुज्ञक्प्त, व्यक्तत, इस अधिनियम के ककसी भी उपबंि या इसके अिीि बिाए गए नियमों या प्रमाणपत्र या जार ककए गए निदेशों का उलिंघि करता है तो केंद्र य सरकार या इस निलमत्त प्राधिकृत अिुमोदि को कोई अधिकार , कोई निबंिि अधिरोवपत कर सकेगा या अधिनियम के अिीि ऐस े निबधंित, व्यक्तत को जार अिुज्ञक्प्त, प्रमाणपत्र या अिुमोदि को ऐसी र नत में, जो ववहहत की जाए, नििंबबत या रद्द नििंबबत या रद्द कर सकेगा । करिे की शक्तत।310 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(2) यह समािाि हो जािे पर कक िमशः इस अधिनियम के उपबंिों या इस अधिनियम के अिीि बिाए गए नियमों या जार ककए गए निदेशों का ककसी व्यक्तत द्वारा उलिंघि ककया गया है तो अधिनियम, नियम या निदेश के संबंधित उपबंिों, क्जिका उलिंघि ककया गया है, की प्रकृनत और ऐसे नििंबि या रद्द करिे या निबिं ि अधिरोवपत करिे के कारणों का कथि करते हुए, केंद्र य सरकार या उपिारा (1) के अिीि प्राधिकृत कोई अधिकार लिखित आदेश द्वारा ऐस े व्यक्तत को जार ककए गए,—
(i) अिुज्ञक्प्त, प्रमाणपत्र या अिुमोदि को नििंबबत या रद्द कर सकेगा ; या
(ii) अिुज्ञक्प्त, प्रमाणपत्र या अिुमोदि पर निबिं ि अधिरोवपत कर सकेगा ।
(3) केंद्र य सरकार या उपिारा (1) के अिीि प्राधिकृत अधिकार , उपिारा (2) के अिीि कोई आदेश पाररत करिे से पूव ष संबंधित व्यक्तत को सुिे जािे का अवसर प्रदाि करेगा ।
(4) केंद्र य सरकार, इस िारा के अिीि बिाए गए नियमों में उि आिारों को, क्जि पर ककसी अिुज्ञक्प्त, प्रमाणपत्र या अिुमोदि को नििंबबत ककया जा सकेगा या व े पररक्स्थनतयां, क्जिके अिीि तुरंत प्रभाव से ऐसे निबिं िों को अधिरोवपत ककया जा सकेगा, ववनिहदषष्ट कर सकेगी । केंद्र य सरकार की 20. केंद्र य सरकार, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा और उसमें उपबंधित कारणों स े कुछ वायुयाि को ककसी वायुयाि या वायुयाि के वग ष और ककसी व् यक्त त या व् यक्त तयों के वग ष को इस छूट देिे की अधिनियम या इसके अिीि बिाए गए नियमों के सभी या ककन् ह ं उपबंिों से छूट दे शक्त त । सकेगी या यह निदेश दे सकेगी कक व े ऐस े वायुयाि या व्य क्त तयों को ऐस े उपान्त रणों के अध् यिीि िागू होंगे जैसे अधिसूचिा में ववनिहदषष् ट ककए जाएं । केंद्र य सरकार 21. केंद्र य सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आदेश द्वारा निदेश दे सकेगी कक इस की प्रत्यायोक्जत अधिनियम के अिीि उसके द्वारा प्रयोग की जा सकिे वाि शक्ततयां (इस अधिनियम करिे की शक्तत । के अिीि नियम बिािे की शक्तत के लसवाय) महानिदेशक, िागर ववमािि या महानिदेशक, िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो या महानिदेशक, वायुयाि दघु टष िा अन्वेर्ण ब्यूरो या केंद्र य सरकार द्वारा इस निलमत्त ववनिहदषष्ट रूप से सशतत ककसी अन्य अधिकार या प्राधिकार द्वारा भी प्रयोग की जा सकेगी । अध्याय 6 हानन या नुकसान के ललए प्रनतकर का संिाय हानि या िुकसाि 22. (1) यहद िारा 18 की उपिारा (1) के अिीि जार की गई ककसी अधिसूचिा में के लिए प्रनतकर अन्तववष्ष ट ककसी निदेश के पररणामस् वरूप ककसी व् यक्त त को कोई हानि या िुकसाि होता के संदाय की है तो ऐसे व् यक्त त को प्रनतकर हदया जाएगा क्जसकी रकम, इसमें इसके प चात ् उपवखणषत र नत और अविारण । र नत से और लसद्िांतों के अिुसार अविाररत की जाएगी, अथाषत ् :— (क) जहां प्रनतकर की रकम सहमनत से नियत की जा सकती है, वहां वह ऐसी सहमनत के अिुसार संदत्त की जाएगी;
(ि) जहां ऐसी सहमनत िह ं हो सकती है, वहां केंद्र य सरकार, ऐस े व् यक्त त को, जो उच् च न्य ायािय का न् यायािीश है अथवा इस रूप में नियुत त होिे के लिए अहहतष है, मध् यस् थ के रूप में नियुत त कर सकेगी; (ग) केंद्र य सरकार, ककसी ववलशष् ट मामिे में, ककसी ऐस े व् यक्त त को, क्जस े प्रनतकर के हकदार व् यक्त त को हुई हानि या िुकसाि की प्रकृनत के बारे में पयाषप्त ज्ञाि हो, िामनिदेशि कर सकेगी और जहां ऐसा िामनिदेशि ककया जाता है वहां प्रनतकर का हकदार व् यक्त त भी उसी प्रयोजि के लिए एक असेसर िामनिहदषष् ट करvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 311 सकेगा;
(घ) मध् यस् थ के समि कायषवाहहयों के प्रारम् भ पर, केंद्र य सरकार और वह व् यक्त त, क्जसको प्रनतपूनत ष की जािी है, यह कथि करेंगे कक उिकी अपिी-अपिी राय में प्रनतकर की उधचत रकम त या है; (ङ) वववाद की सुिवाई के प चात,् मध् यस् थ प्रनतकर की रकम, जो उस े न्य ायसंगत प्रतीत हो, अविाररत करते हुए पंचाट करेगा और उस व् यक्त त या उि व् यक्त तयों को ववनिहदषष् ट करेगा क्जस े या क्जन्ह ें ऐसा प्रनतकर संदत्त ककया जाएगा, और पंचाट करते समय वह प्रत्य ेक मामिे की पररक्स् थनतयों का तथा निम् िलिखित बातों का ध् याि रिेगा—
(i) प्रनतकर के हकदार व् यक्त त को उसके उपाजिष ों में हुआ िुकसाि;
(ii) यहद िारा 18 की उपिारा (1) के अिीि जार की गई ककसी अधिसूचिा में अंतववष्ष ट ककसी निदेश के पररणामस् वरूप, ऐसी अधिसूचिा के जार होिे के िीक प चात ् भलूम का बाजार मूल य कम हो जाता है, तो ऐस े बाजार मूल य में हुई कमी;
(iii) जहां ककसी निदेश के अिुसरण में कोई भवि या संरचिा तुडवा द गई हो या कोई विृ कटवा हदया गया हो अथवा ककसी भवि, संरचिा या विृ की ऊंचाई कम कर द गई हो तो ऐस े तुडवािे, कटवािे या कम करिे के पररणामस् वरूप प्रनतकर के हकदार व् यक्त त को हुआ िुकसाि तथा ऐसे तुडवािे, कटवािे या कम करिे के लिए ऐसे व् यक्त त द्वारा उपगत व् यय;
(iv) यहद प्रनतकर के हकदार व्यक्तत को अपिा निवास-स्थाि या कारबार का स्थाि पररवतिष करिे के लिए बाध्य होिा पडे तो वह युक्ततयुतत व्यय जो उसे ऐसे पररवतिष के कारण उपगत करिा पडे; (च) यहद प्रनतकर के हकदार व् यक्त त या व् यक्त तयों के बारे में कोई वववाद है, तो मध् यस् थ ऐसे वववाद का ववनि चय करेगा और यहद मध् यस् थ इस निष् कर् ष पर पहुंचता है कक एक से अधिक व् यक्त त प्रनतकर के हकदार हैं तो वह प्रनतकर की रकम को ऐसे व् यक्त तयों के बीच प्रभाक्जत करेगा;
1996 का 26 (छ) माध् यस् थम ् और सुिह अधिनियम, 1996 की कोई बात इस िारा के अिीि मध् यस् थता को िागू िह ं होगी ।
(2) उपिारा (1) के िंड (ङ) के अिीि मध्य स् थ द्वारा ककए गए प्रत्य ेक पंचाट में, मध् यस् थ के समि कायवष ाहहयों में उपगत िचे की रकम, और िचे ककि व् यक्त तयों द्वारा और ककस अिुपात में संदत्त ककए जाएंगे, यह भी कधथत होगा ।
23. कोई व् यक्त त, जो मध् यस् थ द्वारा िारा 22 के अिीि ककए गए पंचाट स े प्रनतकर के व् यधथत है, ऐसे पंचाट की तार ि से तीस हदि के भीतर उस उच् च न्य ायािय में, क्जसकी संबंि में पंचाट की अपीि । अधिकाररता में ववमाि िेत्र क्स्थ त हो, अपीि कर सकेगा:
परन् तु यहद उच् च न्य ायािय का समािाि हो जाता है कक अपीिाथी पयाषप् त कारण से समय पर अपीि फाइि िह ं कर सका था तो वह उत त तीस हदि की कािावधि के अवसाि के प चात ् भी अपीि ग्रहण कर सकेगा ।
24. िारा 22 के अिीि नियुत त मध् यस् थ को, इस अधिनियम के अिीि माध् यस् थम ् मध् यस् थ को कायवष ाहहयां करते समय, निम् िलिखित ववर्यों के संबंि में, वे सभी शक्त तयां होंगी जो लसववि न् यायाियों की 1908 का 5 लसववि प्रकिया संहहता, 1908 के अिीि वाद का ववचारण करिे में लसववि न्य ायािय को कुछ शक्ततयों प्राप् त हैं, अथाषत ् :— का होिा ।312 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— (क) ककसी व् यक्त त को समि करिा और उसे उपक्स्थत करािा तथा शपथ पर उसकी पर िा करिा;
(ि) ककसी दस् तावेज के प्रकट करण और उसे प्रस्तुत करिे की अपेिा करिा; (ग) शपथपत्रों पर साक्ष् य िेिा; (घ) ककसी न् यायािय या कायाषिय से ककसी िोक अलभिेि की अध् यपेिा करिा; (ङ) साक्षियों की पर िा के लिए कमीशि निकाििा । अध्याय 7 अपराि और शाक्स्तयां इस अधिनियम 25. (1) यहद कोई व् यक्त त, िारा 10 की उपिारा (2) के िंड (फ) के अिीि बिाए के अिीि बिाए गए ककसी नियम के ककसी उपबंि का उलि ंघि करता है, जो वायुयाि में आयुि, गए नियम के ववस् फोटक या अन्य संकटकार माि के वहि का प्रनतर्ेि या ववनियमि करता है या जब उल िंघि के लिए शाक्स् त । उस िंड के अिीि बिाए गए नियमों के अिीि ऐसे ककसी माि के बारे में सूचिा देि े की अपेिा की जाती है, ऐसी सूचिा देता है जो लमथ् या है और क्जसके लमथ् या होिे का उसे ज्ञाि या वव वास है, या क्जसके सत् य होिे का उसे वव वास िह ं है, और यहद वह स् वामी िह ं है तो स् वामी भी (जब तक कक स्वामी यह साबबत िह ं कर देता है कक अपराि उसकी जािकार , सहमनत या मौिािुकूिता के बबिा ककया गया था) कारावास से, जो दो वर् ष तक का हो सकेगा, और जुमाषि े का भी, जो एक करोड रुपए तक का हो सकेगा, या दोिों स े दंडिीय होगा ।
(2) यहद कोई व् यक्त त, ववमाि िेत्र निदेश बबदं ु से दस ककिोमीटर के बत्रज्या के भीतर पशुओं का वि करिे और िाि उतारिे तथा कूडा, गंदगी और अन्य प्रदवूर्त तथा घणृ ाजिक वस् तएु ं डाििे का प्रनतर्ेि करिे वािे िारा 10 की उपिारा (2) के िंड (यि) के अिीि बिाए गए ककसी नियम के ककसी उपबंि का उल िंघि करता है तो वह कारावास स,े जो तीि वर् ष तक का हो सकेगा, या जुमाषि े स,े जो एक करोड रुपए तक का हो सकेगा या दोिों से, दंडिीय होगा ।
(3) भारतीय िागररक सुरिा संहहता, 2023 में अन्तववष्ष ट ककसी बात के होते हुए 2023 का 46 भी, उपिारा (2) में निहदषष् ट अपराि संज्ञेय होगा ।
(4) िारा 10, िारा 11, िारा 12, िारा 13, िारा 14 या िारा 17 के अिीि कोई अन्य नियम बिाते समय, केंद्र य सरकार यह निदेश दे सकेगी कक उसका भंग करिे पर कारावास से, क्जसकी अवधि दो वर् ष तक की हो सकेगी, या जुमाषिे स,े जो एक करोड रुपए तक का हो सकेगा या दोिों से, दंडिीय होगा । संकटकार उडाि 26. जो कोई ककसी वायुयाि को जािबूझकर ऐसी र नत स े उडाता है क्जसस े भूलम के लिए शाक्स् त । या जि या वायु में ककसी व् यक्त त या ककसी संपवत्त को संकट काररत हो, तो वह कारावास स,े क्जसकी अवधि दो वर् ष तक की हो सकेगी, या जुमाषि े से, जो एक करोड रुपए तक का हो सकेगा या दोिों से, दंडिीय होगा । िारा 4 या िारा 27. यहद कोई व् यक्त त, िारा 4 या िारा 6 के अिीि जार ककए गए ककसी निदेश 6 के अिीि जार का अिुपािि करिे में जािबूझकर असफि रहता है, तो वह कारावास से, क्जसकी अवधि ककए गए निदेशों दो वर् ष तक की हो सकेगी अथवा जुमाषिे से, जो एक करोड रुपए तक का हो सकेगा या का अिुपािि करि े में असफि दोिों से, दंडिीय होगा । रहिे के लिए शाक्स् त ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 313
28. (1) यहद कोई व् यक्त त, िारा 18 के अिीि जार की गई ककसी अधिसूचिा में िारा 18 के अिीि जार अंतववष्ष ट ककसी निदेश का अिुपािि करि े में जािबूझकर असफि रहता है तो वह ककए गए निदेशों कारावास से, क्जसकी अवधि दो वर् ष तक की हो सकेगी, या जुमाषिे स,े जो एक करोड का अिुपािि रुपए तक का हो सकेगा या दोिों से, दंडिीय होगा । करि े में
(2) उपिारा (1) के उपबंिों पर प्रनतकूि प्रभाव डािे बबिा, यहद कोई व् यक्त त िारा असफि रहि े के लिए शाक्स् त । 18 की उपिारा (1) के अिीि जार की गई ककसी अधिसूचिा में अन्तववष्ष ट ककसी निदेश के अिुसरण में, अधिसूचिा में ववनिहदषष् ट अवधि के भीतर, ककसी भवि या संरचिा को तुडवािे में या ककसी विृ को कटवािे में असफि रहता है अथवा ककसी भवि, संरचिा या विृ की ऊंचाई कम करिे में असफि रहता है तो, ऐसे नियमों के अिीि रहते हुए जो केंद्र य सरकार इस निलमत्त बिाए, केंद्र य सरकार द्वारा इस निलमत्त प्राधिकृत कोई अधिकार ऐसे भवि या संरचिा को तुडवािे या ऐसे विृ को कटवािे अथवा ऐसे भवि, संरचिा या विृ की ऊंचाई कम करिे के लिए सिम होगा:
परन् तु इस उपिारा के अिीि नियम बिािे की शक्त त, िारा 34 के उपबंिों के अिीि रहते हुए होगी ।
29. जो कोई, इस अधिनियम या नियमों के अिीि ककसी अपराि को करिे का अपरािों के दष्ु प्ररेण और दष्ु प्ररे ण करता है या ऐसा अपराि करिे का प्रयत् ि करता है और ऐसे प्रयत् ि में अपराि प्रयत्ि ककए गए करिे की दशा में कोई कृत्य करता है वह अपराि के लिए उपबक्न्ि त दण्ड का दायी अपरािों के लिए होगा । शाक्स् त । 2023 का 46 30. (1) भारतीय िागररक सरु िा संहहता, 2023 में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते अपरािों का हुए भी, इस अधिनियम या इसके अिीि बिाए गए नियमों के अिीि दंडिीय ककसी शमि । अपराि का, जो केवि कारावास से दंडिीय अपराि िह ं है या कारावास और जुमाषिे स े भी दंडिीय है, यथाक्स्थनत, महानिदेशक, िागर ववमािि या महानिदेशक, िागर ववमािि सुरिा ब् यरू ो या महानिदेशक, वायुयाि दघु टष िा अन् वेर्ण ब् यूरो द्वारा ककसी अलभयोजि की संक्स्थनत के पूव ष या पचात ् ऐसी र नत में और एक करोड रुपए स े अिधिक रकम के लिए, जो ववहहत की जाए, शमि ककया जा सकेगा ।
(2) उपिारा (1) में अंतववष्ष ट कोई बात ककसी व्यक्तत द्वारा, दसू र बार या तत्पचात ् समाि अपराि काररत करिे की तार ि से पाचं वर् ष की अवधि के भीतर, क्जसका पूव ष में शमि ककया गया था या क्जसके लिए व्यक्तत को दोर्लसद्ि िहराया गया था, काररत ककसी अपराि को िागू िह ं होगी ।
(3) उपिारा (1) में निहदषष्ट प्रत्येक अधिकार , ककसी अपराि का शमि करिे के लिए, केंद्र य सरकार के निदेश, नियंत्रण और अिीिण के अिीि रहते हुए शक्ततयों का प्रयोग करेगा ।
(4) ककसी अपराि का शमि करिे के लिए प्रत्येक आवेदि ऐसी र नत में ककया जाएगा, जो ववहहत ककया जाए ।
(5) जहां ककसी अपराि का शमि ककसी अलभयोजि के संक्स्थत होिे से पूव ष ककया जाता है, तो उपिारा (1) में निहदषष्ट ककसी अधिकार द्वारा उस अपरािी के ववरुद्ि, क्जसके संबंि में अपराि का इस प्रकार शमि ककया गया है, ऐसे अपराि के संबंि में कोई अलभयोजि संक्स्थत िह ं ककया जाएगा ।
(6) जहां ककसी अपराि का शमि ककसी अलभयोजि के संक्स्थत होिे के पचात ् ककया जाता है तो ऐस े शमि को उपिारा (1) में निहदषष्ट अधिकार द्वारा उस न्यायािय के ध्याि में लिखित रूप में िाया जाएगा, क्जसमें अलभयोजि िंबबत है और अपराि के314 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— शमि का ऐसा सूचिा हदए जािे पर उस व्यक्तत को, क्जसके ववरुद्ि अपराि का इस प्रकार शमि ककया जाता है, निमुतष त कर हदया जाएगा ।
(7) इस िारा के अिीि ककसी अपराि के शमि का अलभयुतत की, क्जसके लिए अपराि का शमि ककया गया है, दोर्मुक्तत का प्रभाव होगा ।
(8) उपिारा (1) में ववनिहदषष्ट ककसी अपराि का शमि इस िारा में यथाउपबंधित के लसवाय िह ं ककया जाएगा । अपरािों का 31. (1) कोई न्य ायािय, यथाक्स् थनत, िागर ववमािि महानिदेशक या िागर संज्ञाि । ववमािि सुरिा ब् यरू ो महानिदेशक या वायुयाि दघु टष िा अन् वेर्ण ब् यूरो महानिदेशक द्वारा या उसकी पूव ष लिखित अिुमनत से ककए गए पररवाद के लसवाय इस अधिनियम के अिीि दंडिीय ककसी अपराि का संज्ञाि िह ं िेगा ।
(2) उपिारा (1) में निहदषष् ट पररवाद, उस तार ि से क्जसको अपराि, यथाक्स् थनत, िागर ववमािि महानिदेशक या िागर ववमािि सुरिा ब् यूरो महानिदेशक या वायुयाि दघु टष िा अन् वर्े ण ब् यूरो महानिदेशक के ज्ञाि में आया है, एक वर् ष की अवधि के भीतर ककया जाएगा ।
(3) भारतीय िागररक सुरिा संहहता, 2023 में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, 2023 का 46 प्रथम वग ष न्यानयक मक्जस् रेट के न्यायािय स े निम् ितर कोई न्य ायािय इस अधिनियम के अिीि अपरािों का ववचारण िह ं करेगा । शाक्स् तयों का 32. (1) िारा 25 में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, केंद्र य सरकार, िारा न् यायनिणयष ि । 10, िारा 11, िारा 12, िारा 13, िारा 14 या िारा 17 के अिीि ककसी नियम को बिािे में, ककसी नियम के उलि ंघि के लिए एक करोड रुपए स े अिधिक की शाक्स् त, जो ववहहत की जाए, अधिरोवपत करिे के लिए उपबंि कर सकेगी ।
(2) केंद्र य सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आदेश द्वारा, भारत सरकार के उप सधचव या समतुल य पंक्त त से अन् यूि पंक्त त के अधिकाररयों को ऐसी संख् या में, क्जतिी वह आव यक समझ,े ऐसी र नत में, जैसा कक वह आवयक समझे, उपिारा (1) के अिीि शाक्स् त अधिनिणीत करिे के लिए पदालभहहत अधिकाररयों के रूप में नियुक्त त कर सकेगी ।
(3) केंद्र य सरकार, उपिारा (2) के अिीि पदालभहहत अधिकाररयों की नियुक्त त करते समय उस आदेश में उिकी अधिकाररता भी ववनिहदषष् ट कर सकेगी ।
(4) जहां ऐसे पदालभहहत अधिकार का यह समािाि हो जाता है कक ककसी व् यक्त त द्वारा नियमों के उपबंिों का उल िंघि ककया गया है, तो वह लिखित आदेश द्वारा, उल िंघि की प्रकृनत का, नियमों के ऐसे उपबंि का, क्जसका उल िंघि ककया गया है और ऐसी शाक्स् त अधिरोवपत करिे के लिए कारणों का कथि करते हुए ऐसे व् यक्त त पर शाक्स् त अधिरोवपत कर सकेगा:
परंतु पदालभहहत अधिकार , कोई शाक्स् त अधिरोवपत करिे से पहिे ऐसे व् यक्त त को सुिवाई का अवसर देगा: परंतु यह और कक उपिारा (4) के अिीि पदालभहहत अधिकार शाक्स्त अधिरोवपत करिे के लिए अग्रसर िह ं होगा यहद इस अधिनियम के अिीि ऐसी शाक्स्त अधिरोवपत करिे से लभन्ि कोई कारषवाई समाि हेतुक पर समाि उपबंि का उलिंघि करिे के लिए संक्स्थत की गई है । अपीि । 33. (1) िारा 19 की उपिारा (2) या िारा 32 की उपिारा (4) के अिीि ककए गए ककसी आदेश स े व्यधथत व्यक्तत, मामि े पर अधिकाररता रििे वािे प्रथम अपीिvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 315 अधिकार को अपीि कर सकेगा, जो उस अधिकार से पंक्तत में उच्चतर है क्जसिे आदेश पाररत ककया है ।
(2) प्रथम अपीि अधिकार पिकारों को सुिे जािे का अवसर प्रदाि करिे के पचात ् उस आदेश, क्जसके ववरुद्ि अपीि की गई है, की पुक्ष्ट करते हुए, उपांतररत करते हुए या अपास्त करके, ऐसा आदेश पाररत कर सकेगा, जो वह िीक समझे ।
(3) प्रथम अपीि अधिकार द्वारा पाररत ककसी आदेश से व्यधथत व्यक्तत, मामि े पर अधिकाररता रििे वािे द्ववतीय अपीि अधिकार को अपीि कर सकेगा, जो प्रथम अपीि अधिकार से पंक्तत में उच्चतर है ।
(4) द्ववतीय अपीि अधिकार पिकारों को सुिे जािे का अवसर प्रदाि करिे के पचात ् उस आदेश, क्जसके ववरुद्ि अपीि की गई है, की पुक्ष्ट करते हुए, उपांतररत करते हुए या अपास्त करके, ऐसा आदेश पाररत कर सकेगा, जो वह िीक समझे ।
(5) पूवगष ामी उपिाराओं में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी िागर ववमािि महानिदेशक या िागर ववमािि सुरिा ब्यूरो महानिदेशक द्वारा पाररत ककसी आदेश के ववरुद्ि उपिारा (1) या उपिारा (3) के अिीि अपीि केंद्र य सरकार को की जाएगी ।
(6) जब उपिारा (5) के अिीि कोई आदेश केंद्र य सरकार द्वारा पाररत ककया जाता है तो ऐसे आदेश के ववरुद्ि कोई और अपीि िह ं की जाएगी ।
(7) इस िारा के अिीि प्रत्येक अपीि, ऐसे प्ररूप और ऐसी र नत में तथा ऐस े दस्तावेजों और यथाववहहत फीस के साथ, जो ववहहत की जाए, पाररत आदेश की प्रनत की प्राक्प्त की तार ि से तीस हदि के भीतर की जाएगी: परन्तु उतत अवधि का, कारणों को िेिबद्ि करते हुए तीस हदि से अिधिक अनतररतत अवधि तक ववस्तार ककया जा सकेगा । अध्याय 8 प्रकीण ा
34. इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त नियम बिािे की कोई शक्त त इस शत ष के अिीि प्रकाशि के होगी कक नियम पूव ष प्रकाशि के प चात ् बिाए जाएंग े : प चात ् नियमों का बिाया परन् तु केंद्र य सरकार, िोकहहत में, लिखित आदेश द्वारा, ककसी मामिे में पूव ष जािा । प्रकाशि की शत ष से छूट दे सकेगी ।
35. इस अधिनियम के अिीि बिाया गया प्रत्य ेक नियम, बिाए जािे के प चात ् नियमों का यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्य ेक सदि के समि, जब वह सत्र में हो, कुि तीस हदि की अवधि संसद् के समि रिा जािा । के लिए रिा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आिुिलमक सत्रों में पूर हो सकेगी । यहद उस सत्र के या पूवोत त आिुिलमक सत्रों के िीक बाद के सत्र के अवसाि के पूव ष दोिों सदि उस नियम में कोई पररवतषि करिे के लिए सहमत हो जाए ं तो तत् प चात ् वह ऐसे पररवनततष रूप में ह प्रभावी होगा । यहद उत त अवसाि के पूव ष दोिों सदि सहमत हो जाएं कक वह नियम िह ं बिाया जािा चाहहए तो तत् प चात ् वह निष् प्रभाव हो जाएगा । ककन् तु नियम के ऐसे पररवनततष या निष् प्रभाव होिे से उसके अिीि पहिे की गई ककसी बात की ववधिमान्य ता पर प्रनतकूि प्रभाव िह ं पडेगा ।
36. जहां ककसी व् यक्त त को िारा 25 की उपिारा (1) के अिीि या िारा 10 की न् यायािय की उपिारा (2) के िंड (द) के अिीि बिाए गए ककसी नियम के अिीि दंडिीय ककसी समपहरण का आदेश देि े की अपराि के लिए लसद्िदोर् ककया जाता है, वहा ं वह न्य ायािय, क्जसके द्वारा वह शक्त त । लसद्िदोर् िहराया जाता है, यह निदेश दे सकेगा कक, यथाक्स् थनत, वायुयाि या वस् त ु या316 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— पदाथ,ष क्जसके संबंि में अपराि ककया गया है, केंद्र य सरकार को जब्त हो जाएगा । ध् वसं और 37. (1) ध् वंस और कबाड से संबंधित वाखणज् य पोत पररवहि अधिनियम, 1958 के 1958 का 44 कबाड । भाग 13 के उपबंि समुद्र या ज् वार य जि पर या उिके ऊपर के वायुयाि को वैस े ह िागू होंगे जैस े पोतों को िाग ू होते हैं, और ककसी वायुयाि का स् वामी वायुयाि द्वारा की गई कबाड सेवाओं के लिए युक्त तयुत त इिाम का वैसे ह हकदार होगा जैसे पोत का स् वामी होता है ।
(2) केंद्र य सरकार, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा, वायुयाि को िाग ू होिे वाि े उत त उपबंिों में ऐसे उपान्त रण कर सकेगी, जैसे आव यक या समीचीि प्रतीत हों । भारत में पंजीकृत 38. पेटेंट अधिनियम, 1970 के उपबंि ककसी वायुयाि पर, जो भारत में पंजीकृत 1970 का 39 िह ं ककए गए िह ं है, ककसी आववष् कार के उपयोग पर उसी र नत स े िागू होंगे जैसे वे ववदेशी जियाि वायुयाि पर, में आववष् कार के प्रयोग पर िागू होते हैं । पेटेन् टकृत आववष् कार का उपयोग । कुछ वादों का 39. ककसी भी लसववि न्य ायािय में अनतचार या न् यूसेन्स के संबंि में कोई वाद वजिष । केवि इस कारण से िह ं िाया जाएगा कक वायुयाि की भूलम से इतिी ऊंचाई के ककसी संपवत्त के ऊपर उडाि पर है, जो वायु, मौसम और मामिे की सभी पररक्स् थनतयों को देिते हुए युक्त तयुत त है, या केवि ऐसी उडाि से होिे वाि सामान्य घटिा के आिार पर है । सद्भ ावपूवकष की 40. इस अधिनियम के अिीि सद्भावपूवकष की गई या की जािे के लिए आशनयत गई कारषवाई का ककसी बात के लिए ककसी व्य क्त त के ववरुद्ि कोई वाद, अलभयोजि या अन्य ववधिक संरिण । कायवष ाह िह ं की जाएगी । अधिनियम के 41. इस अधिनियम या इसके अिीि बिाए गए ककसी आदेश या ककसी नियम की िागू होिे की कोई बात, जो िारा 13 या िारा 14 के अिीि बिाए गए नियम से लभन्ि है, जो संघ व् याववृत्त । की िौसेिा, सेिा या वायुसेिा या तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधि द्वारा गहित संघ के अन्य सशस्त्र बिों से संबंधित या उसके द्वारा अिन्य तः नियोक्जत ककसी वायुयाि को या उसके संबंि में अथवा ऐसे वायुयाि के संबंि में नियोक्जत ऐसे बिों के ककसी व्यक्तत को िागू िह ं होगी :
परंतु संघ की िौसेिा, सेिा या वायुसेिा से लभन् ि संघ के ककसी सशस् त्र बि का कोई वायुयाि, क्जसके लिए अधिनियम, क्जसका िारा 43 के अिीि निरसि कर हदया गया है और इसके अिीि बिाए गए नियमों के उपबंि इस अधिनियम के आरंभ की तार ि को िागू थ,े इस अधिनियम और इसके अिीि बिाए गए नियमों द्वारा उस तार ि तक, जो केंद्र य सरकार, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा ववनिहदषष्ट करे, शालसत होते रहेंगे । कहििाइयों को 42. (1) यहद इस अधिनियम के उपबंिों को प्रभावी करिे में कोई कहििाई उत्पन्ि दरू करिे की होती है तो केंद्र य सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आदेश द्वारा ऐसे उपबंि कर सकेगी, जो शक्तत । इस अधिनियम के उपबंिों स े असंगत ि हो, जो उस कहििाई को दरू करिे के लिए उस े आवयक या समीचीि प्रतीत हो :
परंतु ऐसा कोई आदेश अधिनियम के प्रारंभ की तार ि से दो वर् ष की समाक्प्त के पचात ् िह ं ककया जाएगा ।
(2) इस िारा के अिीि ककया गया प्रत्येक आदेश, ककए जािे के पचात,् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदि के समि रिा जाएगा ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 317 1934 का 22 43. (1) वायुयाि अधिनियम, 1934 का निरसि ककया जाता है । निरसि और व्याववृत्त ।
(2) उपिारा (1) में निहदषष्ट अधिनियम के निरसि के होते हुए भी, की गई कोई बात या की गई या ककए जािे के लिए आशनयत कोई कारषवाई, क्जसके अंतगतष ककसी नियम, ववनियमि, अधिसूचिा, निर िण या आदेश का ककया जािा या जार ककया जािा सक्म्मलित है ; या अिुदत्त कोई अिुज्ञक्प्त, प्रमाणपत्र, अिुमोदि, अिुज्ञा या छूट या निष्पाहदत कोई दस्तावेज या लिित ; या जार ककया गया कोई निदेश ; या इस प्रकार निरलसत अधिनियम के अिीि की गई कोई कायवष ाह या अधिरोवपत शाक्स्त, दंड, जब्ती या जुमाषिा, जहां तक वह इस अधिनियम के उपबंिों से असंगत िह ं है, इस अधिनियम के तत्स्थािी उपबंिों के अिीि की गई समझी जाएगी । 1897 का 10 (3) उपिारा (2) में ववलशष्ट मामिों का वणिष सािारण िंड अधिनियम, 1897 की िारा 6 की ऐसी अपीि के प्रभाव के संबंि में सािारणतया िाग ू होिे को प्रनतकूि रूप स े प्रभाववत करिे वािा िह ं समझा जाएगा । __________vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 319 बॉयलर अधिनियम, 2025 (2025 का अधिनियम संखयांक 12) [4 अप्रैल, 2025] बॉयलरों के विनियमि, िाष्प-बॉयलरों के विस्फोट के खतरे से व्यक्ततयों के जीिि और संपवि की सुरक्षा तथा देश में बॉयलरों के विनिमााण, निमााण तथा उपयोग के दौराि पंजीकरण और निरीक्षण में एकरूपता के ललए तथा उससे संबंधित या उसके आिुषंधगक विषयों का उपबंि करिे के ललए अधिनियम भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा छिम्िलिखित रूप में यह अधिछियलमत हो :— अध्याय 1 प्रारंलिक
1. (1) इस अधिछियम का संक्षिप् त िाम बॉयिर अधिछियम, 2025 है । संक्षिप्त िाम, ववस् तार और
(2) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा प्रारंभ । छियत करे और इस अधिछियम के लभन्ि-लभन्ि उपबंिों के लिए लभन्ि-लभन्ि तारीिें छियत की जा सकेंगी और ऐसे ककसी उपबंि में इस अधिछियम के प्रारंभ के प्रछत ककसी छिर्देश का यह अर् ष िगाया जाएगा कक वह उस उपबंि के प्रवत्तृ होिे के प्रछत छिर्देश है ।
(3) अलभव्यक्त रूप से जैसा अन्यर्ा उपबंधित है उसके लसवाय, इस अधिछियम के उपबंि सभी बॉयिरों और बॉयिर घटकों को िागू होंगे, जजिके अंतगतष केंद्रीय सरकार या राज्य सरकारों से संबंधित बॉयिर और बॉयिर घटक भी हैं ।320 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(4) इस अधिछियम की कोई बात, छिम्िलिखित को िागू िहीं होंगी— (क) रेि स े संबंधित या उसके छियंत्रण के अिीि िोकोमोटटव बॉयिर ; (ि) (i) वाष्प द्वारा पूणतष : या भागत: िोटर्दत ककसी जियाि का ;
(ii) सेिा, िौसेिा या वायुसेिा से संबंधित या उसके छियंत्रण के अिीि ; या
(iii) यटर्द बॉयिर िमता में एक सौ िीटर से अधिक िहीं है, तो अस्पतािों या पररचयाष गहृ ों में प्रयुक्त ववसंक्रामक या रोगाणुिाशक से संबंधित, कोई बॉयिर या बॉयिर घटक । पररभार्ाए ं । 2. इस अधिछियम में, जब तक कक संर्दभ ष से अन्यर्ा अपेक्षित ि हो,— (क) “र्दघु टष िा” से बॉयिर या बॉयिर घटकों का ऐसा ववस् फोट अलभप्रेत है, जो उसके सामर्थय ष को कमजोर करिे के लिए उपयुक् त है या उससे जि या वाष् प का ऐसा अछियंत्रत्रत बहाव होता है, जजससे ककसी व् यजक् त की मत्ृ यु या उसको िछत अर्वा ककसी संपवत्त को िुकसाि काररत हो सकता है ;
(ि) “बोर्”ष से िारा 3 के अिीि गटित केंद्रीय बॉयिर बोर् ष अलभप्रेत है; (ग) “बॉयिर” से ऐसा र्दबाव पात्र अलभप्रेत है जजसमें उसके स् वयं के बाह्य उपयोग के लिए ऊष् मा के अिुप्रयोग द्वारा वाष् प उत् पन्ि की जाती है, जो वाष् प बंर्द कर टर्दए जािे पर पूणतष : या भागत: र्दबाव में रहता है ककंतु इसके अंतगषत ऐसा र्दबाव पात्र िहीं है,—
(i) जो पच्चीस िीटर से कम िमता वािा है, ऐसी िमता को भरणरोिी वाल् व से मुख् य वाष् परोिी वाल्व तक मापा जाता है ; या
(ii) जो एक ककिोग्राम प्रछत वग ष सेंटीमीटर स े कम डर्जाइि गेज र्दबाव या कक्रयाशीि गेज र्दबाव वािा है ; या
(iii) जजसमें जि को एक सौ डर्ग्री सेंटीग्रेर् से कम पर ऊजष् मत ककया जाता है ; (घ) “बॉयिर घटक” से वाष् प ििी, भरण ििी, लमतव्ययक, अछततापक, कोई मढ़ाई या अन्य कफटटगं और ककसी बॉयिर का कोई अन्य ऐसा बाह्य या आंतररक भाग अलभप्रेत है जो एक ककिोग्राम प्रछत वग ष सेंटीमीटर गेज से अधिक र्दबाव के अिीि है । स्पष्टीकरण—इस िंर् के प्रयोजिों के लिए “अछततापक” पर्द स े कोई ऐसा उपकरण अलभप्रेत है जो उस र्दवाब पर संतजृप्त तापमाि से परे वाष्प के तापमाि को बढ़ािे के प्रयोजि के लिए भागत: या पूणतष : फ्िू गैसों के लिए िुिा रहता है और उसमें पुि:तापक सजम्मलित है ;
(ङ) “मुख् य छिरीिक”, “उपमुख् य छिरीिक” और “छिरीिक” से िारा 5 के अिीि क्रमश: मुख् य छिरीिक, उपमुख् य छिरीिक तर्ा छिरीिक छियुक् त ककया गया व् यजक् त अलभप्रेत है ; (च) “सिम प्राधिकारी” से िारा 6 की उपिारा (1) में छिटर्दषष्ट कोई संस् र्ा अलभप्रेत है;vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 321 (ि) “सिम व् यजक् त” से ऐसी रीछत में मान्य ताप्राप् त कोई छिरीिक या व् यजक् त अलभप्रेत है जजसे ववछियमों द्वारा ववछिमाषण, छिमाषण और उपयोग के र्दौराि बॉयिरों और बॉयिर घटकों के छिरीिण तर्ा प्रमाणि के लिए ववछिटर्दषष्ट ककया जाए;
(ज) “लमतव्ययक” से भरण ििी का कोई ऐसा भाग अलभप्रेत है जो अवलशष् ट ऊष् मा को एकत्रत्रत करिे के लिए फ्िू गसै ों की कक्रया के लिए पूणतष : या भागत: िुिा रहता है ; (झ) “भरण ििी” से पूणतष : या भागत: र्दबाव के अिीि कोई ििी या संबद्ि कफटटगं अलभप्रेत है जजसके माध्यम से भरण जि सीिे बॉयिर में पहुंचता है और जो उसका अलभन्ि भाग िहीं है ;
(ञ) “छिरीिण प्राधिकारी” से ववछिमाषण और छिमाषण के र्दौराि बॉयिरों और बॉयिर घटकों के छिरीिण और प्रमाणि के लिए ऐसी रीछत में मुख्य छिरीिक या मान्य ताप्राप् त कोई संस्र् ा अलभप्रेत है, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट की जाए ;
(ट) “ववछिमाषण” से बॉयिर या बॉयिर घटकों या र्दोिों का ववछिमाषण, सजन्ि माषण और उसे गढ़िा अलभप्रेत है; (ि) “ववछिमाषता” से कोई ऐसा व् यजक् त अलभप्रेत है, जो बॉयिर, बॉयिर घटकों या र्दोिों के ववछिमाषण में िगा हुआ है;
(र्) “अधिसूचिा” से राजपत्र में प्रकालशत अधिसूचिा अलभप्रेत है ; (ढ़) “स्वामी” के अन्त गतष ऐसा व्यजक्त आता है जजसके पास उसके स् वामी के अलभकताष के रूप में बॉयिर का कब् जा है या उसका उपयोग करता है और ककसी ऐस े बॉयिर का उपयोग करिे वािा ऐसा व् यजक् त भी है जजसे उसिे बॉयिर के स् वामी से भाड़े पर लिया है अर्वा उिार के रूप में प्राप् त ककया है ;
(ण) “ववटहत” से इस अधिछियम के अिीि बिाए गए छियमों द्वारा ववटहत अलभप्रेत है ; (त) “ववछियम” से िारा 40 के अिीि बोर् ष द्वारा बिाए गए ववछियम अलभप्रेत हैं ; (र्) “राज्य सरकार” के अन्तगतष संघ राज्यिेत्र प्रशासि भी है ;
(र्द) “वाष् प ििी” से कोई ऐसी ििी अलभप्रेत है, जजससे वाष् प छिकिता है, यटर्द—
(i) वह र्दबाव, जजस पर ऐसी ििी से होकर छिकििे वािे वाष् प का र्दबाव, वायुमंर्िीय र्दबाव से साढ़े तीि ककिोग्राम प्रछत वगष सेंटीमीटर से अधिक हैं, या
(ii) ऐसी ििी का आंतररक व्य ास र्दो सौ चौवि लमिीमीटर से अधिक है और वाष् प का र्दबाव वायुमंर्िीय र्दबाव से एक ककिोग्राम प्रछत वग ष सेंटीमीटर से अधिक है, और र्दोिों ही र्दशाओं में, वाष् प ििी और भरण ििी की संयोजजत कफटटगं भी इसके अंतगतष है ;322 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— (ि) “संरचिात्म क पररवतषि, पररवििष या िवीकरण” से छिम् िलिखित अलभप्रेत हैं,—
(i) बॉयिर या बॉयिर घटकों के डर्जाइि में कोई पररवतिष ;
(ii) बॉयिर या बॉयिर घटकों के ककसी भाग का ऐसे भाग द्वारा प्रछतस् र्ापि, जो उसी ववछिर्देश के अिुरूप िहीं है ; और
(iii) बॉयिर या बॉयिर घटकों के ककसी भाग में कोई पररवििष ; (ि) “तकिीकी सिाहकार” से िारा 4 की उपिारा (1) के अिीि छियुक् त तकिीकी सिाहकार अलभप्रेत है । अध्याय 2 केंद्रीय बॉयलर बोर् ा केंद्रीय बॉयिर
3. (1) केंद्रीय सरकार, इस अधिछियम के प्रयोजिों के लिए, अधिसूचिा द्वारा बोर् ष । केंद्रीय बॉयिर बोर् ष के िाम स े ज्ञात एक बोर् ष का गिि कर सकेगी ।
(2) बोर्,ष छिजम् िलिखित सर्दस् यों से लमिकर बिेगा, अर्ाषत:्— (क) बोर् ष पर प्रशासछिक छियंत्रण रििे वािे ववभाग का भारसािक सधचव, भारत सरकार, जो पर्देि अध् यि होगा ; (ि) संघ राज् यिेत्र से लभन्ि प्रत्य ेक राज् य का प्रछतछिधित्व करिे के लिए एक सर्दस्य, जो उस राज्य सरकार द्वारा िामछिटर्दषष् ट ककया जािे वािा एक वररष्ि तकिीकी अधिकारी होगा, जो बॉयिरों के छिरीिण और परीिण से अवगत हो ;
(ग) छिम् िलिखित का प्रछतछिधित् व करिे के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा िंर् (ि) के अिीि िामछिटर्दषष्ट सर्दस्यों की समाि संख् या में, िामछिटर्दषष्ट ककए जािे वािे सर्दस्य, अर्ाषत:्—
(i) केंद्रीय सरकार ;
(ii) भारतीय मािक ब् यूरो ;
(iii) बॉयिर और बॉयिर घटक ववछिमाषता ;
(iv) राष् रीय प्रयोगशािाएं ;
(v) इंजीछियरी परामश ष अलभकरण ;
(vi) बॉयिरों के उपयोगकताष ; और
(vii) ऐसे अन्य टहत, जजिके बारे में केंद्रीय सरकार की यह राय है कक उिका बोर् ष में प्रछतछिधित् व होिा चाटहए ; (घ) तकिीकी सिाहकार, जो सर्दस् य-सधचव, पर्देि होगा ।
(3) उपिारा (2) के िंर् (ि) और िंर् (ग) के अिीि िामछिर्देलशत सर्दस् यों की पर्दावधि और उिके िामछिर्देशि की रीछत वह होगी, जो केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत की जाए ।
(4) बोर्,ष अपिे द्वारा ककए जािे वािे सभी कारबार के सचं ािि के लिए अपिी ही प्रकक्रया अविाररत कर सकेगा ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 323
(5) बोर् ष को अपिे सर्दस् यों में से सलमछतयों और उप-सलमछतयों का गिि करिे तर्ा ऐसी सलमछतयों या उप-सलमछतयों को अपिी ककन्हीं शजक् तयों और कतव्ष यों को प्रत्यायोजजत करिे की शजक् त होगी ।
(6) बोर् ष में ककसी ररजक् त के होते हुए भी, बोर् ष की शजक्त यों का प्रयोग ककया जा सकेगा ।
(7) बोर् ष के कृत्य, वाष्प-बॉयिरों के ववस्फोट के ितरे स े व्यजक्तयों के जीवि और संपवत्त की सुरिा सुछिजचचत करिे के लिए बॉयिर और बॉयिर घटकों के डर्जाइि, ववछिमाषण, छिमाषण और उपयोग को ववछियलमत करि े के लिए और पंजीकरण तर्ा छिरीिण में एकरूपता के लिए तर्ा इि प्रयोजिों के लिए, ऐस े ववछियम बिािे होंगे, जो वह िीक समझे ।
4. (1) केंद्रीय सरकार, अधिसूचिा द्वारा, ऐसी अहषताएं और अिुभव रििे वाि े तकिीकी सिाहकार । व् यजक् तयों में से एक तकिीकी सिाहकार छियुक् त करेगी, जो केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत ककया जाए ।
(2) तकिीकी सिाहकार का वेति और भत्ता तर्ा सेवा के अन्य छिबंिि और शतें, वे होंगी, जो केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत की जाएं ।
(3) तकिीकी सिाहकार, इस अधिछियम या इसके अिीि बिाए गए छियमों और ववछियमों के अिीि उसको समिुर्देलशत शजक् तयों का प्रयोग करिे और कतव्ष यों का छिवहष ि करिे के अछतररक्त , ऐसी अन् य शजक् तयों का प्रयोग करेगा और ऐसे कतव्ष यों का छिवहष ि करेगा, जो केंद्रीय सरकार और बोर्,ष उसे प्रत्य ायोजजत करें । अध्याय 3 निरीक्षण, प्रमाणि और पंजीकरण
5. (1) राज् य सरकार, इस अधिछियम के प्रयोजिों के लिए राज् य के लिए उि मुख् य छिरीिक, उप मुख् य व् यजक् तयों को छिरीिक के रूप में छियुक् त कर सकेगी, जजन्ह ें वह उधचत समझे और उि छिरीिक और स् र्ािीय सीमाओं को पररछिजच चत कर सकेगी, जजिके भीतर प्रत्य ेक छिरीिक, इस छिरीिक । अधिछियम द्वारा या इसके अिीि प्रर्दत्त शजक् तयों का प्रयोग करेगा तर्ा छिरीिकों को प्रर्दत्त और अधिरोवपत कतव्ष यों का पािि करेगा ।
(2) राज् य सरकार, राज् य के लिए ऐसे व् यजक् तयों को, उप मुख् य छिरीिक के रूप में छियुक् त कर सकेगी, जजन्ह ें वह उधचत समझे और उि स् र्ािीय सीमाओं को पररछिजच चत कर सकेगी जजिके भीतर प्रत् येक उप मुख् य छिरीिक, इस अधिछियम के अिीि अपिी शजक् तयों का प्रयोग करेगा तर्ा अपिे कतव्ष यों का पािि करेगा ।
(3) उप मुख् य छिरीिक, इस अधिछियम द्वारा या इसके अिीि छिरीिक को प्रर्दत्त शजक् तयों का प्रयोग कर सकेगा और उसे अधिरोवपत कतव्ष यों का पािि कर सकेगा तर्ा इसके अछतररक् त, इस अधिछियम द्वारा या इसके अिीि मुख् य छिरीिक को प्रर्दत्त ऐसी शजक् तयों का प्रयोग कर सकेगा या उस े अधिरोवपत ऐसे कतव्ष यों का पािि कर सकेगा, जो राज् य सरकार द्वारा उसे सौंप े जाएं ।
(4) राज् य सरकार, राज् य के लिए ककसी व् यजक् त को मुख् य छिरीिक के रूप में छियुक् त कर सकेगी, जो इस अधिछियम द्वारा या इसके अिीि मुख् य छिरीिक को प्रर्दत्त324 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— शजक् तयों और उस पर अधिरोवपत कतव्ष यों के अछतररक् त उप मुख् य छिरीिक या छिरीिकों को इस प्रकार प्रर्दत्त ककसी शजक् त का प्रयोग कर सकेगा उसे अधिरोवपत ककसी कतव्ष य का पािि कर सकेगा ।
(5) कोई व् यजक् त, मुख् य छिरीिक, उप मुख् य छिरीिक या छिरीिक के रूप में तब तक छियुक् त िहीं ककया जाएगा, जब तक कक उसके पास ऐसी अहषताएं और अिुभव ि हों, जो केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत ककए जाएं ।
(6) इस अधिछियम के उपबन्ि ों के अिीि रहते हुए, उप मुख् य छिरीिक और छिरीिक, इस अधिछियम द्वारा या इसके अिीि उन्हें प्रर्दत्त शजक् तयों का प्रयोग करेंग े तर्ा उन्हें अधिरोवपत कतव्ष यों का पािि करेंगे, जो मुख् य छिरीिक के सािारण अिीिण तर्ा छियंत्रण के अिीि होगा ।
(7) मुख् य छिरीिक, उप मुख् य छिरीिक और छिरीिक, बॉयिर के उधचत अिुरिण तर्ा सुरक्षित कायषकरण के बारे में स् वालमयों को ऐसी सिाह र्दे सकेंगे, जैसी वे िीक समझें ।
(8) मुख् य छिरीिक, उप मुख् य छिरीिक और छिरीिक, ऐसी अन्य शजक्तयों का प्रयोग करेंगे तर्ा ऐसे कतव्ष यों का पािि करेंग,े जो राज्य सरकार द्वारा ववटहत ककया जाए ।
(9) मुख् य छिरीिक, उप मुख् य छिरीिक और छिरीिक, भारतीय न्याय संटहता, 2023 की िारा 2 के िंर् (28) के अर् ष के अंतगतष िोक सेवक समझे जाएंगे । 2023 का 45 वेल् र्र प्रमाणपत्र 6. (1) सिम प्राधिकारी, ऐसी रीछत में, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट की जाए, प्रर्दाि करिे के बॉयिर या बॉयिर घटकों की वेजल्र्ंग के लिए वेल्र्रों को प्रमाणपत्र प्रर्दाि करिे के लिए लिए सिम मान्यताप्राप्त संस्र्ा होगी । प्राधिकारी ।
(2) कोई व् यजक् त, जो ककसी बॉयिर या बॉयिर घटक या र्दोिों से संसक् त या संबंधित ककसी वेजल् र्ंग काय ष करिे का आशय़ रिता है, सिम प्राधिकारी को, ऐसा वेल् र्र प्रमाणपत्र जारी करिे के लिए आवेर्दि करेगा, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए ।
(3) उपिारा (2) के अिीि आवेर्दि की प्राजप् त पर, सिम प्राधिकारी, वेल् र्र प्रमाणपत्र के लिए परीिा और उस े प्रर्दाि करिे के लिए ऐसी प्रकक्रया का अिुसरण करेगा, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए ।
(4) यटर्द सिम प्राधिकारी का यह समािाि हो जाता है कक उपिारा (2) के अिीि वेल् र्र प्रमाणपत्र के लिए आवर्दे ि करिे वािे व् यजक् त िे वेल्र् र प्रमाणपत्र प्रर्दाि ककए जािे की शतों का अिुपािि कर टर्दया है तो वह ऐसा प्रमाणपत्र, ऐसी शतों के अिीि रहते हुए और ऐसी फीस का भुगताि ककए जािे पर जो ववछियमों द्वारा ववटहत की जाएं, प्रर्दाि करेगा :
परन् तु सिम प्राधिकारी, ककसी व् यजक् त को ऐसा प्रमाणपत्र र्देिे से तब तक इिकार िहीं करेगा, जब तक कक ऐसे व् यजक् त को सुिवाई का अवसर िहीं र्दे टर्दया जाता है । बॉयिर और 7. कोई व् यजक् त, बॉयिर या बॉयिर घटक या र्दोिों का तब तक ववछिमाषण िहीं बॉयिर घटकों के करेगा या िहीं कराएगा, जब तक कक,— ववछिमाषण की पूव ष शत ें । (क) ऐस े पररसरों या प्रसीमाओं में, जजसमें बॉयिर या बॉयिर घटकों या र्दोिों का ववछिमाषण ककया जाता है, डर्जाइि और सजन्िमाषण के लिए ऐसी सुवविाएं िहींvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 325 है, जो ववछियमों द्वारा ववटहत की जाएं ;
(ि) बॉयिर और बॉयिर घटकों का डर्जाइि और रेिाधचत्र का प्रमाणपत्र िारा 8 की उपिारा (3) के िण् र् (क) के अिीि छिरीिण प्राधिकारी द्वारा प्रर्दत्त ि कर टर्दया गया हो ; (ग) ऐस े बॉयिर या बॉयिर घटक या र्दोिों की ववछिमाषण में प्रयुक् त सामग्री, मढ़ाई और कफटटगं ऐसे ववछिटर्दषष्ट ववछिर्देशों के अिुरूप ि हो, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए ; और (घ) बॉयिर या बॉयिर घटक की वेजल् र्ंग के लिए ववछियोजजत व् यजक् त के पास, िारा 6 की उपिारा (4) के अिीि, सिम प्राधिकारी द्वारा प्रर्दत्त वेल् र्र प्रमाणपत्र ि हो ।
8. (1) प्रत्य ेक ववछिमाषता, ककसी बॉयिर या बॉयिर घटकों का ववछिमाषण प्रारंभ करिे ववछिमाषण के र्दौराि छिरीिण । के पूव,ष ववछिमाषण के ऐसे प्रक्रमों पर, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककए जाएं, छिरीिण करिे के लिए एक छिरीिण प्राधिकारी ववछियोजजत करेगा ।
(2) उपिारा (1) के अिीि ववछियोजजत छिरीिण प्राधिकारी, बॉयिर या बॉयिर घटकों के छिरीिण और प्रमाणि के लिए ऐसी प्रकक्रया का अिुसरण करेगा, जो ववछियमों द्वारा ववटहत की जाएं ।
(3) जहां छिरीिण के पच चात—् (क) छिरीिण प्राधिकारी का यह समािाि हो जाता है कक बॉयिर या बॉयिर घटक का डर्जाइि और रेिाधचत्र ऐसे मािकों के अिुरूप है, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककए जाए, तो वह छिरीिण प्रमाणपत्र प्रर्दाि करेगा और बॉयिर या बॉयिर घटक या र्दोिों पर स् टाम् प िगाएगा ; या (ि) छिरीिण प्राधिकारी की यह राय है कक बॉयिर या बॉयिर घटक या र्दोिों ऐसे मािकों के अिुरूप िहीं है, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककए जाएं, तो वह उि कारणों से, जो िेिबद्ि ककए जाएंगे, ऐसा प्रमाणपत्र जारी करिे से इिकार कर सकेगा :
परन् तु ककसी प्रमाणपत्र से तब तक इिकार िहीं ककया जाएगा जब तक कक छिरीिण प्राधिकारी िे, बॉयिर या बॉयिर घटक या र्दोिों के ववछिमाषता को लिखित रूप में ऐसे उपान्त रण या सुिार करिे के लिए, जो वह आवच यक समझे, छिर्देश िहीं र्दे टर्दया हो और छिरीिण प्राधिकारी की यह राय है कक ऐसे छिर्देश के बावजूर्द भी बॉयिर या बॉयिर घटक या र्दोिों के ववछिमाषता िे ऐस े उपान्त रण या सुिार िहीं ककए हैं ।
(4) छिरीिण प्राधिकारी, इस िारा के अिीि छिरीिण के प्रयोजिों के लिए, ऐसी फीस प्रभाररत कर सकेगा, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए ।
9. (1) कोई स् वामी, जो िारा 12 के अिीि बॉयिर को रजजस् टर करािे का आशय पररछिमाषण के र्दौराि छिरीिण । रिता है, बॉयिर के छिमाषण के प्रक्रम पर छिरीिण करिे के लिए ककसी छिरीिण प्राधिकारी को ववछियोजजत करेगा ।
(2) छिरीिण प्राधिकारी, बॉयिर या बॉयिर घटक या र्दोिों के छिरीिण और प्रमाणि326 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— के लिए ऐसी प्रकक्रया का अिुसरण करेगा, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट की जाएं ।
(3) जहां छिरीिण के पच चात,्— (क) छिरीिण प्राधिकारी का यह समािाि हो जाता है कक बॉयिर का छिमाषण, ऐसे मािकों के अिुरूप है, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककए जाएं, तो वह ऐसे प्ररूप में, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए, छिरीिण प्रमाणपत्र प्रर्दाि करेगा ; या (ि) छिरीिण प्राधिकारी की यह राय है कक बॉयिर का छिमाषण ऐसे ववछियमों के अिुसार िहीं ककया गया है तो वह उि कारणों से, जो िेिबद्ि ककए जाएंगे, प्रमाणपत्र प्रर्दाि करिे से इिकार कर सकेगा और बॉयिर या बॉयिर घटक के स्वामी और ववछिमाषता को ऐस े इिकार के बारे में तत् काि संसूधचत करेगा :
परन् तु ऐसे ककसी प्रमाणपत्र से तब तक इिकार िहीं ककया जाएगा जब तक कक छिरीिण प्राधिकारी िे स् वामी को लिखित रूप में ऐसे उपान् तरण या सुिार करिे के लिए, जो वह आवच यक समझे, छिर्देश ि र्दे टर्दया हो और छिरीिण प्राधिकारी की यह राय है कक ऐसे छिर्देश के बार्द भी स् वामी िे, ऐसे उपान्त रण या सुिार िहीं ककए हैं ।
(4) छिरीिण प्राधिकारी, इस िारा के अिीि छिरीिण के प्रयोजिों के लिए ऐसी फीस प्रभाररत कर सकेगा, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए । बॉयिर और 10. (1) कोई व्यजक्त, ककसी बॉयिर या बॉयिर घटकों या र्दोिों की मरम्मत तब बॉयिर घटकों की तक िहीं करेगा या िहीं कराएगा, जब तक कक— मरम्मत करिे की पूव ष शतें । (क) उि पररसरों या प्रसीमाओं में, जजिमें बॉयिर या बॉयिर घटकों या र्दोिों का उपयोग ककया जा रहा है, मरम्मत के लिए ऐसी सुवविाओं की व्यवस्र्ा ि कर िी गई हो, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए ;
(ि) बॉयिर या बॉयिर घटकों का डर्जाइि और रेिाधचत्र और ऐसे बॉयिर या बॉयिर घटकों की मरम्मत में प्रयुक्त सामग्री, मढ़ाई और कफटटगं , ऐसे ववछिर्देशों के अिुरूप ि हो, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट की जाए ; (ग) वेजल्र्ंग में िगे व्यजक्त, िारा 6 की उपिारा (4) के अिीि सिम प्राधिकारी द्वारा अिुर्दत्त वेल्र्र प्रमाणपत्र िारण ि करता हो ;
(घ) वह उपयोगकताष, जजसके पास बॉयिर या बॉयिर घटकों की मरम्मत के लिए आंतररक सुवविाएं िहीं है, ककसी ऐसे बॉयिर मरम्मतकताष को छियोजजत िहीं करता है ; (ङ) वह उपयोगकताष, आंतररक या मरम्मतकताषओं द्वारा की जािे वािी मरम्मतों के अिुमोर्दि के लिए ककसी सिम व्यजक्त को ववछियोजजत िहीं करता है ;
(च) ऐसे उपाय करके, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए, ककसी बॉयिर के भीतर काय ष करिे वािे व्यजक्तयों की सुरिा को सुछिजचचत िहीं करता है ।
(2) कोई बॉयिर मरम्मतकताष ऐसा प्रमाणपत्र, ऐसी रीछत में अलभप्राप्त करेगा, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 327
11. (1) इस अधिछियम में अलभव्यक्त रूप से अन्यर्ा उपबंधित के लसवाय, बॉयिर रजजस्टर ि ककए गए या का कोई भी स्वामी उस बॉयिर का उपयोग तब तक िहीं करेगा या उपयोग ककए जािे के अप्रमाखणत लिए अिुज्ञात िहीं करेगा,— बॉयिरों के (क) जब तक उसे इस अधिछियम या तद्िीि बिाए गए छियमों या ववछियमों उपयोग पर रोक। के उपबंिों के अिुसार रजजस्टर ि ककया गया हो ;
(ि) कोई ऐसा बॉयिर जजसका एक राज्य से र्दसू रे राज्य को अन्तरण ककया गया है जब तक उक्त अन्तरण की ररपोटष ऐसी रीछत में, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट की जाए, ि कर र्दी गई हो ; (ग) जब तक स्वामी के पास बॉयिर का उपयोग प्राधिकृत करिे वािा प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश ि हो ;
(घ) ऐसे र्दबाव पर जो उक्त प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश में अलभलिखित र्दबाव से अधिक र्दबाव हो; (ङ) जहां केंद्रीय सरकार िे यह अपेिा करिे वािे छियम बिाए हों कक बॉयिर, र्दिता या िमता का प्रमाणपत्र िारण करिे वािे ऐस े व्यजक्तयों के भारसािि में हों जब तक बॉयिर ऐसे छियमों द्वारा अपेक्षित प्रमाणपत्र िारण करिे वािे ककसी व्यजक्त के भारसािि में ि हो :
परंतु छिरलसत ककए जािे वािे ककसी अधिछियम के अिीि पंजीकृत बॉयिर या प्रमाखणत या अिुज्ञप्त बॉयिर को, यर्ाजस्र्छत, इस अधिछियम के अिीि पंजीकृत या प्रमाखणत समझा जाएगा ।
(2) र्दिता या सिमता प्रमाणपत्र अलभप्राप्त करिे के आशय रििे वािे व्यजक्तयों की अहषता और अिुभव, ऐसा प्रमाणपत्र अलभप्राप्त करिे के लिए फीस और ऐसी प्रकक्रया वह होगी, जो केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत की जाए ।
12. (1) ऐस े बॉयिर का स्वामी, जजसे इस अधिछियम के उपबंिों के अिीि पंजीकृत पंजीकरण । िहीं ककया गया है, बॉयिर को पंजीकरण ककए जािे के लिए छिरीिक को ऐसे रेिाधचत्र, ववलशजष्ट, प्रमाणपत्र और अन्य र्दस्तावेजों के सार्, ऐसे प्ररूप में आवेर्दि करेगा, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककए जाए ।
(2) उपिारा (1) के अिीि पंजीकरण के लिए प्रत्येक आवेर्दि के सार् ऐसी फीस संिग्ि होगी जो राज्य सरकार द्वारा ववटहत की जाए ।
(3) उपिारा (1) के अिीि ककसी आवेर्दि की प्राजप्त पर, छिरीिक, ऐसी बॉयिर की परीिा के लिए, आवेर्दि की प्राजप्त की तारीि से, तीस टर्दि के भीतर या ऐसी िघुतर अवधि, जो राज्य सरकार द्वारा ववटहत की जाए, तारीि छियत करेगा और उसके स्वामी को इस प्रकार छियत की गई तारीि की कम से कम र्दस टर्दि की सूचिा र्देगा ।
(4) उपिारा (3) के अिीि इस प्रकार छियत की गई तारीि को, छिरीिक, अपिा यह समािाि करिे की दृजष्ट से कक बॉयिर को उसके पररछिमाषण के स्र्ि ववछिमाषण के स्र्ाि से छिमाषण के स्र्ि तक अलभवहि के र्दौराि कोई िुकसाि िहीं पहुंचा है, बॉयिर का छिरीिण करेगा और र्दस्तावेजों के सार् छिरीिण की ररपोटष को सात टर्दि के भीतर मुख्य छिरीिक को भेजेगा ।328 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(5) मुख्य छिरीिक, उपिारा (4) के अिीि ररपोटष की प्राजप्त पर— (क) बॉयिर को रजजस्टर करे और उसे या तो तुरंत या अपिा यह समािाि हो जािे के पचचात ् कक बॉयिर या उससे संिग्ि ककसी वाष्प ििी में का कोई संरचिात्मक पररवतषि, पररवििष या िवीकरण, जजसको वह आवचयक समझे, उसके लिए एक रजजस्टर संख्यांक छिजचचत कर सकेगा ; या (ि) बॉयिर को रजजस्टर करिे से इिकार कर सकेगा :
परंतु जहां मुख्य छिरीिक ककसी बॉयिर को रजजस्टर करिे से इिकार करता है वहां तुरंत बॉयिर के स्वामी को अपिे इिकार करिे की संसूचिा उसके कारणों सटहत र्देगा ।
(6) मुख्य छिरीिक, बॉयिर को रजजस्टर करिे पर, स्वामी को ऐसे प्ररूप में, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए, एक प्रमाणपत्र र्देगा इस प्रमाणपत्र में बॉयिर का उपयोग ऐसी अवधि जो बारह मास से अधिक की ि हो ऐसे अधिकतम र्दबाव पर करिे के लिए प्राधिकृत कर सकेगा, जो वह िीक समझे :
परंतु जहां कोई लमतव्ययक या कोई अज्वलित बॉयिर, जो ऐसे प्रसंस्करण संयंत्र का अछिवाय ष भाग है, जजसमें वाष्प जछित करिे के लिए तेि, एस्फाल्ट या त्रबटुलमि का एक मात्र उपयोग ऊष्मा के माध्यम के रूप में ककया जाता है, वहां मुख्य छिरीिक ऐसे बॉयिर का चौबीस मास से अिधिक अवधि के लिए उपयोग ककया जािा प्राधिकृत कर सकेगा ।
(7) छिरीिक तुरंत बॉयिर के स्वामी को मुख्य छिरीिक के आर्देश को संसूधचत करेगा और तद्िुसार स्वामी को ऐसा प्रमाणपत्र अिुर्दत्त करेगा जजसमें ऐसा अिुर्दाि ककए जािे का आर्देश ककया गया है ।
(8) बॉयिर पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्राजप्त पर, स्वामी, बॉयिर पर रजजस्टर संख्यांक को ऐसी रीछत में और ऐसे समय के भीतर, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए, स्र्ायी रूप से अंककत करवाएगा ।
(9) ककसी राज्य के भीतर एक स्र्ाि से र्दसू रे स्र्ाि पर बॉयिरों के अन्तरण को ऐसी रीछत में ररपोटष ककया जाएगा, जो राज्य सरकार द्वारा ववटहत की जाए । प्रमाणपत्र का 13. (1) ककसी बॉयिर के उपयोग को प्राधिकृत करिे वािा प्रमाणपत्र छिम्िलिखित िवीकरण । र्दशाओं में प्रवत्तृ िहीं रहेगा,— (क) उस अवधि की समाजप्त पर, जजसके लिए यह टर्दया गया र्ा ; या (ि) जब बॉयिर र्दघु टष िाग्रस्त हो जाता है ; या (ग) जब बॉयिर को हटाया जाता है तो हटाए जाि े वािा बॉयिर, िड़ा बॉयिर के लसवाय और ऊष्मा सतह बीस वग ष मीटर स े कम हो या कोई वहिीय या यािीय बॉयिर है ; या (घ) िारा 17 में यर्ा उपबंधित के लसवाय, जब ककसी बॉयिर में या उस पर कोई संरचिात्मक पररवतिष , पररवििष या िवीकरण ककया जाता है ; या (ङ) यटर्द मुख्य छिरीिक ककसी ववलशष्ट मामि े में ऐसा छिर्देश र्देता है जब ककसी बॉयिर से संिग्ि ककसी वाष्प ििी में या उसके लिए कोई संरचिात्मक पररवतिष , पररविषि या िवीकरण ककया जाता है ; याvuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 329 (च) मुख्य छिरीिक या छिरीिक द्वारा बॉयिर के स्वामी को ऐसा आर्देश संसूधचत ककए जािे पर जजसमें बॉयिर का उपयोग इस आिार पर प्रछतवर्द्ि ककया गया है कक वह या उससे संिग्ि बॉयिर घटक ितरिाक जस्र्छत में है ।
(2) उपिारा (1) के िंर् (च) के अिीि ककए गए आर्देश में वे आिार अंतववष्ष ट होंगे जजिके आिार पर आर्देश ककया गया है और उिकी संसूचिा स्वामी को र्दी जाएगी ।
(3) जब कोई प्रमाणपत्र प्रवत्तृ िहीं रहता है तब बॉयिर का स्वामी उसके िवीकरण के लिए सिम व्यजक्त को ऐसी रीछत में और ऐसे र्दस्तावेजों तर्ा ऐसी फीस के सार्, जो छियमों में ववछिटर्दषष्ट ककया जाए, आवेर्दि कर सकेगा ।
(4) उपिारा (3) के अिीि ककसी आवेर्दि की प्राजप्त पर, सिम व्यजक्त ऐसी प्राजप्त की तारीि स े पंद्रह टर्दि के भीतर ऐसी रीछत में बॉयिर का छिरीिण करेगा, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए ।
(5) यटर्द सिम व्यजक्त,— (क) का यह समािाि हो जाता है कक बॉयिर और उससे सिं ग्ि बॉयिर घटक अच्िी जस्र्छत में है तो वह उतिी अवधि के लिए, जजतिी ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट की जाए, प्रमाणपत्र अिुर्दत्त करेगा ;
(ि) की यह राय है कक बॉयिर या बॉयिर घटक या र्दोिों ऐसे मािकों के अिुरूप िहीं है, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककए जाएं, वह, उि कारणों से जो िेिबद्ि ककए जाएं ऐसा प्रमाणपत्र अिुर्दत्त करिे से इिकार कर सकेगा :
परंतु ककसी प्रमाणपत्र से तब तक इिकार िहीं ककया जाएगा जब तक छिरीिण प्राधिकारी िे बॉयिर या बॉयिर घटकों या र्दोिों के स्वामी को लिखित रूप में ऐस े उपांतरण या सुिार करिे के लिए, जो वह आवचयक समझे, छिर्देश ि र्दे टर्दया हो और सिम व्यजक्त की यह राय है कक ऐस े छिर्देश के वाबजूर्द भी बॉयिर या बॉयिर घटकों या र्दोिों के स्वामी िे ऐसे उपांतरण या सुिार िहीं ककए है :
परंतु यह और कक सिम व्यजक्त उपिारा (4) के अिीि छिरीिण करिे के अड़तािीस घंटे के भीतर, बॉयिर या बॉयिर घटकों या र्दोिों के स्वामी को अपिी राय में जो कोई त्रुटट हो या कमी हो उसको और उसके कारणों को सूधचत करेगा और मुख्य छिरीिक को तुरंत ऐसी त्रुटट या िामी के बारे में सूधचत करेगा ।
(6) मुख्य छिरीिक, उपिारा (5) के अिीि ककसी सूचिा की प्राजप्त पर, इस अधिछियम और तर्दिीि बिाए गए ववछियमों के उपबंिों के अिीि रहते हुए, प्रमाणपत्र के िवीकरण का ऐसे छिबंििों और शतों पर आर्देश कर सकेगा, जो छियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए या उसके िवीकरण करिे से इिकार कर सकेगा :
परंतु जहां मुख्य छिरीिक ककसी प्रमाणपत्र का िवीकरण करिे से इिकार कर र्देता है तो वह अपिे इिकार को कारणों सटहत बॉयिर के स्वामी को तुरंत संसूधचत करेगा ।
(7) इस िारा की ककसी बात के बारे में यह िहीं समझा जाएगा कक वह बॉयिर के स्वामी को प्रमाणपत्र के चाि ू रहिे के र्दौराि ककसी भी समय बॉयिर के लिए िवीकरण प्रमाणपत्र के लिए आवेर्दि करिे से रोकती है ।330 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— अिंछतम आर्देश । 14. (1) जहां छिरीिक िारा 12 की उपिारा (4) के अिीि मुख्य छिरीिक को ककसी बॉयिर के मामि े की ररपोटष करता है, वहां वह, यटर्द ऐसे बॉयिर या उसके घटकों का उपयोग िारा 13 की उपिारा (1) के िंर् (च) के अिीि ितरिाक जस्र्छत में होिे के कारण प्रछतलसद्ि िहीं होता है, उसके स्वामी को ऐसे अधिकतम र्दबाव से अिधिक र्दबाव पर, जो वह िीक समझे और इस अधिछियम के अिीि बिाए गए छियमों के अिुसार, मुख्य छिरीिक के आर्देश होिे तक बॉयिर को उपयोग करिे के लिए अिुज्ञात करिे वािा लिखित में एक अिंछतम आर्देश र्दे सकेगा ।
(2) ऐसा अिंछतम आर्देश प्रवत्तृ िहीं रहेगा —
(i) जजसको वह मंजूर ककया गया है उस तारीि स े िह मास की समाजप्त पर ; या
(ii) मुख्य छिरीिक के आर्देशों की प्राजप्त पर ; या
(iii) िारा 13 की उपिारा (1) के िंर् (ि), िंर् (ग), िंर् (घ), िंर् (ङ) और िंर् (च) में छिटर्दषष्ट मामिों में से ककसी मामिे में, और इस प्रकार प्रवत्तृ ि रहि े पर छिरीिक को सौंप टर्दया जाएगा । प्रमाणपत्र मंजूर 15. िारा 14 की उपिारा (1) के उपबंिों के अिीि रहते हुए, जब ककसी बॉयिर स े ककए जाि े तक संबंधित प्रमाणपत्र की कािावधि समाप्त हो गयी है तब स्वामी इस शत ष के अिीि रहते बॉयिर का हुए कक उसिे प्रमाणपत्र के िवीकरण के लिए अवधि की समाजप्त से पूव ष िवीकरण के लिए उपयोग । आवेर्दि कर टर्दया है, िारा 13 की उपिारा (3) के अिीि िवीकरण आवेर्दि पर आर्देश जारी होिे तक उस प्रमाणपत्र में र्दज ष ककए गए अधिकतम र्दबाव पर बॉयिर का उपयोग करिे के लिए हकर्दार होगा । प्रमाणपत्र या 16. मुख्य छिरीिक ककसी भी समय ककसी छिरीिक की ररपोटष पर या अन्यर्ा, अिंछतम आर्देश ककसी प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश को वापस िे सकेगा या उसका प्रछतसंहरण कर का प्रछतसहं रण । सकेगा,— (क) यटर्द यह ववचवास करिे का कारण है कक प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश को कपटपूवकष अलभप्राप्त ककया गया है या उसे गिती से या पयाषप्त परीिा के त्रबिा अिुर्दत्त ककया गया है ; या (ि) यटर्द बॉयिर, जजसके सबं ंि में उस े अिुर्दत्त ककया गया है, िछतग्रस्त हो गया है ; या (ग) यटर्द बॉयिर ककसी ऐसे व्यजक्त के भारसािि में है, जजसके पास िारा 11 की उपिारा (1) के िंर् (ङ) में छिटर्दषष्ट र्दिता या सिमता प्रमाणपत्र िहीं है । बॉयिर में 17. इस अधिछियम के अिीि पंजीकृत ककसी बॉयिर में या उसस े संबंधित कोई भी पररवतिष और संरचिात्मक पररवतिष , पररवििष या िवीकरण तब तक िही ककया जाएगा, जब तक कक िवीकरण । ऐसे पररवतिष , पररवििष या िवीकरण को मुख्य छिरीिक द्वारा लिखित रूप में प्राधिकृत ि कर टर्दया गया हो :
परंतु ऐसा प्राधिकार वहां अपेक्षित िहीं होगा, जहां संरचिात्मक पररवतषि, पररविषि या िवीकरण को ककसी सिम व्यजक्त के पयवष ेिण के अिीि ककया जाता है ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 331
18. (1) जहां इस अधिछियम के अिीि पंजीकृत ककसी बॉयिर का स्वामी, बॉयिर वाष्प ििी या बॉयिर घटकों से संिग्ि ककसी वाष्प ििी या उसके संबंि में अन्य घटकों में कोई भी संरचिात्मक का पररवतिष पररवतिष , पररविषि या िवीकरण का आशय रिता है तो वह अपिे आशय की ररपोटष मुख्य और िवीकरण । छिरीिक को लिखित में प्रस्तुत करेगा और उसके सार् प्रस्ताववत पररवतिष , पररविषि या िवीकरण की ऐसी ववलशजष्टयां भेजेगा, जैसा ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए ।
(2) ककसी संरचिात्मक पररवतिष , पररवििष या िवीकरण को सिम व्यजक्त के पयवष ेिण के अिीि बॉयिर मरम्मतकताष प्रमाणपत्र रििे वािे व्यजक्त द्वारा ककया जाएगा ।
19. (1) इस अधिछियम के अिीि बॉयिर या बॉयिर घटकों या र्दोिों की परीिा के परीिा के समय लिए छियत तारीि पर उसका स्वामी,— स्वामी का कतव्ष य । (क) सिम व्यजक्त को परीिा के लिए सभी युजक्तयुक्त सुवविाएं और ऐसी जािकारी र्देिे के लिए, जो उसे युजक्तयुक्त रूप से अपेक्षित हो;
(ि) बॉयिर या बॉयिर घटकों या र्दोिों को उधचत रूप से बिाए रििे तर्ा ऐसी रीछत में, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट ककया जाए, परीिा हेत ु तैयार रििे के लिए ; और (ग) िारा 12 की उपिारा (1) के अिीि बॉयिर के पंजीकरण के लिए आवेर्दि की र्दशा में, सिम व्यजक्त को ऐस े रेिाधचत्र, ववछिर्देश, प्रमाणपत्र और अन्य ववलशजष्टयां, जो ववछियमों द्वारा ववछिटर्दषष्ट की जाए, उपिब्ि करािे के लिए, आबद्ि होगा ।
(2) यटर्द स्वामी, त्रबिा ककसी युजक्तयुक्त कारण के उपिारा (1) के उपबंिों का अिुपािि करिे में असमर् ष रहता है, तो सिम व्यजक्त जांच करिे से इिकार कर सकेगा और मामिे की ररपोटष मुख्य छिरीिक को कर सकेगा, जो जब तक उसके ववरुद्ि पयाषप्त कारण र्दलशतष ि ककया जाए, स्वामी स े बॉयिर के उपयोग के लिए पंजीकरण या प्रमाणपत्र के िवीकरण हेतु िया आवेर्दि करिे की अपेिा करेगा और उस े बॉयिर का उपयोग करिे के लिए छिवर्द्ि कर सकेगा ।
20. ककसी बॉयिर का स्वामी, जजसके पास बॉयिर संबंिी प्रमाणपत्र या अिंछतम प्रमाणपत्र और अिंछतम आर्देश आर्देश है, उस कािावधि के र्दौराि सभी युजक्तयुक्त समयों पर, जजसके लिए प्रमाणपत्र या प्रस्तुत करिा । आर्देश प्रवत्तृ है, उस िेत्र में अधिकाररता रििे वािे जजिा मजजस्रेट, पुलिस आयुक्त या प्रर्म वग ष मजजस्रेट द्वारा जजसमें बॉयिर उस समय अवजस्र्त है या मुख्य छिरीिक या 1948 का 63 छिरीिक या कारिािा अधिछियम, 1948 के अिीि छियुक्त ककसी छिरीिक द्वारा या जजिा मजजस्रेट या पुलिस आयुक्त द्वारा ववशेर् रूप में लिखित रूप में प्राधिकृत ककसी व्यजक्त द्वारा प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश की मांग ककए जािे पर उसे प्रस्तुत करिे के लिए आबद्िकर होगा ।
21. जहां कोई अन्य व्यजक्त, उस कािावधि के र्दौराि, जजसके लिए बॉयिर से प्रमाणपत्र और अिंछतम आर्देश संबंधित प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश प्रवत्तृ है, बॉयिर का स्वामी हो जाता है तो पूववष ती का अन्तरण । स्वामी या उसके ववधिक उत्तराधिकारी उसे प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश को हस्तांतररत करि े के लिए आबद्ि होंगे ।332 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— छिरीिक की प्रवेश 22. कोई छिरीिक, ककसी बॉयिर या उसस े संिग्ि वाष्प ििी की परीिा करिे के करिे की प्रयोजिों के लिए या इस अधिछियम, उसके अिीि बिाए गए छियमों और ववछियमों के शजक्तया ं । उपबंिों के अिुपािि को सुछिजचचत करिे के लिए, सभी युजक्तयुक्त समयों पर, उस िेत्र की पररसीमाओं के भीतर जजसके लिए उसकी छियुजक्त की गई है ककसी ऐसे स्र्ाि या भवि में, जजसमें उसके पास यह ववचवास करिे का कारण है कक ककसी बॉयिर का उपयोग ककया जा रहा है, प्रवेश कर सकेगा । र्दघु टष िा की 23. (1) यटर्द कोई बॉयिर या बॉयिर घटक र्दघु टष िाग्रस्त हो जाता है, तो उसका ररपोटष । स्वामी या भारसािक व्यजक्त र्दघु टष िा के चौबीस घंटे के भीतर छिरीिक को उसकी लिखित ररपोटष करेगा ।
(2) ऐसी प्रत्येक ररपोटष में र्दघु टष िा की प्रकृछत और उसस े बॉयिर या बॉयिर घटकों या ककसी व्यजक्त को हुई िछत, यटर्द कोई हो, का सही वणिष अन्तववष्ष ट होगा और उस े ऐसी रीछत में वखणतष ककया जाएगा, जजससे छिरीिक र्दघु टष िा की गंभीरता को समझ सके ।
(3) प्रत्येक व्यजक्त छिरीिक द्वारा र्दघु टष िा के कारण, प्रकृछत या ववस्तार के संबंि में लिखित रूप में उससे पूिे गए प्रत्येक प्रचि का उत्तर अपिी सवोत्तम जािकारी और योग्यता के अिुसार सही रूप से र्देिे के लिए आबद्ि होगा ।
(4) इस अधिछियम के अिीि र्दघु टष िा के संबंि में जांच ऐसी रीछत में की जाएगी, जो राज्य सरकार द्वारा ववटहत की जाए : परंतु जहां ककसी बॉयिर या बॉयिर घटकों के र्दघु टष िाग्रस्त होिे के कारण कोई मत्ृ यु हो जाती है तो जांच, ऐसे व्यजक्त द्वारा और ऐसी रीछत में की जा सकेगी जो केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत की जाए । अध्याय 4 अपील मुख्य छिरीिक को 24. (1) कोई व्यजक्त जो,— अपीि । (क) ककसी छिरीिक द्वारा, इस अधिछियम द्वारा या उसके अिीि प्रर्दत्त ककसी शजक्त के प्रयोग में ककए गए ककसी आर्देश से ; या (ि) छिरीिक द्वारा ककए गए ककसी ऐस े आर्देश स े या कोई ऐसा प्रमाणपत्र प्रर्दाि करिे के इिकार से, इस अधिछियम द्वारा या उसके अिीि जजसे र्देिे या प्रर्दाि करिे के लिए उससे अपेिा की जाए या प्रर्दाि करिे के लिए सशक्त हों, व्यधर्त कोई व्यजक्त उस तारीि से तीस टर्दि के भीतर, जजसको ऐसा आर्देश या इिकार उसे संसूधचत ककया गया है, आर्देश या इिकार के ववरुद्ि मुख्य छिरीिक को अपीि कर सकेगा ।
(2) उपिारा (1) के अिीि प्रत्येक अपीि ऐसी रीछत में की जाएगी, जो राज्य सरकार द्वारा ववटहत की जाए ।
(3) उपिारा (1) के अिीि की गई ककसी अपीि के छिपटाि की प्रकक्रया वह होगी, जो राज्य सरकार द्वारा ववटहत की जाए ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 333
25. (1) िारा 24 के अिीि मुख्य छिरीिक द्वारा— केंद्रीय सरकार को अपीि । (क) ककसी बॉयिर को पंजीकृत करिे या ककसी बॉयिर के संबंि में प्रमाणपत्र प्रर्दाि करिे या िवीकरण करिे से इिकार करिे वािे ; (ि) आवेटर्दत ककए गए पूण ष अवधि के लिए वैिता रििे वािे प्रमाणपत्र को प्रर्दाि करिे से इिकार करिे वािे ;
(ग) अधिकतम वांछित र्दबाव पर ककसी बॉयिर का उपयोग करिे के लिए प्राधिकृत करिे वािे प्रमाणपत्र को प्रर्दाि करिे से इिकार करिे वािे ; (घ) ककसी प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश को वापस िेिे या प्रछतसंहृत करिे वािे ;
(ङ) ककसी प्रमाणपत्र में इंधगत र्दबाव की मात्रा या वह अवधि, जजसके लिए ऐसा प्रमाणपत्र प्रर्दाि ककया गया है, को कम करिे वािे; (च) ककसी बॉयिर या वाष्प ििी में ककसी संरचिात्मक पररवतिष , पररविषि या िवीकरण का आर्देश करिे वािे ; या (ि) ककसी बॉयिर या वाष्प ििी में या उसमें कोई संरचिात्मक पररवतषि, पररवििष या िवीकरण को मंजूरी र्देिे से इिकार करिे वािे, ककसी आर्देश से व्यधर्त कोई व्यजक्त, उसे ऐसे आर्देश की संसूचिा से तीस टर्दि के भीतर केंद्रीय सरकार को ऐसे प्ररूप और रीछत में, ऐसे समय के भीतर और ऐसी फीस के संर्दाय पर, जो केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत की जाए, अपीि कर सकेगा ।
(2) ककसी छिरीिण प्राधिकारी के ववछिमाषण या छिमाषण के छिरीिण प्रमाणपत्र प्रर्दाि करिे से इिकार करि े से व्यधर्त कोई व्यजक्त, ऐसे इिकार की उस े संसूचिा की तारीि से तीस टर्दि के भीतर, केंद्रीय सरकार को अपीि कर सकेगा ।
(3) ककसी अपीि के छिपटाि की प्रकक्रया वह होगी, जो केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत की जाए ।
26. (1) िारा 25 के अिीि, केंद्रीय सरकार द्वारा ककए गए आर्देश से व्यधर्त कोई आर्देश के पुिरीिण के व्यजक्त, ऐसे आर्देश की उसे की गई संसूचिा की तारीि से साि टर्दि के भीतर केंद्रीय लिए आवेर्दि । सरकार को उसके आर्देश के पिु रीिण के लिए आवेर्दि कर सकेगा ।
(2) इस िारा के अिीि, आर्देश के पुिरीिण के लिए प्रत्येक आवेर्दि, ऐसे प्ररूप और रीछत में, ऐसे समय के भीतर और ऐसी फीस के संर्दाय पर ककया जाएगा, जो केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत ककया जाए । अध्याय 5 अपराि और शाक्स्तयां
27. बॉयिर का कोई स्वामी जो,— िोटी शाजस्तयां ।
(i) िारा 14 की उपिारा (2) की अपेिािुसार ककसी अिंछतम आर्देश का अभ्यपणष करिे से ; या
(ii) ककसी प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश को, जब िारा 20 के अिीि ऐसा करिे की अपेिा की जाए प्रस्तुत करिे से; या334 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(iii) ककसी प्रमाणपत्र या अिंछतम आर्देश को िारा 21 की अपेिािुसार, ककसी बॉयिर के िए स्वामी को सौंपिे से; या
(iv) जब िारा 23 के अिीि ऐसी अपेिा की जाए, बॉयिर या बॉयिर घटक की ककसी र्दघु टष िा की ररपोटष करिे से, इिकार करता है या त्रबिा ककसी युजक्तयुक्त कारण के असफि रहता है, वह शाजस्त के लिए र्दायी होगा, जो पांच हजार रुपए तक की हो सकेगी । बॉयिर के अवैि 28. ककसी बॉयिर का कोई ऐसा स् वामी, जो— उपयोग के लिए (क) ककसी भी ऐसी र्दशा में, जजसमें इस अधिछियम के अिीि बॉयिर के शाजस् तयां । उपयोग के लिए प्रमाणपत्र या अिजन् तम आर्देश की अपेिा की जाती है, या तो ककसी ऐसे प्रमाणपत्र या ऐसे ककसी आर्देश के त्रबिा अर्वा उसके द्वारा अिुज्ञात र्दबाव स े अधिक र्दबाव पर बॉयिर का उपयोग करेगा ; या (ि) ऐसे ककसी बॉयिर का उपयोग करता है या उपयोग ककए जािे की अिुज्ञा र्देता है जजसे िारा 11 की उपिारा (1) के िंर् (ि) की अपेिािुसार ऐसे अन्त रण की ररपोटष ककए त्रबिा एक राज्य से र्दसू रे राज्य को अंतररत ककया गया है ; या (ग) इस अधिछियम के अिीि बॉयिर को आबंटटत रजजस् टर संख् यांक को िारा 12 की उपिारा (8) की अपेिािुसार बॉयिर पर स्र्ायी रूप से धचजह्ित करवािे में असफि रहता है, तो जुमाषिे का र्दायी होगा, जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा, और उल्िंघि जारी रहिे की र्दशा में, अछतररक् त जुमाषिे का र्दायी होगा, जो प्रर्म टर्दि के पच चात ् प्रत् येक ऐसे टर्दि के लिए, जजसके र्दौराि उल्िंघि जारी रहता है, एक हजार रुपए तक का हो सकेगा । कुि अपरािों के 29. कोई व्यजक्त, जो— लिए र्दंर् । (क) मुख् य छिरीिक की पूव ष मंजूरी प्राप् त ककए त्रबिा ही, जबकक िारा 17 द्वारा ऐसा करिा अपेक्षित है, बॉयिर में या उसके संबंि में कोई संरचिात्मक पररवतिष , पररवििष या िवीकरण करता है अर्वा मुख् य छिरीिक को पहिे सूधचत ककए त्रबिा ही, जबकक िारा 18 द्वारा ऐसा करिा अपेक्षित है, ककसी वाष् प ििी में संरचिात् मक पररवतिष , पररविषि या िवीकरण करता है ; या (ि) बॉयिर की सुरिा वाल् व के सार् इस प्रकार िेड़िाड़ करता है कक वह उस अधिकतम र्दबाव पर चिाए जािे के लिए छिजष् क्रय हो जाए, जजस पर इस अधिछियम के अिीि बॉयिर का उपयोग प्राधिकृत ककया गया है ; या (ग) इस अधिछियम के अिीि बिाए गए ववछियमों के अिुसार, बॉयिर के वाष् प या ऊष् म जि संयोजि को ककसी अन्य बॉयिर या ईंिि में से प्रभावी रूप से अिग ककए त्रबिा, ककसी अन्य व् यजक् त को बॉयिर के भीतर जािे के लिए अिुज्ञात करता है, तो वह कारावास से, जजसकी अवधि र्दो वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से, जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा या र्दोिों से, र्दंर्िीय होगा ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 335
30. (1) जो कोई, इस अधिछियम के उपबन्ि ों के अिुसार, ककसी बॉयिर पर रजजस् टर धचह्ि धचजह्ित रजजस् टर संख् यांक को हटाता है, पररवछततष करता है, ववरूवपत करता है, उसे के सार् िेड़िाड़ करिे पर अदृच य बिाता है या अन्य र्ा उसस े िेड़िाड़ करता है तो शाजस्त के लिए र्दायी होगा, जो शाजस् त । एक िाि रुपए तक का हो सकेगा ।
(2) जो कोई, ककसी बॉयिर पर कपटपूण ष रीछत से ककसी ऐसी रजजस् टर संख् यांक को धचजह्ित करता है, जो इस अधिछियम के अिीि उसे समिुर्देलशत िहीं ककया गया है, तो वह कारावास स,े जजसकी अवधि र्दो वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषिे से, जो एक िाि रुपए तक का हो सकेगा अर्वा र्दोिों से, र्दंर्िीय होगा ।
31. इस अधिछियम के अिीि बिाया गया कोई छियम या ववछियम में यह छिर्देश र्दे छियम या सकेगा कक ऐस े छियम या ववछियम का उल् िंघि करिे वािा कोई व् यजक् त, प्रर्म उल्िंघि ववछियम भगं करिे के लिए की र्दशा में, ऐसी शाजस्त का, जो एक हजार रुपए तक की हो सकेगी और ककसी शाजस् त । पच चात व् ती उल्िंघि की र्दशा में, ऐसी शाजस्त का, जो एक िाि रुपए तक की हो सकेगी, र्दायी होगा ।
32. (1) इस अधिछियम के अिीि सभी शाजस्तयां, जुमाषिे और उद्ग्रहणीय िागत, शाजस्तयों की भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूि योग्य होंगी । वसूिी ।
(2) इस अधिछियम के अिीि शाजस्तयां, जुमाषिे और उद्ग्रहणीय िागतों का ऐसी रीछत में उपयोग ककया जाएगा, जो राज्य सरकार द्वारा ववटहत ककया जाए ।
33. इस अधिछियम द्वारा या इसके अिीि र्दंर्िीय ककसी अपराि के लिए कोई अलभयोजि के अलभयोजि, अपराि ककए जािे की तारीि से चौबीस मास के भीतर ही संजस् र्त ककया लिए पररसीमा और पूव ष मंजूरी । जाएगा, ि कक उसके पच चात ् और कोई भी ऐसा अलभयोजि मुख् य छिरीिक की पूव ष मंजूरी के त्रबिा संजस् र्त िहीं ककया जाएगा ।
34. इस अधिछियम द्वारा या इसके अिीि र्दंर्िीय ककसी अपराि का ववचारण अपरािों का ववचारण । प्रर्म वग ष मजजस् रेट के न्यायािय से छिम्ितर ककसी न्य ायािय द्वारा िहीं ककया जाएगा ।
35. (1) राज्य सरकार या संघ राज्यिेत्र प्रशासि, िारा 27, िारा 28, िारा 30 की शाजस्तयों का न्यायछिणयष ि । उपिारा (1) और िारा 31 के अिीि शाजस्तयों का अविारण करिे के प्रयोजिों के लिए, अधिकाररता रििे वािे जजिा मजजस्रेट या अपर जजिा मजजस्रेट को, कोई जांच करिे तर्ा ऐसी रीछत में शाजस्त अधिरोवपत करिे, जो यर्ाजस्र्छत, राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत की जाए, न्यायछिणाषयक अधिकारी होिे के लिए प्राधिकृत कर सकेगी ।
(2) न्यायछिणाषयक अधिकारी, ककसी ऐसे व्यजक्त को, जो मामिे के तर्थयों और पररजस्र्छतयों से अवगत हो, साक्ष्य र्देिे या कोई र्दस्तावेज प्रस्तुत करिे के लिए समि कर सकेगा और उसे हाजजर करा सकेगा, जो न्यायछिणाषयक अधिकारी की राय में जांच की ववर्यवस्तु के संबंि में उपयोगी या सुसंगत हो और यटर्द ऐसी जांच करिे पर उसका यह समािाि हो जाता है कक संबंधित व्यजक्त िारा 27 या िारा 28 या िारा 30 की उपिारा
(1) या िारा 31 के सभी या ककन्हीं उपबंिों का अिुपािि करिे में असफि रहा है तो वह आर्देश द्वारा उसमें उल्िंघि का कर्ि करते हुए ऐसे व्यजक्त पर शाजस्त अधिरोवपत कर सकेगा :336 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— परंतु संबंधित व्यजक्त को सुिवाई का युजक्तयुक्त अवसर टर्दए त्रबिा ऐसी कोई शाजस्त अधिरोवपत िहीं की जाएगी । न्यायछिणाषयक 36. (1) िारा 35 के अिीि न्यायछिणाषयक अधिकारी द्वारा पाररत ककसी आर्देश स े अधिकारी के व्यधर्त कोई व्यजक्त, ऐसे अधिकारी को, जो राज्य सरकार या संघ राज्यिेत्र प्रशासि में आर्देशों के ववरुद्ि सधचव की पंजक्त से िीचे का ि हो, जजसे उस सरकार या प्रशासि द्वारा अपीि प्राधिकारी अपीि । होिे के लिए, इस छिलमत्त ववशेर् रूप से प्राधिकृत ककया हो, आर्देश की प्राजप्त से साि टर्दि की अवधि के भीतर, ऐसे प्ररूप और रीछत में, जो, यर्ाजस्र्छत, राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार द्वारा ववटहत ककया जाए, अपीि कर सकेगा ।
(2) कोई अपीि साि टर्दि की अवधि की समाजप्त के पचचात ् भी ग्रहण की जा सकेगी, यटर्द अपीिार्ी, अपीि प्राधिकारी का यह समािाि करा र्देता है कक उसके पास उस अवधि में अपीि प्रस्तुत ि करिे का पयाषप्त कारण र्ा ।
(3) अपीि प्राधिकारी, अपीि के पिकारों को सुिवाई का अवसर र्देिे के पचचात ् ऐसा आर्देश पाररत कर सकेगा, जसै ा वह िीक समझे ।
(4) उपिारा (1) के अिीि ककसी अपीि का छिपटारा, अपीि फाइि करिे की तारीि से साि टर्दि के भीतर ककया जाएगा । अध्याय 6 प्रकीण ा केंद्रीय सरकार की 37. केंद्रीय सरकार, इस अधिछियम के ककन्हीं उपबंिों को कायाषजन्व त करिे के संबंि छिर्देश र्देिे की में राज् य सरकार को ऐस े छिर्देश र्दे सकेगी, जो वह आवचयक समझे और राज् य सरकार ऐसे शजक् त । छिर्देशों का अिुपािि करेगी । िूट । 38. (1) राज् य सरकार, अधिसूचिा द्वारा, ककसी ऐस े िेत्र को, जो उसमें ववछिटर्दषष्ट है, इस अधिछियम के सभी या ककन्ह ीं उपबन् िों के प्रवतिष से िूट र्दे सकेगी ।
(2) राज् य सरकार, अधिसूचिा द्वारा, ककन्ह ीं ऐसे बॉयिरों या बॉयिर के वग ष या प्रकार को, जजिका भविों को गम ष रििे या गम ष पािी का प्रर्दाय करिे के लिए अिन् यत: उपयोग ककया जाता है, इस अधिछियम के प्रवतषि से, ऐसी शतों और छिबंििों के अिीि रहते हुए, जैसा वह िीक समझे, िूट र्दे सकेगी ।
(3) ककसी आपात की र्दशा में, राज् य सरकार, लिखित रूप में सािारण या ववशेर् आर्देश द्वारा, ककसी बॉयिर या वाष् प ििी या बॉयिर या वाष् प िलियों के ककसी वग ष को इस अधिछियम के सभी या ककन्ह ीं उपबन् िों के प्रवतिष से िूट र्दे सकेगी ।
(4) यटर्द राज् य सरकार का यह समािाि हो जाता है कक बॉयिरों की सामग्री, डर्जाइि या सजन्ि माषण और र्देश के तीव्र औद्योधगकीकरण की आवच यकता को ध् याि में रिते हुए, ऐसा करिा आवच यक है तो वह राजपत्र में अधिसूचिा द्वारा और ऐसी शतों के अिीि रहते हुए, जो ववछियमों द्वारा ववटहत की जाए, संपणू ष राज् य या उसके ककसी भाग में ककसी बॉयिर या बॉयिर घटकों को इस अधिछियम के सभी या ककन्ह ीं उपबंिों के प्रवतिष से िूट र्दे सकेगी ।vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 337
39. (1) केंद्रीय सरकार, इस अधिछियम के उपबंिों को कायाषजन्व त करिे के लिए, केंद्रीय सरकार अधिसूचिा द्वारा, छियम बिा सकेगी । की छियम बिािे की शजक्त ।
(2) ववलशष् टतया और पूवगष ामी शजक् त की व् यापकता पर प्रछतकूि प्रभाव र्ािे त्रबिा, ऐसे छियम छिम्ि लिखित सभी या ककन्ह ीं ववर्यों के लिए उपबंि कर सकेंगे, अर्ाषत ् :— (क) िारा 3 की उपिारा (3) के अिीि सर्दस् यों की पर्दावधि और उिके िामछिर्देशि की रीछत ;
(ि) िारा 4 की उपिारा (1) के अिीि तकिीकी सिाहकार की अहषताएं और अिुभव ; (ग) िारा 4 की उपिारा (2) के अिीि तकिीकी सिाहकार के वेति और भत्ते तर्ा सेवा के अन्य छिबंिि और शतें ; (घ) िारा 5 की उपिारा (5) के अिीि मुख् य छिरीिक, उप मुख् य छिरीिक और छिरीिक की अहषताएं और अिुभव ;
(ङ) बॉयिर, जो ऐस े व्यजक्त के भारसािि में होंगे, जजसके पास िारा 11 की उपिारा (1) के िंर् (ङ) के अिीि प्रवीणता या सिमता का प्रमाणपत्र है ; (च) िारा 11 की उपिारा (2) के अिीि प्रवीणता या सिमता का प्रमाणपत्र प्राप्त करिे के लिए अहषताएं, अिुभव, फीस और प्रकक्रया ;
(ि) वह व्यजक्त, जो िारा 23 की उपिारा (4) के परन्तुक के अिीि मत्ृ यु काररत करिे वािी र्दघु टष िा की जांच करेगा और ऐसी जांच संचालित करिे की रीछत ; (ज) िारा 25 की उपिारा (1) के अिीि केंद्रीय सरकार को अपीि प्रस्तुत करिे के लिए प्ररूप, रीछत, समय और फीस ;
(झ) िारा 25 की उपिारा (3) के अिीि अपीि के छिपटाि की प्रकक्रया ; (ञ) िारा 26 की उपिारा (2) के अिीि पुिरीिण आवेर्दि फाइि करिे का प्ररूप, रीछत, समय और फीस ; (ट) िारा 35 की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे और शाजस्त अधिरोवपत करिे की रीछत ;
(ि) िारा 36 की उपिारा (1) के अिीि अपीि प्रस्तुत करिे हेतु प्ररूप और रीछत ।
40. (1) बोर्,ष इस अधिछियम के उपबंिों को कायाषजन्वत करिे के लिए, अधिसूचिा बोर् ष की ववछियम बिािे की द्वारा और पूव ष प्रकाशि की शत ष के अिीि रहते हुए, ऐसे ववछियम बिा सकेगा, जो इस शजक्त । अधिछियम या इसके अिीि बिाए गए छियमों से असंगत ि हों ।
(2) ववलशष् टतया और पूवगष ामी शजक् त की व् यापकता पर प्रछतकूि प्रभाव र्ािे त्रबिा, ऐसे ववछियम छिम् िलिखित सभी या ककन्ह ीं ववर्यों के लिए उपबंि कर सकेंगे, अर्ाषत ् :— (क) िारा 2 के िंर् (ि) के अिीि ककसी व्यजक्त को समि व्यजक्त के रूप में मान्यता की रीछत ;
(ि) िारा 2 के िंर् (ञ) के अिीि छिरीिण प्राधिकरण के रूप में संस्र्ा को मान्यता प्रर्दाि करिे की रीछत ;338 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— (ग) िारा 6 की उपिारा (1) के अिीि सिम प्राधिकारी को मान्यता प्रर्दाि करि े की रीछत ;
(घ) िारा 6 की उपिारा (2) के अिीि वेल्र्र प्रमाणपत्र ; (ङ) िारा 6 की उपिारा (3) के अिीि वेल्र्र प्रमाणपत्र के लिए परीिा और उस े प्रर्दाि करिे की प्रकक्रया ; (च) िारा 6 की उपिारा (4) के अिीि वेल्र्र प्रमाणपत्र प्रर्दाि करिे के लिए अन्य शतें और फीस ;
(ि) िारा 7 के िंर् (क) के अिीि बॉयिर, बॉयिर घटकों के डर्जाइि और संछिमाषण के लिए सुवविाएं; (ज) िारा 7 के िंर् (ग) के अिीि बॉयिर या बॉयिर के घटकों के छिमाषण में प्रयोग की जािे वािी सामग्री, मढ़ाई और कफटटगं के लिए ववछिर्देश;
(झ) िारा 8 की उपिारा (1) के अिीि छिरीिण करिे वािे प्राधिकारी द्वारा बॉयिर या बॉयिर घटकों के ववछिमाषण के र्दौराि जांच के प्रक्रम ; (ञ) िारा 8 की उपिारा (2) के अिीि छिरीिण करिे वािे प्राधिकारी द्वारा बॉयिर या बॉयिर घटकों के छिरीिण और प्रमाणि हेतु प्रकक्रया ;
(ट) िारा 8 की उपिारा (3) के िंर् (क) के अिीि बॉयिर या बॉयिर घटकों के डर्जाइि और रेिाधचत्र हेतु मािक ; (ि) िारा 8 की उपिारा (4) के अिीि ववछिमाषण के र्दौराि बॉयिर या बॉयिर घटकों के छिरीिण के लिए फीस ; (र्) िारा 9 की उपिारा (2) के अिीि छिमाषण के र्दौराि ककसी बॉयिर या बॉयिर घटकों के छिरीिण और प्रमाणि हेतु प्रकक्रया ;
(ढ) िारा 9 की उपिारा (3) के िंर् (क) के अिीि ककसी बॉयिर के छिमाषण हेतु मािक और छिरीिण के प्रमाणपत्र का प्ररूप ; (ण) िारा 9 की उपिारा (4) के अिीि छिमाषण के र्दौराि छिरीिण के लिए संर्देय फीस ; (त) िारा 10 की उपिारा (1) के िंर् (क) के अिीि बॉयिर और बॉयिर घटकों की मरम्मत करिे के लिए सुवविाएं ;
(र्) िारा 10 की उपिारा (1) के िंर् (ि) के अिीि बॉयिर या बॉयिर घटकों के डर्जाइि और रेिाधचत्र हेतु मािक तर्ा बॉयिर या बॉयिर घटकों में प्रयुक्त सामग्री, मढ़ाई और कफटटगं के लिए ववछिर्देश; (र्द) िारा 10 की उपिारा (1) के िंर् (च) के अिीि ककसी बॉयिर के भीतर कायरष त व्यजक्त की सुरिा हेतु उपाय ;
(ि) िारा 10 की उपिारा (2) के अिीि प्रमाणपत्र प्राप्त करिे की रीछत ; (ि) िारा 11 की उपिारा (1) के िंर् (ि) के अिीि बॉयिर के अंतरण की ररपोटष करिे की रीछत ;vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 339 (प) िारा 12 की उपिारा (1) के अिीि पंजीकरण के लिए रेिाधचत्र, ववछिर्देश, प्रमाणपत्र और अन्य र्दस्तावेजों सटहत प्ररूप ;
(फ) िारा 12 की उपिारा (6) के अिीि बॉयिर के उपयोग को प्राधिकृत करते समय स्वामी को प्रमाणपत्र प्रर्दाि करिे के लिए प्ररूप ; (ब) वह समय और रीछत, जजसमें िारा 12 की उपिारा (8) के अिीि बॉयिर पर रजजस्टर संख्यांक धचजन्हत ककया जाएगा ;
(भ) िारा 13 की उपिारा (3) के अिीि प्रमाणपत्र के िवीकरण हेतु प्ररूप, र्दस्तावेज और फीस ; (म) िारा 13 की उपिारा (4) के अिीि बॉयिर के छिरीिण की रीछत ; (य) िारा 13 की उपिारा (5) के िंर् (क) के अिीि प्रमाणपत्र की ववधिमान्यता अवधि ;
(यक) िारा 13 की उपिारा (5) के िंर् (ि) के अिीि बॉयिर या बॉयिर घटकों के लिए मािक ; (यि) िारा 13 की उपिारा (6) के अिीि प्रमाणपत्र के िवीकरण के लिए छिबंिि और शतें ; (यग) िारा 18 की उपिारा (1) के अिीि वाष्प िालियों और अन्य बॉयिर घटकों के प्रस्ताववत पररवतिष , पररवििष या िवीकरण की ववलशजष्टयां ;
(यघ) िारा 19 की उपिारा (1) के िंर् (ि) के अिीि बॉयिर या बॉयिर घटकों की जांच के लिए तैयारी की रीछत ; (यङ) िारा 19 की उपिारा (1) के िंर् (ग) के अिीि सिम व्यजक्त को उपिब्ि कराए जािे वािे रेिाधचत्र, ववछिर्देश, प्रमाणपत्र और अन्य ववलशजष्टयां ;
(यच) िारा 29 के िंर् (ग) के अिीि बॉयिर को अिग करिे की रीछत ; (यि) िारा 38 की उपिारा (4) के अिीि ककसी बॉयिर या बॉयिर घटकों को िूट र्देिे की शतें ; और (यज) बॉयिर या बॉयिर घटकों के रेिाधचत्र, ववछिमाषण, छिमाषण और उपयोग से संबंधित कोई अन्य ववर्य के लिए, जजसे बोर् ष द्वारा ववछियलमत ककया जािा है ।
41. िारा 39 के अिीि केंद्रीय सरकार द्वारा बिाया गया प्रत्येक छियम और िारा छियमों और 40 के अिीि बोर् ष द्वारा बिाया गया प्रत् येक ववछियम, बिाए जािे के पच चात ् यर्ाशीघ्र, ववछियमों का संसद् के समि संसद् के प्रत्य ेक सर्दि के समि, जब वह सत्र में हो, कुि तीस टर्दि की अवधि के लिए रिा जािा । रिा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अर्वा र्दो या अधिक आिुक्रलमक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यटर्द उस सत्र के या पूवोक् त आिुक्रलमक सत्रों के िीक बार्द के सत्र के अवसाि के पूव ष र्दोिों सर्दि उस छियम या ववछियम में कोई पररवतषि करिे के लिए सहमत हो जाए ं या उक् त अवसाि के पूव ष र्दोिों सर्दि सहमत हो जाएं कक छियम या ववछियम िहीं बिाया जािा चाटहए, तो तत् पच चात ् छियम या ववछियम, यर्ाजस्र्छत, ऐसे पररवछततष रूप में ही प्रभावी होगा या छिष् प्रभावी हो जाएगा ; तर्ावप, छियम या ववछियम के ऐसे पररवछततष या छिष् प्रभावी होिे से उसके अिीि पहिे की गई ककसी बात की ववधिमान्य ता पर प्रछतकूि प्रभाव िहीं पड़ेगा ।340 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2— राज्य सरकार की 42. (1) राज्य सरकार, अधिसूचिा द्वारा और प्रकाशि पूव ष की शत ष के अिीि रहते छियम बिािे की हुए, छिम्िलिखित सभी या ककन्हीं उपबंिों के लिए छियम बिा सकेगी जो इस अधिछियम शजक्त । और इसके अिीि बिाए गए ववछियमों से असंगत ि हों, अर्ाषत ् :— (क) िारा 5 की उपिारा (8) के अिीि मुख्य छिरीिक, उप मुख्य छिरीिक और छिरीिक की शजक्तयां और कतव्ष य ;
(ि) िारा 12 की उपिारा (2) के अिीि बॉयिर के पंजीकरण हेतु संर्देय फीस; (ग) वह अवधि, जजसके भीतर छिरीिक को िारा 12 की उपिारा (3) के अिीि बॉयिर की परीिा करिे की अपेिा होगी ; (घ) िारा 12 की उपिारा (9) के अिीि राज्य के भीतर एक स्र्ाि से र्दसू रे स्र्ाि पर बॉयिरों के अंतरण की ररपोटष करिे की रीछत ;
(ङ) िारा 23 की उपिारा (4) के अिीि ककसी र्दघु टष िा के संबंि में जांच की रीछत ; (च) िारा 24 की उपिारा (2) के अिीि अपीि करिे की रीछत ; (ि) िारा 24 की उपिारा (3) के अिीि अपीिों का छिपटाि करिे की प्रकक्रया ;
(ज) वह रीछत, जजसमें इस अधिछियम के अिीि शाजस्तयां, जुमाषिे और उद्ग्रहीत िागतों का िारा 32 की उपिारा (2) के अिीि उपयोग ककया जाएगा ; (झ) िारा 35 की उपिारा (1) के अिीि जांच करिे और शाजस्त अधिरोवपत करिे की रीछत ;
(ञ) िारा 36 की उपिारा (1) के अिीि अपीि प्रस्तुत करिे का प्ररूप और रीछत ।
(2) इस अधिछियम के अिीि राज्य सरकार द्वारा बिाया गया प्रत्येक छियम इसके बिाए जािे के पचचात ् यर्ाशीघ्र, राज्य वविाि-मंर्ि के समि रिा जाएगा । आर्देशों की 43. िारा 25 और िारा 26 के अिीि केंद्रीय सरकार का, या मुख्य छिरीिक का, अंछतमता । या ककसी उपमुख्य छिरीिक का, या छिरीिक का आर्देश अंछतम होगा और उस े ककसी न्यायािय में प्रचिगत िहीं ककया जाएगा । कटििाइयों को र्दरू 44. (1) यटर्द इस अधिछियम के उपबंिों को प्रभावी करिे में कोई कटििाई उत्पन्ि करिे की शजक्त । होती है तो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आर्देश द्वारा ऐसे उपबंि कर सकेगी, जो इस अधिछियम के उपबंघों से असंगत ि हो, जो उस े कटििाइयां र्दरू करिे में आवचयक या समीचीि प्रतीत हो:
परंतु इस अधिछियम के प्रारंभ स े तीि वर् ष की अवधि की समाजप्त के पचचात ् इस िारा के अिीि कोई आर्देश िहीं ककया जाएगा ।
(2) इस िारा के अिीि ककया गया प्रत्येक आर्देश, इसके ककए जािे के पचचात ् यर्ाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सर्दि के समि रिा जाएगा । छिरसि और 45. (1) बायिर अधिछियम, 1923 छिरलसत ककया जाता है । 1923 का 5 व्याववृत्त ।
(2) ऐसे छिरसि के होते हुए भी,—vuqHkkx 1d] Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k 341 (क) इस प्रकार छिरलसत अधिछियम के अिीि जारी की गई कोई अधिसूचिा, बिाया गया छियम, ववछियम या अिुर्दत्त डर्क्री, आर्देश या िूट, इस प्रकार प्रभावी होगी, मािो वह इस अधिछियम के उपबंिों के अिीि जारी की गई है या उन्हें बिाया गया हैं, अिुर्दत्त ककया गया है जब तक कक इस अधिछियम के अिीि कोई िई अधिसूचिा, छियम, ववछियम, उपववधि, आर्देश या िूट जारी, बिाया या अिुर्दत्त िहीं कर टर्दया जाता है ;
(ि) इस प्रकार छिरलसत अधिछियम के अिीि स्र्ावपत या सजृजत कोई कायाषिय, छियुक्त अधिकारी या गटित कोई छिकाय उसी प्रकार बिा रहेगा और इस अधिछियम के अिीि स्र्ावपत, सजृजत, छियुक्त या गटित हुआ समझा जाएगा ; (ग) इस प्रकार छिरलसत अधिछियम में ववछिटर्दषष्ट ककसी र्दस्तावेज के इस अधिछियम या इस अधिछियम के उपबंिों के अर्ाषन्वयि में ववछिटर्दषष्ट रूप में समझा जाएगा ;
(घ) इस प्रकार छिरलसत अधिछियम के अिीि उद्ग्रहीत कोई जुमाषिा या शाजस्त उसी प्रकार वसूििीय होगा, मािो वह यह इस अधिछियम के अिीि उद्ग्रहीत ककया गया हो ; (ङ) इस प्रकार छिरलसत अधिछियम के अिीि काररत ककसी अपराि का उसी प्रकार अलभयोजि ककया जाएगा और र्दंर् टर्दया जाएगा, मािो वह इस अधिछियम के अिीि काररत ककया गया हो ;
(च) इस प्रकार छिरलसत अधिछियम के अिीि पंजीकृत कोई भी बॉयिर, इस अधिछियम के अिीि पंजीकृत हुआ समझा जाएगा ; (ि) र्दिता या प्रवीणता का कोई प्रमाणपत्र, िूट या कोई अन्य प्रमाणपत्र या र्दस्तावेज, जो इस प्रकार छिरलसत अधिछियम के अिीि जारी ककया गया है, बिाया गया है या अिुर्दत्त ककया गया है और इस अधिछियम के प्रारंभ के समय प्रवतिष में र्ा, उसी प्रकार समझा जाएगा, मािो यह इस अधिछियम के अिीि जारी ककया गया है, बिाया गया है या अिुर्दत्त ककया गया है, और यर्ाजस्र्छत, प्रमाणपत्र या र्दस्तावेज में र्दलशतष तारीि तब तक प्रवतिष में बिा रहेगा जब तक, यह इस अधिछियम के अिीि रद्र्द ि कर टर्दया जाए ;
(ज) इस प्रकार छिरलसत अधिछियम के अिीि ककसी न्यायािय के समि िंत्रबत कोई कायवष ाही इस अधिछियम के तत्स्र्ािी उपबंिों के अिीि ववचाररत या छिपटाई जा सकेगी ; (झ) इस प्रकार छिरलसत अधिछियम के उपबंिों के अिीि, जो कोई छिरीिण, अन्वेर्ण या जांच की जािी है, उसी प्रकार अग्रसर होती रहेगी, मािो ऐसा छिरीिण, अन्वेर्ण या जांच इस अधिछियम के तत्स्र्ािी उपबंिों के अिीि ककए जािे हेतु आर्देश ककया गया है ।
(3) इस िारा में उजल्िखित ववलशष्ट मामिों पर, छिरसि के प्रभावी होिे के संबंि 1897 का 10 में सािारण िंर् अधिछियम, 1897 की िारा 6 के सािारण रूप से िागू होिे पर प्रछतकूि या प्रभाव िहीं र्ािेगी ।342 Hkkjr dk jkti= vlk/kkj.k [Hkkx 2—
(4) उपरोक्त अधिछियम के छिरसि में ककसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार छिरलसत अधिछियम के अिीि गटित बोर् ष तब तक काय ष करता रहेगा, जब तक इस अधिछियम के अिीि िए बोर् ष का गिि िहीं कर टर्दया जाए । __________ र्ॉ. राजीि मणण, सधचव, भारत सरकार । UPLOADED BY THE MANAGER, GOVERNMENT OF INDIA PRESS, MINTO ROAD, NEW DELHI–110002 AND PUBLISHED BY THE CONTROLLER OF PUBLICATIONS, DELHI–110054.
MGIPMRND—473 GI(S4)—26.10.2026.